08/04/2026
विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल ) के अवसर पर मैं आप के साथ कुछ इंपॉर्टेंट बात शेयर करना चाहता था “ टोटल बॉडी चैकअप “ के बारे मे ,क्योंकि आजकल इसका बहुत प्रचलन है| पहला सवाल यह है कि हमको टोटल बॉडी प्रोफाइल कब करवाने की जरूरत है और उसमें कौन सी जांच जरूरी है? मैं देखता हूं कि आजकल माता-पिता अपने साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चे 10-15 साल के भी टोटल बॉडी चेकअप करा देते हैं जिसकी कोई जरूरत नहीं है टोटल बॉडी चैकअप का उद्देश्य है कि यदि आपके शरीर मे बिना किसी लक्षण के ,किसी प्रकार की कहीं भी कोई खराबी आ रही हो तो उसके बारे में पहले से ही आपको पता लग जाए लेकिन इतनी कम उम्र पर,और अगर कोई भी लक्षण नहीं है तो इन जांचों को करने का कोई औचित्य नहीं है| सामान्यतया 35 साल के उम्र के बाद कुछ शरीर के कुछ अंगों में कुछ कमियां आ सकती हैं जो कि बिना लक्षण के भी हो सकती है अतः 35 साल की उम्र के बाद में यदि कोई बॉडी प्रोफाइल करवाता है और उसकी रिपोर्ट संतोषजनक है तो वह पूरे साल में एक बार ही काफी होता है पर मैंने देखा है कुछ लोग ऐसे हैं जो हर 3 -4 महीने पर अपना टोटल बॉडी प्रोफाइल करवाते हैं तो इसकी जरूरत नहीं दोस्तों|
दूसरी बात यह है कि 30 से 40 साल की उम्र के टोटल बॉडी प्रोफाइल में 70- 80 जांचों की जरूरत नहीं होती है सिर्फ सीबीसी ,ब्लड शुगर और लिवर, किडनी तथा लिपिड की कुछ जाँचें करना काफी है इसके अलावा एक चेस्ट का एक्स –रे, पेट का अल्ट्रसाउन्ड और हार्ट का इकोकार्डियोग्राम करवा लेना चाहिए , परंतु आजकल बहुत सारी कंपनियां 500 /- से ₹3000 तक में अपने- अपने बॉडी प्रोफाइल बेच रहे हैं और उसमें 60/ 70/ 80 या 90 टेस्टों का समावेश कर देते हैं परंतु इन सब जांचों की जरूरत थोड़ी है बेसिक जाँचें ही पर्याप्त हैँ पर अगर कोई लक्षण हो तो उस लक्षण के अनुसार बाकी जांचों की जरूरत होती है तो बेसिकली मूर्ख बनाने के लिए टोटल बॉडी प्रोफाइल मे ये इतने सारी जांच दिखाई जाती हैं और लोग बिना सोचे समझे उनको करवा लेते हैं वास्तव में यह सारी जांच की भी नहीं जाती है बल्कि कुछ जांच को करने के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा बाकी सब की रिपोर्ट भर दी जाती है और यही कारण है कि अक्सर इन टोटल बॉडी प्रोफाइल रिपोर्ट में से कई रिपोर्ट गलत भी होती है| आप लिवर मे जॉन्डिस या पीलिया की जांच क्यों करेंगे जब पीलिया है ही नहीं |लिवर की सूजन या फैटी लिवर के लिए SGPT / SGOT जांच काफी होती है परंतु इस तरह के सस्ते प्रोफाइल मे आधी से ज्यादा फालतू की जाँचों की लिस्ट जोड़कर उसको आकर्षक बनाया जाता है |
टोटल बॉडी प्रोफाइल चेक अप में किए जाने योग्य जांच का चयन उम्र और सेक्स के आधार पर किया जाना चाहिए यानी कि 30 से 40 साल की उम्र में कुछ जांचों की जरूरत होती है जब कि 40 के बाद में कुछ अन्य जांच भी जुड़ जाती हैं और 50 साल के बाद में अन्य कुछ जांच भी की जानी चाहिए इसी प्रकार आदमियों में कुछ विशेष जांच जैसे कि प्रास्टैट कैंसर की स्क्रीनिंग जांच PSA एक आयु सीमा के बाद हर वर्ष होनी जरूरी होती हैं इसी प्रकार महिलाओं में भी PAP smear,ब्रेस्ट मेमोग्राम जैसी ,कुछ विशेष जांचों की सालाना आवश्यकता होती है परंतु इस तरीके की कंपनियां उन जांचों को इन टोटल बॉडी प्रोफाइल मे नहीं करती हैँ | दरअसल ज्यादातर कंपनियों में सिर्फ मशीन और टेक्नीशियन द्वारा यह सिर्फ pathology रिपोर्ट होती है सही तरीका यह है कि पहले आप अपने फैमिली फिजिशियन से पूछ ले कि किन जांचों की जरूरत है और सिर्फ वही करवाएं ,या फिर किसी अच्छे लैब पर पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर से राय करके समुचित जांचों वाला टोटल बॉडी प्रोफाइल सेलेक्ट करें |अधिक जांच होना जरूरी नहीं है सही जांच की रिपोर्ट मिलना ज्यादा जरूरी है और उसके लिए सबसे बेहतर ,किसी लैब पर स्वयं जाकर सैंपल देना, रिपोर्ट की गुणवत्ता की गारंटी होती है क्योंकि दूर (घर) से सैंपल लेकर लैब तक पहुंचने का समय और तरीका उस सैंपल में कई सारी जांचों की रिपोर्ट को बदल देता है और रिपोर्ट गलत आने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अंत में मैं आपको यही राय दूंगा कि भेड़चाल मे न फंसे, सड़क किनारे या पार्कों मे लगे ठेलेनुमा कैम्प मे अपनी कभी जांच न करवाएं | अपनी आयु के अनुसार किसी डॉक्टर से परामर्श करने के पश्चात ही टोटल बॉडी प्रोफाइल करवाएं और ऐसी लैब पर करवाएं ,जहां पर एक प्रशिक्षित पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर आपके परामर्श के लिए उपलब्ध हो| आप सदा स्वस्थ रहें,प्रसन्न रहें ऐसी मनोकामना के साथ --