15/10/2026
AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*जन्म शताब्दी पुस्तक माला*
गृहस्थ जीवन: आत्मविकास और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग
गृहस्थाश्रम में सब प्रकार के कर्तव्य पालन करने का उत्तम सुयोग्य पाया जाता है। इस आश्रम में ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सब प्रकार के अधिकारी व्यक्ति अपना कर्तव्य पालन करते हुये अहंभाव का प्रसार कर सकते हैं। निम्न अधिकारी लोग उच्च अधिकारियों के सुसंग में आकर अपने अहंता के प्रसार के साथ, उनकी अहंता के प्रसार की तुलना करके अपने को उन्नति कर सकते हैं। इसी स्थान में ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, शूद्र, पिता-पुत्र, पति-पत्नि, भाई-बहिन, स्वामि-सेवक, मित्र आदि के सत्संग में आकर सब विषयों में अहंता का प्रसार कर सकते हैं।
क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV . #अध्यात्म #जीवनज्ञान #रिश्ते #आत्मविकास
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