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ये मस्से नहीं  #पेपीलोमा वायरस है, यानी शरीर के अंदर घातक बीमारी के संकेत,एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस एक बेहद खतरन...
19/09/2021

ये मस्से नहीं #पेपीलोमा वायरस है, यानी शरीर के अंदर घातक बीमारी के संकेत,
एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस एक बेहद खतरनाक, आम और सबसे तेजी से फैलने वाला वायरस है.

इतना ही नहीं अधिकतर मामलों में इस वायरस से होने वाली बीमारी के लक्षण भी मालूम नहीं चलते. जिसके कारण न तो प्रभावित व्यक्ति को बीमारी का पता चलता है और न ये पता चलता है कि उनसे ये बीमारी उनके पार्टनर को भी हो रही है.

एचपीवी वायरस कैसे फैलता है और इससे कैसे बचा जा सकता है. ये जानना बेहद जरूरी है.

यह वायरस यौनांग और गुदा की त्वचा के एक-दूसरे से संपर्क में आने से फैलता है. मतलब ये जरूरी नहीं कि सेक्सुअल पेनेट्रेशन होगा तभी दो व्यक्ति के बीच ये वायरस फैलेगा.

यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सेक्स गतिविधियों और ओरल सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल किया जाए तो इस संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सकता है.

एचपीवी वायरस के बारे में वो पांच बातें, जो जानना जरूरी है.

#पहली बात ये कि यौन रूप से सक्रिय 80 फीसदी महिला और पुरुष जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित होते हैं.

यूके पब्लिक हेल्थ सर्विस, एनएचएस और अमेरिक एसोशिएशन ऑफ सेक्सुअल हेल्थ इसकी पुष्टि करते हैं.

अमरीका में यह यौन रूप से फैलने वाली सबसे आम बीमारी है. जामा ऑनकोलोजी पत्रिका में छपे राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक़ सेक्स में शामिल 2000 में से आधे पुरुषों को यह संक्रमण था.

#दूसरी जरूरी बात कि एचपीवी से 6 तरह के कैंसर हो सकते हैं.

एचपीवी गर्भाशय कैंसर के लिए 99 प्रतिशत (एनएचएस की जानकारी के मुताबिक़),

गुदा कैंसर के लिए 84 प्रतिशत, लिंग कैंसर के लिए 47 प्रतिशत जिम्मेदार होता है.

इसके अलावा इसके संक्रमण से योनिमुख, योनि, गले और मुंह का कैंसर भी होता है.
एचपीवी वायरस की सौ से अधिक किस्में पाई गई हैं. इनमें से 30 किस्में प्रजनन अंगों को प्रभावित करती हैं.

एचपीवी-16 और एचपीवी-18 वायरस सबसे खतरनाक होते हैं. ये गर्भाशय कैंसर के लिए 70 प्रतिशत से अधिक जिम्मेदार होता है.

अधिकांश लोग कभी ना कभी एचपीवी से संक्रमित होते हैं, लेकिन उनका प्रतिरक्षा तंत्र इस वायरस से उनकी रक्षा करता है.

#तीसरी, आमतौर पर एचपीवी संक्रमण का कोई लक्षण नहीं होता. इसलिए इसका पता लगाना आसान नहीं है.
महिलाओं में उनके गर्भाशय की कोशिकाओं के नमूने की जांच करके उनमें एचपीवी के संक्रमण का पता लगाने लगाया जा सकता है. इसके लिए दो तरह के जांच की मदद ली जाती है. एक वजाइनल साइटोलॉजी यानी कोशीय जांच और दूसरी पेप टेस्ट या पेपनिकोलाई जांच.

लेकिन पुरुषों में अभी भी इस वायरस के संक्रमण का पता लगाने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं मिला है.

एनएचएस के मुताबिक, "फिलहाल एचपीवी का पता लगाने को कोई ऐसा तरीका नहीं है जिस पर भरोसा किया जा सके. इस वायरस का कोई लक्षण नहीं मिलने के कारण इसके इलाज में बहुत दिक्कतें आ रही हैं".

यदि किसी व्यक्ति में गुदा एचपीवी संक्रमण होने का गंभीर खतरा है तो इसका पता लगाने के लिए एनल साइटोलोजी यानी गुदा कोशीय जांच की जा सकती है.

#चौथी जरूरी बात ये है कि वैसे तो एचपीवी संक्रमण का कोई इलाज नहीं है. हां, इसके असर को ठीक किया जा सकता है, यदि इसका पता लगा लिया जाए.

अधिकांश एचपीवी संक्रमण कोई गंभीर नुकसान नहीं करते और ये 'दो साल के भीतर' खुद-ब-खुद खत्म हो जाते हैं.

यदि यौनांग में गांठें हो गई हैं तो उन्हें क्रीम, मलहम या रसायन से ठीक किया जा सकता है. इन गांठों को फ्रीजिंग या बर्निंग से भी हटाया जा सकता है.

महिलाओं में यदि एचपीवी संक्रमण लगातार जारी रहे तो इससे गर्भाशय की कोशिकाओं में बदलाव का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है. इससे उनमें गर्भाशय का कैंसर होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. इसे गर्भाशय कैंसर भी कहते हैं.

तो गर्भाशय में यदि असामान्य कोशिकाएं पनप रही हैं तो समय रहते उनका पता लगाकर इलाज किया जा सकता है. जानकार का सुझाव है कि महिलाओं को नियमित रूप से पेप टेस्ट करवाते रहना चाहिए.

एनएचएस के मुताबिक़ गर्भाशय कैंसर के 99 प्रतिशत मामले एचपीवी के कारण पैदा लेते हैं.

एचपीवी से जुड़े दूसरे कैंसर आमतौर पर अपने शुरुआती चरण में किसी तरह का लक्षण नहीं दिखाते. जैसे कि मुंह, गला और पुरुष जननांग कैंसर.

#पांचवीं और आखिरी अहम बात ये है कि युवाओं के लिए एचपीवी वायरस से बचने का टीका उपलब्ध है.
ऐसे कई टीके बाजार में मौजूद हैं. इनमें से कई बेहद गंभीर एचपीवी-16 और एचपीवी-18 वायरस से बचाते हैं.

एक दूसरा सबसे नया टीका एचपीवी से जुड़े कैंसर से 90 प्रतिशत तक बचाता है.

कई देशों में सरकार समय समय पर ये टीके किशोरियों को देती है.

(बीबीसी हिंदी रिपोर्ट- 09फरवरी2017)

08/09/2021
हर्पीस सिंप्लेक्स (Herpes simplex) एक वायरस है, जिसकी वजह से त्वचा में छोटे-छोटे दर्दनाक फफोले हो जाते हैं। हर्पीस इंफेक...
19/07/2021

हर्पीस सिंप्लेक्स (Herpes simplex) एक वायरस है, जिसकी वजह से त्वचा में छोटे-छोटे दर्दनाक फफोले हो जाते हैं। हर्पीस इंफेक्शन (Herpes Infection), लोगों में हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस (Herpes simplex Various) के कारण होता है। इसे जेनेटल हर्पीस (Ge***al Herpes) भी कहा जाता है। इसके होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि दाद के शिकार लोगों का कपड़ा या तौलिए इस्तेमाल करना। इसके अलावा सेक्स के दौरान इसके होने का खतरा ज्यादा होता है। हर्पीस संक्रमण, किसी को भी अपना शिकार बना सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार होने पर कभी भी दोबारा हो सकती है। आज हम आपको इस आर्टिकल में हर्पीस के लिए होम रेमेडीज (Home remedies for herpes) के बारे में बता रहे हैं। वैसे, दाद के उपचार के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। मेडिकेशन के अलावा कुछ घरेलू उपायों को भी अपनाया जा सकता है। आइए जानें हर्पीस के लिए होम रेमेडीज (Home remedies for herpes) के बारे में। जिससे इसके लक्षणों, सूजन और जलन आदि को कम किया जा सकता है।

यह  #पेपीलोमा_वायरस है, इसकी वैक्सीन भारत मे उलब्ध है, यदि आप को इस तरह के लक्षण हैं तो सतर्क हो जाइए, ये घातक बीमारी है...
19/07/2021

यह #पेपीलोमा_वायरस है, इसकी वैक्सीन भारत मे उलब्ध है, यदि आप को इस तरह के लक्षण हैं तो सतर्क हो जाइए, ये घातक बीमारी है जो धीमे दिन शरीर मे फैलती है लेकिन लोग इन्हें #मस्से समझकर इगनोर कर देते हैं,
कुछ डॉक्टर भी इसके बारे में अनजान हैं।
इसलिए अगर आप पीड़ित हैं तो #पेपीलोमा वायरस के बारे में गूगल से पढ़ें और जांच करा कर तत्काल उपचार कराएं।
पोस्ट को शेयर करें ताकि देश दुनिया के लोग इसके बारे में सतर्क हो जाएं।

धन्यवाद
Team Neukindus Pharma Pvt Ltd

अधिक से अधिक शेयर करें ताकि जानकारी करोड़ों लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा सके।Please Share this post to other for Human Wel...
31/05/2021

अधिक से अधिक शेयर करें ताकि जानकारी करोड़ों लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा सके।
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31/05/2021

बच्चों में MIS-C यानी Multisystem inflammatory syndrome तेजी से फैल रहा है और यह कहा जा रहा है जिन बच्चों को कोरोना हुआ था या जो बच्चे कोरोना patients के संपर्क में आए थे उनमे ये बीमारी हो रही है, ये काफी गंभीर बीमारी बताई जा रही है, जिसमे multiorgan failure हो सकता है, 4 से 18 साल के बच्चों मे ये बीमारी होती है कुछ cases में 6 महीने के बच्चों में बी इस बीमारी के लक्षण देखे गए है, दिल्ली-NCR में अबतक 200 से ज्यादा केस आज चुके है, खैर US में बी पिछले साल इस बीमारी के कुछ केस सामने आए थे

इसके लक्षण है: गर्दन में दर्द, शरीर पर दाने होना, आंखो का सुर्ख होना, लगातार थकावट बने रहना, पेट में दर्द, उल्टी, हल्का बुखार, conjunctivitis

07/04/2021

कोरोना वायरस के बारे में आप कितना जानते हैं और क्या जानना है जरूरी!

नोवेल कोरोना वायरस के बारे में कई तरह की बातें सोशल मीडिया, वाट्सऐप और इंटरनेट के माध्यम से फैल रही हैं। इनमें से कुछ सही हैं, तो बहुत-सी बातें बिल्कुल निराधार हैं। ऐसे समय में जब कोरोना वायरस महामारी बनकर दुनियाभर में हजारों लोगों की जान ले चुका है, तो इससे जुड़े कुछ अनिवार्य पहलुओं के बारे में जानना जरूरी है। विभिन्न शोध निष्कर्षों पर आधारित विज्ञान प्रसार में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ टीवी वेंकटेश्वरन का यह आलेख.

📌 संक्रमण:

वायरस गले और फेफड़ों में उपकला (epithelial) कोशिकाओं को संक्रमित करता है। SARS-CoV-2 मानव कोशिकाओं के संपर्क में आने पर ACE2 रिसेप्टर्स से बंध जाता है, जो अक्सर गले और फेफड़ों में पाए जाते हैं। हालाँकि, त्वचा पर चिपकने के बावजूद वायरस नुकसान नहीं पहुँचाता क्योंकि बाहरी त्वचा पर उसका संपर्क ACE2 से नहीं होता है। यह वायरस नाक, आँखों और मुँह से होकर शरीर में प्रवेश करता है। हमारे हाथ इसका मुख्य साधन हो सकते हैं, जो हमारे मुँह, नाक और आँखों तक वायरस को पहुँचा सकते हैं। जितनी बार संभव हो 20 सेकंड तक साबुन के पानी से हाथ धोना संक्रमण को रोकने में मदद करता है।

📌 संक्रामक खुराक:

मैकाक बंदर को संक्रमित करने के लिए सात लाख पीएफयू खुराक की आवश्यकता पड़ती है। पीएफयू (प्लाक बनाने की इकाई) नमूना संक्रामकता के मापन की एक इकाई है। हालाँकि, बंदर में कोई नैदानिक लक्षण नहीं देखे गए हैं, नाक और लार के द्रव कणों में वायरल लोड था। मनुष्य को इस वायरस से संक्रमित होने के लिए सात लाख पीएफयू से अधिक खुराक की आवश्यकता होगी। ACE2 रिसेप्टर्स वाले आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहों पर एक अध्ययन से पता चला है कि वह केवल 240 पीएफयू खुराक से SARS से संक्रमित हो सकता है। इसकी तुलना में, चूहों को नये कोरोना वायरस से संक्रमित होने के लिए 70,000 पीएफयू की आवश्यकता होगी।

📌 संक्रामक अवधि:

यह अभी पूरी तरह ज्ञात नहीं है कि कोई व्यक्ति कितनी अवधि तक दूसरों को संक्रमण पहुँचा सकता है, लेकिन अब तक यह माना जा रहा है कि यह अवधि 14 दिन की हो सकती है। संक्रामक अवधि को कृत्रिम रूप से कम करना समग्र संचरण को कम करने का एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति को अस्पताल में एकांत कमरे में भर्ती करना, दूसरे लोगों से अलगाव और लॉकडाउन संक्रमण रोकने के प्रभावी तरीके हो सकते हैं।

📌 कौन कर सकता है संक्रमित:

वायरस से संक्रमित कोई भी व्यक्ति लक्षण प्रकट होने से पहले ही दूसरों को संक्रमित कर सकता है। खाँसी या छींक आने पर हमारे मुँह और नाक को ढंकने से संक्रमण को कम करने में मदद मिल सकती है। वायरस पूरी संक्रामक अवधि में संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक और मल में मौजूद रहता है।

📌 हम कैसे करते हैं संक्रमित:

संक्रमण प्रायः द्रव कणों के माध्यम से होता है। इसके लिए, छह फीट से कम नजदीकी संपर्क की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि यह सिफारिश की जाती है कि हम सार्वजनिक स्थानों जैसे- सब्जी बाजार या सुपरमार्केट में एक-दूसरे से 1.5 मीटर दूर रहें। हांगकांग में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि सामाजिक दूरी बनाए रखकर 44% तक संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। फोन, दरवाजे की कुंडी और दूसरी सतहें वायरस के संचरण का संभावित स्रोत हो सकती हैं, लेकिन इसके बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है। दरवाजे की कुंडी, लिफ्ट का बटन और सार्वजनिक स्थानों पर काउंटर को छूने के बाद हाथों को सैनेटाइज करना बचाव का सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

📌 हम कितने लोगों को संक्रमित करते हैं:

एक विशिष्ट संक्रामक व्यक्ति के कारण होने वाले नए संक्रमणों की औसत संख्या मानव संक्रामकता सीमा 2.2 से 3.1 के बीच है। सरल शब्द में, एक संक्रमित व्यक्ति औसतन लगभग 2.2 से 3.1 व्यक्तियों को संक्रमित करता है। एक-दूसरे से दूरी बनाए रखकर हम वास्तविक संचरण क्षमता को कृत्रिम रूप से कम कर सकते हैं, इस प्रकार संक्रमण की दर को धीमा कर सकते हैं।

📌 वायरस कहां से आया:

यह चमगादड़ का सूप पीने से तो नहीं हुआ है। जब खाद्य उत्पादों को उबाला जाता है, तो वायरस नष्ट हो जाता है। प्रारंभ में, यह अनुमान लगाया गया था कि SARS-CoV-2 वायरस चमगादड़ से मनुष्यों में पहुँचा है। लेकिन, हाल ही में हुए जीनोम के अध्ययन से पता चलता है कि इनसानों में पहुँचने से पहले इसे किसी मध्यस्थ प्रजाति तक जाना चाहिए था। एक अन्य अध्ययन से संकेत मिलता है कि SARS-CoV-2 वायरस का एक वंश बीमारी फैलने से पहले मनुष्यों में मौजूद था।

📌 कैसे विकसित हुआ वायरस:

मनुष्यों में पहुँचने से पहले SARS-CoV-2 या तो किसी जंतु मेजबान में वायरल रूप के प्राकृतिक चयन या फिर जूनोटिक ट्रांसमिशन के बाद मनुष्यों में वायरल रूप के प्राकृतिक चयन से उभरा है। केवल अधिक अध्ययन से पता चलेगा कि दोनों में से कौन-सा तथ्य सही है। यह अभी भी स्पष्ट नहीं हैं कि SARS-CoV-2 में कौन से रूपांतरण हैं, जिन्होंने मानव संक्रमण और संचरण को बढ़ावा दिया है।

📌 SARS-CoV2 कब सामने आया:

दिसंबर 2019 से पहले SARS-CoV2 के कोई दस्तावेजी मामले सामने नहीं आए हैं। हालाँकि, प्रारंभिक जीनोमिक विश्लेषण बताता है कि SARS-CoV-2 के पहले मानव मामले मध्य अक्तूबर से मध्य दिसंबर 2019 के बीच सामने आए थे। इसका मतलब है कि प्राथमिक जूनोटिक घटना और मनुष्यों में इसके प्रकोप के फैलने के बीच की अवधि के बारे में जानकारी नहीं है।

📌 क्या यह जानवरों को संक्रमित कर सकता है:

आणविक मॉडलिंग से पता चलता है कि SARS-CoV-2 मानव के अलावा, चमगादड़, सिवेट, बंदर और सुअर की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि, यह घरेलू पशुओं को संक्रमित नहीं करता है। अंडे या अन्य पॉल्ट्री उत्पादों का सेवन करने से भी SARS-CoV-2 संक्रमण नहीं होता।

📌 क्या कोई दो बार संक्रमित हो सकता है:

एक बार खसरा होने के बाद अधिकतर लोगों में जीवन भर के लिए इस बीमारी के प्रति प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है। इसके बाद शायद ही उन्हें फिर से खसरा होता है। प्रायोगिक रूप से संक्रमित मैकाक बंदर में दोबारा इससे संक्रमित होने के मामले नहीं देखे गए हैं। इसी तरह, मनुष्यों में भी SARS-CoV-2 से उबरने के बाद दोबारा इससे संक्रमित होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालाँकि, यह प्रतिरक्षा कब तक बनी रह सकती है, यह कहना मुश्किल है।

📌 कितनी गंभीर है बीमारी:

COVID-19 मौत की सजा नहीं है। इसके अधिकांश मामले हल्के (81%) हैं, लगभग 15% मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है और 5% को महत्वपूर्ण देखभाल की आवश्यकता होती है। अधिकतर संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

📌 कौन हैं सबसे अधिक संवेदनशील:

हेल्थकेयर कार्यकर्ता इस वायरस के खतरे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। लोम्बार्डी, इटली में लगभग 20% स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करते हुए संक्रमित हो रहे हैं। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धों, हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और साँस संबंधी रोगों से ग्रस्त लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।

📌 मौत का कारण क्या है:

अधिकांश मौतें श्वसन तंत्र फेल होने या फिर श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानी एवं हृदय संबंधी समस्याओं के संयुक्त प्रभाव के कारण होती हैं। फेफड़ों में द्रव का रिसाव, जो श्वसन को रोकता है और रुग्णता को बढ़ावा देता है। वर्तमान में, COVID-19 के लिए उपचार मुख्य रूप से सहायक देखभाल है, यदि आवश्यक हो तो वेंटिलेशन उपयोग किया जा सकता है। फिलहाल, कई चिकित्सीय परीक्षण जारी हैं, और परिणामों की प्रतीक्षा की जा रही है।

📌 क्या वायरस दूध के पाउच या समाचार पत्रों द्वारा प्रेषित होते हैं:

SARS-CoV-2 प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील सतहों पर 3 दिनों तक बना रह सकता है। जब वायरल लोड 10,000 पीएफयू था, तो यह केवल 5 मिनट के लिए अखबार और सूती कपड़े पर रह सकता था। हालाँकि, वायरस को हटाने के लिए दूध के पाउच को धोना पर्याप्त है।

📌 क्या यह हवा में फैल सकता है:

हवा में, वायरस केवल 2.7 घंटे तक जीवित रह सकता है। इसलिए, घर की बालकनी या छत जैसे खुले स्थानों में इससे होने वाले नुकसान का खतरा नहीं होता है।

📌 क्या कोई कम प्रभावकारी रूप है:

इस वायरस के विभिन्न उपभेदों की पहचान की जा रही है, लेकिन अब तक के अध्ययनों में किसी भी रूपांतरण का संकेत नहीं मिला है, जो संचरण या रोग की गंभीरता से जुड़ा हो।

📌 क्या गर्मी या बरसात से मिल सकती है राहत:

तापमान और आर्द्रता में वृद्धि के साथ संचरण में कमी को दर्शाने के कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है।



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