08/09/2026
दुनिया का कोई भी लाइलाज होगी पूर्णतया निशुल्क रूप से जब तक रोग मुक्त करने की व्यवस्था नहीं होगी तब तक आयुर्वेद का कुछ नहीं होना है
यह चाहे सरकार करें
समाज करें
चाहे कोई संस्था करें
तब उसमें से कुछ डाटा निकलेंगे
उन डेटाओं के आधार पर ही दुनिया हमें पूछेगी
वरना हमारा कहीं कोई अस्तित्व नहीं है
बड़े-बड़े कार्यक्रम हो जाते हैं
इस कार्यक्रम में सबसे पहले और बड़ी वाक्य
है कि यहां नि:शुल्क है
वरना तो शुल्क का लेना-देना खाना पीना करके ही लोग मौज उड़ाते हैं
आयुर्वेद का कहीं कुछ भला नहीं होता है
मेरा भी मन तो कर रहा है आने का पर क्या करूं कोई बात मेरे मन के हिसाब से मुझे कहीं दिखती नहीं है
इसलिए समय खराब करना ही लगता है
देखो फिर भी कोशिश करता हूं
आभी सकता हूं
बेटे से कहता हूं टिकट करा दे
सब व्यवसायीकरण हो गया है
तीन जगह आयुर्वेद रुक रहा है
व्यापारी शुद्ध दवाई देने को तैयार नहीं है
वैद्य संशोधन की बात ही नहीं करता है
रोगी संयम के विषय में कुछ भी जानने मानने को तैयार नहीं है
पहले लोग आते थे रोग का कारण पूछते थे
और परहेज पूछते थे
आज कारण का किसी से कोई मतलब नहीं है
खाने के लिए पूछता है
बोल क्या खाऊं तुझे खाऊं या मुझे खाऊं
वैद्य का संशोधन से कोई मतलब नहीं है
केवल दवाइयां कंपनियों की बेचनी है
कंपनियों को दवाई के शुद्ध स्वरूप से कोई मतलब नहीं है केवल बेचनी है
कमीशन देना है
आनंद करना है
कोई भी रोगी किसी भी रोग से रोग मुक्त होकर स्वस्थ जीवन जीने की परंपरा खत्म ही हो गई है
हमारी दो परंपराएं थी
विकार प्रशमन
और
स्वास्थ्य रक्षण
इससे हमकोसों दूर भाग गए हैं
केवल पैसा पैदा करना इधर-उधर की बातें करना और मौज उड़ाना रह गया है
क्या किया जाए
क्या होगा आयुर्वेद का
नाम तो मिट ही गया है
कहीं कोई अस्तित्व की बात ही नहीं हो रही है
कोई भी सज्जन कभी भी किसी भी समय मेरे मोबाइल नंबर 63950633 20एवं 94564 04916 पर मुझसे संपर्क कर मेरी पीड़ा के हिसाब से सहयोग में खड़े हो सकते हैं तो मैं उनका बड़ा आभारी रहूंगा
और
वह मेरी बात को समझ कर मेरे साथ काम कर सकें
विश्व आयुर्वेद परिषद जैसा संगठन बनाकर भी मुझे चैन और शांति नहीं मिल रही है
RAV का भी सदस्य हूं
सुश्रुत संहिता में मैंने सदस्यता पहले बैच में ही ली है और शायद मेरा सदस्य क्रमांक भी एक है 1993-95
डल्हण निदान स्थान पूरे का हिंदी अनुवाद किया है जो संसार में पहली कृति माना जाता है
मैं शिष्य ही बहुत हूं
गुरु बनने की तो मेरी हिम्मत भी नहीं है
ना RAVभी मुझे बना सकती है
मैंने अपनी सदस्यता लेने के लिए भी मना किया था मुझे जो जिज्ञासा थी वह पूरी नहीं हुई
मैंने सुझाव भी दिया था कि इन परिस्थितियों में कुछ नहीं हो सकता है
RAV के अपने अंतरंग चिकित्सालय हों
जहां गुरु और शिष्यों को पूर्ण कालिक रूप में रखा जाए
ला इलाज रोगियों को ठीक करवाया जाए तभी कुछ हो सकता है
आज RAVके कार्यक्रम कब हो जाते हैं कैसे हो जाते हैं मुझे सूचना तक नहीं मिलती है
आना-जाना व्यय पत्र मिलना तो अलग बात है
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महासम्मेलन का भी संरक्षक सदस्य हूं
विद्यापीठ का स्नातक हूं
वहां भी केवल बिल्डिंग बनाकर किराए पर उठाना ही अपना धर्म हो गया है
अपने लक्ष्य पर कहीं कोई नहीं लग रहा है
वहां भी कोई कार्यक्रम कब हो जाता है कब कार्यकारिणी बुलाई जाती है क्या प्रस्ताव होता है क्या उसे पर कार्रवाई होती है
कोई भी सक्रियता नहीं है
अब तो मुझे कोई सूचना भी नहीं मिलती है
हालांक मेरी कोई जाने में रुचि नहीं है
सब केवल फोटो सम्मेलन बनकर रह गए हैं
हां एक बात और बता दूं वहां भी रजिस्ट्रेशन शुल्क लगता है बिना पैसे के कहीं कोई प्रवेश नहीं है
केवल खाना पीना मौज उड़ाना रह गया है
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अभी पिछले समय अहमदाबाद ठक्कर जी से भी भेंट हुई थी
उनकी अनेकों प्रशंसाओं के बाद भी मेरे प्रश्न का उनके पास उत्तर नहीं था
आज कितनी एंबुलेंस आयुर्वेद से लौट रही है कि
जगह नहीं मिली
हम अपने आप में प्रशंसा में कुछ भी कह सकते हैं
अगर अपना अस्तित्व ढूंढेंगे तो कहीं कोई अस्तित्व है ही नहीं आयुर्वेद शब्द नष्ट हो गया आयुष बन गया है
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इसमें भी हमें पूरी जान लगानी चाहिए
आयुर्वेद विभाग आयुर्वेद मंत्री और एलोपैथी की बराबर बजट संपूर्ण ढांचा बराबर खड़ा करके और आयुर्वेद को राष्ट्र की ओर विश्व की चिकित्सा पद्धति घोषित करके ही रहेंगे
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तब कुछ माना जाए सबसे पहली बार वाजपेई जी के चरणों का वंदन करते हुए में उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं
उन्होंने पहली बार नि:शुल्क शब्द का प्रयोग करके
एक पताका फहराई है
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उन शुल्क संग्रह कर्ता महापुरुषों के चरणों में प्रार्थना करता हूं कि आप पैसा इकट्ठा करिए
सब नि:शुल्क करिए
विद्वानों को बुलाइए
शिविर लगाइए
और
दुनिया के सामने यह कह कर दीजिए
उत्तर इकट्ठे करके दीजिए
कि इस रोगी को यह रूप था
हमने इसको निरोग कर दिया
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अभी हमारा एक देदीप्यमान सितारा
वैद्य बालेन्दु प्रकाश चला गया
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उसका हमें बहुत कष्ट है
उनसे भी फोन पर लंबी बात हुई थी
मैं उनके देहरादून केंद्र पर एक दो बार गया भी था उन्होंने भी अपने को सीमित कर लिया था
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आयुर्वेद को बहुत बड़ा रोग होता है कि
वैद्य या तो डॉक्टर बन जाता है या पंडित बन जाता है
वैद्य नहीं रहता है
वाजपेई जी को भी मैं पंडित बनने के लिए मना करता हूं
जब वह भागवत कथा करवाते हैं
मेरे कहने से उन्होंने चरक पारायण आदि करवाये
वह साधुवाद के पात्र हैं
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कुल मिलाकर 100 बेड का अस्पताल नाभ के स्तर का जब तक खड़ा नहीं होगा तब तक कुछ नहीं होना है
और बिना किसी प्रतिबंध और संकोच
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और लाइलाज
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और कानून के लाइलाज रोगियों को ही आधुनिक रिपोर्ट पर हमने ठीक करके दिखा दें
जैसे कैंसर किडनी का हम कोई नाम लेते हैं तो कानून हमारे ऊपर आ जाता है
हम केवल लाइलाज शब्द का प्रयोग करते हुए कुछ करके दिखाओ
क्या हम डाटा इकट्ठे कर रहे हैं
दुनिया को दिखा रहे हैं
या
अपनी पीठ ठोकते रहे
कहते रहे कि
हमने खड़े-खड़े सर जोड़ दिया था
आज उंगली जोड़कर नहीं दिखा सकते हैं
यह मजाक अब दुनिया में चलने वाला नहीं है
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केहरि कूदो कूप में
बल कर कर थक जाए
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जब तक की इंडोर हॉस्पिटल 100 बेड का पूर्णतया नि:शुल्क आयुर्वेद सिद्धांतों पंचकर्म आदिपर आधारित लाइलाज रोगियों को ठीक करके डाटा इकट्ठा करने का नहीं बनेगा तब तक कुछ नहीं होगा
क्या करूं कैसे करूं कोई बात समझ में नहीं आ रही है
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जमीन के अतिरिक्त 10 करोड़ रूपया बनाने में लगेगा
और
फिर एक करोड़ रूपया प्रतिमाह कम से काम चलाने को चाहिए
जमीन मेरे पास है यदि कोई संस्था संगठन सामाजिक सहयोगी कुछ करना चाहे तो मैं तैयार हूं
6395063320/9456404916
देखो कोई बड़ा काम नहीं है इतने बड़े-बड़े भंडारे यात्राएं धार्मिक कार्यक्रम चल रहे हैं केवल खड़े होने और निकलने की बात है देने वाले कम नहीं पड़ेंगे