22/09/2026
आज पहली बार श्मशान गई।
सोचा था, वहाँ जाकर शायद वैराग्य महसूस होगा। शायद ये समझ आएगा कि सब कुछ कितना अस्थायी है, कितना temporary है।
लेकिन वहाँ जाकर ना मुझे कुछ बिल्कुल अलग समझ आया।
मुझे लगा, शायद हम मौत से इसलिए नहीं डरते कि जीवन खत्म हो जाता है, infact हम इसलिए डरते हैं क्योंकि हमने इस जीवन से खुद को बहुत गहराई से जोड़ लिया है।
जन्म के समय से ही कितनी सारी चीज़ें हमें इस दुनिया से जोड़ती चली जाती हैं—नाम, परिवार, रिश्ते, समाज, पहचान। और फिर मृत्यु के समय होने वाले संस्कार जैसे धीरे-धीरे उन सारे रिश्तों और पहचानों से अलग करने की एक process hai, प्रक्रिया हैं।
मुझे समझ आया कि हमारे रिश्ते, हमारे लगाव, हमारी इच्छाएँ, हमारे triggers—ये सिर्फ हमारे बंधन नहीं हैं। Actually में शायद इन्हीं के बीच हमें अपने कर्म जीने हैं। यही इस जीवन का major हिस्सा हैं।
मुद्दा शायद इतना सा है कि हर इंसान, हर आत्मा को किसी point पर ये समझना पड़ेगा कि वो वास्तव में क्या चाहती है।
पर सबसे अजीब बात ये है कि बहुत से लोग ये भी नहीं जानते कि उनके पास कोई choice है।
वे बस वही जीते रहते हैं जो उन्हें सिखाया गया है। जो परिवार चाहता है, जो समाज चाहता है, जो रिश्ते उनसे चाहते हैं, जो परिस्थितियाँ उनके सामने रख देती हैं। बहुत कम लोग रुककर खुद से पूछते हैं—
“मेरी आत्मा क्या चाहती है? मैं इस स्थिति में क्या जीना चाहता हूँ??”
और ये choice भी ऐसी नहीं है कि एक बार कर ली और बात खत्म।
हर पल, हर situation में हमें फिर चुनना पड़ता है।
हर रिश्ते में, हर reaction में, हर मुश्किल परिस्थिति में फिर एक choice सामने आती है—
इस पल मैं कौन हूँ?
मैं क्या चुन रहा हूँ?
और क्या ये सच में वही है जो मेरी आत्मा चाहती है?
अगर मुझे इस दुनिया में रहना है, रिश्तों को जीना है, अपने कर्मों को इसी भौतिक जीवन के अनुभवों के through जीना है—तो मुझे उसे भी पूरे होश के साथ चुनना चाहिए।
और अगर मुझे भीतर जाना है, ब्रह्मांड को समझना है, उस Divine को जानना है जो इन सबके पार है—तो वो भी मेरा conscious choice होना चाहिए।
शायद spirituality किसी एक रास्ते को चुन लेने का नाम नहीं है।
शायद spirituality बस इतनी है कि मैं जो भी चुनूँ, उसे होश में चुनूँ।
श्मशान में मुझे वैराग्य नहीं मिला।
मुझे पहली बार ये समझ आया कि चुनाव कितनी बड़ी चीज़ है। मुझे choices की power और उसकी depth समझ में आई।