05/07/2026
नीचे दिखाई गई CT Brain रिपोर्टें स्ट्रोक (Stroke) के मरीजों की हैं। दोनों मरीजों में हाथ-पैर की कमजोरी, बोलने में परेशानी या लकवे जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन इन दोनों का इलाज एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है।
🩸 पहला प्रकार – Hemorrhagic Stroke
इसमें मस्तिष्क की रक्तवाहिका फट जाती है और मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव (Bleeding) होने लगता है।
🩺 दूसरा प्रकार – Ischemic Stroke
इसमें रक्तवाहिका फटती नहीं है, बल्कि खून का थक्का (Clot) बनने से मस्तिष्क के किसी भाग में रक्त का प्रवाह रुक जाता है।
⚠️ यहीं सबसे बड़ा अंतर है।
Ischemic Stroke में कुछ मरीजों को समय पर पहुँचने पर थक्का घोलने की दवा (Thrombolysis) दी जा सकती है।
लेकिन Hemorrhagic Stroke में यही दवा देना जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि इससे मस्तिष्क में रक्तस्राव और बढ़ सकता है।
इसीलिए केवल लक्षण देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज को कौन-सा स्ट्रोक हुआ है। CT Brain या आवश्यकता अनुसार MRI के बिना सही इलाज शुरू नहीं किया जाता।
✨✨✨✨✨✨✨
"अचानक एक हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया, चेहरा टेढ़ा हो गया और बोलना बंद हो गया।"
अक्सर लोग इसे "लकवा" कहकर घरेलू उपचार या झाड़-फूंक में समय बर्बाद कर देते हैं। लेकिन वास्तव में यह Stroke (स्ट्रोक) हो सकता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है। यदि समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है और स्थायी विकलांगता से भी बचा जा सकता है।
👉 स्ट्रोक (Stroke) या CVA क्या है?
Stroke और CVA (Cerebrovascular Accident) एक ही बीमारी के दो नाम हैं। आजकल पूरी दुनिया में "Stroke" शब्द अधिक प्रचलित है।
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह अचानक रुक जाता है या मस्तिष्क की कोई रक्तवाहिका फट जाती है। कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाएँ ऑक्सीजन और पोषण के अभाव में नष्ट होने लगती हैं। इसलिए कहा जाता है—
"Time is Brain"
जितनी जल्दी इलाज होगा, उतनी अधिक मस्तिष्क की कोशिकाएँ बचाई जा सकती हैं।
✨ स्ट्रोक के दो मुख्य प्रकार
1. Ischemic Stroke (इस्केमिक स्ट्रोक)
यह सबसे सामान्य प्रकार है और लगभग 80–85% मरीजों में यही पाया जाता है।
इसमें मस्तिष्क की रक्तवाहिका में खून का थक्का (Clot) बन जाता है या कहीं और से आकर फँस जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह रुक जाता है। परिणामस्वरूप उस भाग की कोशिकाएँ मरने लगती हैं।
मुख्य कारण हैं—
• उच्च रक्तचाप
• मधुमेह
• उच्च कोलेस्ट्रॉल
• धूम्रपान
• हृदय की धड़कन की अनियमितता (विशेषकर Atrial Fibrillation)
• मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली
2. Hemorrhagic Stroke (हेमरेजिक स्ट्रोक)
यह लगभग 15–20% मामलों में होता है।
इसमें मस्तिष्क की रक्तवाहिका फट जाती है और मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव होने लगता है। रक्तस्राव के कारण मस्तिष्क पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे गंभीर क्षति हो सकती है।
मुख्य कारण हैं—
• वर्षों तक अनियंत्रित उच्च रक्तचाप
• मस्तिष्क की रक्तवाहिका का एन्यूरिज़्म
• रक्त पतला करने वाली दवाओं का प्रभाव
✨ क्या स्ट्रोक से लकवा हो जाता है?
हाँ। यही कारण है कि आम भाषा में स्ट्रोक को अक्सर "लकवा" कहा जाता है।
यदि मस्तिष्क के दाएँ भाग में स्ट्रोक होता है तो शरीर के बाएँ भाग में कमजोरी या लकवा हो सकता है। यदि बाएँ भाग में स्ट्रोक होता है तो शरीर का दायाँ भाग प्रभावित होता है।
लकवा हल्का भी हो सकता है और पूरा भी। इसके साथ बोलने में कठिनाई, समझने में परेशानी, याददाश्त की समस्या, निगलने में कठिनाई तथा चलने-फिरने में दिक्कत भी हो सकती है।
✨ स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण
यदि किसी व्यक्ति में अचानक निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाएँ—
• चेहरा एक ओर टेढ़ा होना
• एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन
• बोलने या समझने में कठिनाई
• अचानक दृष्टि कम होना
• संतुलन बिगड़ना
• चक्कर आना
यदि बहुत तेज सिरदर्द, उल्टी और बेहोशी भी साथ में हो तो यह Hemorrhagic Stroke की ओर संकेत कर सकता है, हालांकि केवल लक्षणों से प्रकार निश्चित नहीं किया जा सकता।
👉 FAST नियम याद रखें
F – Face: चेहरा टेढ़ा हो गया?
A – Arm: एक हाथ उठ नहीं रहा?
S – Speech: बोलने में कठिनाई है?
T – Time: तुरंत अस्पताल पहुँचिए।
✨ Ischemic और Hemorrhagic Stroke में सबसे बड़ा अंतर
• Ischemic Stroke में समस्या रक्तवाहिका के बंद होने की होती है।
• Hemorrhagic Stroke में समस्या रक्तवाहिका के फटने और रक्तस्राव की होती है।
यही अंतर इलाज को पूरी तरह बदल देता है।
🤔 इलाज में क्या अंतर है?
Ischemic Stroke
• यदि मरीज समय पर अस्पताल पहुँच जाए (आमतौर पर शुरुआती 4.5 घंटे के भीतर), तो विशेष दवा द्वारा थक्का घोलने (Thrombolysis) का प्रयास किया जा सकता है।
• कुछ मरीजों में कैथेटर द्वारा थक्का निकालने (Mechanical Thrombectomy) की प्रक्रिया भी की जाती है।
• बाद में Aspirin जैसी antiplatelet दवाएँ, कुछ मरीजों में anticoagulants तथा रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल का नियंत्रण किया जाता है।
Hemorrhagic Stroke
• इसमें थक्का घोलने वाली दवाएँ बिल्कुल नहीं दी जातीं, क्योंकि इससे रक्तस्राव और बढ़ सकता है तथा मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
• इस प्रकार के स्ट्रोक में रक्तचाप नियंत्रित किया जाता है, यदि मरीज blood thinner ले रहा हो तो उसके प्रभाव को कम किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर न्यूरोसर्जरी करके रक्तस्राव को नियंत्रित किया जाता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात : सिर्फ मरीज को देखकर यह नहीं बताया जा सकता कि उसे कौन-सा स्ट्रोक हुआ है।
इसलिए Non-Contrast CT Scan या आवश्यकता अनुसार MRI करना अनिवार्य होता है। रिपोर्ट आने के बाद ही सही इलाज शुरू किया जाता है।
👉 किन लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है?
• उच्च रक्तचाप वाले मरीज
• मधुमेह
• उच्च कोलेस्ट्रॉल
• धूम्रपान एवं तंबाकू सेवन
• अत्यधिक शराब
• मोटापा
• शारीरिक निष्क्रियता
• हृदय रोग
• अनियमित धड़कन (Atrial Fibrillation)
• पहले स्ट्रोक या TIA हो चुका हो
🤔 क्या स्ट्रोक से बचा जा सकता है?
हाँ। लगभग 80% स्ट्रोक को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रोका जा सकता है।
• रक्तचाप नियंत्रित रखें।
• मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल का इलाज नियमित कराएँ।
• धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ दें।
• नियमित व्यायाम करें।
• संतुलित भोजन लें।
• वजन नियंत्रित रखें।
• डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएँ नियमित लें।
स्ट्रोक एक ऐसी बीमारी है जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। जितनी देर होगी, उतनी अधिक मस्तिष्क की कोशिकाएँ नष्ट होती जाएँगी। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाए, हाथ-पैर काम करना बंद कर दें या बोलने में कठिनाई हो, तो इसे सामान्य कमजोरी या लकवा समझकर समय न गँवाएँ।
तुरंत अस्पताल पहुँचें, क्योंकि समय पर इलाज ही जीवन बचा सकता है, लकवे की गंभीरता कम कर सकता है और मरीज को सामान्य जीवन में वापस ला सकता है।
Acute Phase में इमरजेंसी में शीघ्रता से एलोपैथी दवाये इसको कंट्रोल कर लेती है और रिकवरी बहुत अच्छी होती हैं। इसके बाद muscle power, Speech, Weakness में फिजियोथेरेपी इलाज जरूर ले ...डॉ पवन garg