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मेरा स्वास्थ मेरी जिम्मेदारी
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तो दवा को भोजन नहीं, भोजन को दवा बनाना सीखें स्वयं के डॉक्टर बने, स्वयं के स्वास्थ्य के लिए इतना तो करें

गुलामी का अंत, आरोग्य का अनंत! ⛓️💥 अब आप बनेंगे अपने भाग्य के निर्माता!​📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 69...
10/05/2026

गुलामी का अंत, आरोग्य का अनंत! ⛓️💥
अब आप बनेंगे अपने भाग्य के निर्माता!

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 69-70)

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 36


प्रभुजी, डॉ. एडवर्ड डेवी अध्याय 3 का समापन एक ऐसी 'विजय' के साथ करते हैं जो केवल शरीर की नहीं, बल्कि 'आत्मा' की जीत है।

​1. मन की स्वतंत्रता (Mental Freedom):

"जब आप सुबह का नाश्ता छोड़ते हैं, तो आप केवल एक भोजन नहीं छोड़ते, बल्कि आप अपनी उन 'मानसिक जंजीरों' को तोड़ देते हैं जो आपको वर्षों से बीमार बनाए हुए थीं।" जीभ पर नियंत्रण ही जीवन पर नियंत्रण की पहली शर्त है।

​2. प्रकृति का अंतिम फैसला (Nature's Verdict):

प्रकृति कभी आधा काम नहीं करती। यदि आप 'नो ब्रेकफास्ट' को पूर्ण समर्पण से अपनाते हैं, तो प्रकृति आपके शरीर को 'नया जैसा' (As Good as New) बना देती है। यह शरीर का पूर्ण पुनर्जन्म है।

​3. स्वास्थ्य का महा-सूत्र:

आरोग्य बाहर से नहीं आता, यह तो आपके भीतर के 'अत्यधिक भोजन' के परदे को हटाने से प्रकट होता है।
​निष्कर्ष: अध्याय 3 की यह यात्रा हमें सिखाती है कि 'स्वतंत्रता' ही 'आरोग्य' है।

क्या आप इस 'मानसिक गुलामी' से आज़ाद होने के लिए तैयार हैं?
यदि हाँ, तो कमेंट में "विजय" लिखें और इस क्रांति का हिस्सा बनें! 👇

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उम्र को थामें, प्राण-शक्त्ति को बढ़ाएं! ⏳ क्या आप अपना 'आयु बैंक बैलेंस' बेवजह खर्च कर रहे हैं?​📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान कित...
09/05/2026

उम्र को थामें, प्राण-शक्त्ति को बढ़ाएं! ⏳
क्या आप अपना 'आयु बैंक बैलेंस' बेवजह खर्च कर रहे हैं?

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 67-68)
📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 35

डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 67-68 पर बुढ़ापे और दीर्घायु के उस रहस्य को उजागर करते हैं जिसे समझना हर साधक के लिए अनिवार्य है।

​1. आपका 'प्राण-शक्त्ति' बैंक बैलेंस:

हमारी ऊर्जा एक बैंक बैलेंस की तरह है। जब हम बार-बार खाते हैं, तो हम अपनी उम्र की 'पूंजी' पाचन में खर्च कर देते हैं। नाश्ता छोड़ना वास्तव में इस पूंजी को बचाना है ताकि आप लंबी उम्र तक युवा बने रहें।

​2. बुढ़ापा उम्र नहीं, 'गंदगी' है:

"बुढ़ापा उम्र बढ़ने से नहीं, बल्कि शरीर के भीतर कचरा (Toxins) जमा होने से आता है।" जब पेट को आराम मिलता है, तो शरीर अपनी कोशिकाओं (Cells) को फिर से 'नया' बनाने लगता है। इसे ही असली कायाकल्प कहते हैं।

​3. अजेय शरीर का निर्माण:

जो अपनी भूख पर विजय पा लेता है, उसका शरीर रोगों के लिए अजेय हो जाता है। प्राण-शक्त्ति जब पाचन से मुक्त्त होती है, तो वह 'अमृत' बनकर पूरे शरीर में बहती है।

क्या आप भी अपनी उम्र को थामना चाहते हैं?
आज ही अपनी 'प्राण-शक्त्ति' को बचाने का संकल्प लें।

कमेंट में लिखें "आरोग्य" यदि आप भी इस कायाकल्प यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं! 👇

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“सच्चा आरोग्य वहाँ शुरू होता है…जहाँ बिना कारण मुस्कान आने लगे।"अध्याय 3 का महा-निष्कर्ष: आरोग्य का अंतिम फल! केवल रोगमु...
09/05/2026

“सच्चा आरोग्य वहाँ शुरू होता है…
जहाँ बिना कारण मुस्कान आने लगे।"

अध्याय 3 का महा-निष्कर्ष:

आरोग्य का अंतिम फल!
केवल रोगमुक्त्ति नहीं, परम आनंद की प्राप्ति!

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 65-66)

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 34



प्रभुजी, डॉ. एडवर्ड डेवी के इस अध्याय का समापन हमें उस सत्य की ओर ले जाता है जहाँ शरीर केवल 'मशीन' नहीं, बल्कि 'मंदिर' बन जाता है।

​अध्याय 3 के समापन सूत्र (पृष्ठ 65-66):

​इच्छाशक्त्ति का प्रचंड उदय: जब आप अपनी जीभ को नियंत्रित करते हैं, तो आपका 'आत्मबल' जागृत होता है।

"भूख पर विजय" ही "सफलता" का पहला प्रमाण है।

​बिना कारण मुस्कुराहट: "जब शरीर का कण-कण शुद्ध होता है, तब चेहरा बिना किसी क्रीम के चमकता है और मन बिना किसी कारण के मुस्कुराता है।" यह आंतरिक प्रसन्नता का रसायन है।

​चरम शांति: खाली पेट रहने पर मस्तिष्क और स्वभाव में वह धैर्य आ जाता है जो हज़ारों सालों की साधना का फल है।

​निष्कर्ष: 'मानस आरोग्य' का असली लक्ष्य केवल वजन घटाना नहीं है, बल्कि उस 'भीतरी प्रकाश' को जगाना है जिसे हम अक्सर भोजन के बोझ तले दबा देते हैं। अध्याय 3 हमें एक नए जन्म का अहसास कराता है।

क्या आपने कभी अपने भीतर उस शांति को महसूस किया है जब पेट हल्का हो और मन एकदम शांत?

यह आपके अध्याय 3 की सफलता का पहला कदम है। अपने अनुभव कमेंट में साझा करें और इस 'दृश्य क्रांति' का हिस्सा बनें!
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“जब पेट खाली…तब दिमाग सुपर-कंप्यूटर बनता है।”अद्भुत रहस्य: पेट खाली, तो दिमाग शक्त्तिशाली! 🧠✨ नाश्ता छोड़ें, बुद्धिमत्ता ...
08/05/2026

“जब पेट खाली…
तब दिमाग सुपर-कंप्यूटर बनता है।”

अद्भुत रहस्य: पेट खाली, तो दिमाग शक्त्तिशाली! 🧠✨ नाश्ता छोड़ें, बुद्धिमत्ता जगाएं!

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 63-64)

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 33

हम सोचते हैं कि सुबह का नाश्ता हमें 'दिमागी ताकत' देता है, लेकिन डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 63-64 पर एक क्रांतिकारी सच उजागर करते हैं, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या "हम दिमाग को सुस्त बना रहे हैं?"

​धुंध बनाम स्पष्टता:

"सुबह का भोजन आपके दिमाग पर एक 'धुंध' (Fog) की तरह काम करता है। जब आप पेट को आराम देते हैं, तो आपका मस्तिष्क सुपर-कंप्यूटर की तरह काम करने लगता है।"

​अध्याय 3 के दिमागी सूत्र (पृष्ठ 63-64):

​रॉयल ब्लड सप्लाई: मस्तिष्क शरीर का सबसे 'वीआईपी' अंग है। भारी नाश्ता करने से शरीर का रक्त और ऊर्जा 'पेट' की ओर खिंच जाती है, जिससे मस्तिष्क को वह 'रॉयल' सप्लाई नहीं मिल पाती जो उसे एकाग्रता के लिए चाहिए।

​स्मृति और एकाग्रता: डॉ. डेवी उन बौद्धिक लोगों के अनुभव साझा करते हैं जिन्होंने बताया कि खाली पेट रहने पर उनकी ग्रहण शक्ति, निर्णय क्षमता और स्मृति कई गुना बढ़ गई।

​गट-ब्रेन संतुलन: जब पेट शांत होता है, तो नसें (Nerves) शांत होती हैं, जिससे विचार स्पष्ट और गहरे होते हैं। नाश्ते की सुस्ती दिमाग को ऊर्जा 'देती' नहीं, बल्कि पाचन के लिए ऊर्जा 'चुराती' है।

​निष्कर्ष: सुपर-इंटेलिजेंस का मार्ग मन की पुरानी आदतों को तोड़कर, मस्तिष्क को 'फुल पावर' देने से शुरू होता है।

क्या आपने कभी 'नो ब्रेकफास्ट' के दौरान मानसिक स्पष्टता या काम में अधिक फोकस महसूस किया है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में लिखकर औरों को प्रेरित करें! 👇

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शरीर को मत काटो… बीमारी की जड़ काटो।अद्भुत रहस्य: आपके भीतर बैठा है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर! 🩺✨ बस उसे काम करने का मौक...
07/05/2026

शरीर को मत काटो… बीमारी की जड़ काटो।

अद्भुत रहस्य: आपके भीतर बैठा है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर! 🩺✨ बस उसे काम करने का मौका दें!

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 61-62)

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 32



हम बीमारियों के लिए बाहर डॉक्टरों और दवाइयों के चक्कर काटते हैं, लेकिन डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 61-62 पर बताते हैं कि असली इलाज आपके भीतर है।

​कैसे काम करता है आपका आंतरिक डॉक्टर?

जब आप सुबह का नाश्ता बंद करते हैं, तो पाचन में खर्च होने वाली भारी ऊर्जा (Energy) अचानक 'फ्री' हो जाती है।
यह मुक्त्त हुई ऊर्जा ही आपका 'इंटरनल डॉक्टर' है।

​अध्याय 3 के क्रांतिकारी सूत्र:

​प्राकृतिक सर्जरी: जब बाहर से खाना नहीं मिलता, तो शरीर की प्राण-शक्त्ति भीतर जमा 'कचरे', 'गांठों' और 'विषैले तत्वों' को जलाकर ईंधन बनाना शुरू कर देती है।

​मरम्मत की शक्त्ति: खाली पेट रहने के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम उन अंगों की मरम्मत (Repair) करता है जो सालों से बीमार थे।

​उत्तेजना नहीं, शक्त्ति: असली ताकत भोजन की 'उत्तेजना' में नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक 'शुद्धि' में है।

​निष्कर्ष: "जब आप सुबह का नाश्ता छोड़ते हैं, तब आपका 'इंटरनल डॉक्टर' सक्रिय होता है, जो पुरानी बीमारियों की जड़ें खोदकर उन्हें बाहर फेंक देता है।"

क्या आपने कभी महसूस किया है कि उपवास के दौरान आपकी इंद्रियां अधिक तेज और मन अधिक शांत हो जाता है?

यह आपके आंतरिक डॉक्टर के सक्रिय होने का लक्षण है। अपने अनुभव कमेंट में साझा करें! 👇

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Big shout out to my newest top fans! 💎 Chandulal Savalia, Satyaprakash RaiDrop a comment to welcome them to our communit...
06/05/2026

Big shout out to my newest top fans! 💎 Chandulal Savalia, Satyaprakash Rai

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“क्या आप आदत के गुलाम हैं…या शरीर की जरूरत समझते हैं?”कड़वा सच: क्या आप सुबह 'भूख' के कारण खाते हैं या 'मजबूरी' में? ⛓️🍔 ...
06/05/2026

“क्या आप आदत के गुलाम हैं…
या शरीर की जरूरत समझते हैं?”

कड़वा सच: क्या आप सुबह 'भूख' के कारण खाते हैं या 'मजबूरी' में? ⛓️🍔
आइए, गुलाम नहीं, मालिक बनें!

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 59-60)

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 31

[ VS. ]

अध्याय 3 के अंतिम पन्नों (59-60) में डॉ. डेवी एक बड़ा खुलासा करते हैं जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि "भोजन को 'कमाना' क्यों ज़रूरी है?"

​क्या आप मानसिक गुलामी में हैं?

डॉ. डेवी बताते हैं कि सुबह उठते ही जो हमें 'भूख' महसूस होती है, वह शरीर की 'ज़रूरत' नहीं है। वह केवल मन की एक पुरानी 'मानसिक कंडीशनिंग' ( ) है। वर्षों से सुबह खाने की आदत के कारण मन हमें मजबूर करता है।

​अध्याय 3 (पृष्ठ 59-60) के व्यावहारिक सूत्र:

​श्रम ही कमाई है: शरीर ने जब तक कोई #शारीरिक या #मानसिक श्रम न किया हो, उसे भोजन देने का अर्थ है उस पर 'कर्ज' चढ़ाना। पहले श्रम (ऊर्जा का व्यय) करें, फिर भोजन (ऊर्जा का संचय) करें।

​आदतों की गुलामी छोड़ें: "जब आप #सुबह_का_नाश्ता छोड़ते हैं, तो आप केवल भोजन नहीं छोड़ रहे, बल्कि आप अपनी उन पुरानी आदतों की गुलामी छोड़ रहे हैं जो आपको बीमार बनाए रखती हैं।"

​स्थायी लाभ: जो साधक इस गुलामी से आज़ाद होते हैं,
डॉ. डेवी के अनुसार, वे ' #त्वचा_में_चमक', ' #आंखों_में_रोशनी' और ' #बुद्धि_में_तीव्रता' जैसे दिव्य लाभ प्राप्त करते हैं।

​निष्कर्ष: #आरोग्य का मार्ग मन की पुरानी #जंजीरों को तोड़कर, शरीर की वास्तविक ज़रूरतों को सुनने से शुरू होता है।

आज सुबह जब आपने खाया, तो क्या वह वास्तविक भूख थी या बस 'समय हो गया' इसलिए खाया?

अपने मन के इस 'कोड' को पहचानें और कमेंट में साझा करें! 👇

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क्या आपकी जीभ पर सफ़ेद परत है? सावधान! यह आपके भीतर की गंदगी का 'लाइव रिपोर्ट कार्ड' है! 👅🚩📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | ...
05/05/2026

क्या आपकी जीभ पर सफ़ेद परत है?
सावधान! यह आपके भीतर की गंदगी का 'लाइव रिपोर्ट कार्ड' है! 👅🚩

📖 नो ब्रेकफास्ट प्लान किताब | अध्याय 3 (पृष्ठ 57-58)

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 29

[THE MIRROR OF HEALTH]

डॉ. एडवर्ड डेवी पृष्ठ 57-58 पर 'आरोग्य के अंतिम संकेत' के बारे में बताते हैं। यदि आप जानना चाहते हैं कि आपका शरीर भीतर से कितना साफ हुआ है, तो बस सुबह उठकर आइने में अपनी जीभ देखें।

#जीभ क्या कहती है?

सफ़ेद/पीली परत: मतलब सफाई अभियान अभी चालू है। आपके शरीर के भीतर कचरा अभी भी जल रहा है।

गुलाबी और साफ जीभ: यह 'पूर्ण आरोग्य' का प्रमाण है! जिस दिन जीभ प्राकृतिक रूप से गुलाबी हो जाए, समझ लीजिए बीमारियों ने विदा ले ली है।

अध्याय 3 (पृष्ठ 57-58) के गुप्त रहस्य:

1. #मुँह का #स्वाद: जब बिना कुछ खाए मुँह का स्वाद मीठा और ताज़ा रहने लगे, तो समझें कि आपकी 'प्राण-शक्त्ति' ने कायाकल्प (Rejuvenation) पूरा कर लिया है।

2. सच्ची भूख का उदय: पूर्ण शुद्धि के बाद लगने वाली भूख एक 'दिव्य पुकार' है। तब खाया गया सादा भोजन भी अमृत की तरह शरीर को फौलाद बनाता है।

3. #कायाकल्प: जब पाचन शांत होता है, तो प्राण-शक्त्ति पुरानी से पुरानी असाध्य बीमारियों की जड़ें काटना शुरू कर देती है।

निष्कर्ष: आरोग्य कोई बाहरी #दवा नहीं, बल्कि आपके भीतर की सफाई का परिणाम है।

अभी आइना देखें! आपकी जीभ क्या कह रही है? क्या उस पर परत है या वह साफ है? कमेंट में बताएं, हम आपको बताएंगे कि आपकी शुद्धि के अगले चरण क्या होने चाहिए! 👇

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 #सावधान! आपकी  #जीभ आपके स्वास्थ्य का 'कोड' बता रही है —क्या आप इसे  #पढ़ पा रहे हैं? 👅 दर्पण की तरह साफ़ सच!📖 विशेष स्वा...
05/05/2026

#सावधान! आपकी #जीभ आपके स्वास्थ्य का 'कोड' बता रही है —क्या आप इसे #पढ़ पा रहे हैं? 👅 दर्पण की तरह साफ़ सच!

📖 विशेष स्वास्थ्य श्रृंखला | मानस आरोग्य जागरूकता

📍 मानस आरोग्य पोस्ट नंबर: 30

[THE TONGUE REVEAL]

हम अक्सर बीमारियों के लिए बड़ी-बड़ी जांच करवाते हैं, लेकिन प्रकृति ने हमारे शरीर के भीतर ही एक 'डायग्नोस्टिक लैब' दी है — हमारी जीभ।
जीभ का रंग और बनावट आपके पाचन, पोषण और भीतरी शुद्धि का असली आईना है।

अपनी जीभ जांचें और समझें शरीर का संकेत:

1. सफ़ेद जीभ (White Tongue): यह निर्जलीकरण (Dehydration) या पेट में अत्यधिक गंदगी/फंगल संक्रमण का संकेत है।
'नो ब्रेकफास्ट प्लान' के दौरान यह परत दर्शाती है कि सफाई जारी है।

2. लाल जीभ (Red Tongue): विटामिन B12, फोलिक एसिड की कमी या शरीर में बढ़ी हुई आंतरिक गर्मी (Inflammation) को दर्शाती है।

3. पीली जीभ (Yellow Tongue): यह सीधे तौर पर लिवर, पित्त (Bile) की गड़बड़ी या पाचन तंत्र के कमजोर होने का इशारा है।

4. नीली या बैंगनी जीभ: यह रक्त्त संचार में गड़बड़ी या ऑक्सीजन की कमी का गंभीर संकेत हो सकता है।

5. दरारें वाली जीभ: यह शरीर में पानी की भारी कमी या किडनी संबंधी विकारों की ओर इशारा करती है।

निष्कर्ष: आरोग्य का मार्ग दवा की दुकान से नहीं, बल्कि शरीर के इन संकेतों को समझकर 'संयम और शुद्धि' अपनाने से होकर गुजरता है।

आज सुबह आपने आइने में अपनी जीभ का रंग कैसा देखा? क्या वह गुलाबी और साफ है? अपनी स्थिति कमेंट में साझा करें, ताकि हम आपको प्राकृतिक समाधान की दिशा दिखा सकें! 👇

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05/05/2026

Manas Arogya

04/05/2026

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Shantam Avenue
Surat
394326

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