2nd International Seminar/Workshop-” Wellness through Ayurveda”-2015

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2nd International Seminar/Workshop-” Wellness through Ayurveda”-2015 JOINTLY ORGANIZED BY AYUSH DARPAN FOUNDATION &TRILOK AYURVEDA WELLNESS CENTRE,RIS

09/04/2026
23/03/2026
22/03/2026

fans जीभ कभी झूठ नहीं बोलती: जानिए आपका सुबह का आईना आपसे क्या कह रहा है 👅
एक आयुर्वेदाचार्य के रूप में, परामर्श (Consultation) के दौरान मैं सबसे पहले रोगी की जीभ का अवलोकन करता हूँ। आयुर्वेद में जीभ को 'जिह्वा' कहा जाता है—जो आपके पाचन की अग्नि (Agni) की स्थिति जानने का एक सीधा माध्यम है।

जीभ पर जमी सफेद परत (White Coating) सिर्फ सफाई की कमी नहीं है; यह 'आम' (Ama) का स्पष्ट संकेत है। 'आम' यानी शरीर में जमा वे विषैले तत्व जो भोजन के ठीक से न पचने के कारण बनते हैं। जब आपका शरीर आपके द्वारा खाए गए भोजन को कुशलतापूर्वक पचा नहीं पाता, तो वह जीभ पर अपना निशान छोड़ देता है।

एक सामान्य चक्र (The Common Cycle)
मेरे कई मरीज इन लक्षणों से जूझते हैं, लेकिन वे समझ नहीं पाते कि ये सब आपस में जुड़े हुए हैं:

सुबह का भारीपन (Morning Heaviness): 8 घंटे की नींद के बाद भी ताजगी महसूस न होना।

लेपित जीभ (Coated Tongue): जीभ पर एक चिपचिपी सफेद परत, जो साफ करने के बाद भी वापस आ जाती है।

सुस्त पाचन (Sluggish Digestion): खाना खाने के काफी समय बाद भी पेट का फूलना, भारीपन या "भरा हुआ" महसूस होना।

समाधान: केवल बाहरी नहीं, आंतरिक है
हालांकि तांबे का टंग क्लीनर एक महत्वपूर्ण दैनिक उपकरण है, लेकिन असली सफाई भीतर से होती है। आपके पाचन तंत्र (Gut Health) को प्रामाणिक रूप से ठीक करने में ये बातें शामिल हैं:

कफ पर ध्यान दें: भारी, ठंडे और डेयरी उत्पादों (दूध-दही) को कम करें जो सिस्टम को "ब्लॉक" करते हैं।

अग्नि को प्रज्वलित करें: पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करने के लिए अदरक, जीरा और काली मिर्च जैसे सरल घरेलू मसालों का उपयोग करें।

समय का महत्व: यह समझना कि आप कब खाते हैं (जैसे देर रात के भोजन से बचना) उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आप क्या खाते हैं।

क्लिनिकल अंतर्दृष्टि (Clinical Insight)
यदि आप अपनी जीभ पर यह परत देखते हैं, तो इसे अनदेखा न करें। यह आपके शरीर का 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' है। इससे पहले कि ये विषैले तत्व शरीर के ऊतकों (धातुओं) में गहराई तक बैठें, त्रिफला और गुनगुने पानी जैसे सरल आयुर्वेदिक उपाय आपके संतुलन को वापस ला सकते हैं।

क्या आपकी सुबह की दिनचर्या में जीभ की जांच शामिल है? आइए नीचे कमेंट्स में पाचन स्वास्थ्य पर चर्चा करें। 👇

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22/03/2026

fans 🌿 नमस्कार साथियों! डॉ. नवीन जोशी (MD Ayurveda) का अभिवादन! 🌿

आज मैं आप सभी के साथ आयुर्वेद के एक ऐसे दिव्य उपहार के बारे में चर्चा करूँगा, जो सदियों से अपनी अद्भुत प्रभावशीलता के लिए जाना जाता है।

🌟 चंद्रप्रभा वटी: आयुर्वेद का दिव्य 'सर्वरोगनाशक' उपहार 🌟

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है - 'चंद्र' अर्थात चंद्रमा और 'प्रभा' अर्थात कांति। यह औषधि न केवल रोगों का नाश करती है, बल्कि शरीर को चंद्रमा के समान ओज और चमक भी प्रदान करती है।

क्यूँ है यह इतनी प्रभावशाली? 🤔
इसकी विशिष्टता इसके अनूठे मिश्रण में छिपी है। इसमें शिलाजीत, शुद्ध गुग्गुलु, और लौह भस्म जैसे शक्तिशाली घटक द्रव्य शामिल हैं। कुल 37 तत्वों का यह संयोजन वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने की क्षमता रखता है।

🚀 बहुआयामी लाभ और 'अनुपान' का महत्व 🚀
चंद्रप्रभा वटी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि अलग-अलग अनुपान (साथ में ली जाने वाली चीजें) के साथ इसका प्रयोग करने पर यह अलग-अलग रोगों में रामबाण की तरह कार्य करती है:

💧 मूत्र विकारों में: पेशाब में जलन या किडनी स्टोन की समस्या हो, तो इसे गोक्षुरादि क्वाथ या नारियल पानी के साथ लेना अत्यंत लाभकारी है।
🌺 स्त्री रोगों के लिए: श्वेत प्रदर और गर्भाशय की कमजोरी में इसे अशोकारिष्ट या चावल के मांड के साथ दिया जाता है।
🍬 मधुमेह और प्रमेह: प्रमेह के रोगियों के लिए यह औषधि किसी वरदान से कम नहीं है, विशेषकर जब इसे हल्दी के स्वरस के साथ लिया जाए।
💪 शारीरिक शक्ति: सामान्य कमजोरी की स्थिति में इसे गुनगुने दूध के साथ लेने से शरीर को नई ऊर्जा और बल मिलता है।

वैद्यकीय परामर्श: 👨‍⚕️
चंद्रप्रभा वटी केवल एक दवा नहीं, बल्कि एक संपूर्ण स्वास्थ्य रक्षक है। हालांकि यह सुरक्षित है, लेकिन इसका सेवन हमेशा अपनी प्रकृति और रोग के अनुसार किसी विशेषज्ञ वैद्य की देखरेख में ही करना चाहिए।

स्वस्थ रहें, आयुर्वेद अपनाएं। 🙏

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