आशीर्वाद न्यूरो-साइकियाट्रिक एवं मानसिक चिकित्सा केंद्र Aashirwad Medical

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आशीर्वाद न्यूरो-साइकियाट्रिक एवं मानसिक चिकित्सा केंद्र Aashirwad Medical Hospital for Persons with Mental and Behavioral problems and Drug abuse

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा हैजो हर दिन दूसरों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाता है,लेकिन खुद के भीतर अंधेरे स...
16/10/2025

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है
जो हर दिन दूसरों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाता है,
लेकिन खुद के भीतर अंधेरे से जूझ रहा होता है?
' डॉ नोलन रयान विलियम्स ' यह नाम गूगल पर सर्च करिएगा। जो जानकारी मिलेगी वह आपको चौंका सकती है, बशर्ते आपके भीतर मानवीय संवेदनाएं जिंदा हों।
दुनिया के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक और न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. नोलन आर. विलियम्स अब हमारे बीच नहीं रहे। वह अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में कार्यरत थे और उन्होंने डिप्रेशन (अवसाद) और आत्मघाती विचारों (suicidal ideation) के इलाज के लिए अत्याधुनिक तकनीकें विकसित कीं।
उनकी टीम द्वारा विकसित SAINT प्रोटोकॉल (Stanford Accelerated Intelligent Neuromodulation Therapy) ने उन लोगों में नई उम्मीद जगाई थी, जिन पर दवाएँ या पारंपरिक थेरेपी असर नहीं कर रही थीं।
लेकिन विडम्बना देखिए — जो व्यक्ति दिन-रात दूसरों को अवसाद से बाहर निकालने में लगा था, उसने स्वयं आत्महत्या कर ली।
एक ऐसा व्यक्ति जिसने दूसरों को “जीने की वजह” दी, खुद अपने जीवन से हार गया।
यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं है — यह घटना हमें एक गहरा सबक देती है कि मानसिक बीमारी किसी को नहीं छोड़ती।
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💔 डिप्रेशन — एक अदृश्य युद्ध
डिप्रेशन एक “कमज़ोरी” नहीं, बल्कि मस्तिष्क की बीमारी है —
जो सोचने, महसूस करने और निर्णय लेने की क्षमता को धीरे-धीरे कुंद कर देती है।
कई बार बाहर से व्यक्ति मुस्कुराता हुआ दिखता है, काम करता है, समाज में सम्मानित है,
लेकिन भीतर उसका मन एक गहरे अंधकार, निराशा और थकान से जूझ रहा होता है।
डॉ. विलियम्स का निधन हमें याद दिलाता है कि डिप्रेशन केवल आम लोगों तक सीमित नहीं है।
यह डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, नेताओं — किसी पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसको फर्क नहीं पड़ता कि आपका ओहदा और सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति क्या है।
उन लोगों में तो और अक्सर, जो दूसरों को मदद देने में सबसे आगे होते हैं, वे स्वयं अपने दर्द को सबसे ज़्यादा छिपाते हैं।
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⚠️ आत्महत्या – मौत नहीं, मुक्ति की पुकार
आत्महत्या करने वाला व्यक्ति वास्तव में “मरना” नहीं चाहता —
वह अपने दर्द से मुक्त होना चाहता है।
जब कोई यह कदम उठाता है, तो वह असहायता, अकेलेपन और निराशा की पराकाष्ठा पर होता है।
उसे लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा — और यहीं हमें समाज के रूप में उसकी मदद करनी होती है।
हमें यह समझना होगा कि आत्महत्या “कायरता या साहस” का प्रश्न नहीं है —
यह मन की पीड़ा का सहनशक्ति की सीमा तक पहुंच जाने का परिणाम है।
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💬 हमें क्या करना चाहिए?
हमें यह सीखना होगा कि “सुनना” कभी-कभी “बचाना” बन सकता है।
1. मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें।
जितना हम बात करेंगे, उतनी जल्दी कलंक (stigma) टूटेगा।
2. अपने आस-पास के लोगों पर ध्यान दें।
जो व्यक्ति सामान्य से अलग व्यवहार कर रहा हो — चुप, उदास, या आत्ममंथन में खोया — उसके पास बैठिए।
3. मदद माँगना कमजोरी नहीं है।
जैसे हम बुखार या दर्द में डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही मन के दर्द में मनोचिकित्सक के पास जाना बिल्कुल सामान्य है।
4. डॉक्टर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स का भी ध्यान रखें।
वे दूसरों की पीड़ा में इतना खो जाते हैं कि अपनी मानसिक थकान को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
डॉ. विलियम्स की कहानी हमें यही सिखाती है कि हीलर को भी हीलिंग की ज़रूरत होती है।
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🌱 एक सच्चा संकल्प
हम सबको यह प्रण लेना चाहिए कि —
हम मानसिक बीमारी को “कमज़ोरी” नहीं मानेंगे।
हम दूसरों को सुनने और सहारा देने की संस्कृति विकसित करेंगे।
हम अपने परिवार, दोस्तों, विद्यार्थियों और सहकर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य की संवेदना बढ़ाएँगे।
और यदि कभी कोई व्यक्ति संघर्ष कर रहा हो, तो हम उसे यह महसूस कराएँगे कि वह अकेला नहीं है।
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🕯️ डॉ. नोलन आर. विलियम्स का जाना मनोचिकित्सा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है,
लेकिन उनका जीवन हमें यह याद दिलाता रहेगा कि
मानसिक स्वास्थ्य केवल इलाज का विषय नहीं, बल्कि करुणा, समझ और मानवता का प्रश्न है।
यदि आपको भी डिप्रेशन या किसी भी मानसिक समस्या के लिए सहायता चाहिए तो हमसे संपर्क कर सकते हैं -
डॉ जे के वर्मा एम डी
न्यूरो साइकियाट्रिस्ट एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ
आशीर्वाद मेडिकल सेंटर
टांडा रोड पटेल नगर अकबरपुर
अम्बेडकर नगर उ प्र
मोबाइल नंबर: 7007051257, 9792132927

10/09/2025

आज आशीर्वाद मेडिकल सेंटर पर हमारी फार्मेसी की बहुत ही जिम्मेदार सदस्य अमरावती का जन्मदिन समस्त स्टाफ के साथ मनाया गया। आपको उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं अमरावती..

ट्रेजेडी ऑफ़ कॉमन्स और हमारी सामाजिक विफलताएं कल्पना कीजिए की सरकार ने एक नया नया पार्क बनवाया है और उसका सुंदर रखरखाव स...
01/09/2025

ट्रेजेडी ऑफ़ कॉमन्स और हमारी सामाजिक विफलताएं

कल्पना कीजिए की सरकार ने एक नया नया पार्क बनवाया है और उसका सुंदर रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड लगाया गया है” यहाँ पर कूड़ा फेंकना मना है”। कुछ दिन सब बढ़िया से चलता है फिर एक दिन एक परिवार वहाँ घूमने आता है और वहाँ बच्चे अपने चिप्स के पैकेट वहीं कोने में धीरे से फेंक देते हैं, जबकि कुछ दूर पर ही कूड़ेदान भी था । कुछ देर बाद कोई और गुजरता है तो वही पैकेट पर अपना गुटखा थूक देता है । शाम तक वहाँ ठीक ठाक कूड़ा इकट्ठा हो जाता है। कुछ दिन ऐसे ही चलता है। सफ़ाई वाले भी ठीक से नहीं कम करते और कुछ महीने बीतते बीतते उस सुंदर पार्क के कोने कूड़ेदान और पीकदान में बदल चुके होते हैं । अब उधर से मुकरते हुए बदबू आती है क्यूंकि कुछ लोग मौका देखकर पेशाब कर अपना भी योगदान दे देते हैं। इस तरह से अच्छे खड़े पार्क का सत्यानाश हो चुका होता है।

इस काम में सबसे बड़ी बात है की इसमें हर आदमी यही सोचता है की मेरे काम से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता । सिर्फ़ एक पैकेट फेंकने या एक बार थूकने से इतने बड़े पार्क पर कोई असर कहाँ पड़ेगा । पर सबकी थोड़ी बेवक़ूफ़ी और स्वार्थ के कारण एक बड़े सार्वजनिक सम्पत्ति का भयंकर नुक़सान कर दिया जाता है । अब वह परिवार भी वहाँ पर नहीं बैठ सकता जो चिप्स का पैकेट फेंका था या जो एक बार थूका था ।

ऐसा ही पैटर्न आप सार्वजनिक संपत्तियों और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग में देख सकते हैं। फुटपाथ पर जब आरके दुकानदार थोड़ा सा अतिक्रमण करता है तो उससे कुछ नहीं बिगड़ता पर जब बहुत सारे लोग वही करते हैं तो फुटपाथ का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और कोई उसका उपयोग नहीं कर पाता।

जब एक घर में नल बिना प्रयोजन के खुला रहता है तो कितना ही पानी ख़राब हो जाता है। जब एक पूरा शहर ऐसा करता है तो उस क्षेत्र में ही भूजल का स्तर नीचे चला जाता है।

जब एक किसान पराली जलाता है तो उसका प्रभाव नगण्य होता है जब सब लोग ऐसा ही करते हैं तो वायु प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेना दूभर हो जाता है।

जब रेड लाइट या रेलवे क्रासिंग पर एक आदमी ग़लत साइड से निकलता है तो कुछ नहीं फ़र्क़ पड़ता पर जब उसके पीछे हर आदमी ऐसा ही करने लगता है तो घंटों लंबा जाम लग जाता है।

इस तरह के स्वार्थपूर्ण व्यवहार की परिकल्पना इकोलॉजी के संदर्भ में दिया गया था जिसे “ट्रेजेडी ऑफ़ कॉमन्स “ कहते हैं । इसमें यह कहा जाता है अलग अलग व्यक्ति स्वार्थों के वशीभूत होकर ग़लत कार्यों को करते हैं और सम्पूर्ण संसाधन का दोहन इस तरह से कर लेते हैं कि वह किसी के भी उपयोग के लायक नहीं रहता है ।

परंतु देखा जाए तो यह थ्योरी सिर्फ़ इकोलॉजी यानी परिस्थितिकी ही नहीं जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में लोगों के व्यवहार के बारे में सही बात कहती है जिनमें सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग लोग व्यक्तिगत ग़लत करने लगते हैं ।

अब लोगों को ज़िम्मेदार कैसे बनाया जाए ?
इसका जवाब है प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही । जब लोग निगरानी में रहते हैं तो ज़्यादा ज़िम्मेदार दिखते हैं। ऐसा जीवन के कुछ क्षेत्रों में किया जाये तो धीरे धीरे लोग अन्य क्षेत्रों में भी सही व्यवहार करने लगते हैं।

जैसे हम और आप यहाँ ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं परंतु किसी बड़े शहर में जाकर सब सही से करते हैं या फिर किसी दूसरे देश में जाकर बिल्कुल सभ्य बन जाते हैं । यह माइंडसेट भी धीरे धीरे विकसित होगा, बस सबको थोड़ा थोड़ा प्रयास करना होगा।

धन्यवाद

किसी भी मानसिक समस्या, नशानुक्ति या सेक्स संबंधित समस्या हो तो हमसे संपर्क कर सकते हैं-

डॉ जे के वर्मा एम डी

न्यूरो- साइकियाट्रिस्ट एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ
आशीर्वाद मेडिकल सेंटर
टांडा रोड पटेल नगर अकबरपुर
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आशीर्वाद मेडिकल सेंटर की महत्वपूर्ण सदस्य तबस्सुम का जन्मदिन समस्त स्टाफ के साथ मनाया गया। आप अपने जीवन में आगे बढ़ें और...
30/08/2025

आशीर्वाद मेडिकल सेंटर की महत्वपूर्ण सदस्य तबस्सुम का जन्मदिन समस्त स्टाफ के साथ मनाया गया। आप अपने जीवन में आगे बढ़ें और सदा प्रसन्न रहें, इसी कामना के साथ.....

आज आशीर्वाद मेडिकल सेंटर पर हमारी फार्मेसी की बहुत ही जिम्मेदार सदस्य रीतू का जन्मदिन समस्त स्टाफ के साथ मनाया गया। आपको...
29/08/2025

आज आशीर्वाद मेडिकल सेंटर पर हमारी फार्मेसी की बहुत ही जिम्मेदार सदस्य रीतू का जन्मदिन समस्त स्टाफ के साथ मनाया गया। आपको उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं रीतू...

प्रसन्नता, आनंद और जीवन का उद्देश्य( Pleasure, Happiness and Purpose of Life)सामान्यतः प्रसन्नता और आनंद को हम समान ही स...
30/07/2025

प्रसन्नता, आनंद और जीवन का उद्देश्य( Pleasure, Happiness and Purpose of Life)

सामान्यतः प्रसन्नता और आनंद को हम समान ही समझते हैं, जैसे कि हम प्रसन्न हैं मतलब हम आनंद में हैं। परन्तु इन दोनों शब्दों के भावार्थ में एक आधारभूत अंतर है। अंग्रेजी में इनको हम Pleasure और Happiness कह सकते हैं, तब ज्यादा आसान होगा समझना।

Pleasure या प्रसन्नता एक स्थिति है जो कि किसी खास वस्तु या विचार या मनोस्थिति द्वारा उत्पन्न हुई है। जैसे कि आपको देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया या आज बॉस ने मेरे कम को सराहा तो मुझे प्रसन्नता महसूस हुई। यह प्रसन्नता सदा किसी वजह से आती है और वजह खत्म होने के बाद यह खत्म हो जाती है। वस्तुतः प्रसन्नता प्रायः क्षणभंगुर होती है। यही इसकी सबसे बड़ी खामी भी है।

इसके विपरीत आनंद या Happiness स्वयं में एक मनोस्थिति है जिसमें आप स्वयं में आनंदित और संतुष्ट महसूस करते हैं। इसके लिए किसी बाहरी उत्प्रेरक की आवश्यकता नहीं होती है। इसी को महात्मा बुद्ध enlightenment कहते हैं। जब आप आनन्द में होते हैं तो भी आप दुखी या अप्रसन्न हो सकते हैं परन्तु वे आपकी मनोस्थिति को बदल नहीं पाएंगे और उनका असर ख़त्म होने पर आप सामान्य हो जाएंगे यानि आनंदित।

प्रसन्नता आनंद का एक छोटा सा भाग होता है पर आनंद उससे कहीं आगे की मनोवृत्ति होती है।वास्तव में आनंद के दो हिस्से होते हैं, एक हिस्सा प्रसन्नता (Pleasure)वाला है और एक हिस्सा होता है जो यह महसूस करवाता है कि मैने अपना जीवन अच्छे से जिया (Life lived well) है। पहले वाले को अंग्रेजी में Hedonia और दूसरे वाले को Eudaimonia कहते हैं। बिना Eudamonia के Hedonia बहुत ही कम समय तक रह सकता है। अगर प्रसन्नता के पीछे अच्छी जिंदगी जी गई वाला एहसास नहीं रहेगा तो उसका असर ख़त्म होते देर नहीं लगेगी।

इसका दैनिक जीवन में क्या महत्व हो सकता है। आजकल हमारा समाज और संसार Hedonia के पीछे भाग रहा है। वह रोज कुछ ऐसा करता है जिससे प्रसन्नता मिल जाए। नई चीजें खरीदना, नए दोस्त बनाना, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना और हर साधारण से साधारण बात को पोस्ट करना आदि। लेकिन यह कुछ समय के लिए ही रहता है, क्योंकि Pleausure या Hedonia का स्वभाव ही है आना और खत्म हो जाना।

आज हमको जरूरत है आनन्द यानि Happiness या Eudaimonia की। लेकिन जो गुण अच्छा होता है वह दुर्लभ भी होता है। तो उसको प्राप्त करने लिए मेहनत तो करने पड़ेगी। छोटे छोटे Pleasure को त्याग करने की आदत डालनी होगी। जीवन ने अनुशासन लाना पड़ेगा, खाने- पीने में अनुशासन, रिश्तों में अनुशासन, शारीरिक और मानसिक श्रम में अनुशासन, और सबसे ज़रूरी बात जीवन में उद्देश्य यानी Purpose को ढूंढ कर लाना होगा। Purpose ही वह जादुई चाबी है जिससे आनंद के खजाने का ताला खुल सकता है। हमारे जीवन का उद्देश्य जितना स्पष्ट और समाज से जुड़ा होगा, उतना ही आनंद की प्राप्ति हो सकेगी। इसका आपके धन धान्य, रुतबा, नौकरी, व्यापार, राजनीतिक कद से की लेना देना नहीं है। तो अगर आपको जीवन में संतुष्ट और खुश रहना है तो अपने जीवन का उद्देश्य ऐसा बनाइए जिसमें आप और आपका समाज दोनों लाभान्वित हों। जो कार्य बिना स्वयं का लाभ के किए जाते हैं वे ही असली खुशी और संतुष्टि देते हैं। आप जितना ही पद प्रतिष्ठा और पैसे के पीछे भाग रहे हैं, जीवन आपसे पीछे छूटता जा रहा है।
इसलिए ठहरिए, खुद को टटोलिए और खुश रहने के लिए कुछ करिए।।

आखिर में, किसी भी तरह के तनाव या जीवन में मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं -

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