Saptrishi health Care

Saptrishi health Care vaidya amman guruwar md (acu) a. s. p. e. u.

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सुबह Good morning की शुभकामनाएं.............       *दुःख में भी सुख का*             *अनुभव किया*,!                    *ज...
24/08/2026

सुबह Good morning की शुभकामनाएं.............
*दुःख में भी सुख का*
*अनुभव किया*,!
*जब जब मैने आपका*
*स्मरण*किया*!!
🙏💐सुप्रभात 🙏💐
*!!!

19/08/2026
Good morning
15/07/2026

Good morning

कमर दर्द : कारण व निवारणआयुर्वेद विज्ञान सदा ही मानव का हितचिन्तक रहा है इसके अंतर्गत वर्णित दिनचर्या, रात्रिचर्या, त्रऋ...
22/05/2026

कमर दर्द : कारण व निवारण

आयुर्वेद विज्ञान सदा ही मानव का हितचिन्तक रहा है इसके अंतर्गत वर्णित दिनचर्या, रात्रिचर्या, त्रऋतुचर्या, सदवृत्त आचार आदि का पालन कर मनुष्य सुखी एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकता है किन्तु वर्तमान में भौतिकवादी एवं विलासितापूर्ण जीवन जीने के कारण आयुर्वेद में वर्णित परिचर्याओं का पालन नहीं हो रहा है। फलस्वरूप विभिन्न रोग पैदा हो रहे हैं, उन्हीं में से कमर दर्द भी एक है।

लगभग 80 से 90 प्रतिशत लोग जिन्दगी में कभी न कभी कमरदर्द का अनुभव करते हैं।

कारण - रीढ़ की हड्डी के निर्माण में अस्थियाँ, वातनाड़ियाँ, जोड़, मांसपेशियों, स्नायु, कंडरा आदि संरचनायें होती हैं। कमरदर्द का मुख्य कारण मांसपेशियों में तनाव, संधियों में तनाव खिंचाव व चोट लगना है। रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करने वाले रोग यथा ऑस्टियोआर्द्रराइटिस, यूमेटॉइडआर्ब्रराइटिस, ऑस्टयोपोरोसिस, ऑस्टिओमैलेशिया, एन्क्लिोजिंगस्पॉन्डिलाइटिस, हड्डियों की टी.बी. तथा स्त्रियों सम्बन्धी रोग यथा कष्टार्तव, फाइब्रायड्स, एन्डिमेट्रिओसिस, गर्भाशय अंश, उम्र के साथ शरीर में होने वाले क्षयजन्य (Degeneration) रोग यथा गद्दी का हास (Degeneration of Disc) जोड़ों में परिवर्तन तथा स्नायुओं की जीर्णता, शारीरिक विकृतियाँ, जैसे स्कोलिओसिस के मुख्य कारण शरीर की नित्य रूप से की जाने वाली दोषपूर्ण गतिविधियाँ जैसे गलत तरीके से खड़ा होना, बैठना व सोना, वजन उठाना, झटके से मुड़ना, ऊँचाई से कूदना, कुर्सी व टेबल का दोषपूर्ण डिजाइन तथा व्यायाम में लगातार कमी आदि हैं।

आईबीएस, कब्ज, गुर्दे की बीमारी, प्रोस्टेट का बढ़ना, विटामिन बी-12 तथा विटामिन सी की कमी, सूर्य की रोशनी का अभाव एवं मानसिक तनाव से भी कमर में पीड़ा का अनुभव होता है। आजकल अधिकांश व्यक्तियों में स्लिप डिस्क (नाड़ी शोथ, साइटिका) की बीमारी देखने को मिल रही है इसका मुख्य कारण चोट लगना, अचानक भारी वजन उठाना, वाहन चलाते समय जर्क लगना, व्यायाम की कमी के कारण कमर की मांसपेशियों में शक्ति की कमी है। रोगी को प्रमुख रूप से कमर, दोनों या एक नितंब में तीव्र शूल दर्द तथा दर्द का एक पैर या दोनों पैरों तक जाना, झनझनाहट होना, कभी कभी सुत्र होना आदि का भी अनुभव होता हैं।

चिकित्सा - कमर दर्द को दूर करने हेतु जो दवाइयों दी जाती हैं वह पूरी तरह से समस्या का समाधान तो नहीं करतीं पर दवाइयों की आदत अवश्य पड़ जाती है। इसके लिए सबसे आवश्यक कार्य कमर सम्बन्धी व्यायाम करना है जिससे स्पाइन डिस्क को पोषक द्रव्यों की आपूर्ति हो सके जिससे कि आयु के साथ-साथ रीढ़ की हड्डियों में होने वाले क्षय (De-terioration) को विलंबित (Delay) किया जा सके।

रोग के कारण के अनुरूप ही चिकित्सा व्यवस्था करनी होती है सामान्यतया 2 से 3 सप्ताह विश्राम करने से लाभ हो जाता है। फिजियोथैरपी तथा कुछ योगासन यथा भुजंगासन, नौकासन, शलभासन भी लाभप्रद हैं। आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा में इस रोग का बहुत अच्छा इलाज है। 25 वर्षों के अनुभव के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कमरदर्द के अधिकांश रोगियों को पंचकर्म चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, लेप व बंधन चिकित्सा से स्थाई रूप से ठीक किया जा सकता है।

यदि किसी रोगी को ट्यूमर, फ्रैक्चर आदि से कारण मल व मूत्र पर नियंत्रण नहीं हो. पक्षाघात की स्थिति हो तो इस अवस्था में तुरन्त शल्य किया करवाना चाहिए। आजकल अधिकता लोगों को स्लिप डिस्क होने पर ऑपरेशन की सलाह दी जाती है परन्तु तथ्य यह है कि 95 प्रतिशत लोगों को सर्जरी से बचाया जा सकता है। रोग की स्थिति के अनुसार 3 से 4 सप्ता तक वातनाशक तैलों से मृदु अभ्यंग, कटिषिङ्ग है। या कटिबस्ति, नाड़ी स्वेद या सर्वांग भाप सार मर्म गुटिका का लेप तथा बंधन करने एवं चिकित्सा के प्रयोग में रोगी लीक हो औषधियों में विशेषतः रास्नासप्तकर सहचरादि क्वाथ त्रयोदशांगली रस आदि का प्रयोग किया जाता है।

यदि रोगी को बहुत अधिक पीड़ा है तो मर्म चिकित्सा या ऑस्टियोपैथी, शिरावेध, अग्निकर्म, आदि चिकित्सा के द्वारा सधः लाभदिया जा सकता है।

कटि प्रदेश अपानवायु का स्थान है अतः आमदोष का पाचन करना व कोष्ठ की शुद्धि करना आवश्यक है।

बचाव व सावधानियाँ - जो व्यक्ति लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, उन्हें निश्चित् अंतराल पर खड़े होकर कमर का हल्का व्यायाम करना चाहिए। फोम या मुलायम गद्दों का उपयोग न करें इससे स्पाइन का प्राकृतिक पोश्चर बदल जाता है जो कि कटिशूल का कारण बनता है। रूई का पतला गद्दा इस्तेमाल करें, आगे की ओर झुककर वजन न उठायें। बैठते समय, कम्प्यूटर पर कार्य करते समय, पोछा लगाते समय पोश्चर का ध्यान रखें। गृहणियाँ रसोई में खड़े होकर बर्तन साफ न करें।

यौगिक सूक्ष्म व्यायाम द्वारा शरीर की सभी संधियों का व्यायाम तथा स्पाइन की कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज द्वारा लम्बे समय तक राहत प्राप्त की जा सकती है।

निरंजन फल (Niranjan Phal), जिसे मालवा नट (Malva Nut) या चाइना फ्रूट भी कहा जाता है, का वानस्पतिक नाम Sterculia lychnopho...
17/04/2026

निरंजन फल (Niranjan Phal), जिसे मालवा नट (Malva Nut) या चाइना फ्रूट भी कहा जाता है, का वानस्पतिक नाम Sterculia lychnophora है। यह आयुर्वेद और पारंपरिक चीनी/वियतनामी चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी/फल के रूप में इस्तेमाल होता है। यह प्राकृतिक रूप से शीतलक (cooling), सूजन कम करने वाला, कसैला (astringent), एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुणों से भरपूर होता है। फल पानी में भिगोने पर फूल जाता है और जेल जैसा गूदा बन जाता है, जो पेट और गले को आराम देता है।

निरंजन फल के मुख्य औषधीय उपयोग
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यह मुख्य रूप से पित्त दोष को संतुलित करने और शरीर की आंतरिक गर्मी कम करने के लिए जाना जाता है। इसके प्रमुख फायदे निम्न हैं:

♦️बवासीर (Piles/Hemorrhoids): खून आने, सूजन और दर्द में रामबाण। यह आंतों की सूजन कम करता है और मल को नरम बनाता है।

♦️अत्यधिक रक्तस्राव (Excessive Bleeding): गर्भाशय से होने वाले भारी मासिक धर्म (heavy periods), अल्सर या अन्य रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है।

♦️पाचन संबंधी समस्याएं: कब्ज, अपच, गैस, एसिडिटी, अल्सर, कोलाइटिस (ulcerative colitis) और IBS में राहत। यह आंतों को आराम देता है और detox करता है।

♦️गले की समस्याएं: गले में खराश, सूजन, टॉन्सिलाइटिस, खांसी, कफ और गले के संक्रमण में सुखदायक। जेल जैसा पानी धीरे-धीरे पीने से राहत मिलती है।

♦️त्वचा संबंधी फायदे: शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालकर मुंहासे, फोड़े-फुंसी, एक्जिमा, चकत्ते और सोरायसिस जैसी समस्याओं में सुधार।

♦️अन्य फायदे: बुखार, साइनस, दमा, वजन नियंत्रण, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर में सहायक। यह इम्यूनिटी बढ़ाता है, नींद सुधारता है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

✍️सावधानी: यह शीतलक है, इसलिए ठंडे प्रकृति वाले लोग कम मात्रा में लें। अधिक मात्रा से दस्त या पेट दर्द हो सकता है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या कोई गंभीर बीमारी वाले डॉक्टर/आयुर्वेदिक वैद्य से सलाह लेकर ही इस्तेमाल करें।

निरंजन फल के सरल घरेलू नुस्खे
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🕳️बवासीर और कब्ज के लिए:
रात को 1 निरंजन फल को आधे गिलास पानी में भिगोकर रखें।
सुबह खाली पेट उसी पानी में फल को अच्छे से मसलें (यह फूलकर जेल जैसा हो जाता है), बीज निकालकर पानी पी लें।
2-3 सप्ताह तक रोज करें। खून आना और सूजन कम होती है।

🕳️अत्यधिक मासिक रक्तस्राव या गर्भाशय ब्लीडिंग के लिए:
रात को 1 फल 1 कप पानी में भिगोएं।
सुबह खाली पेट मसलकर पानी पीएं। यह रक्तस्राव को नियंत्रित करता है।

🕳️गले की खराश, खांसी या टॉन्सिल के लिए:
1 फल पानी में भिगोकर उसका जेल जैसा पानी धीरे-धीरे चुस्कियों में पिएं।
दिन में 1-2 बार। यह गले को ठंडक और नमी देता है।
एसिडिटी, अल्सर या पेट की गर्मी के लिए:
1 फल भिगोकर सुबह का पानी पिएं। या फल को उबालकर काढ़ा बनाकर पिएं।

🕳️त्वचा के लिए (बाहरी उपयोग):
भिगोए हुए फल के गूदे को मुल्तानी मिट्टी या गुलाबजल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाएं। 10 मिनट लगाकर धो लें। मुंहासे और चकत्तों में फायदा।

अन्य जड़ी-बूटियों के साथ संयुक्त नुस्खे
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निरंजन फल को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर प्रभाव बढ़ाया जा सकता है। ये पारंपरिक आयुर्वेदिक संयोजन हैं

🌹बवासीर और पाचन के लिए हल्दी के साथ:
1 निरंजन फल भिगोएं। सुबह मसलकर पानी में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं।
हल्दी की एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण सूजन और संक्रमण कम करते हैं। रोज 7-10 दिन।

🌹गले की समस्या और खांसी के लिए अदरक या मुलेठी के साथ:
निरंजन फल का भिगोया पानी + थोड़ा अदरक का रस या मुलेठी का काढ़ा मिलाकर पिएं।
यह कफ निकालने और गले को शांत करने में बेहतर काम करता है। दिन में 2 बार।

🌹मासिक धर्म अनियमितता या भारी ब्लीडिंग के लिए अशोका या शतावरी के साथ:
निरंजन फल का पानी + अशोका छाल या शतावरी पाउडर (1/4 चम्मच) मिलाकर पिएं।
यह महिलाओं की समस्याओं में हार्मोनल बैलेंस और रक्तस्राव नियंत्रण में मदद करता है।

🌹अल्सर और कोलाइटिस के लिए एलोवेरा या आमला के साथ:
भिगोए फल का जेल + एलोवेरा जेल (1 चम्मच) या आमला पाउडर मिलाकर लें।
यह पेट की आंतरिक सूजन और अल्सर को ठीक करने में सहायक है।

🌹डिटॉक्स और त्वचा के लिए नीम या त्रिफला के साथ:
निरंजन फल का पानी + थोड़ा नीम पत्ती का काढ़ा या त्रिफला चूर्ण मिलाकर पिएं।
शरीर से गर्मी और विष निकालकर त्वचा साफ करता है।

🌹सामान्य शीतलक पेय (गर्मी में):
निरंजन फल का जेल + गुलाबजल या सौंफ मिलाकर ठंडा करके पिएं। यह शरीर को ठंडक देता है और पाचन सुधारता है।

🌹उपयोग की विधि सामान्य:
फल को अच्छे से धोकर एयरटाइट डिब्बे में रखें।
हमेशा साफ पानी में भिगोएं। पाउडर या काढ़ा रूप में भी उपलब्ध होता है।
सामान्य डोज: 1 फल रोज (भिगोकर) या वैद्य के अनुसार 1-2 ग्राम पाउडर।

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