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नमस्कार 🙏💐ज्येष्ठ मास( मई-जून) ग्रीष्म ऋतुचर्यासम्भावित रोग - रूखापन, दौर्बल्य, लू लगना, खसरा, हैजा, चेचक, कै, दस्त, बुख...
12/05/2026

नमस्कार 🙏💐
ज्येष्ठ मास( मई-जून) ग्रीष्म ऋतुचर्या
सम्भावित रोग - रूखापन, दौर्बल्य, लू लगना, खसरा, हैजा, चेचक, कै, दस्त, बुखार, नकसीर, जलन, प्यास, पीलिया, यकृत विकार आदि होने की सम्भावना होती है।
- पथ्य आहार-विहार - सूर्योदय से पहले उठना तथा उषापान , सुबह टहलना, ठण्डी जगह पर रहना, धूप में निकलने से पहले पानी पीना, तथा सिर को ढककर जाना, बार-बार पानी पीते रहना एवं दो बार स्नान, दिन में सोना हितकर है।
- हल्के, मीठे, चिकनाई वाले पदार्थ, ठण्डे पदार्थ, चावल, जौ, मूंग, मसूर, दूध आदिl
- विशेष- दही की लस्सी, फलों का रस, सत्तू, छाछ नींबू पानी नारियल पानी, जलजीरा, आम पन्ना गोंद कतीरा आदि ।
- अपथ्य आहार-विहार- धूप, परिश्रम, व्यायाम, प्यास रोकना, रेशमी कपड़े, कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधन, प्रदूषित जल का सेवन अहितकर है।
- ‌‌गरम, तीखे, नमकीन, तले हुए पदार्थ, तेज मसाले, मैदा, बेसन से बने, पचने में भारी खाद्य पदार्थों एवं शराब का सेवन अहितकर है।
निवेदन -केवल स्थानीय व स्वदेशी , प्राकृतिक व स्वास्थ्यवर्धक पदार्थों व उत्पादों को प्राथमिकता दें। विदेशी उत्पादों जैसे कि कोल्ड ड्रिंक आइसक्रीम चॉकलेट कॉफी इत्यादि का बहिष्कार करें।

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जीवन में नए रंग- उमंग व हर्ष-उल्लास के उत्सव  होली पर नए अन्न को होलिका की अग्नि में अर्पित कर स्वस्थ, संपन्न उज्जवल भवि...
04/03/2026

जीवन में नए रंग- उमंग व हर्ष-उल्लास के उत्सव होली पर नए अन्न को होलिका की अग्नि में अर्पित कर स्वस्थ, संपन्न उज्जवल भविष्य की प्रार्थना व शुभकामनाएं🙏💐

शिशिर ऋतुचर्या - पौष माह (दिसंबर- जनवरी)  इस ऋतु में सर्दी, रुखापन,  ज्वर, खांसी, दमा आदि रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है।...
11/01/2026

शिशिर ऋतुचर्या - पौष माह (दिसंबर- जनवरी) इस ऋतु में सर्दी, रुखापन, ज्वर, खांसी, दमा आदि रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है।
पथ्य आहार-विहार
• प्रातः भ्रमण, धूप में बैठकर तेल मालिश, व्यायाम और ताजे या गर्म जल से मुल्तानी मिट्टी /ऊबटन से स्नान कर, गर्म उनी वस्त्र धारण करें ।
• मधुर, स्निगध, बलवर्धक भोजन का सेवन करना चाहिए।
•रक्तचाप के रोगी विशेषकर अर्जुन की छाल को चाय , दूध व काढ़े का सेवन लाभदायक है।
• विविध प्रकार के मेवे और गुड़- तिल, मूंगफली के लड्डू विशेष लाभदायक है।
ऋतु विशेष उत्पाद:- केसर शिलाजीत शहद और च्यवनप्राश
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🌿✨ **आंवला नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं!** ✨🌿   30/10/2025आज से **आंवला सेवन का शुभ काल** शुरू होता है। आयुर्वेद के अनुसार...
31/10/2025

🌿✨ **आंवला नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं!** ✨🌿 30/10/2025

आज से **आंवला सेवन का शुभ काल** शुरू होता है। आयुर्वेद के अनुसार, **कार्तिक मास की नवमी तिथि** से आंवला खाने की परंपरा प्रारंभ होती है। इसे “**आंवला नवमी**” कहा जाता है — जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का दिन माना गया है।

🍋 **आंवला (Indian Gooseberry)** — आयुर्वेद में इसे *‘धात्री फल’* कहा गया है, जिसका अर्थ है “पालन करने वाली माँ”। यह शरीर को पोषण, प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा प्रदान करता है।

💚 **इस मौसम में आंवला खाने के प्रमुख लाभ:**
1️⃣ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और सर्दी-जुकाम से बचाव करता है।
2️⃣ विटामिन C का प्राकृतिक स्रोत — त्वचा और बालों के लिए अमृत समान।
3️⃣ पाचन शक्ति को मजबूत करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।
4️⃣ रक्त को शुद्ध करता है और लीवर को स्वस्थ रखता है।
5️⃣ मन को शांत और आँखों की रोशनी को प्रखर बनाता है।

🌞 **कैसे करें सेवन:**
- प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक ताजा आंवला खाएं, या
- आंवला चूर्ण, मुरब्बा, या रस के रूप में लें।

🪔 आज से इस पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक फल को अपने आहार में शामिल करें —
“**आंवला नवमी से शुरू करें प्रकृति का अमृत, स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम।**” 🌿

Yogic agro organics
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#आंवला_नवमी #आंवला_सेवन #स्वास्थ्य #प्राकृतिक_ऊर्जा
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*पथ्य आहार-विहार*वर्षा-ऋतु की समाप्ति व शीत ऋतु संधिकाल में हल्के, सुपाच्य, ताजे, गर्म और पाचक अग्नि को बढ़ाने वाले खाद्...
21/08/2025

*पथ्य आहार-विहार*
वर्षा-ऋतु की समाप्ति व शीत ऋतु संधिकाल में हल्के, सुपाच्य, ताजे, गर्म और पाचक अग्नि को बढ़ाने वाले खाद्य-पदार्थों का सेवन हितकारक है। ऐसे पदार्थ लेने चाहिए, जो वात को शान्त करने वाले हों। इस दृष्टि से आहार तथा घी व तेल से बने नमकीन पदार्थ उपयोगी रहते हैं। भुट्टा खाने के बाद छाछ पीने से वह अच्छी तरह पच जाता है । दही की लस्सी में लौंग, त्रिकटु (सोंठ, पिप्पली और काली मिर्च), सेंधा नमक, अजवायन, काला नमक आदि डाल कर पीने से पाचन-शक्ति ठीक रहती है। लहसुन की चटनी व शहद को जल एवं अन्य पदार्थों (जो गर्म न हों), में मिला कर लेना उपयोगी है। इस मौसम में वात और कफ दोषों को शान्त करने के लिए कटु, अम्ल और क्षार पदार्थ लेने चाहिए। अम्ल, नमकीन और चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन करने से वात दोष का शमन करने में सहायता मिलती है।
*अपथ्य आहार-विहार*
वर्षा ऋतु की समाप्ति व शीत ऋतु संधिकाल में पत्ते वाली सब्जियाँ, ठण्डे व रूखे पदार्थ, चना, मोंठ, उड़द, जौ, मटर, मसूर, ज्वार, आलू, कटहल, सिंघाड़ा, करेला और पानी में सत्तू घोलकर लेना हानिकारक है। वर्षा ऋतु में जब वर्षा बहुत कम होती है, तो पित्त का प्रकोप होने लगता है। इस समय खट्टे, तले हुए, बेसन से बने पदार्थ, तेज-मिर्च मसाले वाले, बासी खाद्य-पदार्थों और पित्त बढ़ाने वाले खाद्यों का सेवन नहीं करना चाहिए। एक लोकोक्ति के अनुसार श्रावण मास में दूध, भाद्रपद में छाछ, क्वॉर मास में करेला और कार्तिक मास में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दिन में सोना, धूप में घूमना व सोना, अधिक मैथुन, अधिक पैदल चलना एवं अधिक शारीरिक व्यायाम भी हानिप्रद है।
केवल खाद्य सामग्री ही नहीं अपितु उपयोग में आने वाली प्रत्येक वस्तु स्वदेशी विकल्प को अपनाएं व राष्ट्र को समृद्ध बनाएं , संकल्प करें 🙏


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श्रावण माह - वर्षा-ऋतु की नमी से वात-दोष कुपित हो जाता है और पाचन-शक्ति अधिक दुर्बल हो जाती है। इस कारण से पेचिश, हैजा, ...
15/07/2025

श्रावण माह - वर्षा-ऋतु की नमी से वात-दोष कुपित हो जाता है और पाचन-शक्ति अधिक दुर्बल हो जाती है। इस कारण से पेचिश, हैजा, आत्रशोथ, अलसक, गठिया, जोडो में सूजन व संक्रमण से मलेरिया और फाइलेरिया बुखार, उच्च रक्तचाप, फुंसियाँ, दाद, खुजली आदि अनेक रोग आक्रमण कर सकते है।
पथ्य आहार-विहार : आसन प्राणायाम करना, शरीर पर उबटन मलना, मालिश और सिकाई करना लाभदायक है। वर्षा-ऋतु में हल्के, सुपाच्य, ताजे, गर्म और पाचक अग्नि को बढ़ाने वाले खाद्य-पदार्थों का सेवन हितकारक है। वर्षा ऋतु में पत्ते वाली सब्जियाँ, ठण्डे व रूखे पदार्थो को छोड़ अम्ल, नमकीन और चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन करने से वात दोष का शमन करने में सहायता मिलती है, । ऋतु में विशेषतः जल की शुद्धि के लिए तुलसी के कुछ पत्ते और फिटकरी घोलाने , उबालकर शुद्ध ही पायें । यदि ठण्डे जल, काढे , ग्रीन टी में शहद मिला लिया जाए तो और अच्छा है। रसायन रूप में हरड़ का चूर्ण सेंधा नमक मिला कर लेना चहिए। स्वास्थ्य संबंधी परामर्श व सुझाव के लिए संपर्क कर सकते हैं🙏🏻💐
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— in Gurgram, Haryana, Delhi NCR.

नमस्कार 🙏💐ज्येष्ठ मास( मई-जून) ग्रीष्म ऋतुचर्यासम्भावित रोग - रूखापन, दौर्बल्य, लू लगना, खसरा, हैजा, चेचक, कै, दस्त, बुख...
18/05/2025

नमस्कार 🙏💐
ज्येष्ठ मास( मई-जून) ग्रीष्म ऋतुचर्या
सम्भावित रोग - रूखापन, दौर्बल्य, लू लगना, खसरा, हैजा, चेचक, कै, दस्त, बुखार, नकसीर, जलन, प्यास, पीलिया, यकृत विकार आदि होने की सम्भावना होती है।
- पथ्य आहार-विहार - सूर्योदय से पहले उठना तथा उषापान , सुबह टहलना, ठण्डी जगह पर रहना, धूप में निकलने से पहले पानी पीना, तथा सिर को ढककर जाना, बार-बार पानी पीते रहना एवं दो बार स्नान, दिन में सोना हितकर है।
- हल्के, मीठे, चिकनाई वाले पदार्थ, ठण्डे पदार्थ, चावल, जौ, मूंग, मसूर, दूध, शर्बत, दही की लस्सी, फलों का रस, सत्तू, छाछ नींबू पानी नारियल पानी, जलजीरा, आम पन्ना आदि का सेवन हितकर है।
- अपथ्य आहार-विहार- धूप, परिश्रम, व्यायाम, प्यास रोकना, रेशमी कपड़े, कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधन, प्रदूषित जल का सेवन अहितकर है।
- ‌‌गरम, तीखे, नमकीन, तले हुए पदार्थ, तेज मसाले, मैदा, बेसन से बने, पचने में भारी खाद्य पदार्थों एवं शराब का सेवन अहितकर है।

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नमस्कार 💐 🙏वसंत ऋतुचर्या -फाल्गुन माह (फरवरी- मार्च)  इस ऋतु में सूर्य की किरणें प्रखर होने से संचित कफजन्य रोगों की प्र...
23/02/2025

नमस्कार 💐 🙏वसंत ऋतुचर्या -फाल्गुन माह (फरवरी- मार्च) इस ऋतु में सूर्य की किरणें प्रखर होने से संचित कफजन्य रोगों की प्रधानता, ज्वर, खांसी, दमा, इन्फेक्शन, भूख कम लगना, अरुचि आदि रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है।
पथ्य आहार-विहार
• प्रातः भ्रमण, सूर्य नमस्कार, आसन , प्राणायाम, व्यायाम , मालिश, जल नेति, नस्य, कुंजल आदि हितकर है।
•जठर अग्नि मंद होने के कारण हल्का, लघु, क्षारीय भोजन सेवन करना चाहिए।
• कटु तिक्त कषाय रस उदाहरणार्थ कटु रस में काली मिर्च, तिक्त में मेथी, करेला, नीम कषाय में फिटकरी , शहद के साथ हरड़ आदि का अधिक सेवन करें।
• कफवर्धक ठंडी तासीर के पदार्थों का सेवन न करें। For more *health updates follow* www.facebook.com/organikwala
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नमस्कार 💐 🙏वसंत ऋतुचर्या -फाल्गुन माह (फरवरी- मार्च)  इस ऋतु में सूर्य की किरणें प्रखर होने से संचित कफजन्य रोगों की प्र...
23/02/2025

नमस्कार 💐 🙏वसंत ऋतुचर्या -फाल्गुन माह (फरवरी- मार्च) इस ऋतु में सूर्य की किरणें प्रखर होने से संचित कफजन्य रोगों की प्रधानता, ज्वर, खांसी, दमा, इन्फेक्शन, भूख कम लगना, अरुचि आदि रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है।
पथ्य आहार-विहार
• प्रातः भ्रमण, सूर्य नमस्कार, आसन , प्राणायाम, व्यायाम , मालिश, जल नेति, नस्य, कुंजल आदि हितकर है।
•जठर अग्नि मंद होने के कारण हल्का, लघु, क्षारीय भोजन सेवन करना चाहि ए।
• कटु तिक्त कषाय रस उदाहरणार्थ कटु रस में काली मिर्च, तिक्त में मेथी, करेला, नीम कषाय में फिटकरी , शहद के साथ हरड़ आदि का अधिक सेवन करें।
• कफवर्धक ठंडी तासीर के पदार्थों का सेवन न करें।

नमस्कार 🙏बसंत पंचमी की शुभकामनाएं💐 इस ऋतु   में वातिक व वात कफज रोग सर्दी, रुखापन,  ज्वर, खांसी, दमा, फंगल इन्फेक्शन, बि...
02/02/2025

नमस्कार 🙏बसंत पंचमी की शुभकामनाएं💐 इस ऋतु में वातिक व वात कफज रोग सर्दी, रुखापन, ज्वर, खांसी, दमा, फंगल इन्फेक्शन, बिवाई फटना आदि रोगों की सम्भावना बढ़ जाती है।
पथ्य आहार-विहार
• प्रातः भ्रमण, धूप में बैठकर सिर व शरीर की तेलमालिश, व्यायाम और ताजे या गर्म जल से मुल्तानी मिट्टी /ऊबटन से स्नान कर अगर लेप, गर्म उनी वस्त्र धारण करें ।
•जठर अग्नि प्रबल होने के मधुर, स्निगध, रसायुक्त व बलवर्धक भोजन का सेवन करना चाहिए।
•रक्तचाप के रोगी विशेषकर अर्जुन की छाल को चाय , दूध व काढ़े का सेवन लाभदायक है।
• विविध प्रकार के मेवे , पाक और गुड़- तिल, मूंगफली के लड्डू, शहद व चवनप्राश विशेष लाभदायक *है। https://d-organikwala.dotpe.in*

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