CALL:09599081730, ALLOVER INDIA.JOIN THIS SPIRITUAL NETWORK TO EARN MORE.We are Looking for energetic male-females allover world, specially in india to grow the organisation AADISHAKTI. मेरा विश्वास ही नहीं बलिक दावा है कि यदि इस दिव्य गुणों वाली चाय का सेवन श्र(ा एवं विश्वास के साथ प्रतिदिन दो-तीन बार या अनेक बार किया जाए तो न सिपर्फ प्रचलित चाय के दुष्परिणामों से बचा जा सकता है बलिक जटिल से जटि
ल पुराने रोगों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है, जिन्हें आप लाइलाज समझ बैठे हैं। चूँकि इसमें प्रयुक्त सभी घटक मानव शरीर की रोग प्रतिकारक शकित को बढ़ाने वाले हैं। अतएव इसके निरंतर सेवन से एडस, कैंसर एवं शुगर जैसे रोगों की संभावना को कापफी हद तक कम किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर कुष्ठ रोग, सपफेद दाग, सोरायसिस इत्यादि चर्मरोग, चेहरे पर निकलने वाले कील मुहासे एवं काले दाग-ध्ब्बे एवं झाइयां इसके निरंतर सेवन से निमर्ूल हो सकते हैं। चेहरे पर ओजस्वी चमक एवं सौंदर्य में वृधि होती है। जो नैसर्गिक सौंदर्य महंगे-महंगे सौंदर्य प्रसाध्नों से नहीं मिलता वह केवल इस चाय के दैनिक इस्तेमाल से मिलता है। चूंकि यह एक दिव्य
रक्तशोध्क पेय है।
शुगर (डायबिटीज) ब्लड प्रेशर व हदय रोगियों के लिए तो यह एक आवश्यक एवं जीवनदायक औषधि के समान है। उक्त रोगियों के लिए प्रचलित चाय अत्यंत दुष्परिणामकारक साबित होती है, पिफर भी चाय आज एक आदत है। अतएव प्रस्तुत पेय चाय का विकल्प और एक रामबाण औषधि साबित होगी।
तुलसी, अमृता इत्यादि वातशामक औषधियों के कारण इसमें वात विकार को मिटाने की अदभुत क्षमता है। यदि जोड़ों के दर्द, गठियाबार्इ, वात की प्रबलता के कारण नाडियों में दर्द रहता हो तो यह चाय रामबाण औषधि साबित हो सकती है। गठिया मरीजों को बिना दूध् के अथवा एक चम्मच, चायपत्ती गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से विशेष लाभ मिलता है।
गुप्त रोग- सभी स्त्री व पुरूष गुप्त रोगों में यह चमत्कारी एवं स्थायी लाभ दर्शाती है। युवाओं में घटती पौरूषशकित, वीर्य का पतलापन, धत, स्वप्नदोष इत्यादि समस्याओं तथा स्तंभन शकित की कमी को दूर करना इस पेय का दिव्य प्रभाव स्पष्ट करता है। इसी तरह सित्रायों में भी आजकल सित्रात्व की कमी, उदासीनता एवं जनन-संस्थान की अनेक समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। यह वर्तमान जीवनशैली एवं खानपान का सीधा दुष्परिणाम है। मेरा अचल विश्वास है कि महिलाओं के स्वास्थ्य संवर्(न एवं उपयर्क्त रोगों के निदान यहां तक कि मासिक की विभिन्न गड़बडियों में भी यह एकमात्रा चाय ही बेहतरीन औषधि का कार्य करेगी।
गर्भाशय को स्वच्छ एवं विकाररहित करना इसका विशेष औषधि गुण है। अतएव जिनके बच्चे नहीं होते या असमय गर्भ खणिडत हो जाता है, उन सित्रायों को निरंतर इसका सेवन बड़ी ही क्ष(ा एवं विश्वास के साथ करना चाहिए। उपयर्क्त तकलीपफों में बिना दूध डाले काढ़े की भांति खूब पकाकर और एक चौथार्इ पानी रह जाए तब छानकर सेवन करें। उपयरुक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि पुरूषों में पौरूष और नारियों में नारीत्व का एहसास जगाने की दिव्य शकित से भरपूर है यह पेय।