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Ojas Ojas is a wellness startup whose mission is to spread spirituality and uplift society.

Ojas provides physical and emotional healing services such as Prana chikitsa and yoga-medication to people as well as teaches this technique to new students.

15/10/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*जन्म शताब्दी पुस्तक माला*
गृहस्थ जीवन: आत्मविकास और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग
गृहस्थाश्रम में सब प्रकार के कर्तव्य पालन करने का उत्तम सुयोग्य पाया जाता है। इस आश्रम में ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सब प्रकार के अधिकारी व्यक्ति अपना कर्तव्य पालन करते हुये अहंभाव का प्रसार कर सकते हैं। निम्न अधिकारी लोग उच्च अधिकारियों के सुसंग में आकर अपने अहंता के प्रसार के साथ, उनकी अहंता के प्रसार की तुलना करके अपने को उन्नति कर सकते हैं। इसी स्थान में ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, शूद्र, पिता-पुत्र, पति-पत्नि, भाई-बहिन, स्वामि-सेवक, मित्र आदि के सत्संग में आकर सब विषयों में अहंता का प्रसार कर सकते हैं।

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV . #अध्यात्म #जीवनज्ञान #रिश्ते #आत्मविकास
https://vicharkrantibooks.org/Book_page/ViewPDF/3361
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क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे रिश्तों में दुख और तनाव क्यों पैदा होते हैं?किसी को दुख देने से पहले बस एक बार सोचिए—“अगर...
15/10/2026

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे रिश्तों में दुख और तनाव क्यों पैदा होते हैं?
किसी को दुख देने से पहले बस एक बार सोचिए—
“अगर मैं उसकी जगह होता, तो मुझे कैसा लगता?”

14/10/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*जन्म शताब्दी पुस्तक माला*

दूसरों के प्रति की गई भलाइयां ही सुकर्म क्यों कही जाएं? अपने प्रति जो कुछ अपनी सुख वृद्धि के लिए अथवा अन्य स्वार्थ साधन के लिये अच्छे कर्म किये जाते हैं वे सुकर्म क्यों नहीं हों और अगर सुकर्म हों भी तो कम दर्जे का क्यों माना जाय? और फिर यह सुकर्म क्यों किये जायं? अर्थात्, इनके करने से अगर पुण्य होते हैं तो पुण्य ही क्यों किया जाय?

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV .

हम पुण्य क्यों करें? अच्छे कर्मों का असली रहस्य क्या है? पुण्य करने से क्या मिलता है?
14/10/2026

हम पुण्य क्यों करें? अच्छे कर्मों का असली रहस्य क्या है? पुण्य करने से क्या मिलता है?

11/10/2026

What if you have been worshipping God for years… but your anger, ego and criticism are still the same? Then we need to ask an uncomfortable question: Is our Upasana truly working?

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09/10/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*जन्म शताब्दी पुस्तक माला*
*भाव ऊर्जा का सुनियोजन हो लक्ष्य*

किसी भी जीवित प्राणधारी को लीजिये, उसकी सूक्ष्म और स्थूल,बाहरी और भीतरी क्रियाओं और कल्पनाओं का गम्भीर एवं वैज्ञानिक विश्लेषणकीजिये, प्रतीत होगा कि इन्हीं चार क्षेत्रों के अन्तर्गत उसकी समस्त चेतना परिभमण कर रही है। (१)ऋक् कल्याण (२) यजुः-पौरुष (३) साम-क्रीड़ा (४) अथर्व-अर्थ। इन चार दिशाओं के अतिरिक्त प्राणियों की ज्ञान-धारा और किसी ओर प्रवाहित नहीं होती। ऋकको धर्म, यजुः को मोक्ष, साम को काम,अथर्व को अर्थ भी कहा जाताहै। यही चार ब्रह्माजी के मुख हैं। ब्रह्मा को चतुर्मुख इसलिये कहा गया हैकि वे एक मुख होते हुए भी चार प्रकार की ज्ञान धारा का निष्क्रमण करते हैं। वेद शब्द का अर्थ है-'ज्ञान' इस प्रकार वह एक है, परन्तु एक होते हुए भी वहप्राणियों के अन्तःकरण में चार प्रकार का दिखाई देता है। इसलिये एक वेद को सुविधा के लिए चार भागोंमें विभक्त करदिया गया है।

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV .

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