03/06/2026
भारतीय ज्ञान परम्परा के पथ प्रदर्शक बाबाजी पण्डित देवदत्त शास्त्री जी की "हिमालय मेरी बांहों में" पुस्तक का पुनर्प्रकाशित संस्मरण शीघ्र ही नये स्वरूप में प्राप्त होगा। इसके प्रथम संस्करण का प्रकाशन 1977 में हुआ था, आदरणीय दादाजी Dinesh Kumar Garg इस पुस्तक की समीक्षा कर रहे हैं एवं उनका महत्त्वपूर्ण समीक्षात्मक लेख जो दोनों संस्करणों के मध्य का होगा,उसका यथार्थ अवलोकन भी इसमें द्रष्टव्य होगा। आशीर्वचन के रूप में Rajendra Tripathi Rasraj गुरु जी के वचन हैं।
साथ ही बाबाजी की हिमालय की रहस्यमयी घटनाओं का अवलोकन श्रीसिद्ध आथर्वण शोध परिषद् SSAARC के सौजन्य से मैंने आचार्या पूजा पाण्डेय एवं Sumit Mishra जी ने जो सर्वेक्षण किया है, वह भी सचित्र एवं सप्रमाण इसमें प्रकाशित हो रहा है। ग्रन्थ को सुसज्जित प्रकाशन का श्रेय परमप्रिय आदरणीय Brahmanand Mishra भैया का है, जिनके बिना पुस्तक प्रकाशित करना मेरे लिए दुष्कर है।
ईश्वर का धन्यवाद है जो बाबाजी के कार्यों को करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सभी को प्रणाम है।