06/06/2026
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार, नई दिल्ली।
प्रतिलिपि:
माननीय मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
माननीय सांसद श्री राज़ नाथ सिंह जी।
विषय: "वीरान बचपन – हरियाली रहित भारत" अभियान के अंतर्गत बच्चों हेतु पार्कों एवं हरित क्षेत्रों के निर्माण तथा इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किए जाने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि वर्तमान समय में देश के अनेक शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के लिए पर्याप्त पार्क, खेल मैदान एवं हरित क्षेत्र उपलब्ध नहीं हैं। विशेष रूप से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बच्चे खुले वातावरण, प्राकृतिक हरियाली तथा सुरक्षित खेल स्थलों से वंचित होते जा रहे हैं। परिणामस्वरूप उनका शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास प्रभावित हो रहा है।
बचपन जीवन का वह स्वर्णिम काल होता है जिसमें खेल, प्रकृति, मित्रता और रचनात्मक गतिविधियाँ व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला रखती हैं। किंतु आज का बचपन धीरे-धीरे "वीरान बचपन" में परिवर्तित होता जा रहा है, जहाँ बच्चों के पास खेलने के लिए पर्याप्त हरित एवं सुरक्षित सार्वजनिक स्थान उपलब्ध नहीं हैं।
भारत की प्राचीन परंपरा प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक उद्यानों, बगीचों, उपवनों और सार्वजनिक हरित स्थलों की रही है। हमारे पूर्वजों ने गाँवों और नगरों में ऐसे स्थान विकसित किए थे जहाँ बच्चे, बुजुर्ग और परिवार प्रकृति के साथ समय व्यतीत कर सकें। वर्तमान परिस्थितियों में इस परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
अतः मेरा विनम्र अनुरोध है कि—
देशभर में "वीरान बचपन – हरियाली युक्त भारत" नामक राष्ट्रीय अभियान प्रारंभ किया जाए।
प्रत्येक नगर, कस्बे एवं ग्राम पंचायत में उपलब्ध सरकारी अथवा अनुपयोगी सार्वजनिक भूमि को चिन्हित कर बच्चों के पार्क एवं हरित क्षेत्र विकसित किए जाएँ।
प्रत्येक आवासीय क्षेत्र से सुगम दूरी पर कम से कम एक सार्वजनिक पार्क सुनिश्चित किया जाए।
पार्कों में बच्चों के खेल उपकरण, पौधारोपण, खुला व्यायाम क्षेत्र तथा दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएँ विकसित की जाएँ।
इस योजना को केंद्र एवं राज्य सरकारों के सहयोग से चरणबद्ध तरीके से पूरे भारत में लागू किया जाए।
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं विद्यालयों को पार्क संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान से जोड़ा जाए।
मेरा विश्वास है कि यह पहल केवल बच्चों को बेहतर बचपन प्रदान नहीं करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं स्वस्थ भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
अतः आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि इस विषय को राष्ट्रीय जनहित के रूप में स्वीकार करते हुए आवश्यक नीति एवं कार्यवाही करने की कृपा करें।
सादर।
भवदीय,
मानवेन्द्र तिवारी
योगीपुरम, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मोबाइल: __________________
दिनांक: ______5 june2026____________
यह पत्र जनहित एवं राष्ट्रीय स्तर की मांग के रूप में तैयार किया गया है और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा सांसद महोदय को भेजा जा सकता है।