Sethi Rasayan Shala

Sethi Rasayan Shala We are Manufacturers, Suppliers and Exporters of a qualitative range of Ayurvedic Medicines. Our range is well-received in the market.

SETHI RASAYAN SHALA Manufacturers of Ayurvedic & Herbal Medicines | We Share Authentic Ayurvedic Health Tips, Disease Awareness & Natural Healing Knowledge Based on Traditional Principles | Promoting Holistic Wellness & Preventive Healthcare Through Trus Sethi Rasayan Shala established in the year 1980, is a leading manufacturer of Ayurvedic herbal products and pharmaceutical bulk drugs.The factory is established in Indore.

80 वर्ष तक स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न कैसे रहें ? जापान के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक की अनमोल सीखआज चिकित्सा विज्ञान, बेहतर पो...
30/05/2026

80 वर्ष तक स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न कैसे रहें ? जापान के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक की अनमोल सीख

आज चिकित्सा विज्ञान, बेहतर पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता के कारण मनुष्य की औसत आयु लगातार बढ़ रही है। अनेक देशों में लोग 80 वर्ष या उससे अधिक आयु तक जीवित रह रहे हैं।
लेकिन केवल लंबा जीवन ही पर्याप्त नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि जीवन के अंतिम पड़ाव तक व्यक्ति स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर और प्रसन्न बना रहे।

जापान के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हिदेकी वादा ने इसी विषय पर एक चर्चित पुस्तक लिखी है – "The 80-Year-Old Wall" (80 वर्ष की दीवार)। यह पुस्तक प्रकाशित होते ही लाखों प्रतियाँ बिक गईं और जापान की सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तकों में शामिल हो गई।
इसमें लेखक ने बताया है कि 60 से 80 वर्ष की आयु के बीच व्यक्ति किस प्रकार जीवन का आनंद लेते हुए स्वस्थ और खुशहाल रह सकता है।

खुशहाल और स्वस्थ बुज़ुर्ग जीवन के 44 सूत्र
शारीरिक स्वास्थ्य के लिए

1. 🚶 प्रतिदिन खूब पैदल चलिए।

2. 😌 गुस्सा आने पर गहरी साँस लीजिए।

3. 🏃 अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम कीजिए।

4. 💧 गर्मी में ए.सी. का उपयोग करते समय पर्याप्त पानी पीजिए।

5. 🍎 ताजे फल, सलाद और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दीजिए।

6. 🚶‍♂️ अधिक चलने से शरीर और मस्तिष्क दोनों सक्रिय रहते हैं।

7. 🛁 स्नान को सरल और सुरक्षित रखें।

8. 🌞 प्रतिदिन कुछ समय धूप में बैठिए।

9. 🌬️ खुलकर और गहरी साँस लेने की आदत डालिए।

10. ⚕️ अनावश्यक दवाइयों के सेवन से बचिए और चिकित्सकीय सलाह का पालन कीजिए।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए

11. 😊 जो है, उसे स्वीकार करना सीखिए।

12. 🧠 भूलना केवल उम्र का परिणाम नहीं, मस्तिष्क के कम उपयोग का भी परिणाम है।

13. 📚 सीखना कभी बंद मत कीजिए।

14. 🎨 कोई नया शौक अपनाइए।

15. 📺 लगातार टीवी देखने की आदत कम कीजिए।

16. 🎵 संगीत, पढ़ाई, लेखन या रचनात्मक कार्यों में समय बिताइए।

17. 😴 नींद न आए तो चिंता न करें, शरीर को आराम दें।

18. 🧩 दिमागी खेल, पहेलियाँ और पढ़ने की आदत बनाए रखें।

19. 🌈 हमेशा सकारात्मक सोच विकसित करें।

20. 🙏 हर परिस्थिति को शांतिपूर्वक स्वीकार करना सीखें।

सामाजिक जीवन के लिए

21. 🏠 घर में कैद होकर न रहें।

22. 👨‍👩‍👧‍👦 परिवार और मित्रों से जुड़े रहें।

23. 🤝 दूसरों के लिए अच्छा कार्य करें।

24. ❤️ जिन लोगों के साथ अच्छा महसूस हो, उनके साथ समय बिताएँ।

25. 🚫 नकारात्मक लोगों से उचित दूरी बनाए रखें।

26. 💬 मन की बात कहने में संकोच न करें।

27. 😊 मुस्कुराते और हँसते रहिए।

28. 🎉 सामाजिक गतिविधियों में भाग लीजिए।

29. 💖 खुश रहने वाले लोग सभी को प्रिय लगते हैं।

30. 🌻 अकेलापन हमेशा दुख नहीं होता, यदि आप स्वयं के साथ प्रसन्न हैं।

जीवन-दर्शन और व्यवहार

31. 🌿 संतोष जीवन का सबसे बड़ा सुख है।

32. 🎯 जो अच्छा लगे वही कीजिए, जो न भाए उसे छोड़ दीजिए।

33. 🍲 संतुलित मात्रा में अपनी पसंद का भोजन भी खाइए।

34. ⚖️ हर कार्य सावधानी और समझदारी से कीजिए।

35. 🩺 समय रहते अपना विश्वसनीय पारिवारिक चिकित्सक चुनिए।

36. 😄 कभी-कभी थोड़ा शरारती और बेफिक्र होना भी ठीक है।

37. 🤲 ज़रूरत पड़ने पर जिद छोड़ देना भी बुद्धिमानी है।

38. 🏅 प्रसिद्धि और प्रशंसा की लालसा कम कीजिए।

39. 👶 अपनी सरलता और मासूमियत बनाए रखिए।

40. 🌄 वर्तमान में जीना सीखिए।

41. 🎯 जीवन के नियम स्वयं तय कीजिए।

42. 💪 बीमारी से लड़ने के बजाय उसके साथ संतुलित जीवन जीना सीखिए।

43. 🌱 इच्छाएँ, सपने और लक्ष्य जीवन में ऊर्जा बनाए रखते हैं।

44. 😂 हँसी सबसे सस्ती, सुरक्षित और प्रभावी औषधि है।

कुछ अतिरिक्त महत्वपूर्ण सुझाव

✔ नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
✔ पर्याप्त पानी पीने की आदत बनाए रखें।
✔ मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें।
✔ प्रतिदिन कम से कम एक ऐसा कार्य करें जिससे आपको खुशी मिले।
✔ कृतज्ञता (Gratitude) का अभ्यास करें और हर दिन किसी न किसी बात के लिए धन्यवाद महसूस करें।
✔ जीवन में उद्देश्य बनाए रखें, क्योंकि उद्देश्यपूर्ण जीवन अधिक संतोष और दीर्घायु प्रदान करता है।

बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक और सुंदर चरण है। यदि हम शरीर को सक्रिय, मन को सकारात्मक और संबंधों को मधुर बनाए रखें तो 60, 70 या 80 वर्ष की आयु भी जीवन का सबसे सुखद समय बन सकती है।

याद रखिए : उम्र केवल एक संख्या है, लेकिन उत्साह, जिज्ञासा और मुस्कान आपको सदैव युवा बनाए रखते हैं। 🌹

यह उपयोगी जानकारी अपने वरिष्ठ मित्रों, परिजनों और शुभचिंतकों के साथ अवश्य साझा करें ।

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उल्टा चलना Reverse Walking: आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान की नजर में एक अनोखा स्वास्थ्य अभ्यास 🚶‍♂️आज की तेज़ रफ़्तार और बै...
29/05/2026

उल्टा चलना Reverse Walking: आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान की नजर में एक अनोखा स्वास्थ्य अभ्यास 🚶‍♂️

आज की तेज़ रफ़्तार और बैठे रहने वाली जीवनशैली में लोग फिटनेस और स्वास्थ्य के नए नए तरीके खोज रहे हैं । इन्हीं में से एक सरल लेकिन प्रभावशाली अभ्यास है उल्टा चलना या रिवर्स वॉकिंग ।
देखने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिक शोध और आयुर्वेद दोनों ही इसे शरीर व मन के लिए बेहद लाभकारी मानते हैं ।

यह अभ्यास न केवल सामान्य चलने से अलग मांसपेशियों को सक्रिय करता है, बल्कि संतुलन, मस्तिष्क की सक्रियता और जोड़ों की सेहत को भी बेहतर बनाता है ।

आयुर्वेद में उल्टा चलना :* आयुर्वेद में शरीर की गति, संतुलन और स्नायु-मांसपेशियों के समन्वय को स्वास्थ्य का मूल आधार मानता है। सामान्य दिशा के विपरीत चलने से शरीर की निष्क्रिय मांसपेशियां सक्रिय होती हैं ।

इससे वात दोष का संतुलन होता है, प्राण वायु और व्यान वायु का बेहतर संचार होता है । आयुर्वेद के अनुसार यह मांसधातु मांसपेशियां और अस्थिधातु हड्डियां को बल प्रदान करता है । नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जोड़ों की जकड़न कम होती है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार आता है ।

उल्टा चलने के प्रमुख लाभ 🚶‍♂️
घुटनों, कमर और जोड़ों को राहत :* उल्टा चलने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव बदल जाता है । आगे की बजाय पीछे की ओर दबाव पड़ता है, जिससे घुटनों के आगे वाले हिस्से anterior knee पर कम तनाव पड़ता है।

अध्ययनों में पाया गया है कि घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA) वाले मरीजों में 6 हफ्ते के नियमित अभ्यास से दर्द और जकड़न काफी कम हो जाती है । कमर व रीढ़ की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं, जिससे पुरानी कमर दर्द में राहत मिलती है ।

शरीर का संतुलन और समन्वय बेहतर :* यह अभ्यास प्रोप्रियोसेप्शन शरीर की स्थिति की जानकारी को चुनौती देता है। परिणामस्वरूप संतुलन क्षमता बढ़ती है, गिरने का खतरा कम होता है, खासकर बुजुर्गों में । आयुर्वेद में इसे मांसधातु और अस्थिधातु को पुष्ट करने वाला बताया गया है ।

मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क की सक्रियता : 🚶‍♂️
उल्टा चलते समय ज्यादा ध्यान और एकाग्रता चाहिए होती है। इससे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स मस्तिष्क का निर्णय और समस्या समाधान वाला हिस्सा सक्रिय होता है।

अध्ययनों में पाया गया है कि इससे याददाश्त, फोकस, और संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ती है। तनाव, चिंता कम होती है और मूड बेहतर रहता है ।

मोटापा नियंत्रण और कैलोरी बर्न :* सामान्य चलने की तुलना में उल्टा चलने में 40% ज्यादा कैलोरी बर्न होती है (MET value ~6 बनाम 3.5)। इससे वजन कम करने, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और शरीर की चर्बी घटाने में मदद मिलती है।

पैरों की मांसपेशियों को मजबूती और लचीलापन :*
क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग, ग्लूट्स, काफ मसल्स और एंकल मसल्स अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। इससे पैरों की ताकत बढ़ती है और लचीलापन आता है ।

नींद, मूड और ऊर्जा स्तर में सुधार :* नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है, शरीर में एंडोर्फिन्स रिलीज होते हैं, जिससे गहरी नींद आती है और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

अतिरिक्त लाभ :* मुद्रा posture सुधार, हृदय स्वास्थ्य बेहतर, स्ट्रोक या पार्किंसन जैसे न्यूरोलॉजिकल मामलों में सहायक, फिजियोथेरेपी के रूप में पीठ की मांसपेशियों की मजबूती

आयुर्वेद के अनुसार विस्तार :* आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य नरेंद्र सेठी का कहना है कि उल्टा चलना केवल फिटनेस ट्रेंड नहीं, बल्कि शरीर और मस्तिष्क को प्राकृतिक रूप से सक्रिय करने वाला प्राचीन-आधुनिक संयुक्त अभ्यास है ।

आयुर्वेद में वात दोष की वृद्धि से जोड़ों का दर्द, कमजोरी, घबराहट और असंतुलन होता है। उल्टा चलना इन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसे अभ्यंग तेल मालिश, योगासन जैसे ताड़ासन, वृक्षासन, प्राणायाम और सात्विक आहार के साथ जोड़कर करने से लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं ।

उल्टा चलने का सही तरीका :🚶‍♂️
शुरुआत 2-5 मिनट से शुरू करें, धीरे-धीरे 10-15-20 मिनट तक बढ़ाएं । जगह सपाट, साफ़ और सुरक्षित जगह पार्क, घर का हॉल, ट्रेडमिल । पीछे देखते हुए छोटे-छोटे कदम लें, घुटने थोड़े मोड़कर। शुरू में दीवार या किसी का सहारा लें।

फ्रीक्वेंसी :* सप्ताह में 3-5 दिन ।

सावधानियां :* शुरुआती दिनों में धीरे चलें । बुजुर्ग, चक्कर आने वाले, गंभीर हृदय रोगी, हाल ही में सर्जरी हुए या गंभीर जोड़ों की समस्या वाले व्यक्ति डॉक्टर/आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बिना न करें। हमेशा पीछे का ध्यान रखें, ट्रैफिक या असमान जगह से बचें । अगर दर्द बढ़े तो तुरंत रोक दें ।

उल्टा चलना एक सरल, कम खर्च वाला और अत्यंत प्रभावी अभ्यास है । इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करके आप शारीरिक शक्ति, मानसिक संतुलन और संपूर्ण स्वास्थ्य को नया आयाम दे सकते हैं । 🚶‍♂️
नियमितता और सावधानी के साथ इसे अपनाएं तो कुछ हफ्तों में ही फर्क महसूस होने लगेगा । स्वस्थ रहें, सक्रिय रहें !

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आयुर्वेदिक शोध ने जगाई उम्मीद : 12 वर्षों बाद गूंजी किलकारीभोपाल । आधुनिक जीवनशैली, मानसिक तनाव और बदलती दिनचर्या के कार...
17/05/2026

आयुर्वेदिक शोध ने जगाई उम्मीद : 12 वर्षों बाद गूंजी किलकारी

भोपाल । आधुनिक जीवनशैली, मानसिक तनाव और बदलती दिनचर्या के कारण आज बांझपन (Infertility) की समस्या तेजी से बढ़ रही है ।
ऐसे समय में आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान और औषधीय परंपरा पर आधारित शोध नई उम्मीद जगाते दिखाई दे रहे हैं ।
हाल ही में “शिवलिंगी बीज” पर आधारित एक आयुर्वेदिक क्लिनिकल ट्रायल ने सकारात्मक परिणाम देकर चिकित्सा जगत का ध्यान आकर्षित किया है ।

एक महिला, जो विवाह के 12 वर्षों बाद भी मातृत्व सुख से वंचित थी, अनेक उपचारों और प्रयासों के बाद निराश हो चुकी थी ।
लेकिन आयुर्वेदिक उपचार, संतुलित आहार-विहार और विशेषज्ञ वैद्यकीय मार्गदर्शन के माध्यम से उसे मातृत्व सुख प्राप्त हुआ ।
यह केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा और उसके वैज्ञानिक आधार का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है।

आयुर्वेद में “शिवलिंगी बीज” को प्रजनन क्षमता को संतुलित करने वाला महत्वपूर्ण द्रव्य माना गया है।
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और गर्भसंस्कार से जुड़े आयुर्वेदिक सिद्धांतों में स्त्री स्वास्थ्य, गर्भधारण और संतुलित जीवनचर्या को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है ।
विशेषज्ञों के अनुसार उचित निदान, तनावमुक्त जीवन, संतुलित भोजन, योग-प्राणायाम और आयुर्वेदिक औषधियों का समन्वय कई दंपत्तियों के लिए आशा की नई किरण बन सकता है ।

आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि किसी भी औषधि का सेवन स्वयं से नहीं करना चाहिए । योग्य एवं अनुभवी वैद्य के परामर्श से ही उपचार लेना उचित होता है,
क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति, स्वास्थ्य स्थिति और कारण अलग-अलग हो सकते हैं ।

आयुर्वेद केवल रोग उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन की विज्ञानसम्मत परंपरा है ।
मातृत्व और परिवार की खुशियों को पुनः जागृत करने में आयुर्वेद आज भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है ।

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नैत्र स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद का विश्वसनीय सहयोग : “नैत्रायु टेबलेट”👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️आज की डिजिटल जीवनशैली में मोबाइल, ...
16/05/2026

नैत्र स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद का विश्वसनीय सहयोग : “नैत्रायु टेबलेट”
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आज की डिजिटल जीवनशैली में मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और लगातार पढ़ने के कारण आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।
आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखना, आंखों का जल्दी थक जाना और शुरुआती नेत्र कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

ऐसे समय में आयुर्वेद आधारित “नैत्रायु टेबलेट” आंखों के पोषण और नेत्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हर्बल सहयोग प्रदान करती है।

नैत्रायु टेबलेट पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित एक विशेष हर्बल एवं मिनरल फॉर्मूलेशन है, जिसमें सप्तामृत लोह, आमलकी रसायन, स्वर्ण माक्षिक भस्म, विभीतकी, भृंगराज, यष्टिमधु, गिलोय, अश्वगंधा और शतावरी जैसे गुणकारी द्रव्यों का समावेश किया गया है।

यह संयोजन आंखों को पोषण देने, नेत्र शक्ति बनाए रखने और आंखों की थकान कम करने में सहायक माना जाता है।

यह टेबलेट मोबाइल, लैपटॉप और लगातार स्क्रीन देखने से होने वाले आई स्ट्रेन में उपयोगी है। आंखों की जलन, लालिमा, पानी आना एवं थकान जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक हो सकती है।

पारंपरिक रूप से यह शुरुआती नेत्र कमजोरी और बढ़ती उम्र के साथ होने वाली दृष्टि संबंधी समस्याओं में भी उपयोग की जाती रही है।

आंवला एवं विभीतकी जैसे रसायन द्रव्य आंखों के पोषण और एंटीऑक्सीडेंट संरक्षण में सहायक माने जाते हैं । गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन देती है ।

जबकि अश्वगंधा एवं शतावरी शरीर को शक्ति और संतुलन प्रदान करने में उपयोगी मानी जाती हैं । यष्टिमधु आंखों की शांति और आराम में सहयोगी मानी जाती है ।

नैत्रायु टेबलेट नियमित नेत्र देखभाल, आंखों की कमजोरी, आंखों की थकान तथा समग्र नेत्र स्वास्थ्य को बनाए रखने हेतु उपयोगी आयुर्वेदिक सहयोग प्रदान करती है ।

स्वस्थ दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और स्क्रीन टाइम नियंत्रण के साथ इसका उपयोग अधिक लाभकारी हो सकता है । निर्माता : सेठी रसायन शाला संपर्क : 9424896884

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आयुर्वेद में गठिया का इलाजगठिया (आर्थराइटिस) एक ऐसा रोग है जिसमें जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई ...
13/05/2026

आयुर्वेद में गठिया का इलाज
गठिया (आर्थराइटिस) एक ऐसा रोग है जिसमें जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई होती है । आयुर्वेद में इसे मुख्यतः वात रोग माना गया है । जब शरीर में वात दोष बढ़ता है और आम (अधपचा विषैला तत्व) जमा हो जाता है तब जोड़ों में दर्द व सूजन उत्पन्न होती है ।

लक्षण : गठिया के सामान्य लक्षणों में जोड़ों में दर्द और सूजन, सुबह उठते समय अकड़न, घुटनों, उंगलियों, कमर या टखनों में दर्द, चलने में कठिनाई, जोड़ों में गर्माहट या आवाज आना तथा कमजोरी और थकान शामिल हैं ।

इसके प्रमुख कारण : में ठंडी व बासी चीजों का अधिक सेवन, अधिक दही, फ्रिज का पानी, मैदा, फास्ट फूड, मोटापा, पाचन खराब रहना, अधिक बैठकर काम करना, बढ़ती उम्र तथा यूरिक एसिड बढ़ना शामिल हैं ।

आयुर्वेदिक घरेलू उपाय : में रात में भिगोया हुआ मेथी दाना सुबह चबाकर खाना, हल्दी व अदरक का सेवन, सुबह खाली पेट लहसुन की कलियां लेना, अजवाइन का सेक करना तथा हल्के गर्म सरसों या तिल तेल से मालिश करना लाभकारी माना जाता है । गिलोय का काढ़ा या रस भी सूजन कम करने में उपयोगी माना गया है ।

आयुर्वेदिक औषधियां : में योगराज गुग्गुल, महायोगराज गुग्गुल, रास्नादि क्वाथ, सिंहनाद गुग्गुल तथा त्रयोदशांग गुग्गुल का उपयोग चिकित्सकीय सलाह से किया जाता है ।

पथ्य ~अपथ्य : गठिया में गर्म और ताजा भोजन, मूंग दाल, लहसुन, अदरक, हल्दी, तिल, गुनगुना पानी तथा हरी सब्जियां लाभकारी मानी जाती हैं जबकि ठंडी चीजें, फ्रिज का पानी, रात का दही, ज्यादा चावल, फास्ट फूड, अधिक मिठाई और मैदा से बचना चाहिए ।

योगासन : हल्के योग जैसे पवनमुक्तासन, वज्रासन और ताड़ासन तथा सुबह की हल्की सैर भी लाभकारी हो सकती है ।

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धर्म साधना, आयुर्वेद और आत्मबल से कैंसर पर जीत : एम्स कर रहा स्टडीकिशनगढ़ । एडवांस स्टेज ओवरी कैंसर, आंतों में संक्रमण, ...
12/05/2026

धर्म साधना, आयुर्वेद और आत्मबल से कैंसर पर जीत : एम्स कर रहा स्टडी

किशनगढ़ । एडवांस स्टेज ओवरी कैंसर, आंतों में संक्रमण, लगातार गिरता वजन और डॉक्टरों द्वारा सीमित जीवन की आशंका जताने जैसी गंभीर परिस्थितियों के बीच राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ की 51 वर्षीय अलका जैन ने अद्भुत साहस, जैन धर्म के संयम और आयुर्वेदिक जीवनशैली के सहारे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर विजय प्राप्त की ।

अब उनके स्वास्थ्य सुधार को लेकर चिकित्सा जगत में भी चर्चा हो रही है तथा एम्स जोधपुर के चिकित्सक इस पूरे मामले का अध्ययन कर रहे हैं ।

अलका जैन ने बताया कि बीमारी के दौरान उनकी तीन बड़ी सर्जरी हुईं । लंबे समय तक अस्पताल में उपचार चला, लेकिन उन्होंने मानसिक रूप से हार नहीं मानी ।

उन्होंने जैन धर्म की तप, संयम और अनुशासन की परंपरा को जीवन में उतारते हुए सूर्यास्त के बाद भोजन करना पूरी तरह बंद कर दिया । इसके साथ ही उन्होंने रात्रि में पानी पीना भी त्याग दिया। उनका कहना है कि इससे शरीर को आराम मिला और मानसिक दृढ़ता बढ़ी ।

उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान परिवार ने भी पूरा सहयोग दिया। घर में प्रेशर कुकर का उपयोग बंद कर दिया गया तथा भोजन को अधिक प्राकृतिक और सात्विक तरीके से तैयार किया जाने लगा ।

गेहूं, मैदा, चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन लगभग बंद कर दिया गया। इसके स्थान पर हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन अपनाया गया ।

अलका जैन ने आयुर्वेदिक जीवनशैली को भी अपने उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया । उन्होंने तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, शतावरी और पपीते के पत्तों जैसे पारंपरिक हर्बल उपायों का सीमित एवं चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सेवन किया ।
आयुर्वेद के अनुसार ये औषधियां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शरीर को बल देने और मानसिक तनाव कम करने में सहायक मानी जाती हैं ।

उन्होंने बताया कि केवल दवा ही नहीं बल्कि मानसिक शक्ति ने भी उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकाला । बीमारी के दौरान उन्होंने प्रतिदिन णमोकार मंत्र का जाप किया ।

अलका जैन के अनुसार इस मंत्र के नियमित जाप से उन्हें मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्म विश्वास प्राप्त हुआ । जैन धर्म में णमोकार मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली और आत्मशुद्धि का मंत्र माना गया है ।

इसके साथ ही उन्होंने जैन धार्मिक ग्रन्थ तत्वार्थ सूत्र, रत्नकरण्ड श्रावकाचार, समयसार और भक्तामर स्तोत्र का नियमित पाठ भी किया । तत्वार्थ सूत्र जीवन और कर्म सिद्धांत का ज्ञान देता है ।

समयसार आत्मा की शक्ति और आत्मचिंतन का संदेश देता है। रत्नकरण्ड श्रावकाचार संयमित और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देता है ।
भक्तामर स्तोत्र को मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है ।

इलाज के दौरान चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में बताए गए स्वास्थ्य सिद्धांतों का भी पालन किया गया ।
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार रोग के समय केवल औषधि ही नहीं बल्कि मन की स्थिति, सकारात्मक विचार, सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या भी रोगमुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।

विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, भय और निराशा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं, जबकि ध्यान, प्रार्थना, मंत्र जाप और अनुशासित जीवनशैली मानसिक एवं शारीरिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं ।

आज अलका जैन की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है । यह उदाहरण बताता है कि आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेदिक अनुशासन और जैन धर्म की आध्यात्मिक साधना का समन्वय व्यक्ति को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष करने की शक्ति दे सकता है ।

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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण, पहचान और आयुर्वेदिक निवारणआजकल बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड हृदय रोग, हार्ट अटैक औ...
10/05/2026

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण, पहचान और आयुर्वेदिक निवारण

आजकल बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बड़ा कारण बन रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या मुख्यतः कफ दोष वृद्धि, मेद धातु विकार और अग्निमांद्य कमजोर पाचन शक्ति के कारण उत्पन्न होती है । आयुर्वेद में कहा गया है कि अत्यधिक स्निग्ध, गुरु और मधुर आहार शरीर में कफ और मेद को बढ़ाकर धमनियों में अवरोध पैदा करता है ।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के प्रमुख कारण
1.गलत आहार : अधिक तैलीय, तला-भुना भोजन, फास्ट फूड, मैदा, मिठाइयाँ, अधिक घी, मक्खन, डेयरी उत्पाद, ठंडे पेय, पैकेज्ड फूड, धूम्रपान और शराब सेवन।
2.गलत जीवनशैली : शारीरिक श्रम और व्यायाम की कमी, दिन में सोना (दिवा निद्रा), देर रात तक जागना, मानसिक तनाव और अनियमित दिनचर्या। इससे कफ दोष बढ़ता है और शरीर में चर्बी जमा होने लगती है ।
3.अग्निमांद्य (Weak Digestion) : जब जठराग्नि कमजोर हो जाती है, तब भोजन पूरी तरह नहीं पचता और “आम” (विषैले तत्व) बनते हैं । यही आम रक्त और धमनियों में जाकर जमाव पैदा करते हैं ।

*आयुर्वेदिक रोग प्रक्रिया* अग्निमांद्य → आम निर्माण → रक्त में मिश्रण → धमनियों में जमाव → हृदय रोग
4.आनुवंशिक कारण : यदि परिवार में पहले से कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह या हृदय रोग की समस्या हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।
5.शुगर एवं इंसुलिन रेसिस्टेंस : अधिक मीठा और परिष्कृत खाद्य पदार्थ खाने से इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ता है, जिससे ट्राइग्लिसराइड तेजी से बढ़ सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट को कैसे पहचानें ?
कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराया जाता है ।
कुल कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol) 200 mg/dl से कम — सामान्य
200–239 mg/dl : बॉर्डरलाइन
240 mg/dl से अधिक : उच्च
LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) 100 mg/dl से कम : उत्तम
100–129 : सामान्य
130–159 : बढ़ा हुआ
160+ : खतरनाक
HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल)
40 mg/dl से कम : कम (जोखिम)
50–60+ : अच्छा एवं हृदय रक्षक
ट्राइग्लिसराइड (Triglycerides) 150 mg/dl से कम : सामान्य
150–199 : बॉर्डरलाइन
200+ : उच्च
500+ : अत्यधिक खतरनाक
पहचान का सरल तरीका : LDL ↑ ज्यादा + HDL ↓ कम = हृदय रोग का खतरा
ट्राइग्लिसराइड ↑ = फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट रिस्क
कई बार व्यक्ति सामान्य दिखता है, लेकिन रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ निकलता है । इसलिए समय-समय पर जांच करवाना आवश्यक है ।

बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लक्षण एवं नुकसान
मोटापा, आलस्य, भारीपन, अधिक पसीना, सांस फूलना, छाती में जकड़न ।
नुकसान : हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर, मधुमेह।

आयुर्वेदिक निवारण एवं उपचार
1.आहार सुधार : जौ, ओट्स, हरी सब्जियाँ, लहसुन, अदरक, नींबू, सेब, अमरूद और पपीता का सेवन करें। कम तेल और कम नमक वाला भोजन लें। तला-भुना, मिठाइयाँ, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड से बचें।
*2.आयुर्वेदिक औषधियाँ* चिकित्सक की सलाह से
त्रिफला चूर्ण : पाचन सुधारने एवं चर्बी कम करने में सहायक।
मेदोहर गुग्गुल : कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में उपयोगी।
अर्जुन छाल : हृदय को मजबूती प्रदान करती है।
लहसुन: प्राकृतिक लिपिड कंट्रोलर।
3.पंचकर्म चिकित्सा : वमन, विरेचन और बस्ती शरीर में जमा कफ, वसा एवं विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक माने जाते हैं ।
4.योग और प्राणायाम : कपालभाति, अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार तथा प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चलना लाभकारी है।
5.घरेलू उपाय : सुबह खाली पेट 2–3 लहसुन की कलियाँ, गुनगुने पानी में नींबू, रातभर भिगोया हुआ मेथीदाना तथा अलसी का सेवन लाभकारी माना जाता है ।

आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य नरेंद्र सेठी की सलाह समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराएं । पाचन शक्ति सुधारना सबसे पहला उपचार है । कफ और मेद धातु को संतुलित रखें । दवा से अधिक महत्वपूर्ण सही आहार-विहार और नियमित दिनचर्या है ।

🌸 हैप्पी मदर्स डे 🌸स्वर्गीय मातुश्री मैना बाई सेठी की पावन स्मृति को सादर नमन । आपका स्नेह, संस्कार और आशीर्वादहमारे जीव...
10/05/2026

🌸 हैप्पी मदर्स डे 🌸
स्वर्गीय मातुश्री मैना बाई सेठी की पावन स्मृति को सादर नमन । आपका स्नेह, संस्कार और आशीर्वाद
हमारे जीवन की अमूल्य धरोहर हैं । मातृ प्रेम सदैव हमारे हृदय में अमर रहेगा ।
💐 श्रद्धांजलि एवं विनम्र प्रणाम 💐
--नरेंद्र पदमा सेठी एवं सेठी परिवार 🙏

अपराजिता के नीले फूल और ब्लू टी सायटिका एवं नसों के दर्द में लाभकारीब्लू टी अर्थात अपराजिता के नीले फूलों से बनी चाय । इ...
09/05/2026

अपराजिता के नीले फूल और ब्लू टी सायटिका एवं नसों के दर्द में लाभकारी
ब्लू टी अर्थात अपराजिता के नीले फूलों से बनी चाय । इसके ताजे या सूखे फूलों को पानी में उबालकर छान लें और सुबह खाली पेट सेवन करें । ब्लू टी को लेकर आजकल बाज़ार में अनेक दावे किए जाते हैं ।
आयुर्वेदिक और पारंपरिक उपयोगों के अनुसार अपराजिता के फूल और ब्लू टी तनाव और मानसिक थकान कम करने में उपयोगी, पाचन क्रिया को संतुलित करने में मददगार, सायटिका एवं नसों के दर्द में राहत देने में सहायक, एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण त्वचा और बालों के लिए लाभकारी, स्मरण शक्ति और एकाग्रता में सहायक है ।
अपराजिता का पौधा घर में आसानी से लगाया जा सकता है। घर पर उगाकर ताजे फूलों का उपयोग करना अधिक शुद्ध और किफायती विकल्प है। अनावश्यक महंगे उत्पादों पर धन खर्च करने के बजाय प्राकृतिक रूप में इसका लाभ लें । हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है ।
उचित मात्रा और सीमित मात्रा में अधिकतम 1-2 माह तक ही उपयोग करना है । सेवन से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें ।
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बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं..!भगवान बुद्ध की सबसे बड़ी सीख है कि "घृणा को सिर्फ प्रेम से ही समाप्त किया जा सकता...
01/05/2026

बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं..!
भगवान बुद्ध की सबसे बड़ी सीख है कि "घृणा को सिर्फ प्रेम से ही समाप्त किया जा सकता है, यह एक अटूट सत्य है ।" भगवान बुद्ध ने सत्य, अहिंसा, मानवता, दया और करुणा जैसे महान मूल्यों पर चलने की प्रेरणा दी एवं संसार को शांति, समरसता व समृद्धि का मार्ग दिखाया।
सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं ।🙏

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