25/05/2026
प्रेम और खालीपन
रात के ग्यारह बजे हैं। आपका साथी सो चुका है लेकिन आप अभी भी जाग रहे हैं| मोबाइल की रोशनी में उनका आख़िरी मैसेज बार-बार पढ़ रहे हैं। मैसेज में कुछ भी ग़लत नहीं है। बस इतना लिखा है कि ठीक है,कल बात करते हैं। लेकिन आपका मन इन शब्दों को किसी जासूस की तरह खंगाल रहा है। यह साथ सो रहे पति के शब्द भी हो सकते हैं जो सोने से पहले यह कह कर सोया है|
यह कोई असाधारण रात नहीं है। यह करोड़ों लोगों की हर दूसरी रात है। और इस रात का नाम है — छोड़ जाने का डर।
प्रेम, जो हमें सबसे अधिक सुरक्षा देने का वादा करता है, अक्सर हमारी सबसे गहरी असुरक्षा का स्रोत बन जाता है। हमने इस विरोधाभास को इतनी बार देखा है कि इसे "प्रेम" का स्वाभाविक हिस्सा मान लिया है। हम कहते हैं — "जहाँ प्रेम है, वहाँ डर तो रहेगा ही।"
लेकिन क्या यह सच है?
तंत्र कहता है — आपके सामने जो व्यक्ति है, वह एक दर्पण है। "वे मुझे छोड़ देंगे" यह डर कहीं बाहर से नहीं आ रहा है, यह आपके अपने भीतर से आ रहा है| एक ऐसी जगह से जहाँ आपने स्वयं को बहुत पहले छोड़ दिया था। आप साथी के जाने से नहीं डरते बल्कि उस खालीपन से डरते हैं जो उनके जाने के बाद सामने आएगा।
तंत्र कहता है कि जिस दिन आप उस खालीपन में बिना डरे उतरेंगे, उस दिन एक रहस्यमयी दरवाजा खुलेगा या एक तिस्लमी पर्दा हटेगा| दरवाजा खुलते ही या पर्दा हटते ही आप पायेंगे कि इतने वर्षो से जिस कमरे को आप खाली समझे बैठे थे वह असल में खाली ही नहीं है। असल में वह आपका अपना बचपन का वह कमरा है जोकि शुरू से आपका ही घर है। और जो अपने घर में बैठा है, उसे कोई कहाँ से बेघर करेगा?
डर बेचने वाले बहुत हैं। पर आप उनके ग्राहक बनने के लिए नहीं जन्मे।
पूरा लेख — चार दृष्टिकोण से: मनोविज्ञान, तंत्र, बुद्ध और विज्ञान भैरव तंत्र की रोशनी में — वेबसाइट पर पढ़िए या youtube पर देखें। लिंक कमेंट में है।
— नवारम्भ
Bhairava Ta**ra **ra