Herbsayurmed Pharmaceuticals

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Herbsayurmed Pharmaceuticals Herbsayurmed Pharmaceuticals is a trusted Ayurvedic wellness brand established in 1998 and officially registered in 2011.

We are committed to delivering pure, effective Ayurvedic solutions for modern lifestyle problems.

🌿 INDIAN'S Giloy Ras with TulsiDiscover the traditional goodness of Giloy and Tulsi with INDIAN'S Giloy Ras — a herbal A...
29/09/2026

🌿 INDIAN'S Giloy Ras with Tulsi

Discover the traditional goodness of Giloy and Tulsi with INDIAN'S Giloy Ras — a herbal Ayurvedic formulation designed to support immune health and everyday wellness.

✨ Supports immune health
✨ Supports overall wellness
✨ Made with Giloy & Tulsi
✨ Herbal formulation inspired by traditional Ayurveda
✨ A natural choice for everyday wellness

Nature’s goodness, thoughtfully brought into your daily wellness routine.

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🌿 INDIAN'S Ajmodh Ras ExtractDiscover the traditional goodness of Ajmodh Vati in INDIAN'S Ajmodh Ras Extract — a herbal ...
29/09/2026

🌿 INDIAN'S Ajmodh Ras Extract

Discover the traditional goodness of Ajmodh Vati in INDIAN'S Ajmodh Ras Extract — a herbal formulation crafted for everyday kidney and urinary wellness.

✨ Traditionally inspired Ayurvedic formulation
✨ Supports kidney health
✨ Herbal support for urinary wellness
✨ Made with natural herbal ingredients
✨ A convenient choice for Ayurvedic healthcare

Herbal wellness inspired by traditional Indian formulations, made for modern lifestyles.

Explore INDIAN'S Ajmodh Ras Extract by Herbsayurmed Pharmaceuticals

26/09/2026

काली मिर्च, शरीर में सर्दी, जकड़न
सा कफ होने पर राहत प्रदान करती है।
इसके सेवन से खांसी में भी आराम मिलता है।
सर्दी के कारण नाक बहने पर काली मिर्च
का सेवन करें, राहत मिलेगी। कफ, छाती में
जकड़ जाने पर काली मिर्च का सेवन करने से
राहत मिलती है। ज्यादा सर्दी लग जाने
पर काली मिर्च और लहसुन को मिलाकर
खाएं, तुंरत राहत मिलेगी

25/09/2026

इंजायटी -(एक फेंसी सा वर्ड एक नया टर्म )आखिर कौन सी बीमारी हैं यह कहां से आयी,शरीर के कौन से भाग में कहाँ पर होती हैं
जी हां दोस्तों आज से 10-15 वर्ष पहले हमने सुना भी नहीं था इन्जायटी के बारे और आज बडे बूढ़े तो छोड़ो 8,9 साल के बच्चे भी,कम पढ़े लिखें लोग भी डॉक्टर भी कहते सुने गए हैं मुझे / तुम्हे इंजायटी हैं
अब सवाल यह आता हैं कि इससे प्रेक्टिकली कैसे बचा कैसे जाय
मैंने इस बारे में मेडिकल बुक्स में,ऑनलाइन बहुत स्टडी की एक डॉक्टर से पूछा यह कहाँ पर होती हैं हाथ में पैर में या शरीर के कौन से पार्ट होती हैं और डॉक्टर ने कहा यह हाथ पैर में नहीं,सिर में होती हैं,मैंने सवाल किया सिर में कहां पर लेफ्ट एम एस फेयर में या राइट एम एस फेयर में होती हैंडॉक्टर बोले नहीं यह सिर में नहीं दिमाग़ में होती हैं तब समझ में आया कि यह बीमारी शरीर किसी पार्ट में नहीं ब्रेन में नहीं माइंड में होती हैं,सोच में होती हैं
जिस प्रकार हमारे गुरु जी बताते विज्ञान बताती हैं कि शरीर में 72000/ नस -नाड़िया होती हैं नस तो वह होती हैं जिनमे खून सरकुलेट होता हैं यह बाहर से दिखाई भी देती हैं नाड़ियां वह होती हैं जिनमे इथेर युक्त ऑक्सीजन सरकुलेट होती हैं इन 7200 नस,नड़ियों में से 9 प्रमुख व 3 अति प्रमुख पिंगला,इड़ा,सुशुमना नाड़िया होती हैं
होती इसी प्रकार ब्रेन और माइंड अलग अलग होते हैं
आखिर क्योंऔर क्या होती इन्जायटी - ज़ब कोई व्यक्ति अपने आप क़ो आज के वातावरण से मिला नहीं पाता वह अपने आप क़ो अपनी ही नजरो में छोटा देखने लगता हैं वह डरता हैं कि मेरे साथ ऐसा न हो जाय वैसा न हो जाय मेरे बाद मेरे परिवार का मेरे बिजनेस का क्या होगा अगर मैं मर गया तो.अपनी हर सोच में तो लगा देता हैं उक्त प्रॉब्लम्ब क़ो कोप -अप करने उनका समाधान खोजने उससे स्ट्रगल करने उससे लड़ने की बजाय अपने हथियार डाल देता है तो उसे इंजयटी हो जाती है धीरे धीरे वह स्ट्रेस में रहने लगता है फिर उसके ब्रेन में डिप्रेशन के रूप में एक खतरनाख बीमारी बन जाती हैं
समाधान - इसका समाधान दवाइया नहीं(किसी ख़ास स्थिति क़ो छोड़कर )योगा,द्वारा विभिन्न आसनो द्वारा किसी योग गुरु के सानिध्य में अपनी विल पावर क़ो बढ़ा कर आसानी से किया जा सकता है आज कल की भागती दौड़ती,बदलती जिंदगी में ज़ब तक हम जीवित है उक्त परेशनीयों का डर तो आएगा ही लेकिन उक्त प्रॉब्लम्ब सबके साथ है केवल आपके साथ नहीं हादसे सबके साथ होंगे होते है केवल दूसरों के साथ नहीं हमारे साथ भी हो सकते है यह सब तो हमारे मरने के बाद ही बंद होंगे इसलिए हमें इन परेशनीयों के आगे घुटने टेकने की बजाय अपने आप क़ो बदलना होगा हमें कोप अप (तख्त प्लट )करना होगा अपने योग गुरु के सानिध्य में स्वर,स्वांस विज्ञान के इन आसनो द्वारा ( पहले कपाल भारती,उसके बाद अनुलोम विलोम,उसके बाद ब्रह्मानीक उसके बाद उज्जैई या उदगीत (लेकिन ध्यान रहे यह सब आसन आप योग गुरु के कहें अनुसार करे )लास्ट में कुम्भक पूरा एक चक्र करके अपने आप क़ोअंदर से देखना है अपने आप क़ो अंदर से मज़बूत करना होगा.तभी हम इस इंजयटी कोई बीमारी नहीं है इसे स्ट्रेस,डिप्रेशन रूपी बीमारी बनने से रोक सकते है..

23/09/2026

दूध पीने के नियम --
बोर्नविटा , होर्लिक्स के विज्ञापनों के
चलते माताओं के मन में यह बैठ जाता है
की बच्चों को ये सब डाल के दो कप दूध
पिला दिया बस हो गया . चाहे बच्चे दूध
पसंद करे ना करे , उलटी करे , वे किसी तरह
ये पिला के ही दम लेती है . फिर
भी बच्चों में केशियम की कमी , लम्बाई
ना बढना , इत्यादि समस्याएँ देखने में
आती है .आयुर्वेद के अनुसार दूध पिने के कुछ
नियम है ---
- सुबह सिर्फ काढ़े के साथ दूध
लिया जा सकता है .
- दोपहर में छाछ पीना चाहिए .
दही की प्रकृति गर्म होती है ;
जबकि छाछ की ठंडी .
- रात में दूध पीना चाहिए पर बिना शकर
के ; हो सके तो गाय का घी १- २ चम्मच
दाल के ले . दूध की अपनी प्राकृतिक
मिठास होती है वो हम शकर डाल देने के
कारण अनुभव ही नहीं कर पाते .
- एक बार बच्चें अन्य भोजन लेना शुरू कर दे
जैसे रोटी , चावल , सब्जियां तब उन्हें गेंहूँ ,
चावल और सब्जियों में मौजूद केल्शियम
प्राप्त होने लगता है . अब वे केल्शियम के
लिए सिर्फ दूध पर निर्भर नहीं .
- कपालभाती प्राणायाम और नस्य लेने से
बेहतर केशियम एब्ज़ोर्प्शन होता है और
केल्शियम , आयरन और विटामिन्स
की कमी नहीं हो सकती साथ ही बेहतर
शारीरिक और मानसिक विकास होगा .
- दूध के साथ कभी भी नमकीन या खट्टे
पदार्थ ना ले .त्वचा विकार हो सकते है .
- बोर्नविटा , कॉम्प्लान या होर्लिक्स
किसी भी प्राकृतिक आहार से अच्छे
नहीं हो सकते . इनके लुभावने
विज्ञापनों का कभी भरोसा मत करिए .
बच्चों को खूब चने , दाने , सत्तू , मिक्स्ड आटे
के लड्डू खिलाइए
- प्रयत्न करे की देशी गाय का दूध ले .
- जर्सी या दोगली गाय से भैंस का दूध
बेहतर है .
- दही अगर खट्टा हो गया हो तो भी दूध
और दही ना मिलाये , खीर और कढ़ी एक
साथ ना खाए . खीर के साथ
नामकी पदार्थ ना खाए .
- अधजमे दही का सेवन ना करे .
- चावल में दूध के साथ नमक ना डाले .
- सूप में ,आटा भिगोने के लिए , दूध इस्तेमाल
ना करे .
- द्विदल यानी की दालों के साथ
दही का सेवन विरुद्ध आहार
माना जाता है . अगर करना ही पड़े
तो दही को हिंग जीरा की बघार दे कर
उसकी प्रकृति बदल लें .
- रात में दही या छाछ का सेवन ना करे .

अनियमित महावारी से बचने के लिये घरेलू उपचारhome remedies for IRREGULAR PERIODSजब किसी महिला को एक या दो महीने में केवल ए...
22/09/2026

अनियमित महावारी से बचने के लिये घरेलू उपचार
home remedies for IRREGULAR PERIODS

जब किसी महिला को एक या दो महीने में केवल एक बार पीरियड्स होने लगे या फिर
एक महीने में दो-तीन बार
हो तो इसका मतलब है कि वह अनियमित महावारी से ग्रस्त है। यह उस महिला के
लिये बहुत ही सीरियस समस्या है। इस समस्या से आगे चल कर नई शादी शुदा लड़कियां आसानी से मां नहीं बन पाती। इसके अलावा कई और भी स्वास्थ्य संबन्धी समस्याएं सामने आ
सकती हैं। जितनी जल्दी हो सके इस समस्या से छुटकारा पाना चाहिये और हो सके तो प्राकृतिक इलाज ही करवाना चाहिये। घरेलू उपचार इस
अनियमित महावारी से निपटने के लिये बहुत ही अच्छा माना जाता है। एक बात जो आपको ध्यान में रखनी है वह यह है
कि आपको यह समस्या क्यों हुई है, इसका पता भी लगाएं। अनियमित महावारी के कई कारण हो सकते हैं जैसे,

पौष्टिक आहार ना लेना, जंक फूड का अधिक सेवन, स्मोकिंग, शराब, तनाव, वजन का तुरंत बढना या घटना, कीमोथैरेपी,
प्रसव, गर्भपात या स्तनपान आदि।

चलिये जानते हैं कि घरेलू इलाज से किस तरह से
अनयिमित महावारी ठीक
किया जा सकता है।
ऐसे करें प्राकृतिक उपचार -

-मसालेदार और गर्म खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और ऐसे
अन्य जंक फूड खाने से बचे क्योंकि इसमें पोषक
तत्वों की कमी होती है। संतुलित और पौष्टिक आहार खाया जाना चाहिये। फल,
अनाज, सब्जियां, मीट, दाल और डेयरी प्रोडक्ट जरुर खाएं।

-वजन कम करने के चक्कर में यदि आप नाश्ता या एक टाइम का खाना छोड़ देती हैं तो भी पीरियड्स पर असर पडे़गा।
आपको तीन टाइम भोजन जरुर करना चाहिये।

- धनिया या सौंफ के बीज का काढा रोज दिन में एक बार पियें। इन सामग्रियों को रात भर पानी में भिगो कर सुबह पानी छान कर खा लेना चाहिये।

-रात को नीम की छाल को पानी में भिगो दीजिये। दूसरे दिन छाल को पानी से
छान लें और इस पानी को दिन में 3 बार पीयें। इससे पीरियड्स समय पर होने लगेगा।

-आप अनियमित महावारी को गाजर और चुकन्दर के रस को पी कर भी ठीक कर
सकती हैं। हर दिन 3 महीने तक इनके जूस को पीजिये और लाभ उठाइये।
आप नींबू का रस और दालचीनी का पाउडर एक साथ मिला कर उसे रोजाना पी सकती हैं।

-दिन में दो बार एक चम्मच तिल का पाउडर खाइये।

-आप घर पर ऐसा सलाद बना कर खा सकती हैं जिसमें 2 चम्मच भिगोई हुई मेथी मिली हो।

-दिन में एक कप बटर मिल्क
यानी मठ्ठा पीजिये, इसमें
पानी भी मिलाइये।

-अंगूर का जूस भी पीरियड को नियमित कर सकता है।

-कच्चा पपीता और एलोवेरा का जूस पीजिये।

20/09/2026

यदि दिनभर में 25 से 100 ग्राम तक मेथी दाने किसी भी रूप में सेवन कर लिया जाए तो रक्त शुगर की मात्रा के साथ बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। रोगी राहत महसूस करता रहता है। पीसे हुए मेथी दाने 50 से 60 ग्राम मात्रा को एक ग्लास पानी में भिगो दें। 12 घंटे बाद छानकर पीएं। इस तरह से सुबह-शाम रोज दो बार पीते रहने से मधुमेह में आराम मिलता है। इसके अलावा मेथी के पत्तों की सब्जी भी खाएं।

_______________ _______- प्याज काट कर रखने से यह वातावरण मेंमौजूद बैक्टीरिया सोख लेता है.- कान दर्द : प्याज गर्म राख में...
13/09/2026

_______________ _______
- प्याज काट कर रखने से यह वातावरण में
मौजूद बैक्टीरिया सोख लेता है.
- कान दर्द : प्याज गर्म राख में भुनकर
उसका पानी निचोड़कर कान में डाले। दर्द
में तुरंत लाभ होगा
- मोतिया बिन्द : प्याज का रस एक
तोला, असली शहद एक तोला,
भीमसेनी कपूर तीन माशे सबको खूब
मिलाकर लगाने से मोतिया का असर
नहीं होता।
- पेट के कीड़े-प्याज का कच्चा रस पिलाने से
पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हें
- बारूद से जलने पर- यदि शरीर का कोई
भाग बारूद से जल जाये तो उस स्थान पर
प्याज का रस लगाने से लाभ होता है।
- कब्ज दूर करता है .
- गले की खराश मिटाए- यदि आप सर्दी,
कफ या खराश से पीडित हैं तो आप ताजे
प्याज का रस पीजिये। इमसें गुड या फिर
शहद मिलाया जा सकता है।
- ब्लीडिंग समस्या दूर करे- नाक से खून बह
रहा हो तो कच्चा प्याज काट कर सूघ
लीजिये।
- पाइल्स की समस्या में सफेद प्याज
खाना शुरु कर दें। - मधुमेह करे कंट्रोल-
कच्चा प्याज खाया जाए तो यह शरीर में
इंसुलिन उत्पन्न करेगा।
- दिल की सुरक्षा- कच्चा प्याज हाई ब्लड
प्रेशर को नार्मल करता है और बंद खून
की धमनियों को खोलता है जिससे दिल
की कोई बीमारी नहीं होती।
- कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करे- इसमें मिथाइल
सल्फाइड और अमीनो एसिड होता है
जो कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटा कर
अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाता है।
- कैंसर सेल की ग्रोथ रोके- प्याज में सल्फर
तत्व अधिक होते हैं। सल्फर शरीर को पेट,
कोलोन, ब्रेस्ट, फेफडे और प्रोस्टेट कैंसर से
बचाता है।
- एनीमिया ठीक करे- प्याज काटते वक्त
आंखों से आंसू टपकते हैं, ऐसा प्याज में मौजूद
सल्फर की वजह से होता है। इस सल्फर में एक
तेल मौजूद होता है
जो कि एनीमिया को ठीक करने में सहायक
होता है। खाना पकाते वक्त यही सल्फर जल
जाता है, तो ऐसे में कच्चा प्याज खाइये।
- बाल गिरने की समस्या से निजात पाने के
लिए प्याज बहुत ही असरकारी है। गिरते
हुए बालों के स्थान पर प्याज का रस रगडने
से बाल गिरना बंद हो जाएंगे। इसके
अलावा लेप लगाने पर काले बाल उगने शुरू
हो जाते हैं।
- पथरी की शिकायत में प्याज बहुत
उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में
मिलाकर शरबत बनाकर पीने से
पथरी की से निजात मिलता है। प्याज
का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-
आप कटकर बाहर निकल जाती है।
- गठिया के लिए – गठिया में प्याज बहुत

THE TRADITION OF AJMODH.Rooted in Ayurveda. Inspired by nature.Introducing INDIAN'S Ajmodh Ras — bringing the traditiona...
09/09/2026

THE TRADITION OF AJMODH.

Rooted in Ayurveda. Inspired by nature.

Introducing INDIAN'S Ajmodh Ras — bringing the traditional goodness of Ajmodh into a modern wellness routine.

Traditionally valued for supporting:
✓ Helps in Breaking kidney stones naturally
✓ Urinary tract relief
✓ Sugar & uric acid control
✓ 100% natural herbs

A timeless Ayurvedic ingredient, thoughtfully presented for today.

Discover the tradition. Explore Ajmodh Ras.

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