Dr. Pankaj Ayurveda

Dr. Pankaj Ayurveda आयुर्वेद, योग, एवं स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी एवं घरेलू चिकित्सा हेतु जुड़े रहें, आप हमसे अपने स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याओं के बारे में भी सलाह ले सकते हैं।

21/08/2026

अधिकतर जनता अंजाने में यह गलती करती है कि अजीर्ण में भी हरीतकी का उपयोग करती है औऱ इससे रोग औऱ बढ़ जाता है। याद रहे कब्ज औऱ अजीर्ण में अंतर है। , अजीर्ण में हरीतकी लेने को आयुर्वेद में मना किया गया है , जबकि कब्ज में ले सकते हैं। अब इसमे अंतर कैसे किया जाए इसके लिये किसी योग्य शासकीय मान्यता प्राप्त आयुर्वेद चिकित्सक से मिलें।
स्वघोषित वैद्य औऱ सोशल मीडिया के ज्ञानवान लोगों से दूर रहें, ये लोग ही अजीर्ण में हरीतकी( हरड़ चूर्ण ) खाने को बोलते हैं।

हरीतकी के बारे में शास्त्रोक्त एवं विश्वसनीय जानकारी हेतु हमारे पेज को फॉलो करें।

डॉ पंकज श्रीवास्तव ( M.D.)
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी

20/08/2026

यकृत विकारों में आयुर्वेद बहुत ही कारगर है। इसलिए आयुर्वेद का लिव 52 जैसे अन्य ब्रांड की दवाओं को एलोपैथिक चिकित्सक अपने मरीजों को देते हैं। इसलिए जब आयुर्वेद ही लेना है तो आयुर्वेद डॉक्टर से परामर्श के बाद ही उपयोग करें।

20/08/2026
 #अदरक #सोंठ #जिंजर
20/08/2026

#अदरक
#सोंठ
#जिंजर

 #पुष्करमूल #हृदयरोग
19/08/2026

#पुष्करमूल
#हृदयरोग

नमस्कार  स्वास्थ्य के प्रति जागरूक मित्रों....🙏🙏🙏पिछले लेख में हमने बात की थी कि कौन कौन से पदार्थों को दूध के साथ ले सक...
19/08/2026

नमस्कार स्वास्थ्य के प्रति जागरूक मित्रों....🙏🙏🙏

पिछले लेख में हमने बात की थी कि कौन कौन से पदार्थों को दूध के साथ ले सकते हैं आज हम बात करते हैं गर्म दूध और धारोष्ण दूध( तुरंत दुहा हुआ दूध) के बारे में।

आयुर्वेद ग्रंथ योगरत्नाकर अनुसार-
गाय का धारोष्ण दुग्ध हितकर है , भैंस का धाराशीत ( कुछ देर का दुहा हुआ दूध) दूध हितकर है , भेड़ का दूध गर्म करने के बाद हितकर होता है , बकरी का दूध गर्म करने के बाद ठंडा करके उपयोग करने पर हितकारी होता है।

गाय का धारोष्ण दूध वात को नष्ट करने वाला, पुष्टि करने वाला, पांडु - कामला ( खून की कमी एवं पीलिया) को दूर करने में हितकर, क्षीण पुरुष के ओज को बढ़ाने वाला, शरीर के दाह, हाँथ पैर औऱ आंखों की जलन को कम करने वाला, पित्त को शांत करने वाला कृशता ( दुबलेपन ) को दूर करने वाला होता है।

बिना गर्म किया हुआ दूध- अभिस्यन्दी अर्थात शरीर के स्त्रोत्स को बंद करने वाला एक प्रकार से शरीर मे भारीपन करने वाला, गुरु अर्थात पचने में भारी , कफ वर्धक औऱ आम ( जब भोजन सही रूप से नही पचता तो भोजन से आमरस का निर्माण होता है यह बहुत सी बीमारियों का कारण होता है। ) बढ़ाने वाला होता है। औऱ अपथ्य माना गया है। इसलिए दूध को पकाकर ही उपयोग करना चाहिए।
गाय का धारोष्ण दूध उपयोग कर सकते हैं।

गर्म किये हुए दूध के साधारण गुण-
गर्म किया हुआ दूध कफ औऱ वात का नाशक है , गर्म करके ठंडा किया हुआ दूध पित्त का नाशक है। अर्थात जब हाँथ पैर में दर्द ज्यादा यात्रा करने के कारण या कोई अन्य शारीरिक कार्य करने के कारण होता हो, तो गर्म दूध पीने से लाभ होता है। यदि कफ बढ़ा हो या फिर जुकाम जैसा लक्षण हो तो गर्म दूध हल्दी के साथ लेने पर इसमे लाभ होगा।
यदि शरीर मे जलन हो या हथेली / तलवों में जलन हो या आंखों में जलन हो तो गर्म दूध को ठंडा करने पीने से लाभ होता है । यह दूध का सामान्य त्रिदोष पर प्रभाव है।

दूध में आधा जल मिलाकर गर्म करने दूध शेष करने पर दूध पचने में बहुत हल्का होता है ।
गर्म किया हुआ दूध कच्चे दूध से दोगुना समय तक पथ्य होता है ।

दूध में चौथाई भाग जल मिलाकर लगातार चलाते हुये गर्म किया जाए औऱ दूध के मात्रा पूर्ववत बचने पर फिर सेवन किया जाए तो यह औऱ भी उत्तम होता है। यह रोग नाशक , बल दायक औऱ ओज एवं शुक्र को बढ़ाने वाला होता है।

धन्यवाद.....
जानकारी पसंद आई हो तो पेज को फॉलो करें।


#दूध

डॉ पंकज श्रीवास्तव (B.A.M.S., M.D. PGD in Clinical Panchakrma)
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी

आयुर्वेद अनुसार दूध के साथ खाने योग्य औऱ न खाने योग्य पदार्थआयुर्वेद के ग्रंथ योगरत्नाकर ने खान पान के विस्तृत गुणों के ...
18/08/2026

आयुर्वेद अनुसार दूध के साथ खाने योग्य औऱ न खाने योग्य पदार्थ

आयुर्वेद के ग्रंथ योगरत्नाकर ने खान पान के विस्तृत गुणों के बारे में बताया है उसी क्रम में उन्होंने दूध के विभिन्न प्रकार औऱ उसके गुण जैसे बकरी का दूध, भैंस का दूध, गाय का दूध आदि के गुणों का वर्णन किया है। किस दूध की क्या विशेषता है इसके बारे में बाद में बात करेंगे आज इस लेख में यह बताया जा रहा है कि दूध के साथ कौन कौन से पदार्थ खा सकते हैं औऱ कौन कौन से नही।

दूध के साथ खाने वाले पदार्थ- पका हुआ आम, मुनक्का ( द्राक्षा , दाख या किशमिश) शहद, घृत , मख्खन, पिप्पली, मरीचि, मिश्री , शक्कर , गुड़, सोंठ( अदरक) , हरड़, औऱ लगभग सभी मीठे पदार्थ दूध के साथ खाया जा सकता है
अम्ल रसों में आंवला दूध के साथ , शाक वर्ग में परोरा, कषाय रस में यव को दूध के साथ ले सकते हैं।

दूध के साथ न खाने वाले पदार्थ- आयुर्वेद में कुछ पदार्थों को दूध के साथ खाने को मना किया है जैसे - मांस, मछली, मूली, जामुन, सुरा , सभी प्रकार के उष्ण पदार्थ, तेल, सरसों, कैंथ का फल, नींबू, खट्टा अनार, बैर, केला , बेल का फल, इन पदार्थों को दूध के साथ नही खाना चाहिए।

डॉ पंकज श्रीवास्तव ( B.A.M.S., M.D., PGD in Clinical Panchakrma )
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी

बरसात का मौसम बहुत से लोगों को पसंद आता है औऱ इस मौसम में अधिकतर लोगों को कुछ न कुछ नया खाने का शौक बना रहता है। बस उनकी...
15/08/2026

बरसात का मौसम बहुत से लोगों को पसंद आता है औऱ इस मौसम में अधिकतर लोगों को कुछ न कुछ नया खाने का शौक बना रहता है। बस उनकी यही एक आदत उन्हें बीमार बना सकती है,। आयुर्वेद में 1 वर्ष को 6 भागों में बांटा है जिन्हें ऋतु नाम से सम्बोधित किया है जो निम्न प्रकार हैं शिशिर ,बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत। औऱ प्रत्येक ऋतु की ऋतुचर्या बताई गई है जिसका पालन करने से मनुष्य स्वस्थ रहता है इसलिए आयुर्वेद के बारे में यह प्रचलित है कि इसमे बीमार न होने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है अर्थात स्वस्थ रहने के उपाय बताए जाते हैं । अगर किसी कारणवश जैसे कि ऊपर लिखा है वर्षा ऋतु में खान- पान की वजह से बीमार हो सकते हैं तब फिर चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। ( स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम आतुरस्य विकार प्रश्मनम च)।

वर्षा ऋतु में जठराग्नि मंद हो जाती है जिसके कारण खाये हुआ भोजन का ठीक से पाचन नही हो पाता है जिसके कारण भोजन अपक्व रहता है औऱ शरीर मे आम ( एक प्रकार से विकृत कफ) का निर्माण होता है जो कि साधारण रूप से सर्दी जुकाम अस्थमा आदि उत्पन्न करना है औऱ वर्षा ऋतु में स्वभाविक रूप से वात का प्रकोप होता है जिसके कारण जोड़ो में दर्द की शिकायत उत्पन्न होती है। और ऊपर से मिर्च मसाला वाला भोजन करने से पित्त का प्रकोप होता है जिससे वर्षा ऋतु में स्किन डिसीज के रोगी भी बहुत पाए जाते हैं।

इसलिए हमे स्वस्थ रहने के लिये आयुर्वेद में दी हुई ऋतुचर्या का पालन करना चाहिए।
वर्षा ऋतु में सुपाच्य भोजन लें , स्वच्छ सूती वस्त्र धारण करें, भोजन में या किसी भी रूप में शहद का प्रयोग करें। औऱ भी बहुत से नियम हैं आहार विहार कैसा रखना है वर्षा ऋतु में जिससे कि हम अपने आप को स्वस्थ रख सकें। इसके लिये आप अपने नजदीकी आयुर्वेद चिकित्सक से सम्पर्क कर सकते हैं।

नोट- ऋतुचर्या के बारे में आपको सोशल मीडिया में बहुत सारे ज्ञानवान लोग मिलेंगे बहुत से वीडियो मिलेंगे पर ध्यान रखे स्वस्थ व्यक्ति और रोगी व्यक्ति दोनो के लिये नियम अलग होते हैं। इसलिए आयुर्वेद से सम्बंधित किसी भी सलाह या उपचार के लिये आयुर्वेद चिकित्सक से ही परामर्श लें। एक आयुर्वेद चिकित्सक आधुनिक चिकित्सा औऱ आयुर्वेद दोनो का ज्ञान रखता है इसलिए वह आपके लिये उचित सलाह दे सकता है। आयुर्वेद के नाम पर जो सोशल मीडिया पर स्वघोषित वैद्य बने हैं उनसे अपने आप को बचा कर रखें ।
धन्यवाद

डॉ पंकज श्रीवास्तव

13/08/2026

आयुर्वेद में पेट साफ करने हेतु बहुत सी दवा आती है, जैसे
हरीतकी (हरड़ )चूर्ण
त्रिफला चूर्ण
ईसबगोल
बड़ी दाख( मुनक्का)
अंजीर
सनाय
एरण्ड तेल
घृतकुमारी
जमालगोटा

औऱ भी बहुत से नाम हैं कई योग ऐसे हैं जिनमे यह सिंगल दवा को मिलाकर एक पूर्ण रूप से नई दवा बन जाती है जैसे
कायम चूर्ण, पेट सफा, दिव्य चूर्ण, लेक्सओल आदि औऱ भी बहुत से ब्रांड नाम से आती हैं।

जो ऊपर दी हुई दवा के नाम हैं उनमे से बहुत सी दवा आपको सोशल मीडिया के माध्यम से आपके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले स्व घोषित वैद्य बताते रहते हैं कि फलां औषध लीजिये औऱ वर्षों से होने वाली कब्ज से राहत पाइए।

पर यहाँ ध्यान रखने वाली यह बात है कि हर एक दवा हर मरीज को और हर बीमारी में नही दी जाती है। प्रत्येक दवा का कार्य करने का अपना सिद्धांत है औऱ कब्ज होने के अपने स्वतंत्र औऱ बीमारी जन्य बहुत से कारण हैं।

इसलिए अगर अपने स्वास्थ्य की औऱ अपने धन रक्षा चाहते हैं तो सोशल मीडिया के स्व घोषित वैद्यों से दूर रहें।
सरकार द्वारा रजिस्टर्ड आयुर्वेद चिकित्सक से ही आयुर्वेद दवा औऱ सलाह लें ।

ये आपके स्वास्थ्य के लिये उचित है।

धन्यवाद

डॉ पंकज श्रीवास्तव ( M. D.)
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी

Address

Bhander

Opening Hours

Monday 1pm - 8pm
Tuesday 1pm - 8pm
Wednesday 1pm - 8pm
Thursday 1pm - 8pm
Friday 1pm - 8pm
Saturday 1pm - 8pm

Telephone

+919752270453

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr. Pankaj Ayurveda posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share