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11/05/2026

*कितना सुंदर. उत्तर !*

दो पीढ़ियों के बीच तुलना…

हर किसी को ज़रूर पढ़नी चाहिए 👌👌
*एक युवक ने अपने पिता से पूछा* :
“आप लोग पहले कैसे जीते थे?”
– तकनीक नहीं थी
– हवाई जहाज़ नहीं थे
– इंटरनेट नहीं था
– कंप्यूटर नहीं थे
– नाटक नहीं थे
– टीवी नहीं था
– सिनेमा नहीं था
– वायु प्रदूषण नहीं था
– गाड़ियाँ नहीं थीं
– मोबाइल फोन नहीं थे

*उसके पिता ने उत्तर दिया:*
“जैसे आज तुम्हारी पीढ़ी जी रही है…”
– भक्ति नहीं
– ज्ञान नहीं
– संतों का परिचय नहीं
– ग्रंथों का ज्ञान नहीं
– शांति नहीं
– संयम नहीं
– धर्मनिष्ठा नहीं
– कुल-धर्म और परंपराएँ नहीं
– प्रार्थनाएँ नहीं
– त्योहार नहीं
– करुणा नहीं
– सम्मान नहीं
– आदर नहीं
– आदर्श नहीं
– संस्कार नहीं
– लज्जा नहीं
– रिश्ते-नाते नहीं
– नम्रता नहीं
– स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता नहीं
– समय का नियोजन नहीं
– खेल नहीं
– पढ़ने की आदत नहीं
– सेवा भाव नहीं

“ *हम, जो 1940 से 1980 के बीच जन्मे लोग हैं, वास्तव में धन्य हैं।*
हमारा जीवन इसका जीवंत प्रमाण है:”
👉 खेलते समय और साइकिल चलाते हुए हमने कभी हेलमेट नहीं पहना।
👉 स्कूल से आने के बाद शाम तक खेलते रहते थे, कभी टीवी नहीं देखते थे।
👉 हमने इंटरनेट मित्रों के साथ नहीं, बल्कि सच्चे मित्रों के साथ खेला।
👉 प्यास लगने पर नल का पानी पिया, बोतलबंद पानी नहीं।
👉 हम कभी बीमार नहीं पड़े, फिर भी चार दोस्त एक ही गिलास में जूस पी लेते थे।
👉 रोज़ भरपेट चावल खाने के बावजूद हमारा वजन कभी नहीं बढ़ा।
*👉 नंगे पाँव चलने पर भी हमारे पैरों को कुछ नहीं हुआ।*
👉 माता-पिता ने हमें स्वस्थ रखने के लिए कभी सप्लीमेंट्स का उपयोग नहीं किया।
👉 हम अपने खिलौने खुद बनाते थे और उनसे खेलते थे।

*👉 हमारे माता-पिता अमीर नहीं थे, लेकिन उन्होंने हमें प्यार दिया, भौतिक चीज़ें नहीं।*

👉 हमारे पास मोबाइल, डीवीडी, प्ले स्टेशन, एक्सबॉक्स, वीडियो गेम, पर्सनल कंप्यूटर या इंटरनेट चैट नहीं था — *लेकिन हमारे पास सच्चे दोस्त थे।*
👉 हम बिना बुलाए दोस्तों के घर चले जाते थे और उनके साथ भोजन करते थे।
👉 आज की दुनिया के विपरीत, हमारे रिश्तेदार पास-पास रहते थे, इसलिए पारिवारिक समय और रिश्ते खुशहाल थे।
👉 हम भले ही ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों में हों, लेकिन उन तस्वीरों में रंगीन यादें हैं।

*👉 हम एक अनोखी और सबसे समझदार पीढ़ी हैं,*

*क्योंकि हम आख़िरी पीढ़ी थे जिन्होंने अपने माता-पिता की बात मानी,*
और पहली पीढ़ी हैं
* *जिन्हें अपने बच्चों की बात सुननी पड़ी।*
*
और हम ही वे लोग हैं जो आज भी समझदार हैं और
उस तकनीक को सीखने-समझने में आपकी मदद कर रहे हैं
जो हमारे समय में अस्तित्व में ही नहीं थी!
🌹🙏🙏🙏🌹

अंत में —
*दिन तो चले गए 🥲, लेकिन यादें रह गईं* 👌
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

🌹 अपने लिए जिए तो क्या जिये          तू जी ऐ दिल जमाने के लिए🌹 दूसरों का दुखड़ा दूर करने वाले            तेरे दुख दूर कर...
23/04/2026

🌹 अपने लिए जिए तो क्या जिये
तू जी ऐ दिल जमाने के लिए
🌹 दूसरों का दुखड़ा दूर करने वाले
तेरे दुख दूर करेंगे राम
🙏🙏करबद्ध अनुरोध🙏🙏
कृपया यह सूचना अधिक से अधिक लोगों को प्रेषित करें
यदि आपके छोटे से प्रयास से किसी के जीवन में परिवर्तन आ जाए तो आपको दुआएं ही देगा
कहा गया है
*दवा से दुआ श्रेष्ठ है*
🙏💕🙏💕🙏💕
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

Darshan Wellness Ashram                           प्रत्येक रविवार निशुलक शिवि…

.     भगवान हमें देख रहे हैहमारे घर के पास एक डेयरी वाला है| वह डेयरी वाला ऐसा है कि आधा किलो "घी" में, अगर 'घी' 502 ग्र...
23/04/2026

. भगवान हमें देख रहे है

हमारे घर के पास एक डेयरी वाला है| वह डेयरी वाला ऐसा है कि आधा किलो "घी" में, अगर 'घी' 502 ग्राम तुल गया तो 2 ग्राम 'घी, वापिस निकाल लेता था।

एक बार मैं आधा किलो 'घी' लेने गया. उसने मुझे 90 रूपय ज्यादा दे दिये। मैंने कुछ देर सोचा और पैसे लेकर निकल लिया। मैंने मन में सोचा,कि 2-2 ग्राम से तूने जितना बचाया था, 'बच्चू,अब एक ही दिन में निकल गया।

मैंने घर आकर "अपनी गृहलक्ष्मी जी" को कुछ नहीं बताया और घी दे दिया। उसने जैसे ही 'घी, डीब्बे में पलटा आधा घी बिखर गया, मुझे झट से कहावत याद आ गयी “बेटा चोरी का माल मोरी में” और साहब यकीन मानीये वो 'घी, किचन की सिंक में ही गिरा था।

इस वाकये को कई महीने बीत गये थे। परसों शाम को मैं वेज रोल लेने गया, उसने भी मुझे सत्तर रूपय ज्यादा दे दिये, मैंने मन ही मन सोचा चलो बेटा!! आज फिर चैक करते हैं कि क्या वाकई में भगवान 'हमें, देखता है। मैंने रोल पैक कराये और पैसे लेकर निकल लिया। आश्चर्य तब हुआ जब एक रोल अचानक रास्ते में ही गिर गया, घर पहुँचा, बचा हुआ रोल टेबल पर रखा, अपना मनपसंद काँच का गिलास उठाया जूस निकालने के लिये ,अरे•••यह क्या?•••गिलास हाथ से फिसल कर टूट गया। मैंने हिसाब लगाया करीब-करीब सत्तर में से साठ रूपय का नुकसान हो चुका था, 'मैं,बडा आश्चर्यचकित था। और अब सुनिये•••ये भगवान तो•••मेरे पीछे ही पड गया, जब कल शाम को 'सुभिक्षा वाले, ने मुझे तीस रूपये ज्याद दे दिये। मैंने अपनी धर्म-पत्नी से पूछा क्या कहती हो!!! एक ट्राई और मारें।? उन्होने मुस्कुराते हुये कहा–जी नहीं, और हमने पैसे वापस कर दिये। बाहर आकर हमारी धर्म-पत्नी जी ने कहा–
वैसे एक ट्राई और मारनी चाहिये थी।
कहना था•••कि•• उन्हें एक ठोकर लगी•••और वह गिरते-गिरते बचीं!!?
मैं सोच में पड गया कि वाकई भगवान हमें देख रहा है। हाँ भगवान हमें हर पल हर क्षण देख रहा है। हम बहुत सी जगह पोस्टर लगे देखते हैं,
"आप कैमरे की नजर में" हैं।.. पर याद रखना हम हर क्षण पल प्रतिपल उसकी नजर में हैं।

वो हर पल गलत कार्य करने से पहले और बाद में भी हमें आगाह करता है। लेकिन यह समझना न समझना हमारे विवेक पर निर्भर करता है।
🙏🏻🙏🏻 दंडवत प्रणाम 🙏🏻🙏🏻
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

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*꧁ || गुरू संकल्प परिवार ||꧂*👉 *हमारा सम्मान हमारे अपने हाथ में है। यदि हम दूसरों को सम्मान देंगे, तो दूसरे भी हमें निश्...
23/04/2026

*꧁ || गुरू संकल्प परिवार ||꧂*
👉 *हमारा सम्मान हमारे अपने हाथ में है। यदि हम दूसरों को सम्मान देंगे, तो दूसरे भी हमें निश्चित रूप से सम्मान देंगे..!!*

*यह तो ठीक है, कि प्रत्येक व्यक्ति में स्वाभिमान होता है, और होना भी चाहिए, अन्यथा वह ठीक ढंग से जी ही नहीं पाएगा। प्रसन्नता से नहीं जी पाएगा। क्योंकि स्वाभिमान, व्यक्ति के अंदर उत्साह और प्रसन्नता को उत्पन्न करता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को "स्वाभिमानपूर्वक" जीवन जीना चाहिए।*

*परंतु जब कोई व्यक्ति "अभिमानपूर्वक" दूसरों के साथ दुष्टतापूर्ण व्यवहार करता है, दूसरे व्यक्ति के स्वाभिमान पर चोट करता है, तो उसका यह व्यवहार अच्छा नहीं है। यह उसके लिए और समाज के लिए भी अत्यंत हानिकारक होता है। हमने अपने आसपास और फिल्मों आदि में ऐसे दृश्य देखे होंगे।*

*"स्वाभिमान" का अर्थ है, अपने वास्तविक गुणों और योग्यता को ठीक से समझ कर दूसरे लोगों से उसी अनुपात में धन सम्मान सुविधाओं आदि की प्राप्ति की इच्छा करना, और दूसरों के साथ सभ्यतापूर्वक व्यवहार करना। यह स्वाभिमान कहलाता है। यह अच्छा भी है, और व्यवहार में सुखदायक भी है।*

*परंतु इससे भिन्न जो "अभिमान" है, वह निश्चित रूप से बहुत खराब है। अभिमान का अर्थ होता है "अपने गुणों और योग्यता को वास्तविकता से अधिक मानकर, दूसरों से बहुत अधिक मात्रा में धन सम्मान और सुख सुविधाओं की इच्छा रखना, और दूसरों के साथ असभ्यतापूर्वक बोलना कटु भाषा का प्रयोग करना। बार-बार दूसरों को अपमानित करने वाली भाषा बोलना, और शरीर से अत्याचार करना। यह बहुत ही विनाशकारी है।"*

*कोई व्यक्ति कितना ही पढ़ा लिखा हो, कितना ही धन संपन्न हो, यदि विद्या और धन आदि वस्तुओं का उसमें अभिमान आ जाता है, तो उसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है। और वह ठीक विचार नहीं कर पाता, कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना उचित है, और मैं कैसा व्यवहार कर रहा हूं ?" "इस अभिमान के कारण से आपस में बहुत से झगड़े उत्पन्न हो जाते हैं, और आपस के व्यवहार बिगड़ते हैं। यहां तक कि कभी-कभी तो उनके संबंध टूट भी जाते हैं।"*

*कृपया हम भी ऊपर बताए लक्षणों के अनुसार ईमानदारी से अपना आत्म निरीक्षण करें। "यदि हममें स्वाभिमान है, तो ठीक है। हम सुख से जियेंगे।" "और यदि हममें अभिमान है, तो हम निश्चित रूप से दूसरे लोगों के साथ अन्याय और झगड़ा करेंगे। दूसरा व्यक्ति भी एक सीमा तक हमको सहन करेगा। उसके बाद वह भी प्रतिक्रिया करेगा। फिर हमें बहुत दुख और दंड भोगना पड़ेगा।" "हो सकता है उसके साथ हमारा संबंध भी टूट जाए। यदि हमारा संबंध टूट गया, तो वह फिर से वैसा नहीं बन पाएगा। यदि ऐसा हुआ तो बाद में हमको बहुत पश्चाताप करना पड़ेगा।" अतः सबके साथ यथायोग्य व्यवहार करना चाहिए।*
*यथायोग्य व्यवहार का तात्पर्य यह है कि, जब हमारे सामने कोई छोटा व्यक्ति हो, तो उसके साथ ठीक व्यवहार करें। उसकी योग्यता के अनुसार उसे उचित सम्मान देवें। यदि हम उसका अपमान करेंगे, और यदि उसने भी पलट कर हमारा अपमान कर दिया, तो हमको वह सहन नहीं हो पाएगा। तब हम बहुत दुखी हो जाएंगे।"*

*"यदि हमारे सामने हमारे से अधिक योग्यता वाला व्यक्ति हो, तब तो उसके साथ बहुत ही सावधानी सभ्यता और सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। यदि उसके साथ आप बार-बार असभ्यता करेंगे, तो वह भी एक सीमा तक सहन करेगा, उसके बाद वह भी हमारा अपमान कर देगा। हो सकता है, हमें अपने जीवन में से ही निकाल दे। और आपसे भविष्य में कभी भी बात ही न करे। तब हमको बहुत अधिक कष्ट होगा।" "इसी प्रकार बराबर योग्यता वाले व्यक्ति के साथ भी उचित व्यवहार करें।"*

*सम्मान पूर्वक व्यवहार तो सबके साथ ही करें। "क्योंकि किसी व्यक्ति के सम्मान पर चोट करना सबसे बड़ा अपराध है।" यदि हम ऐसा अपराध करेंगे, तो क्रोध में आकर दूसरा व्यक्ति भी हमारे साथ बुरा व्यवहार कर सकता है।" "सावधान ! क्रोध सबके अंदर भरा पड़ा है। केवल एक दो दुर्व्यवहार करने की देर है, एकदम सारा क्रोध बाहर निकल कर आ जाएगा। तब हमको उसका सामना करना बहुत कठिन पड़ेगा।"*

*यदि कोई अपात्र व्यक्ति हो, और हम उससे संबंध न रखना चाहें, तो हम उससे चुपचाप संबंध तोड़ सकते हैं। "क्योंकि जैसे दूसरा व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है, वैसे ही हम भी कर्म करने में स्वतंत्र हैं।" "परंतु यदि उसे हमने अपमानित कर दिया, तो हमें वह व्यवहार बहुत भारी पड़ सकता है। इसलिए किसी का भी अपमान न करें।"*

*स्मरण रहे, "हमारा सम्मान हमारे अपने हाथ में है।" "यदि हम दूसरों को सम्मान देंगे, तो दूसरे बुद्धिमान लोग भी हमें निश्चित रूप से सम्मान देंगे।" "यदि हम अभिमान में आकर दूसरों का अपमान करेंगे, तो यह 'अन्याय' कहलाता है। तब वही परिणाम हमें भी भोगना पड़ सकता है। तब इससे हमको ईश्वर भी नहीं बचा पाएगा। क्योंकि ईश्वर भी न्याय के पक्ष में ही सहयोग देता है।" "इसलिए सदा सोच समझ कर दूसरों के साथ अच्छा अर्थात यथायोग्य व्यवहार करें।"*
*(सन्त महापुरुषों की ✍️ से)*
*बोलो जय श्री राधे श्याम*
Dr M K Sharma
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21/04/2026

😎😎😎 समय 🌞🌞🌞
"बीता कल हमारे पास नहीं है लेकिन जीतने के लिए आने वाला कल हमारे पास है ....."

बीता हुआ कल अब सिर्फ याद बन चुका है उसमें की गई गलतियाँ हार दुख या पछतावा उन्हें बदलना अब हमारे हाथ में नहीं है....

लेकिन आने वाला कल अभी लिखा ही नहीं गया वो कोरी किताब है
जिस पर मेहनत हिम्मत और विश्वास की स्याही से हम अपनी जीत की कहानी लिख सकते हैं....

जो इंसान हर रोज़ बीते कल को सोचकर बैठा रहता है वो आज भी खो देता है।
और जो आज को संभाल लेता है
वही आने वाले कल को जीत लेता है।

याद रखो कल ने हमें सिखाया है
लेकिन आज हमें बदलने का मौका देता है....इसलिए जो बीत गया बीत गया उसमे कितनी परेशानिया, मुसीबते हुवी हो उनको छोड़ो उनको जायदा याद करने से बस आप उदास होंगे

दुखी होंगे ओर आपके उदास sad से किसी कों फ़रक ना....
इसलिए उसको छोड़ अपना आज मै रहो...

“बीता हुआ कल सबक है
और आने वाला कल मौका
जो आज मेहनत कर लेता है
वही कल इतिहास बनाता है...”

ज़िंदगी पीछे मुड़कर रोने के लिए नहीं
आगे बढ़कर चमकने के लिए मिली है।
जो बीत गया उसे जाने दो…

और जो आने वाला है
उसे जीतने की पूरी तैयारी आज से शुरू कर दो.....

कहते है ना आपका कल कैसा गया हो,
आज ओर आने वाला कल धांसु होना चाहिए..... ❤️

सुप्रभात सभी कों
राधे राधे.....🦚🦚

27/02/2026

🌹🌹 जय‌ श्री कृष्ण जी 🌹🌹
*इन्सान उन चीजों से, कम बीमार होता है, जो वो खाता है ..*
*ज्यादा बीमार वह उन चीजों से होता है, जो उसे अन्दर ही अन्दर खाती रहती हैं ..*

*""कम सोचें पर सही सोचें""*

*बेवजह खुश रहिए ..*
*वजह बहुत मंहगी है ..!!*

🌹जय‌ श्री कृष्ण जी 🌹
*चिंता इतनी कीजिये कि
काम हो जाये...*
*इतनी नहीं कि जिंदगी
का काम तमाम हो जाये...*
💐🙏
*दुनिया में सब परेशान हैं...*

*कुछ सच में...*
*कुछ सच से...*
💐🙏
*अजीब कश्मकश है जिंदगी की ..*
*कुछ बातें कहकर लगता है, चुप रह जाते तो अच्छा था.*
*कुछ बातें सह कर लगता है, कुछ कह लेते तो अच्छा था।।*
*🌹🌹 जय‌ श्री कृष्ण जी 🌹🌹
[🙏🏼 आज का सुविचार 🙏🏼
कभी फुर्सत मिले,तो खुद से एक
सवाल जरूर पूछना, कि......
जिंदगी जी रहे हो
या काट रहे. हो.........
🙏🏼🙏🏼 सुप्रभात🙏🏼🙏🏼

*शान्त रहना कमजोरी नही**समझदारी की निशानी है*           *क्योंकि..**हर जबाब शब्दों से नहीं**व्यवहार से दिया जाता है*    ...
20/02/2026

*शान्त रहना कमजोरी नही*
*समझदारी की निशानी है*
*क्योंकि..*
*हर जबाब शब्दों से नहीं*
*व्यवहार से दिया जाता है*
*राज - सखी*

20/02/2026

*🌲🚩सुविचार🌲*
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

*(१) दौलत एक झटके में…खूबसूरती एक बीमारी में….और इज्ज़त एक गलती में समाप्त हो जाती है….इसलिए इन तीन चीजों पर कभी घमंड न करना!*

*(२) रिश्ते निभाने का ज्ञान हमें न दें ….क्योंकि हम तो उनसे भी हंसकर बात करते हैं जो मन में हमारे प्रति विष भरकर बैठे हैं!*

*(३) ज़िंदगी के तीन उसूल बना लो…उससे जरूर माफ़ी मांगो जिसे तुम चाहते हो…उसे कभी मत छोड़ो जो तुम्हें चाहता हो…उससे कभी कुछ न छुपाओ जो तुम पर भरोसा करता हो!*

*(४) पेट फ़कीर का भी खाली नहीं रहता और ख्वाहिशें बादशाह की भी पूरी नहीं होती!*

*(५) ज़िंदगी एक किताब की तरह है…कुछ पन्ने फाड़ने का मन करता है…कुछ दोबारा पढ़ने का!*

*🌹जय‌ श्री कृष्ण जी 🌹*

17/02/2026

*भरोसा और आशीर्वाद*
*कभी दिखाई नही देते ....*
*लेकिन*
*असम्भव को सम्भव*
*बना देते है.....!!*
माली प्रतिदिन पौधों को पानी देता है* *मगर फल सिर्फ*
*मौसम में ही आते हैं*
इसीलिए जीवन में धैर्य रखें*
*प्रत्येक चीज अपने समय पर होगी*
*प्रतिदिन बेहतर काम करे*
*आपको उसका फल*
*समय पर जरूर मिलेगा..*
🌹 जय श्री कृष्ण जी🌹
*Good Morning*
══════🦋🦋═══════
🅜🅑

16/02/2026

*🌲🇮🇳आज के सुविचार🌲*

*(१) सादगी परम सौंदर्य है, क्षमा उत्कृष्ट बल है, विनम्रता सबसे अच्छा तर्क है और अपनापन सर्वश्रेष्ठ रिश्ता है!*

*(२) आपकी उपस्थिति से कोई व्यक्ति स्वयं के दुःख भूल जाए, यही आपकी उपस्थिति की सार्थकता है!*

*(३) रिश्ता बनाने से पहले पूरी आँखें खुली रखिए और बन जानें के बाद आधी आँखें बंद कर लीजिए!*

*(४) विचारों का स्तर हमारी संगत पर निर्भर करता है, हमारी संगति जितनी अच्छी होगी, हम उतने ही अच्छे विचारों के धनी होंगे!*

*(५) अपने स्वभाव को हमेशा सूरज की तरह रखें, न उगने का अभिमान और न ही डूबने का डर।!*

*🙏🌹शुभ प्रभात🌹🙏*

15/02/2026

🪹🪹🪹🪹🪹
*महाभारत का सार सिर्फ़ नौ लाइनों में समझें, जिसमें पाँच लाख श्लोक हैं....*

आप किसी भी धर्म के हों,
चाहे आप औरत हों या मर्द,
चाहे आप गरीब हों या अमीर,
चाहे आप अपने देश में हों या विदेश में,
संक्षेप में...
*अगर आप इंसान हैं, तो महाभारत के ये 9 अनमोल मोती ज़रूर पढ़ें और समझें....*

1. `अगर आप समय रहते अपने बच्चों की बेवजह की मांगों और इच्छाओं पर कंट्रोल नहीं करेंगे, तो आप ज़िंदगी में लाचार हो जाएँगे...` *'कौरव'*

2. `आप कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अगर आप अधर्म का साथ देंगे, तो आपकी ताकत, हथियार, हुनर और आशीर्वाद सब बेकार हो जाएँगे...` *'कर्ण'*

3. `अपने बच्चों को इतना बड़ा न बनाएँ कि वे अपने ज्ञान का गलत इस्तेमाल करके पूरी तबाही मचा दें...`
*'अश्वत्थामा'*

4. `कभी ऐसे वादे न करें कि आपको अधर्मियों के आगे झुकना पड़े...` *'भीष्म पितामह'*

5. `अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल *धन, शक्ति, अधिकार और गलत लोगों का साथ आखिर में पूरी बर्बादी की ओर ले जाता है...`
*'दुर्योधन'*

6. `कभी भी सत्ता की बागडोर किसी अंधे व्यक्ति को मत दो, यानी जो स्वार्थ, धन, घमंड, ज्ञान, मोह या वासना में अंधा हो, क्योंकि वह बर्बादी की ओर ले जाएगा...`
*'धृतराष्ट्र'*

7. `अगर ज्ञान के साथ समझदारी है, तो आप ज़रूर जीतेंगे...` *'अर्जुन'*

8. `धोखा आपको हर मामले में सफलता नहीं दिलाएगा...`
*'शकुनि'*

9. `अगर आप नैतिकता, नेकी और कर्तव्य को सफलतापूर्वक बनाए रखते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकती।`
*'युधिष्ठिर'*

यह आर्टिकल सभी के लिए फायदेमंद है, इसलिए कृपया इसे बिना किसी बदलाव के शेयर करें।
*सर्वे भवन्तु सुखिनः*
*सर्वे सन्तु निरामयाः*

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*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है।
जय श्रीकृष्ण *

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