Singi Chikitsa

Singi Chikitsa Singi Chikitsa Pain Treatment “SINGI CHIKITSA” is a traditional healing practice from indigenous communities of India. The initial results have been encouraging.
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The term “Singi” refers to specific metal cups like cow horn while “Chikitsa” means treatment of healing in Sanskrit. This practice is deeply rooted in local traditions and knowledge passed down through generations, often emphasizing a connection to nature and community well being. We have started Singi Treatment in the month of February, 2024 itself from Burari area of North Delhi. Till now we have cured various body pains of more than 150 people. Singi Chikitsa is our traditional treatment method with the help of which year’s old pain gets cured in few minutes. It is like magic.

13/01/2025
आख़िरकार, पहले आप समझ आना बंद होते हैं, फिर दिखाई देना बंद होते हैं, और फिर सुनाई ही देना बंद हो जाते हैं. रवायती समझौताव...
16/11/2024

आख़िरकार, पहले आप समझ आना बंद होते हैं, फिर दिखाई देना बंद होते हैं, और फिर सुनाई ही देना बंद हो जाते हैं. रवायती समझौतावादी लोगों के लिए के लिए यह अजीब है, मगर समझौते और खुद्दारी के बीच खुद्दारी चुनने पर वक़्त-ए-आज़माईश क़ा अंतिम पड़ाव शायद ऐसा ही होता है. समझे ना जाने तक आप हौसला बनाये रखते हैं, क्योंकि बग़ावत करने के इस नतीजे से इतिहास आपको पहले ही वाक़िफ़ करवा चुका होता है, आप इसके साथ ही सहज होना सीख जाते हैं. आप अलग-थलग कर दिये जाते हैं, बाज़ दफ़ा उपहास क़ा पात्र भी बनते हैं, लेकिन फिर भी बामशक्कत इतनी बड़ी दुनिया में आप अपना मुट्ठी भर कम्फर्ट, ख़ुशी, और चंद अपने जैसे अपने लोग ढूंढ ही लेते हैं.... आसरा फिर भी वही होता है, कि आप अकेले नहीं हैं..... मेरी नज़र में सुना ही ना जाने क़ा पड़ाव अच्छे अच्छों के धैर्य की परीक्षा ले लेता हैं. मैंने एक से एक मज़बूत लोगों को अपनों द्वारा समझें ना जाने पर जितना बागी होते देखा, उतना ही सुने ही न जाने पर टूट कर बिखरते देखा..... आमतौर पर ख़ुद्दार, बागी व्यक्ति का चुप ना रहना ही उसकी शुरुवाती ताक़त मानी जाती है, आप तरह-तरह के बैर पाल लेते हैं, मगर चुप रहना नहीं चुनते, बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, फ़लाना ढिंकड़ा.......तो क्या ऐसे इंसाफ़पंसद व्यक्ति को चुप करवा देने के लिए दुनिया का यह आखिरी हथियार होता है? क्या लंबे चले संघर्ष क़ा नतीजा अधिकतर चुप हो जाना या दूसरों की चुप्पी सहज स्वीकार लेना है?? अपने प्रिविलेज और स्वार्थ के लिए सहज चुप्पी स्वीकार कर लेने वाले चुप लोगों की क़तार में इस तरह धक्का देकर खड़ा किया जाना कितना पीड़ादायक है? वह भी बिल्कुल खाली हाथ और बेनतीजा!!!

और पागल भी ठहराते है।।
14/11/2024

और पागल भी ठहराते है।।

भ्रष्टाचार देश और समाज को अंदर ही अंदर खौखला कर देता है।।
12/11/2024

भ्रष्टाचार देश और समाज को अंदर ही अंदर खौखला कर देता है।।

नेता को खोजिए कहीं खो गया है,  कहीं  आदमी  तो  नहीं  हो गया है? गया  था  सूखे  के  दौरे  पर परसों पानी  पानी  तो   नहीं ...
03/11/2024

नेता को खोजिए कहीं खो गया है,
कहीं आदमी तो नहीं हो गया है?
गया था सूखे के दौरे पर परसों
पानी पानी तो नहीं हो गया है?
उसकी हिकमते गुनाह को सलाम है
बड़े प्यार से नफरते बो गया है?
बाग के बचे खुचे फूल मुरझा गए
घड़ियाली आंसू कोई रो गया है!

शायद ही कभी त्यौहारों से इतनी कोफ़्त हुई है..... रंग-रौशनी से इतर, इन दिनों सर्द मौसम की दस्तक ही थी जो मन के सन्नाटे को ...
01/11/2024

शायद ही कभी त्यौहारों से इतनी कोफ़्त हुई है..... रंग-रौशनी से इतर, इन दिनों सर्द मौसम की दस्तक ही थी जो मन के सन्नाटे को सहला देती थी, मगर इस बार मेरे हिस्से की वो नर्म ठंडक भी फ़िज़ा से ग़ायब है..... ये उत्सव अब थकान दे रहे हैं..... कुछ चीज़ें हाथ से छूटती जा रहीं हैं, कुछ को ख़ुद ही अब छोड़ देने का मन है, और कुछ को झटक कर फेंक देने का..... जब सभी को आपके मज़बूत किरदार की आदत हो जाती है, तो आपका कमज़ोर पड़ना गुनाह मान लिया जाता है..... आपकी मज़बूती के कायल लोग अचानक आपके कमज़ोर बिलखते रूप को देख कर सदमे में चले जाते हैं, कि जैसे मानो क्या ही देख लिया हो, और victim blaming इस समाज का प्रिय शगल है..... दूर तक पसरा मैदान, लेकिन चलने के लिए जहाँ भी पैर रख रहा हूँ, ठीक वहीं की ज़मीन दरक रही है, मैं भागने की कोशिश करता हूँ, पलट कर देखने से भी डर लग रहा है, कहीं बीता कल फिर से क़रीब नज़र ना आ जाए, और अतीत के छींटे एक बार फिर से धोना मुश्किल ना हो जाए, और फिर से धुलते धुलते दाग़ ना छोड़ जाएं, अपने मूल स्वभाव के विपरीत पीड़ाएं आपको तराशने के बजाय अचानक कुरेदने लगती हैं...... नाउम्मीदी का ही यही दौर होता है जब आपके अपनों का लिटमस टेस्ट होता है, कौन आपका कितना है? किसमें आपका कितना हिस्सा है.... अंतहीन पीड़ायें और ख़ुशहाल उत्सव एक साथ मिलकर मेरे इर्द-गिर्द तांडव कर रहे हैं, ये कैसे संभव है??
ये बाहरी शोर, ये रंग, तमाशा, ये शोशा, ये जगमगाहट बस जैसे तैसे थम जाए.....

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