Bharat Swabhiman Trust, Assam East

Bharat Swabhiman Trust, Assam East Yog, Ayurved, Bharatiya Shiksha, Nasamukti or bharatiya sanskriti ke prati bhi jagruk hona.
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02/09/2026

दाल क्यों आपके लिए वरदान है 🙏

उच्च रक्तचाप में क्या खाएं और न खाए 🙏🙏🙏
02/09/2026

उच्च रक्तचाप में क्या खाएं और न खाए 🙏🙏🙏

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए आहार पर ध्यान दें।

कम नमक, संतुलित आहार, ताजे फल-सब्जियाँ, नियमित योग और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएँ। अचार, पापड़, नमकीन, पैकेट फूड और अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
यदि डॉक्टर ने दवा दी है, तो उसे बिना चिकित्सकीय सलाह बंद न करें।

🌿 स्वस्थ भोजन • नियमित योग • नियंत्रित रक्तचाप • स्वस्थ जीवन

#उच्चरक्तचाप #रक्तचाप ंट्रोल #स्वस्थहृदय #हृदयस्वास्थ्य #संतुलितआहार #कमलवण #योग #प्राणायाम #स्वस्थजीवन #स्वामीरामदेव #पतंजलि #आयुर्वेद #स्वस्थभारत

🌾 अपने शरीर के अनुसार अपनी रोटी चुनिए,स्वस्थ रोटी, स्वस्थ जीवन। 🌿सही रोटी = बेहतर सेहत की कुंजी1. वजन बढ़ाना हो → गेहूं ...
01/09/2026

🌾 अपने शरीर के अनुसार अपनी रोटी चुनिए,स्वस्थ रोटी, स्वस्थ जीवन। 🌿

सही रोटी = बेहतर सेहत की कुंजी

1. वजन बढ़ाना हो → गेहूं की रोटी
ऊर्जा और पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत। संतुलित आहार में वजन बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

2. वजन कम करना हो → जौ की रोटी
फाइबर से भरपूर और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में सहायक।

3. मधुमेह में → चने की रोटी
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले आटे का विकल्प, रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है।

4. कब्ज की समस्या में → बाजरे की रोटी
फाइबर से भरपूर, पाचन को बेहतर रखने और कब्ज में राहत देने में सहायक।

5. हड्डियों की मजबूती के लिए → रागी की रोटी
कैल्शियम से भरपूर, हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में सहायक।

6. दिल की सेहत के लिए → ज्वार की रोटी
फाइबर से भरपूर, संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी।

7. अधिक प्रोटीन के लिए → सोयाबीन मिश्रित आटे की रोटी
प्रोटीन से भरपूर, मांसपेशियों के निर्माण और रिकवरी में सहायक।

8. बेहतर पाचन के लिए → मल्टीग्रेन रोटी
विभिन्न अनाजों का मिश्रण, जिससे आहार में विविधता और पोषण बढ़ता है।

🥗 साथ में क्या भोजन लें?

ताज़ी सब्जियां, सलाद, दालें, घी की उचित मात्रा, मौसमी फल, छाछ और उपयुक्त आयुर्वेदिक आहार।

❌ कम करें

तला-भुना भोजन, पैकेज्ड फूड, अत्यधिक मीठा, अधिक नमक और बहुत अधिक मैदा से बनी चीज़ें।

🌿 आयुर्वेदिक दृष्टि

अपने वात, पित्त, कफ और अग्नि की प्रकृति के अनुसार भोजन का चयन करना अधिक उचित माना जाता है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति में आयुर्वेदाचार्य से परामर्श लें।

📚 आयुर्वेदिक संदर्भ: चरक संहिता, सूत्रस्थान 27/240; अष्टांग हृदयम्, सूत्रस्थान 15/24।

#असमपूर्व , #पतंजलि_सोशल_मीडिया

बालों के लिए वरदान है भृंगराज 🙏🙏🙏
01/09/2026

बालों के लिए वरदान है भृंगराज 🙏🙏🙏

⚠️ भृंगराज—बालों की देखभाल का पारंपरिक ‘केशराज’!
✍🏻 भृंगराज तेल स्कैल्प की मालिश और बालों की कंडीशनिंग में उपयोगी हो सकता है, लेकिन बाल झड़ना रोकने या सफेद बालों को काला करने का पक्का इलाज नहीं।
👉🏻 सही जानकारी के साथ अपनाएं।
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#भृंगराज #केशराज #बालोंकीदेखभाल

आहार की औषधि है 🙏🙏🙏
01/09/2026

आहार की औषधि है 🙏🙏🙏

#योग जीवन मे स्वस्थ शरीर की गारंटी है हम सभी को प्रतिदिन निरंतर योग करना चाहिए।

Sudhanshu Kumar स्वस्थ विश्व कर्म चन्द योगी हिमाचली Kuldeep Yogi Rajesh Kumar Bharat Swabhiman Trust Bihar South Ranjita Ssha Anand Singh

तेज सिर दर्द से छुटकारा पाने का उपाय:: #पतंजलि  #पतंजलि_सोशल_मीडिया  ूर्व  #असमपूर्व  #योग  #आयुर्वेद  #प्राकृतिक_चिकित्...
01/09/2026

तेज सिर दर्द से छुटकारा पाने का उपाय::

#पतंजलि #पतंजलि_सोशल_मीडिया ूर्व #असमपूर्व #योग #आयुर्वेद #प्राकृतिक_चिकित्सा
#स्वास्थ्य #स्वस्थ_जीवन #सिरदर्द #आधाशीशी #लौंग #घरेलू_उपाय #आयुर्वेदिक_उपाय

गंगाजल क्यों शुद्ध है 🙏🙏🙏
31/08/2026

गंगाजल क्यों शुद्ध है 🙏🙏🙏

# गंगाजल कभी खराब क्यों नहीं होता?

# # # आस्था के साथ विज्ञान को समझने की एक रोचक कहानी

बचपन में हममें से कई लोगों ने देखा होगा कि दादी-नानी गंगाजल को वर्षों तक संभालकर रखती थीं। सामान्य पानी कुछ दिनों में बदबू देने लगता है, उसमें सूक्ष्मजीवों की वृद्धि हो सकती है और कभी-कभी काई भी जम जाती है। लेकिन लंबे समय तक रखा हुआ गंगाजल अक्सर अपेक्षाकृत साफ दिखाई देता है।

तब मन में सवाल उठता है—**आखिर गंगाजल में ऐसा क्या विशेष है?**

इसका जवाब केवल आस्था में ही नहीं, बल्कि विज्ञान में भी खोजा गया है।

# # गंगा की शुरुआत कहाँ से होती है?

हिमालय के गोमुख-गंगोत्री क्षेत्र से निकलने वाली धारा को **भागीरथी** कहा जाता है। आगे **देवप्रयाग** में भागीरथी और अलकनंदा का संगम होता है। इसी संगम के बाद नदी को **गंगा** कहा जाता है।

हिमालय से मैदानों की ओर आते हुए गंगा अनेक प्रकार की चट्टानों, खनिजों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के संपर्क में आती है। इसके जल में विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव और जैविक घटक भी पाए जाते हैं।

# # गंगा के पानी में क्या है खास?

गंगा के पानी को लेकर वैज्ञानिकों की रुचि का एक महत्वपूर्ण कारण इसमें पाए जाने वाले **बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages)** हैं।

बैक्टीरियोफेज वास्तव में बैक्टीरिया नहीं, बल्कि ऐसे सूक्ष्म वायरस होते हैं जो विशेष प्रकार के बैक्टीरिया को संक्रमित करके उन्हें नष्ट कर सकते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों में गंगा के पानी में ऐसे bacteriophages पाए गए हैं जो कुछ हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। यही गंगा के पानी की कुछ प्राकृतिक antimicrobial और self-purification विशेषताओं को समझने में मदद करता है।

# # यह बात 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है

सन् **1896 में ब्रिटिश वैज्ञानिक Ernest Hankin** ने Ganga और Yamuna के पानी का अध्ययन किया था। उन्होंने पाया कि गंगा के पानी में *Vibrio cholerae* यानी हैजा पैदा करने वाले बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने वाली क्षमता थी।

बाद में bacteriophages की खोज और उन पर हुए शोधों ने यह समझने में मदद की कि कुछ प्राकृतिक जल स्रोतों में मौजूद phages बैक्टीरिया की संख्या को नियंत्रित करने में भूमिका निभा सकते हैं।

इस ऐतिहासिक observation ने गंगा के पानी की प्राकृतिक antibacterial properties को लेकर वैज्ञानिक रुचि को बढ़ाया।

# # लेकिन क्या गंगाजल कभी खराब नहीं होता?

यह कहना कि **“गंगाजल कभी खराब नहीं होता” वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही नहीं है।**

गंगा के पानी में कुछ प्राकृतिक self-purification mechanisms जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गंगा का पानी हर स्थान पर और हर परिस्थिति में पीने योग्य है।

गंगा जैसे विशाल नदी तंत्र में पानी की गुणवत्ता स्थान, मौसम, प्रदूषण, सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है।

यानी **गंगा के पानी में प्राकृतिक रूप से स्वयं को शुद्ध करने की कुछ विशेष क्षमताएँ हैं, लेकिन ये असीमित नहीं हैं।**

# # फिर गंगाजल लंबे समय तक सुरक्षित क्यों रह सकता है?

इसके पीछे कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं की भूमिका हो सकती है—जैसे:

* बैक्टीरियोफेज द्वारा कुछ बैक्टीरिया का नियंत्रण
* सूर्य के प्रकाश का प्रभाव
* पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता
* प्राकृतिक microbial competition
* sedimentation और dilution
* पानी की रासायनिक एवं जैविक संरचना

इन सभी प्रक्रियाओं को मिलाकर गंगा में एक प्राकृतिक **self-purification system** काम करता है।

इसीलिए गंगा के जल की विशेषताओं को केवल किसी एक पदार्थ या एक ही कारण से समझना सही नहीं होगा।

# # आस्था और विज्ञान—दोनों का अपना स्थान

भारतीय संस्कृति में गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि **माँ गंगा** के रूप में श्रद्धा का केंद्र हैं। करोड़ों लोगों के लिए गंगा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

विज्ञान हमें यह समझने में मदद करता है कि गंगा के पानी में मौजूद कुछ प्राकृतिक जैविक और रासायनिक प्रक्रियाएँ इसके विशेष गुणों में किस प्रकार योगदान दे सकती हैं।

लेकिन विज्ञान के नाम पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि गंगा में स्नान करने मात्र से हर बीमारी ठीक हो जाती है या गंगाजल हर परिस्थिति में पीने योग्य है।

**गंगा की वास्तविक महत्ता शायद इसी में है कि यहाँ आस्था और प्रकृति दोनों एक साथ दिखाई देते हैं।**

गंगा को पवित्र मानना हमारी आस्था है, और गंगा की प्राकृतिक विशेषताओं को समझना विज्ञान का विषय।

इसलिए गंगा के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल उसमें स्नान करने में नहीं, बल्कि **उसे स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त रखने में भी है।**

# # # गंगा केवल हमारी आस्था नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी है।

**“माँ गंगा को पूजें भी और बचाएँ भी।”**

31/08/2026

कैंसर से कैसे बचे 🙏🙏🙏

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781125

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