24/05/2026
ग़ज़ल --
बात होती है मगर बात नहीं होती है,
बस घटा घिरती है बरसात नहीं होती है.
साथ उसके भले रहता हूँ मैं साया बन कर ,
पर मेरी उस से मुलाक़ात नहीं होती है.
आशिको अब ये समझना ही पडे़गा तुमको,
दिल जो हारा है तो ये मात नहीं होती है.
झूठ ही बोला है ये यार किसी ने तुमसे,
आशिकों की कोई औक़ात नहीं होती है.
तू मेरे पास है तो और भला क्या माँगू ?
इससे अच्छी कोई सौग़ात नहीं होती है.
ये तो इनआम है मालिक का संभालो इसको ,
ज़िंदगानी कोई ख़ैरात नहीं होती है.
विमल कुमार 'विमल '