03/08/2026
एक सपने का पुनर्जन्म…
श्री रामकृष्ण निःशुल्क पाठशाला की नई शुरुआत
आज का दिन मेरे जीवन का एक अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय दिन है।
कई वर्षों तक बंद रहने के बाद आज एक बार फिर "श्री रामकृष्ण निःशुल्क पाठशाला" का नया सफर शुरू हुआ।
इस पाठशाला का सपना स्वर्गीय निर्झर कांति भट्टाचार्य जी ने देखा था। वर्ष 2008 में उनके अथक प्रयास, बागआँचड़ा रामकृष्ण-शारदा आश्रम के सहयोग तथा बेलूर मठ के पूजनीय महाराजों के आशीर्वाद से, पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले के शांतिपुर थाना अंतर्गत चर पान पाड़ा गाँव के गरीब एवं वंचित बच्चों के लिए इस निःशुल्क पाठशाला की स्थापना हुई थी। उस समय मुझे उनके साथ रहकर इस पवित्र कार्य में सहयोग करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
चर पान पाड़ा एक नदी से चारों ओर घिरा हुआ, एक छोटे से द्वीप जैसा गाँव है। यहाँ के अधिकांश लोगों की जीविका खेती और मछली पकड़ने पर निर्भर है। आज भी इस गाँव के अधिकांश लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
मैंने अपनी आँखों से देखा है—
साँप के काटने के बाद कई लोग अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देते थे।
कई गर्भवती माताएँ नदी के रास्ते असहनीय पीड़ा झेलती थीं।
अनेक मरीज उचित इलाज के अभाव में बीच रास्ते ही अपनी अंतिम साँस ले लेते थे।
इन दर्दनाक सच्चाइयों ने मुझे हमेशा भीतर से झकझोर दिया।
साल 2020 में हमारे जीवन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस पाठशाला के दो प्रमुख स्तंभ—स्वर्गीय निर्झर कांति भट्टाचार्य जी और स्वर्गीय भोलानाथ घोष जी—हम सबको छोड़कर इस संसार से विदा हो गए। उनके जाने के बाद मेरे लिए अकेले 70–80 बच्चों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी निभाना संभव नहीं रहा। मैंने अनेक लोगों से सहायता माँगी, कई दरवाज़ों पर दस्तक दी, लेकिन कोई रास्ता न मिलने के कारण अत्यंत भारी मन से इस पाठशाला को बंद करना पड़ा।
लेकिन क्या सपने कभी मरते हैं?
पिछले कुछ वर्षों से यह अधूरा दायित्व हर दिन मुझे पुकारता रहा। मुझे हमेशा लगता रहा कि इन बच्चों की मुस्कान, उनका भविष्य और उनकी शिक्षा के प्रति मैं ऋणी हूँ।
आख़िरकार, स्वर्गीय निर्झर कांति भट्टाचार्य जी की पावन स्मृति को समर्पित करते हुए, अपनी सामर्थ्य के अनुसार मैंने एक बार फिर "श्री रामकृष्ण निःशुल्क पाठशाला" की शुरुआत की है।
मुझे पूरा विश्वास है कि आज भी इस दुनिया में ऐसे अनेक अच्छे लोग हैं, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करना चाहते हैं।
आपसे मेरी विनम्र प्रार्थना है—
यदि आप इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना चाहते हैं, यदि आप उनके जीवन में शिक्षा का प्रकाश फैलाना चाहते हैं, तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग का हाथ बढ़ाइए। एक रुपया, दो रुपये या दस रुपये—राशि का महत्व नहीं, बल्कि आपका प्रेम, आपकी करुणा और आपकी भावना हमारे लिए सबसे अधिक मूल्यवान है।
और यदि आप आर्थिक सहायता नहीं कर सकते, तब भी कोई बात नहीं।
एक दिन समय निकालकर हमारे इस छोटे से गाँव में आइए। इन बच्चों से मिलिए, उनसे बातें कीजिए, उनका उत्साह बढ़ाइए और उन्हें बड़े सपने देखने की प्रेरणा दीजिए। हो सकता है कि आपके कुछ प्रेरणादायक शब्द किसी एक बच्चे का पूरा जीवन बदल दें।
आपका प्रेम, आपका आशीर्वाद और आपका सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
आइए, हम सब मिलकर इस गाँव के गरीब बच्चों के हाथों में शिक्षा, संस्कार, मानवता और उज्ज्वल भविष्य का दीप जलाएँ। भगवान श्री रामकृष्ण, माँ शारदा और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलकर हम आने वाली पीढ़ी का उज्ज्वल भविष्य बनाएँ।
🙏 संपर्क पता:
चर पान पाड़ा
शांतिपुर, नदिया, पश्चिम बंगाल – 741404
📞 मोबाइल: 8167415738
आपका छोटा-सा सहयोग किसी एक बच्चे का भविष्य बदल सकता है।
सभी को मेरा सादर प्रणाम एवं हृदय से धन्यवाद।