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Treatment for Acute and Chronic diseases, Hormonal disorders like (Thyroid,PCOD, Infertility, Diabetes ), Joint pain,Skin disease ( Urticaria, Psoriasis, Eczema, Fungal), Hemorrhoid etc

16/07/2026

कास (Cough) आयुर्वेद में कास रोग कहलाता है। यह मुख्यतः वात, पित्त और कफ दोषों के असंतुलन के कारण होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में सूखी या बलगम वाली खाँसी, गले में खराश, छाती में भारीपन और बार-बार खाँसी आना शामिल हैं। आयुर्वेद में उपचार दोषानुसार किया जाता है, जिसमें अग्नि सुधारना, कफ का शमन या निष्कासन तथा वासा, यष्टिमधु, पिप्पली और तुलसी जैसी औषधियों का उपयोग किया जाता है।

14/07/2026

Bronchial Asthma को आयुर्वेद में तमक श्वास (Tamak Shwasa) कहा जाता है। यह मुख्यतः वात और कफ दोष के असंतुलन से होता है। कफ श्वास मार्ग (airways) में रुकावट पैदा करता है और वात सांस लेने में कठिनाई बढ़ाता है।

02/07/2026

अगर आपके जोड़ों में दर्द, सूजन या जकड़न रहती है, तो आयुर्वेद में शल्लाकी एक महत्वपूर्ण औषधि मानी जाती है। शल्लाकी, जिसे Boswellia serrata भी कहा जाता है, में पाए जाने वाले Boswellic acids सूजन को कम करने में मदद करते हैं और जोड़ों की गतिशीलता (mobility) को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों में भी उपयोग किया जाता है। …..Takshvi medi healthcare

16/06/2026

TAkSHVI MEDI HEALTHCARE ….
शतावरी चूर्ण आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण रसायन औषधि है, जिसका उपयोग विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। यह रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौरान हार्मोनल संतुलन बनाए रखने, गर्मी के दौरे (hot flashes), चिड़चिड़ापन और कमजोरी जैसी समस्याओं में सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त यह शरीर को पोषण प्रदान करने, शक्ति बढ़ाने तथा समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। इसे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दूध या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।

11/06/2026

सितोपलादि चूर्ण आयुर्वेद का एक प्रसिद्ध औषधीय योग है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से खांसी, जुकाम, गले की खराश, कफ विकारों और श्वसन तंत्र की समस्याओं में किया जाता है। यह कफ को कम करने, गले को आराम देने तथा श्वसन तंत्र की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। इसके प्रमुख घटकों में मिश्री, वंशलोचन, पिप्पली, इलायची और दालचीनी शामिल हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन देने और श्वसन स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।

03/06/2026

पुनर्नवा आयुर्वेद में यकृत (लिवर) के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण औषधि मानी जाती है। इसके शोथहर (सूजन कम करने वाले) और मूत्रल गुण शरीर से अतिरिक्त द्रव एवं विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार पुनर्नवा लिवर की कार्यक्षमता को सहयोग देने, सूजन को कम करने तथा पाचन एवं चयापचय को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इसका सेवन सदैव योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

01/06/2026

यकृत (लिवर) रोगों में आयुर्वेद संतुलित आहार-विहार, पाचन शक्ति को सुधारने तथा यकृत की कार्यक्षमता को सहयोग देने पर बल देता है। हल्का, ताज़ा और सुपाच्य भोजन लें, तैलीय, मसालेदार एवं मद्यपान से परहेज़ करें। पर्याप्त जल सेवन, नियमित दिनचर्या और उचित विश्राम लाभकारी होते हैं। आयुर्वेदिक औषधियाँ एवं उपचार रोगी की प्रकृति, रोग की अवस्था तथा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ही लेने चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर यकृत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। — Dr. Pooja

19/05/2026

महिलाओं में low haemoglobin यानी एनीमिया को आयुर्वेद में प्रायः “पांडु रोग” माना जाता है, जिसमें शरीर में कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना, चेहरा पीला पड़ना और बाल झड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार संतुलित आहार, सही दिनचर्या और कुछ लौह युक्त औषधियां haemoglobin बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं। भोजन में गुड़, भुना चना, अनार, चुकंदर, गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल, खजूर, किशमिश और आंवला शामिल करना लाभकारी होता है, क्योंकि आंवला और नींबू जैसे Vitamin C स्रोत iron absorption बढ़ाते हैं। आयुर्वेद में Punarnava Mandur, Navayas Lauh, Dhatri Lauh और Lohasava जैसी औषधियां चिकित्सकीय सलाह से दी जाती हैं। साथ ही भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे iron का absorption कम हो सकता है।

18/05/2026

15/05/2026

Avipattikar Churna एक पित्तशामक आयुर्वेदिक formulation है, जो hyperacidity, acid reflux में उपयोगी माना जाता है; जबकि Ajmodadi Churna एक दीपनीय-पाचन चूर्ण है, जो gastritis,indigestion, flatulence एवं abdominal bloating में सहायक होता है।

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