Rashi Vichar Jyotish Adhyatm

Website

Rashi Vichar Jyotish Adhyatm These videos have helped people overcome mental stress, depression, addictions, low self esteem.

01/10/2026
01/10/2026

*पितृदोष-* कैसे बनता है पितृदोष निवारण के उपाय

*कुण्डली के नवम भाव को भाग्य भाव कहा गया है . इसके साथ ही यह भाव पित्र या पितृ या पिता का भाव तथा पूर्वजों का भाव होने के कारण भी विशेष रुप से महत्वपूर्ण हो जाता है .महाऋषियों के अनुसार पूर्व जन्म के पापों के कारण पितृ दोष बनता है . इसके अलावा इस योग के बनने के अनेक अन्य कारण भी हो सकते है .*

*नवम भाव पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है। शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है। व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है।*

*कुन्डली का नवां घर धर्म का घर कहा जाता है, यह पिता का घर भी होता है, अगर किसी प्रकार से नवां घर खराब ग्रहों से ग्रसित होता है तो सूचित करता है कि पूर्वजों की इच्छायें अधूरी रह गयीं थी, जो प्राकृतिक रूप से खराब ग्रह होते है वे सूर्य मंगल शनि कहे जाते है और कुछ लगनों में अपना काम करते हैं, लेकिन राहु और केतु सभी लगनों में अपना दुष्प्रभाव देते हैं, नवां भाव, नवें भाव का मालिक ग्रह, नवां भाव चन्द्र राशि से और चन्द्र राशि से नवें भाव का मालिक अगर राहु या केतु से ग्रसित है तो यह पितृ दोष कहा जाता है। इस प्रकार का जातक हमेशा किसी न किसी प्रकार की टेंसन में रहता है, उसकी शिक्षा पूरी नही हो पाती है, वह जीविका के लिये तरसता रहता है, वह किसी न किसी प्रकार से दिमागी या शारीरिक रूप से अपंग होता है।*

*अगर किसी भी तरह से नवां भाव या नवें भाव का मालिक राहु या केतु से ग्रसित है तो यह सौ प्रतिशत पितृदोष के कारणों में आजाता है। सामान्यत: व्यक्ति का जीवन सुख -दुखों से मिलकर बना है. पूरे जीवन में एक बार को सुख व्यक्ति का साथ छोड भी दे, परन्तु दु:ख किसी न किसी रुप में उसके साथ बने ही रहते है, फिर वे चाहें, संतानहीनता, नौकरी में असफलता, धन हानि, उन्नति न होना, पारिवारिक कलेश आदि के रुप में हो सकते है . पितृ दोष को समझने से पहले पितृ क्या है इसे समझने का प्रयास करते है.*

*पितृ क्या है-*

*पितरों से अभिप्राय व्यक्ति के पूर्वजों से है . जो पित योनि को प्राप्त हो चुके है . ऎसे सभी पूर्वज जो आज हमारे मध्य नहीं, परन्तु मोहवश या असमय मृ्त्यु को प्राप्त होने के कारण, आज भी मृ्त्यु लोक में भटक रहे है . अर्थात जिन्हें मोक्ष की प्राप्ति नहीं हुई है, उन सभी की शान्ति के लिये पितृ दोष निवारण उपाय किये जाते है .*

*ये पूर्वज स्वयं पीडित होने के कारण, तथा पितृ्योनि से मुक्त होना चाहते है, परन्तु जब आने वाली पीढी की ओर से उन्हें भूला दिया जाता है, तो पितृ दोष उत्पन्न होता है.*

*पितृ दोष कैसे बनता है?*

*नवम पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है . शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है . व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है.*

*पितृ दोष के कारण -*

*पितृ दोष उत्पन्न होने के अनेक कारण हो सकते है . जैसे:- परिवार में अकाल मृ्त्यु हुई हों, परिवार में इस प्रकार की घटनाएं जब एक से अधिक बार हुई हों . या फिर पितरों का विधी विधान से श्राद्ध न किया जाता हों, या धर्म कार्यो में पितरों को याद न किया जाता हो, परिवार में धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न न होती हो, धर्म के विपरीत परिवार में आचरण हो रहा हो, परिवार के किसी सदस्य के द्वारा गौ हत्या हो जाने पर, या फिर भ्रूण हत्या होने पर भी पितृ दोष व्यक्ति कि कुण्डली में नवम भाव में सूर्य और राहू स्थिति के साथ प्रकट होता है.*

*नवम भाव क्योकि पिता का भाव है, तथा सूर्य पिता का कारक होने के साथ साथ उन्नती, आयु, तरक्की, धर्म का भी कारक होता है, इसपर जब राहू जैसा पापी ग्रह अपनी अशुभ छाया डालता है, तो ग्रहण योग के साथ साथ पितृ दोष बनता है . इस योग के विषय में कहा जाता है कि इस योग के व्यक्ति के भाग्य का उदय देर से होता है . अपनी योग्यता के अनुकुल पद की प्राप्ति के लिये संघर्ष करना पडता है.*

*हिन्दू शास्त्रों में देव पूजन से पूर्व पितरों की पूजा करनी चाहिए . क्योकि देव कार्यो से अधिक पितृ कार्यो को महत्व दिया गया है . इसीलिये देवों को प्रसन्न करने से पहले पितरों को तृ्प्त करना चाहिए . पितर कार्यो के लिये सबसे उतम पितृ पक्ष अर्थात आश्चिन मास का कृ्ष्ण पक्ष समझा जाता है .*

*पितृ दोष शान्ति के उपाय -*

*आश्विन मास के कृ्ष्ण पक्ष में पूर्वजों को मृ्त्यु तिथि अनुसार तिल, कुशा, पुष्प, अक्षत, शुद्ध जल या गंगा जल सहित पूजन, पिण्डदान, तर्पण आदि करने के बाद ब्राह्माणों को अपने सामर्थ्य के अनुसार भोजन, फल, वस्त्र, दक्षिणा आदि दान करने से पितृ दोष शान्त होता है .*

*इस पक्ष में एक विशेष बात जो ध्यान देने योग्य है वह यह है कि जिन व्यक्तियों को अपने पूर्वजों की मृ्त्यु की तिथि न मालूम हो, तो ऎसे में आश्विन मास की अमावस्या को उपरोक्त कार्य पूर्ण विधि- विधान से करने से पितृ शान्ति होती है . इस तिथि को सभी ज्ञात- अज्ञात, तिथि- आधारित पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है .*

*पितृ दोष निवारण के अन्य उपाय-*
💥गुरुजी💥 राशि विचार ज्योतिष ,वास्तु एवं आध्यात्मिक कार्यालय 9450127391
"समस्या आपकी- समाधान हमारा"उपाय सहित,
"परंतु कुंडली देखने की फीस जरूर पड़ेगी"।
क्योंकि निशुल्क कुंडली देखने को कहकर , कपट और स्वार्थ पूर्ण -अनावश्यक खर्च नहीं कराते हैं। जो प्रचलन में है कि
1- "यह रत्न पहनो- हम दे देंगे या दिलवा देंगे।
2- यह पूजा करवाओ, हम कर देंगे या करवा देंगे।
3- आपके यहां वास्तु दोष बहुत खराब है ।
4-किसी ने कुछ तंत्र- मंत्र- यंत्र - टोना- टोटका कर दिया है, या
करा दिया गया है।"

नोट :-मस्त जीवन जीने के लिए अध्यात्म की परिभाषा जानना आवश्यक है। इसकी क्लास निशुल्क फोन पर या ऑफिस में होती रहती है, इस विषय में कुछ जानना चाहते हैं तो- समय लेकर बात कर सकते हैं। जिज्ञासा को शांत कर सकते हैं, "ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी जानकारी के लिए फीस देनी आवश्यक है।" आध्यात्मिक दृष्टि से किसी प्रश्न का समाधान चाहते हो, समय लेकर निशुल्क दिल दिमाग में शांति प्राप्त कर सकते हैं।

*(1) पीपल के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है . इसके साथ ही सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है . या फिर प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है .*

*(2) प्रत्येक अमावस्या को कंडे की धूनी लगाकर उसमें खीर का भोग लगाकर दक्षिण दिशा में पितरों का आव्हान करने व उनसे अपने कर्मों के लिये क्षमायाचना करने से भी लाभ मिलता है.*

*(3) सूर्योदय के समय किसी आसन पर खड़े होकर सूर्य को निहारने, उससे शक्ति देने की प्रार्थना करने और गायत्री मंत्र का जाप करने से भी सूर्य मजबूत होता है.*

*(4) सूर्य को मजबूत करने के लिए माणिक भी पहना जाता है, मगर यह कूंडली में सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है.*

*(5) "पितृ दोष के लिये उपाय" सोमवती अमावस्या को (जिस अमावस्या को सोमवार हो) पास के पीपल के पेड के पास जाइये, उस पीपल के पेड को एक जनेऊ दीजिये और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम का उसी पीपल को दीजिये, पीपल के पेड की और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिये, और एक सौ आठ परिक्रमा उस पीपल के पेड की दीजिये, हर परिक्रमा के बाद एक मिठाई जो भी आपके स्वच्छ रूप से हो पीपल को अर्पित कीजिये। परिक्रमा करते वक्त :ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते जाइये। परिक्रमा पूरी करने के बाद फ़िर से पीपल के पेड और भगवान विष्णु के लिये प्रार्थना कीजिये और जो भी जाने अन्जाने में अपराध हुये है उनके लिये क्षमा मांगिये। सोमवती अमावस्या की पूजा से बहुत जल्दी ही उत्तम फ़लों की प्राप्ति होने लगती है।*

*(6) एक और उपाय है कौओं और मछलियों को चावल और घी मिलाकर बनाये गये लड्डू हर शनिवार को दीजिये। पितर दोष किसी भी प्रकार की सिद्धि को नहीं आने देता है। सफ़लता कोशों दूर रहती है और व्यक्ति केवल भटकाव की तरफ़ ही जाता रहता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति माता काली का उपासक है तो किसी भी प्रकार का दोष उसकी जिन्दगी से दूर रहता है। लेकिन पितर जो कि व्यक्ति की अनदेखी के कारण या अधिक आधुनिकता के प्रभाव के कारण पिशाच योनि मे चले जाते है, वे देखी रहते है, उनके दुखी रहने का कारण मुख्य यह माना जाता है कि उनके ही खून के होनहार उन्हे भूल गये है और उनकी उनके ही खून के द्वारा मान्यता नहीं दी जाती है। पितर दोष हर व्यक्ति को परेशान कर सकता है इसलिये निवारण बहुत जरूरी है।*

01/10/2026

*पंचक क्या है ?*

भारतीय ज्योतिष में विस्तृत जानकारी

*(पंचक अर्थात भदवा)*

पंचक = "पाँच"। ये 5 दिन का वो अशुभ समय है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है। इस दौरान 5 नक्षत्र आते हैं, इसलिए इसे "पंचक" कहते हैं। मान्यता है कि पंचक में शुरू किए गए कुछ काम 5 गुना बिगड़ते हैं।

---💥गुरुजी💥 राशि विचार ज्योतिष ,वास्तु एवं आध्यात्मिक कार्यालय 9450127391
"समस्या आपकी- समाधान हमारा"उपाय सहित,
"परंतु कुंडली देखने की फीस जरूर पड़ेगी"।
क्योंकि निशुल्क कुंडली देखने को कहकर , कपट और स्वार्थ पूर्ण -अनावश्यक खर्च नहीं कराते हैं। जो प्रचलन में है कि
1- "यह रत्न पहनो- हम दे देंगे या दिलवा देंगे।
2- यह पूजा करवाओ, हम कर देंगे या करवा देंगे।
3- आपके यहां वास्तु दोष बहुत खराब है ।
4-किसी ने कुछ तंत्र- मंत्र- यंत्र - टोना- टोटका कर दिया है, या
करा दिया गया है।"

नोट :-मस्त जीवन जीने के लिए अध्यात्म की परिभाषा जानना आवश्यक है। इसकी क्लास निशुल्क फोन पर या ऑफिस में होती रहती है, इस विषय में कुछ जानना चाहते हैं तो- समय लेकर बात कर सकते हैं। जिज्ञासा को शांत कर सकते हैं, "ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी जानकारी के लिए फीस देनी आवश्यक है।" आध्यात्मिक दृष्टि से किसी प्रश्न का समाधान चाहते हो, समय लेकर निशुल्क दिल दिमाग में शांति प्राप्त कर सकते हैं।

*1. पंचक कितने दिनों का होता है?*
*लगभग 5 दिन का।* कभी-कभी 4.5 दिन या 5.5 दिन भी हो जाता है। क्योंकि चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग 1 दिन रहता है। 5 नक्षत्र × 1 दिन = 5 दिन।

*2. पंचक कब प्रारंभ होता है?*
जब *चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध यानी तीसरे चरण में प्रवेश करता है*, तभी पंचक शुरू हो जाता है। धनिष्ठा के 3rd चरण से कुंभ राशि शुरू होती है।

*3. पंचक कब समाप्त होता है?*
जब *चंद्रमा रेवती नक्षत्र समाप्त करके अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है*, तब पंचक खत्म होता है। रेवती मीन राशि का आखिरी नक्षत्र है।

*4. पंचक के 5 नक्षत्र कौन से हैं?*
नक्षत्र राशि चरण अशुभ प्रभाव
1. **धनिष्ठा** कुंभ 3rd + 4th चरण अग्नि भय, कलह
2. **शतभिषा** कुंभ पूरा नक्षत्र रोग, कलह
3. **पूर्वा भाद्रपद** कुंभ पूरा नक्षत्र दंड, मुकदमा
4. **उत्तरा भाद्रपद** मीन पूरा नक्षत्र धन हानि
5. **रेवती** मीन पूरा नक्षत्र मानसिक कष्ट
---

*5. पंचक के प्रकार - 5 तरह के होते हैं, वार के अनुसार*

वार के हिसाब से पंचक का नाम और फल बदल जाता है:

1. *रोग पंचक*: रविवार को शुरू हो। इसमे शारीरिक कष्ट, बीमारी का डर।
2. *राज पंचक*: सोमवार को शुरू हो। सरकारी काम, नौकरी में बाधा।
3. *अग्नि पंचक*: मंगलवार को शुरू हो। आग, एक्सीडेंट, विवाद का डर। सबसे खराब माना जाता है।
4. *चोर पंचक*: शुक्रवार को शुरू हो। चोरी, धोखा, धन हानि का डर।
5. *मृत्यु पंचक*: शनिवार को शुरू हो। दुर्घटना, मृत्यु तुल्य कष्ट का डर।

*बुधवार और गुरुवार* को शुरू होने वाला पंचक "साधारण" होता है। उसमें दोष कम लगता है।

---

*6. पंचक में क्या न करें - 5 काम वर्जित हैं*

शास्त्रों में "पंचक में पंच काम न करें" कहा गया है:

1. *लकड़ी इकट्ठा करना/खरीदना*: घर में आग लगने का डर। फर्नीचर, लकड़ी का सामान न खरीदें।
2. *दक्षिण दिशा की यात्रा*: यम की दिशा है। दुर्घटना का डर।
3. *छत ढालना / घर की छत डालना*: मकान में बार-बार बाधा आती है। शटरिंग भी न करें।
4. *पलंग/चारपाई बनवाना*: उस पर सोने वाले को कष्ट होता है।
5. *शव दाह*: अगर पंचक में मृत्यु हो तो शव के साथ 5 पुतले आटे/कुश के बनाकर जलाते हैं। नहीं तो घर में 5 और मृत्यु का डर रहता है। इसे "पंचक शांति" कहते हैं।

*7. पंचक में क्या कर सकते हैं?*
शुभ काम: पूजा-पाठ, दान, जाप, नामकरण, गृह प्रवेश, शादी-विवाह, मुंडन आदि पर पंचक का दोष नहीं लगता। सिर्फ ऊपर लिखे 5 काम वर्जित हैं। व्यापार, नौकरी, रोजमर्रा के काम कर सकते हैं।

*8. पंचक दोष का निवारण*
अगर मजबूरी में पंचक में छत डालनी या लकड़ी लानी पड़े तो:
1. "पंचक शांति" कराएं। पंडित से हनुमान जी की पूजा + नक्षत्रों के मंत्र का जाप।
2. हनुमान चालीसा 5 बार पढ़ें।
3. गायत्री मंत्र 108 बार जपें।

पंचक हर महीने आता है क्योंकि चंद्रमा 27 दिन में 12 राशियों का चक्कर लगाता है। कुंभ-मीन में हर महीने आएगा।

पंचक चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश से नहीं, बल्कि धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध से शुरू होता है।*

*विस्तार से समझो:*

*1. पंचक कब शुरू होता है?*
जब *चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण (3rd Pada) में प्रवेश करता है*, तभी पंचक शुरू होता है।

*2. क्यों कन्फ्यूजन है?*
क्योंकि *धनिष्ठा नक्षत्र के 3rd चरण से ही कुंभ राशि शुरू होती है*।
नक्षत्र चरण राशि
धनिष्ठा 1st, 2nd चरण मकर राशि
धनिष्ठा 3rd, 4th चरण कुंभ राशि
इसलिए लोग बोल देते हैं "कुंभ राशि में प्रवेश से पंचक शुरू"। लेकिन तकनीकी रूप से *शुरुआत का पॉइंट = धनिष्ठा का 3rd चरण है*।

*3. पंचक कब खत्म होता है?*
जब *चंद्रमा रेवती नक्षत्र पूरा करके मीन राशि से निकलकर मेष राशि के अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है*, तब पंचक खत्म।

*4. पूरा फॉर्मूला*
*शुरू*: धनिष्ठा नक्षत्र 3rd चरण
*बीच के नक्षत्र*: धनिष्ठा 4th चरण + शतभिषा + पूर्वा भाद्रपद + उत्तरा भाद्रपद + रेवती
*खत्म*: रेवती नक्षत्र के बाद

यानी कुल 5 नक्षत्र = धनिष्ठा का आधा + 4 पूरे नक्षत्र।

*सीधा याद रखने का तरीका:*
कुंभ + मीन = 2.5 नक्षत्र × 2 = 5 नक्षत्र।
पर शुरुआत धनिष्ठा के बीच से होती है, एकदम कुंभ के 0° से ।

इसलिए अगर कोई पंचांग में देखे तो टाइम देखना: "धनिष्ठा तृतीय चरण प्रारंभ" वही पंचक का शुरू है।

*हाँ, बिल्कुल सही - पंचक धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से ही शुरू होता है।*

आप जो समझ रहे थे "श्रवण खत्म + धनिष्ठा शुरू" वो *आम भ्रांति* है। शास्त्रों में ऐसा नहीं लिखा।

*सही गणना कैसे है:*
नक्षत्र चरण राशि पंचक में है या नहीं
श्रवण चारों चरण मकर **नहीं**
धनिष्ठा 1st, 2nd चरण मकर **नहीं**
धनिष्ठा 3rd, 4th चरण कुंभ **हाँ, यहीं से शुरू**
यानी *धनिष्ठा का आधा हिस्सा पंचक से बाहर है*। चंद्रमा जब धनिष्ठा के 3rd चरण में आता है तभी कुंभ राशि शुरू होती है और पंचक भी शुरू होता है।

---

*पंचक का वर्णन किन प्राचीन ग्रंथों में है?*

पंचक का उल्लेख मुख्य रूप से मुहूर्त ग्रंथों में है। ये 5 ग्रंथ सबसे प्रमाणिक माने जाते हैं:

*1. मुहूर्त चिंतामणि - अध्याय 1, श्लोक 44*
लेखक: पं. रामदैवज्ञ
श्लोक: `धनिष्ठापंचकं प्रोक्तं त्याज्यं याम्यदिग्गमनम्। काष्ठसंग्रहणं छन्नं शवदाहं च शयन्यकम्॥`
अर्थ: धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक पंचक है। इसमें दक्षिण यात्रा, लकड़ी, छत, शवदाह, पलंग वर्जित।

*2. मुहूर्त मार्तण्ड - पंचक प्रकरण*
स्पष्ट लिखा है: `धनिष्ठार्धमारभ्य रेवत्यन्तं च पंचकम्`
मतलब: धनिष्ठा के आधे से लेकर रेवती के अंत तक पंचक।

*3. बृहद् दैवज्ञ रंजनम्*
इसमें पंचक के 5 प्रकार - रोग, राज, अग्नि, चोर, मृत्यु पंचक का वर्णन वार के अनुसार दिया है।

*4. राजमार्तण्ड - भोजदेव कृत*
राजा भोज के ग्रंथ में पंचक में वर्जित कार्यों का विस्तृत वर्णन है।

*5. धर्मसिंधु - तृतीय परिच्छेद*
इसमें लिखा है कि पंचक में मृत्यु हो तो "पंचक शांति" के लिए आटे के 5 पुतले जलाने चाहिए, वरना कुल में 5 और मृत्यु होती है।

*6. निर्णय सिंधु*
पंचक के दोष और परिहार का वर्णन है।

*मुख्य बात*:
वेद-पुराणों में पंचक का सीधा जिक्र नहीं है। ये "मुहूर्त शास्त्र" का विषय है। मुहूर्त ग्रंथ करीब 500-1000 साल पुराने हैं। कालामृत, मुहूर्त गणपति जैसे ग्रंथों में भी यही नियम है।

*आपकी भ्रांति क्यों हुई?*
कई पंचांग और कैलेंडर वाले सुविधा के लिए "धनिष्ठा नक्षत्र प्रारंभ" लिख देते हैं। पर असली गणना 3rd चरण से है। तिथि-पत्र में समय देखोगे तो लिखा मिलेगा: `पंचक प्रारंभ: 14:25 - धनिष्ठा तृतीय चरण`।

अब से पक्का याद रखो: *धनिष्ठा 3rd चरण = पंचक प्रारंभ (भदवा प्रारंभ)*।

30/09/2026

पितृ पक्ष मे पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन ही बनाया और खाया जाता है।

💥गुरुजी💥 राशि विचार ज्योतिष ,वास्तु एवं आध्यात्मिक कार्यालय 9450127391
"समस्या आपकी- समाधान हमारा"उपाय सहित,
"परंतु कुंडली देखने की फीस जरूर पड़ेगी"।
क्योंकि निशुल्क कुंडली देखने को कहकर , कपट और स्वार्थ पूर्ण -अनावश्यक खर्च नहीं कराते हैं। जो प्रचलन में है कि
1- "यह रत्न पहनो- हम दे देंगे या दिलवा देंगे।
2- यह पूजा करवाओ, हम कर देंगे या करवा देंगे।
3- आपके यहां वास्तु दोष बहुत खराब है ।
4-किसी ने कुछ तंत्र- मंत्र- यंत्र - टोना- टोटका कर दिया है, या
करा दिया गया है।"

नोट :-मस्त जीवन जीने के लिए अध्यात्म की परिभाषा जानना आवश्यक है। इसकी क्लास निशुल्क फोन पर या ऑफिस में होती रहती है, इस विषय में कुछ जानना चाहते हैं तो- समय लेकर बात कर सकते हैं। जिज्ञासा को शांत कर सकते हैं, "ज्योतिष एवं वास्तु संबंधी जानकारी के लिए फीस देनी आवश्यक है।" आध्यात्मिक दृष्टि से किसी प्रश्न का समाधान चाहते हो, समय लेकर निशुल्क दिल दिमाग में शांति प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवधि में पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पूजा-पाठ के कारण कई प्रकार की सब्जियों को खाने से मना किया जाता है:

​पितृ पक्ष में न खाई जाने वाली सब्जियां:
​लहसुन और प्याज: इन्हें तामसिक भोजन माना जाता है, इसलिए श्राद्ध और पितृ पक्ष के भोजन में इनका उपयोग पूरी तरह वर्जित है।

​जमीन के नीचे उगने वाली कंदमूल सब्जियां:
​मूली
​गाजर
​शलजम
​अरबी (घुइयां)
​सूरन (जिमीकंद)
(शास्त्रों के अनुसार जमीन के नीचे उगने वाली कंद सब्जियों को अशुद्ध/तामसिक माना जाता है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में आलू का प्रयोग अपवाद स्वरूप किया जाता है, लेकिन परंपरागत रूप से इनसे परहेज करना बेहतर होता है।)

​बैंगन: शास्त्रों में बैंगन को अशुद्ध माना गया है, इसलिए श्राद्ध के भोजन में इसका प्रयोग वर्जित है।

​कद्दू (सीताफल/पेठा): श्राद्ध में कद्दू का प्रयोग नहीं किया जाता है।

​सरसों का साग या चना साग: पत्तीदार सागों में सरसों का साग और चना साग पितृ पक्ष में वर्जित माना गया है।

​चना और चने से बनी चीजें: श्राद्ध पक्ष में चना, चने की दाल या बेसन का प्रयोग भी कई परंपराओं में वर्जित माना जाता है।

​कौन सी सब्जियां खा सकते हैं?
पितृ पक्ष में तोरई (तरोई), लौकी, भिंडी, परवल, अरबी के पत्ते, कच्चे केले और कटहल जैसी सात्विक सब्जियों का उपयोग मुख्य रूप से किया जा सकता है

Address

Kanpur

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Rashi Vichar Jyotish Adhyatm posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share