04/04/2026
दिनांक 02 अप्रैल 2026 को आई०एम०ए० सभागार, बरेली में "विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस" के अवसर पर जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान तथा आई०एम०ए० कम्युनिटी सर्विस, बरेली व इंडियन पीडियाट्रिक एकेडमी, बरेली के संयुक्त तात्वाधान से निःशुल्क ऑटिज्म स्क्रीनिंग सह मूल्यांकन शिविर का आयोजन प्रातः 09:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दोपहर 02:00 बजे से लेकर सांय 05:00 बजे किया गया।
अभिभावकों के लिए आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के चेयरमैन प्रो० (डा०) अमिताव मिश्रा, आई०एम०ए०, बरेली के अध्यक्ष डा० अतुल श्रीवास्तव, आई०एम०ए० कम्युनिटी सर्विस, बरेली के अध्यक्ष डा० प्रमेंन्द्र महेश्वरी, डा० अंशु अग्रवाल, डा० शालिनी महेश्वरी, डा० के०सी० गुप्ता, डा० एकांश अग्रवाल, डा० अमृत, डा० प्रेम कुमार, डा० गिरीश अग्रवाल, डा० जी० एस० खंडुजा, डा० वी०के० चावला, डा० राका चावला, एवं संस्थान की निदेशिका श्रीमती शाश्वती नंदा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करकें किया। इस अवसर पर लगभग 150 से अधिक अभिभावकों एवं जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के डिसेबिलिटी एक्सपर्ट एवं विशेष शिक्षक आदि मौजूद रहें।
जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम के प्रथम सत्र में निःशुल्क ऑटिज्म स्क्रीनिंग सह मूल्यांकन शिविर का आयोजन प्रातः 09:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक किया गया जिसमें लगभग 150 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें ऑटिस्टिक बच्चों के Sensory Issues पर डा० अमिताव मिश्रा ने बताया कि ऑटिस्टिक बच्चों में जो भी समस्याएं होती है। उनमें Sensory Issues होता है। इन बच्चों के Sensory Issues का आंकलन एक प्रशिक्षित एक्सपर्ट से ही कराना चाहिए। यदि Sensory over reaction, access या deficit के कारण से हो रही है तो थैरेपिस्ट को दोनो परिस्थितियों में अलग-अलग प्रशिक्षण देना चाहिए। इसी तरह उन्होने Communication Issues और Behavioral Issues पर अभिभावको को आसान एवं सरल तरीके की युक्ति के माध्यम से समझाया तथा अभिभावको के मन में जो कि डाउट थे उनका निस्तारण किया। संस्थान की खेल शिक्षिका सुश्री फारिया खान ने ऑटिस्टिक बच्चों के लिए विशेष प्रकार के फनगेम्स का भी आयोजन किया।
कार्यदिवस के द्वितीय सत्र में ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दोपहर 02:00 बजे से लेकर सांय 05:00 बजे किया गया। जिसमें जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के चेयरमैन प्रो० (डा०) अमिताव मिश्रा ने बताया कि विगत कुछ वर्षों से ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की संख्या लगातार बढ रही हो जो चिन्ताजनक है। डा० अमिताव मिश्रा ने यह राय दी कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को ऑटिज्म से उत्पन्न होने वाले सभी समस्याओं को अच्छे से समझना चाहिए और विशेषज्ञों से प्राप्त परामर्श के अनुसार थैरेपी एवं घरेलू प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। कार्यशाल विभिन्न सत्रों में Understanding Children with Autism, Managing Sensory Issues, Managing Language and Communication Issues, Managing Behavioral & Emotional Issues आदि पर परिचर्चा हुई।
डॉ० अतुल श्रीवास्तव, अध्यक्ष आई.एम.ए., बरेली ने कहा कि मेडिकल सर्विस में विगत वर्षों में ऐसे बच्चों की निदान और चिकित्सा को लेकर अनेक प्रगति हुई है परन्तु पुनर्वास के क्षेत्र में जो प्रगति हम अन्र्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शोध पत्रिका में पढ़ते है, वो हमारे जीवनधारा में देखने पर मिल जाता है और यह संस्थान अत्याधिक क्रियाओं की नयी-नयी जानकारी दिलाता है।
डा० प्रमेंन्द्र महेश्वरी, अध्यक्ष आई०एम०ए० कम्युनिटी सर्विस, बरेली ने कहा कि यह एक दिमागी बीमारी होती है, जो ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलती है। जब बच्चा छोटा होता है, तो इसके लक्षणों का पता लगा पाना आसान नहीं होता है। इसे हम मानसिक दिव्यांगता का एक छोटा रूप कह सकते हैं लेकिन उचित ट्रेनिंग से ऑटिस्टिक बच्चों को कार्यकुशल बनाया जा सकता है, ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बस दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया है। आइए, उनकी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानें और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडे।हर बच्चा खास होता है और उसकी अपनी एक अलग चमक होती है। ऑटिज्म से ग्रसित बच्चो को आपकी सहानुभूति की नहीं, बल्कि आपके सहयोग और स्वीकृति की जरूरत है।
संस्थान की संरक्षिका डा० राका चावला ने कहा कि ऑटिज़्म कोई कमी नही है, बल्कि यह दुनिया को देखने और समझने का एक अलग और अनोखा तरीका है। यह एक ऐसी धुन की तरह है, जो हर किसी से अलग होती है-कभी धीमी, कभी गहरी, लेकिन हमेशा अर्थपूर्ण। ऑटिज्म से जुड़े बच्चों को संवाद, व्यवहार और सामाजिक संबंधों में कुछ चुनौतियों हो सकती है, लेकिन उनके भीतर अद्भुत क्षमताएं भी होती है-जैसे गहरी एकाग्रता, सृजनात्मकता और सच्ची भावनाएँ। सही समय पर पहचान, प्रशिक्षण और निरंतर सहयोस से वे अपने जीवन में बेहतर प्रगति कर सकते है।
कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए संस्थान की निदेशिका श्रीमती शाश्वती नन्दा ने श्री वरूण कुमार, (एमपीटी केरल स्वास्थ्य विश्वद्यालय, पीजीडीईआई उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, न्यूरो-फिजियोथेरेपिस्ट और अर्ली इंटरवेंशनिस्ट), श्री सीकन कुमार सामंतराय और सुश्री पल्लवी सिंह (एमएसएड, एवाईजे नेशनल इंस्टीट्यूट आफर स्वीच एंड हियरिंग डिसेबिलिटी, मुंबई), सुश्री नमरा सैयद नियाजी, श्री अभिनव कुमार, सुश्री सुमन (डीएसएम नेशनल रिहैबिलिटेशन यूनिवर्सिटी, लखनऊ), शिवेन्द्र चौहान, सचिन कुमार सिंह, राहुल यादव, नियोजिता चौहान, फुरकाना नाज, अजमी सुल्ताना, उजमा तबस्सुम, सोनल भाटिया, सोनम पाण्डेय, हेमा चौहान, अनुज प्रताप सिंह चौहान, रूकसार, नाजिया, नेहा सिंह, भार्गवी वत्स, ममता दिवाकर, काजल यादव, श्रीमती मेघा रमन राजपाल, अर्शी मिर्जा एवं संस्थान के प्रशासक श्री हर्ष चौहान आदि के सहयोग की सरहाना की।