Ramkumar kushwaha

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Ramkumar kushwaha प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा एवं माता बगराजन के आशीर्वाद से समस्त बीमारियों का इलाज

08/12/2025

बहुत सारे मित्रों ने कहा भईया कमजोरी बहुत रहती है और मन अच्छा नहीं रहता ऐसा लगता शरीर में ताकत ही नहीं है जान ही नहीं है। और ऐसा सिर्फ बड़े बुर्जुगों ने नहीं बल्कि यंग ऐज वालों ने भी बताया,
हम आप को एक प्रयोग बताते है
प्राकृतिक जड़ी बूटियां
- भुने चने 200 ग्राम
-बादाम 100 ग्राम
-काजू 100 ग्राम
-खरबूज बीज 50 ग्राम
-खसखस 50 ग्राम
-कालीमिर्च 30 ग्राम
-अश्वगंधा 100ग्राम
-विदारी कंद 50ग्राम
-धागे वाली मिश्री 235 ग्राम
सबको पीसकर चूर्ण बना लें और कांच के जार में रख लीजिए फिर नियमित
1-1 चम्मच सुबह सायं , उपर से गौ दुग्ध

ऑर्डर करने के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं

परंपरागत प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा समस्त बीमारियों का इलाज
हमारा पता भाग राजन माता मंदिर द्रमदा पुरवा (कर्री)
8827737698
🚩🙏

07/12/2025

शौच करते समय होती है जलन और दर्द तो आपको भी हो सकता है भगंदर? जानिए लक्षण, कारण और इलाज।

भगंदर, नाम से भले ही अजीब लगता है, लेकिन यह बड़ी बीमारी है। एक मामूली फोड़े से बढ़ कर भयंकर दर्द देने वाली बीमारी, जो कि किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी को फिस्टुला भी कहते हैं। गुदा नली में पस जमा होने के कारण भगंदर जानलेवा दर्द दे सकता है।

इस बीमारी को ऐसे समझें कि हमारे कुछ नाजुक अंग या नस जो आपस में जुड़े नहीं होते, उन्हें यह जोड़ देता है। जैसे आंत को त्वचा से, योनि को मलाशय से। आइए जानते हैं भगंदर के लक्षण, कारण, बचाव और इलाज के बारे में।

फिस्टुला में सबसे आम होता है- एनल फिस्टुला यानी भगंदर। यह छोटी नली की तरह होता है, जो आंत के अंतिम हिस्से को गुदा के पास की त्वचा से जोड़ देता है। गुदा नली में पस जमा होने के कारण कई बार ऑपरेशन की जरुरत पड़ जाती है।

भगंदर और बवासीर में अंतर

कई लोग बवासीर और भगंदर रोग को लेकर कनफ्यूज हो जाते हैं, जबकि दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। बवासीर रोग में गुदा के बाहर नस फूलकर मोटी हो जाती है और अंगूर के दानों के बराबर बाहर निकल जाती है।

ज्यादा कब्ज की स्थिति में वे फट जाती है। और खून निकलने लगता है। जबकि ये जब गुदा के अंदर होता है तो वो भगंदर कहलाता है, जोकि एक विकट समस्या हैं।

भगंदर के लक्षण:

गुदा में बार-बार फोड़े होना
गुदा के आसपास दर्द और सूजन
शौच करने में दर्द
मलद्वार से रक्तस्नाव
बुखार लगना, ठंड लगना और थकान होना
कब्ज होना, मल नहीं हो पाना
गुदा के पास से बदबूदार और खून वाली पस निकलना
बार-बार पस निकलने के कारण गुदा के आसपास की त्वचा में जलन
बचाव

अगर कभी आपको गुदा द्वार के पास फुंसी, फोड़ा वगैरह हो चुका है तो भगंदर से बचने के लिए आपको सावधानियां बरतनी चाहिए।

कब्ज या सूखे मल की स्थिति में पर्याप्त मात्रा में फाइबर लें।
तरल पदार्थ/पेय का ज्यादा सेवन करें। शराब और कैफीन (चाय-कॉफ़ी) पीने से बचें।
शौच को रोकें नहीं। बहुत जरुरी हो तो भी ज्यादा देर तक न रोकें।
पाचन तंत्र फिट रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
शौच करने में पर्याप्त समय लें। न बहुत हड़बड़ी करें और न ही बहुत ज्यादा देर तक बैठे रहें।
मल द्वार को साफ और सूखा रखें। शौच के बाद अच्छे से सफाई करें।
भगंदर का परीक्षण

कुछ का भगंदर का पता लगाना आसान होता है और कुछ का कठिन। कभी-कभी यह खुद ठीक हो जाता है तो कभी-कभी ठीक होने के बाद फिर से हो जाता है।

इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर मलद्वार से रिसाव और रक्तस्त्राव के लक्षणों की जांच करते हैं। इसका पता लगाने के लिए कोलोनोस्कोपी की भी जरुरत पड़ सकती है। इसमें आपके गुदा में एक कैमरे वाली ट्यूब डाली जाती है, गुदा और मलाशय का भीतरी हिस्सा देखा जाता है।

इलाज

अगर आपको बवासीर है, भंगंदर है, गोल तीर है, होसिला है, फिशर है जिसे पाइल्स बवासीर भी कहते है। इसका सबसे अच्छा इलाज है मुली का रस। जो हमारे घर में आसानी से मिल जाती है।

एक कप मुली का रस खाना खाने के एक घंटे बाद ले। ये जल्दी बवासीर ठीक करता है। इससे 20-20 साल पुरानी बवासीर भी ठीक होती है। बवासीर दो तरह की होती है। एक खुनी होती है, और एक काली इसके सेवन से दोनों ठीक होती है। जिसको हम पुस्यला बदन दर्द कहते है. ये भी ठीक हो जाता है।

इसकी एक और ओषधि है, काले अंगूर का रस। जोकि बवासीर और बदन दर्द की एक अच्छी दवा है। अगर कोई काले अंगूर रस का एक कप जूस पिएगा तो उसका बवासीर और बदन दर्द ठीक हो जाएगा। बवासीर और बदन दर्द अनार के रस से भी ठीक हो जाता है।

बवासीर और बदन दर्द के लिए एक और बहुत अच्छी दवा है, जिसको आप कपूर कहते है, इसका प्रयोग आप पूजा मे भी करते है। कपूर का थोडा सा टुकड़ा केले मे लगा के खा ले तो तुरंत ये बवासीर और बदन दर्द को ठीक करता है।

लेकिन इसका सेवन हर रोज नहीं करना है। इसको आप महीने में दो बार ले सकते है और अधिक से अधिक तीन बार ये बवासीर के लिए बहुत उपयोगी दवा है।

प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा समस्त बीमारियों का इलाज
पता बगराजन माता मंदिर द्रमदा पुरवा कर्री
Boston Red Sox Highlights

07/12/2025

जय श्री राम जय बगराजन माता जय प्रकृति

🔥 पाचन शक्ति कम होना – कारण और समाधान

प्रश्न:*
भोजन के बाद भारीपन, डकार, पेट फूलना या अपच जैसी समस्या बार-बार होती है। क्या कोई ऐसी जड़ी-बूटी है जो पेट को हल्का रखे और पाचन शक्ति को स्वाभाविक रूप से बढ़ाए?

🌿 उत्तर
आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या *अग्नि मंद्य (पाचन अग्नि की कमजोरी)* के कारण होती है।
इस स्थिति में सबसे प्रभावी जड़ी-बूटी है *त्रिकटु चूर्ण* (सोंठ, काली मिर्च और पिपली का आदि

*🌸 लाभ:*
1. पाचन अग्नि को प्रज्वलित कर भोजन को सही ढंग से पचाने में मदद करता है।
2. गैस, पेट फूलना और भारीपन में तुरंत राहत देता है।
3. शरीर से अतिरिक्त कफ और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
4. भूख बढ़ाता है और ऊर्जा स्तर सुधारता है।

*🥣 सेवन विधि:*
- भोजन के बाद *¼ चम्मच त्रिकटु चूर्ण* गुनगुने पानी या शहद के साथ लें।
- सुबह खाली पेट *गुनगुने पानी में नींबू और शहद* का सेवन लाभदायक है।
- लगातार 10–12 दिन नियमित प्रयोग करें।

*👨‍👩‍👧‍👦 कौन ले सकता है:*
युवा, वृद्ध और वे सभी जिन्हें बार-बार पेट फूलने या भारीपन की शिकायत रहती है।

*⚠️ सावधानी:*
जिन्हें पेट में जलन या अल्सर की समस्या हो, वे चिकित्सक की सलाह से सेवन करें।

*अन्य जीवनशैली सुझाव:*
- भोजन में अदरक, जीरा और हींग का प्रयोग बढ़ाएं।
- ठंडे पेय पदार्थों से बचें।
- भोजन शांत मन से और नियमित समय पर करें।

*⏳ अपेक्षित परिणाम:*
5–7 दिन में पेट हल्का लगेगा और भूख व पाचन शक्ति में स्पष्ट सुधार दिखेगा।

संतुलित अग्नि, स्वस्थ पाचन

बना बनाया चूर्ण लेने के लिए हमें संपर्क कर सकते हैं

पता बगराजन माता मंदिर द्रमदा पुरवा ( कर्री)
परंपरागत वैद 8827737698

06/12/2025
06/12/2025

सांसद खेल महोत्सव बसारी
Chhiddi Kushwaha
Prakash Chandra Patel
राजाभैया मित्र मंडली अरजरिया

04/12/2025

शौच करते समय होती है जलन और दर्द तो आपको भी हो सकता है भगंदर? जानिए लक्षण, कारण और इलाज।

भगंदर, नाम से भले ही अजीब लगता है, लेकिन यह बड़ी बीमारी है। एक मामूली फोड़े से बढ़ कर भयंकर दर्द देने वाली बीमारी, जो कि किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी को फिस्टुला भी कहते हैं। गुदा नली में पस जमा होने के कारण भगंदर जानलेवा दर्द दे सकता है।

इस बीमारी को ऐसे समझें कि हमारे कुछ नाजुक अंग या नस जो आपस में जुड़े नहीं होते, उन्हें यह जोड़ देता है। जैसे आंत को त्वचा से, योनि को मलाशय से। आइए जानते हैं भगंदर के लक्षण, कारण, बचाव और इलाज के बारे में।

फिस्टुला में सबसे आम होता है- एनल फिस्टुला यानी भगंदर। यह छोटी नली की तरह होता है, जो आंत के अंतिम हिस्से को गुदा के पास की त्वचा से जोड़ देता है। गुदा नली में पस जमा होने के कारण कई बार ऑपरेशन की जरुरत पड़ जाती है।

भगंदर और बवासीर में अंतर

कई लोग बवासीर और भगंदर रोग को लेकर कनफ्यूज हो जाते हैं, जबकि दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। बवासीर रोग में गुदा के बाहर नस फूलकर मोटी हो जाती है और अंगूर के दानों के बराबर बाहर निकल जाती है।

ज्यादा कब्ज की स्थिति में वे फट जाती है। और खून निकलने लगता है। जबकि ये जब गुदा के अंदर होता है तो वो भगंदर कहलाता है, जोकि एक विकट समस्या हैं।

भगंदर के लक्षण:

गुदा में बार-बार फोड़े होना
गुदा के आसपास दर्द और सूजन
शौच करने में दर्द
मलद्वार से रक्तस्नाव
बुखार लगना, ठंड लगना और थकान होना
कब्ज होना, मल नहीं हो पाना
गुदा के पास से बदबूदार और खून वाली पस निकलना
बार-बार पस निकलने के कारण गुदा के आसपास की त्वचा में जलन
बचाव

अगर कभी आपको गुदा द्वार के पास फुंसी, फोड़ा वगैरह हो चुका है तो भगंदर से बचने के लिए आपको सावधानियां बरतनी चाहिए।

कब्ज या सूखे मल की स्थिति में पर्याप्त मात्रा में फाइबर लें।
तरल पदार्थ/पेय का ज्यादा सेवन करें। शराब और कैफीन (चाय-कॉफ़ी) पीने से बचें।
शौच को रोकें नहीं। बहुत जरुरी हो तो भी ज्यादा देर तक न रोकें।
पाचन तंत्र फिट रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
शौच करने में पर्याप्त समय लें। न बहुत हड़बड़ी करें और न ही बहुत ज्यादा देर तक बैठे रहें।
मल द्वार को साफ और सूखा रखें। शौच के बाद अच्छे से सफाई करें।
भगंदर का परीक्षण

कुछ का भगंदर का पता लगाना आसान होता है और कुछ का कठिन। कभी-कभी यह खुद ठीक हो जाता है तो कभी-कभी ठीक होने के बाद फिर से हो जाता है।

इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर मलद्वार से रिसाव और रक्तस्त्राव के लक्षणों की जांच करते हैं। इसका पता लगाने के लिए कोलोनोस्कोपी की भी जरुरत पड़ सकती है। इसमें आपके गुदा में एक कैमरे वाली ट्यूब डाली जाती है, गुदा और मलाशय का भीतरी हिस्सा देखा जाता है।

इलाज

अगर आपको बवासीर है, भंगंदर है, गोल तीर है, होसिला है, फिशर है जिसे पाइल्स बवासीर भी कहते है। इसका सबसे अच्छा इलाज है मुली का रस। जो हमारे घर में आसानी से मिल जाती है।

एक कप मुली का रस खाना खाने के एक घंटे बाद ले। ये जल्दी बवासीर ठीक करता है। इससे 20-20 साल पुरानी बवासीर भी ठीक होती है। बवासीर दो तरह की होती है। एक खुनी होती है, और एक काली इसके सेवन से दोनों ठीक होती है। जिसको हम पुस्यला बदन दर्द कहते है. ये भी ठीक हो जाता है।

इसकी एक और ओषधि है, काले अंगूर का रस। जोकि बवासीर और बदन दर्द की एक अच्छी दवा है। अगर कोई काले अंगूर रस का एक कप जूस पिएगा तो उसका बवासीर और बदन दर्द ठीक हो जाएगा। बवासीर और बदन दर्द अनार के रस से भी ठीक हो जाता है।

बवासीर और बदन दर्द के लिए एक और बहुत अच्छी दवा है, जिसको आप कपूर कहते है, इसका प्रयोग आप पूजा मे भी करते है। कपूर का थोडा सा टुकड़ा केले मे लगा के खा ले तो तुरंत ये बवासीर और बदन दर्द को ठीक करता है।

लेकिन इसका सेवन हर रोज नहीं करना है। इसको आप महीने में दो बार ले सकते है और अधिक से अधिक तीन बार ये बवासीर के लिए बहुत उपयोगी दवा है।

26/11/2025
प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा एवं माता बगराजन के आशीर्वाद से सदय असद बीमारियों का इलाज                                  ...
28/01/2025

प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा एवं माता बगराजन के आशीर्वाद से सदय असद बीमारियों का इलाज

पता ==बगराजन माता मंदिर दिरमदा पुरवा कर्री तहसील राजनगर जिला छतरपुर मध्य प्रदेश पिंड471105
8827737698
9630115496 (वैद जी)

*आयुर्वेद में पनीर को निकृष्टतम भोजन के रूप में बताया गया है।*,
बोले तो कचरा और कचरा भी ऐसा वैसा नहीं,
*ऐसा कचरा जिसे जानवरों को भी खिलाने से मना किया गया है*।
दूध को फाड़ कर या दूध का रूप विकृत करके पनीर बनता है।
क्योंकि *भारत में प्राचीन काल से ही दूध को विकृत करने की मनाही रही है।
*पनीर खाने के नुकसान*,
आयुर्वेद ने तो शुरू से ही मना किया था कि *विकृत दूध लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है*, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी अपने नए शोध में साबित किया है कि
पनीर खाने से आंतों पर अतिरिक्त दबाव आता है। जिससे पाचन संबंधित रोग होते हैं।
*पनीर में पाया जाने वाले प्रोटीन पचाने की क्षमता जानवरों में भी नहीं होती है*
फिर मनुष्य उसे कैसे पचा सकता है !
*नतीजा होता है खतरनाक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चल कर शुगर,*
*कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लडप्रेशर और यही पनीर पेट की खतरनाक बीमारी IBS को भी पैदा करता है।*
ज़्यादा पनीर खाने से खून में थक्के जमने की शिकायत होती है, जो ब्रेन हैमरेज और हार्ट फेलियर का कारण बनता है।
वहीं ये पनीर हार्मोनल डिसबैलेंस का कारण बनता है, जिससे हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म पनपता है,
*महिलाओं में गर्भ धारण करने की क्षमता कम होती है।*
कुल मिला कर यदि देखा जाए तो *ये पनीर लाभ तो केवल जीभ को देता है, लेकिन हानि पूरे शरीर की करता है,*
*पर कढ़ाई पनीर, शाही पनीर, मटर पनीर, चिली पनीर और भी न जाने क्या क्या पनीर....*
समोसे में पनीर, पकौड़ी में पनीर, पिज्जा में पनीर, बर्गर में पनीर,
*मतलब जहां देखो वहां पनीर, पनीर पनीर*।
भारत में शायद जितना दूध पैदा नहीं होता उससे ज़्यादा पनीर बनता होगा। भारतीय लोग तो पनीर के इतने दीवाने हो चुके हैं कि इन्हें जहां पनीर मिल जाता है बहुत ही मजे से चाप लेते हैं,
होटल में गए तो बिना पनीर खाये इनके गले से निवाला नहीं निगलता।

26/01/2025

प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा एवं माता बगराजन के आशीर्वाद से सदय असद बीमारियों का इलाज

पता ==बगराजन माता मंदिर दिरमदा पुरवा कर्री तहसील राजनगर जिला छतरपुर मध्य प्रदेश 471105
8827737698
9630115496 (वैद जी)

आपने अक्सर शादी में या होटल में खाने सौंफ रखी देखी होगी जिसका प्रयोग आप खाने के बाद के लिए करते हैं. खाने के बाद अक्सर लोग सौंफ खाते हैं और ये ज्यादातर रेस्टोरेंट में दिखाई देती हैं

मगर क्या आप जानते हैं कि खाने के बाद सौंफ क्यों खाई जाती है ? दरअसल खाने के बाद सौंफ इसलिए खाई जाती है क्योंकि इसे खाने से आपकी पाचन क्रिया झट से काम करेगी और आपका खाना अच्छे से पच जाता है.

मिश्री और चीनी का मिश्रण हो तो और भी अच्छा है क्योंकि सौंफ और चीनी को एक साथ मिलाकर खाने से आपका पाचन क्रिया दुरुस्त रहेगा और खाना बहुत अच्छे से डायजेस्ट हो सकता है. क्यों खाई जाती है खाने के बाद सौंफ ये तो आपको बता दिया लेकिन इसके अलावा भी इसके कई गुणकारी लाभ होते हैं, चलिए आपको बताते हैं.


दरअसल , मसाले से युक्त भोजन खाने के बाद मुंह से बदबू आने लगती है, जिसे दूर करने के लिए सौंफ और मिश्री खाया जाता है।

ये प्रयोग बहुत ही अच्छा है, अगर आपको यकीं नहीं है तो आप भी खाने का बाद मुंह की स्मेल को सुंघिये, उसके बाद कुछ सौंफ और मिश्री खा लीजिए फिर दोबारा से स्मेल को सुंघिये आपको खुद महसूस हो जाएगा और आप फ्रेश फील करेंगे।

हर दिन सौंफ खाने से आपके आंखो की रोशनी भी ठीक रहती है. अगर आप चाहें तो इसमें मिश्री भी मिला सकते हैं.

हर दिन अगर आप नियमित रूप से सुबह खाली पेट सौंफ खाने से खून साफ होता है और त्वचा में भी चमक आती है.

सौंफ में कैल्शियम, पोटेशियम के अलावा आयरन और सोडियम जैसे औषधीय तत्व पाये जाते हैं. इसका हर दिन सेवन करने से आपकी बॉडी में होने वाली ये सारी कमियां खत्म हो जाएंगी.

हर दिन सौंफ का प्रयोग करने से खांसी, मुंह के छाले और लूज मोशन जैसी बीमारियां नहीं होती और अगर हो गई है तो ऐसे में सौंफ का सेवन समय-समय पर करते रहें

🌹🙏 स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें 🙏

Ramkumar Kushwaha Rakesh Kushwaha Mohan Lal Kushwaha Tradewithms Singh Sunil Kuswahaji Kuswahaji Sandeep Kushwaha

20/01/2025

प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा एवं माता बगराजन के आशीर्वाद से सदय असद बीमारियों का इलाज

पता ==बगराजन माता मंदिर दिरमदा पुरवा कर्री तहसील राजनगर जिला छतरपुर मध्य प्रदेश 471105
8827737698
9630115496 (वैद जी)

#पनीर का फूल
पनीर नाम सुनते ही मानो ऐसा लगता है कि यह दूध से बने पनीर खाद्य पदार्थ के बारे में बात हो रही है परंतु आज हम जिस पनीर के फूल के बारे में बात कर रहे है वह एक पौधा है और औषधीय गुणों से भरा हुआ पौधा है।

पनीर फूल जिसका वैज्ञानिक नाम विथानिया कौयगुलांस है। यह सोलानेसी परिवार का एक पौधा है, जिसे इंडियन चीज मेकर, इंडियन रिनेट, पनीर डोडी, पनीर डोडा, पनीर बेड व कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। संस्कृत में इसे ऋष्यगंधा, उर्दू में पनिरदोडी, हिंदी में पनीर का फूल व पनीरबंद, बंगाली में पनीर फूल के नाम से जाना जाता है।

इसका उपयोग पनीर बनाने के लिए भी किया जाता है इसमें मौजूद औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में इसे कई बीमारियों से बचाव व उनके इलाज के लिए लाभकारी माना गया है।

डायबिटीज आज के समय में सबसे आम बीमारी है। इसमें कई प्रकार के चयापचय संबंधी विकार शामिल होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल में वृद्धि का कारण बनते हैं। यह समस्या तब पैदा होती है, जब पैन्क्रियाज इंसुलिन नहीं बना पाते । हम जो खाना खाते हैं, वह शुगर में टूटकर खून में मिल जाता है। जब ब्लड शुगर बढ़ जाता है, तो पैन्क्रियाज इंसुलिन को छोड़ने का संकेत देता है। इस स्वास्थ्य समस्या का कोई स्थाई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ खाने , स्वस्थ जीवनशैली बनाने और समय पर दवाएं लेने से इसे मैनेज करने में मदद मिलती है।

खासतौर से, डायबिटीज रोगियों को अक्सर अपने खान-पान पर ध्यान देने की जरूरत होती है। आयुर्वेद में बहुत सारे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है, जो डायबिटीज रोगियों के लिए किसी वरदान से कमक नहीं हैं। ऐसा ही एक उपाय है ' पनीर के फूल' । इसे भारतीय रेनेट, विथानिया कोगुलांस या पनीर डोडा के रूप में भी जाना जाता है। पनीर के फूल भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पाए जाते हैं, जो अपने औषधीय गुणों के कारण काफी पॉपुलर हैं और डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद भी। अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं, तो इस फूल का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है।

पनीर फूल को आयुर्वेदिक दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। ये खाने में मीठा होता है और इसमें शामक और मूत्रवर्धक गुण होते हैं। इसके अलावा ये अनिंद्रा, घबराहट, अस्थमा और डाइबिटीज से लड़ने में सहायक होता है.

औषधीय रूप में प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य ले

Ramkumar Kushwaha Rakesh Kushwaha Saurabh Kushwaha

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