Jeevandhara Rehabilitation Research Institute, Bareilly

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Jeevandhara Rehabilitation Research Institute, Bareilly Rehabilitation and Resource Services to Children with Disabilities It is one of the pioneering institutes that promote inclusive education.

Established in year 1992, Jeevandhara takes pride of being one of the largest centres not only in Uttar Pradesh but in whole of North India. The Institute has been recognized with several national recognition and honors for its quality services and reputation. The Institute has the following Centers:
1. Advanced Hearing Testing Centre with facility of OAE. ABR/BERA, ASSR, Impedance and PTA Testing;
2. Digital Hearing Aid Fitting Centre;
3. Speech and Language Treatment Centre;
4. Developmental Therapy Centre for infants and children with developmental delay, cerebral palsy, autism spectrum disorder (ASD);
5. Psychological Assessment and Intervention Centre;
6. Centre for Support for Regular School Children with impairment and learning difficulties ;
7. Training centre for Professionals and Teachers;
8. Special Learning Centre for Children with Learning Problems, Intellectual deficits, Hearing Impairment/deafness and Autism Spectrum Disorder;
9. Centre for Promoting Quality of Life of Persons with Severe Disabilities;
10. Research and Documentation

This centre does not receive any government grant, but massively supported by local public and parents of the beneficiaries. It is purely a non profitable organization. We encourage you to support us!

Media Coverage On the occasions of “Workshop for Rehabilitation Professionals”, 03 April 2026
04/04/2026

Media Coverage On the occasions of “Workshop for Rehabilitation Professionals”, 03 April 2026

आज दिनांक 03 अप्रैल 2026 को जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान द्वारा आई०एम०ए० सभागार, बरेली में "Rehabilitation Professi...
04/04/2026

आज दिनांक 03 अप्रैल 2026 को जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान द्वारा आई०एम०ए० सभागार, बरेली में "Rehabilitation Professionals" के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान के दोनों परिसरों से 50 से अधिक पुनर्वास पेशेवरों एवं विशेष अध्यापकों ने प्रतिभाग किया। जिसमें Ms. Archana Kumari, ASD Expert, Tamana Institute, New Delhi तथा (डा०) अमिताव मिश्रा, अध्यक्ष जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के चैयरमैन एवं प्रोफेसर एवं डायरेक्टर इग्नु, नई दिल्ली ने ऑटिस्टिक बच्चों को हैण्डिल करने व सकारात्मक सुधार लाने के लिए सभी पुनर्वास पेशेवरो को प्रशिक्षित किया।

कार्यशाला दिवस का प्रथम सत्र मे सुश्री अर्चना कुमारी ने बताया कि पुनर्वास पेशेवर के रूप में आप ऑटिस्टिक बच्चें के साथ धैर्य, स्थिर रूटीन, दृश्य सहायता, सरल और स्पष्ट संचार, व्यवहार प्रबन्धन, सामाजिक कौशल, बच्चों को उसकी रूचियों के माध्यम से सम्र्पक स्थापित करना, सरल और स्पष्ट भाषा निर्देश, इंद्रिया एकीकरण पर जोर दे। व्यवहार में स्थिरता लाने के लिए उनकी जिद को पुरा न करे बल्कि सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करें।

तथा कार्यशाला दिवस के द्वितीय एवं अंतिम सत्र में डा० अमिताव मिश्रा ने बताया कि ऑटिस्टिक बच्चों के व्यवहार और विकास में सुधार के प्रमुख उपाय जल्दी और सही थेरेपी ऑक्यूपेशनल थेरेपी-सेंसरी मुद्दों के लिए, स्पीच थेरेपी-बातचीत के लिए, बिहेवियरल थेरेपी-व्यवहार को सुधारने में बहुत सहायक है। सकारात्मक प्रोत्साहन, ऑटिस्टिक बच्चें स्ट्रक्चर्ड रूटीन में बेहतर महसूस करते है, बच्चों की संवेदी आवश्यकताओं को समझना यदि बच्चा बहुत तेज आवाज़ या रोशनी से परेशान होता है तो उनके Sensory - friendly space प्रदान करें। हर बच्चा अलग होता है, अतः बच्चें की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार ही कोई प्लान बनाए।

संस्थान की निदेशिका श्रीमती शाश्वती नन्दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित सभी पुनर्वास पेशेवरों विशेष कर श्री वरूण कुमार, श्री सीकन कुमार सामंतराय, सुश्री पल्लवी सिंह, सुश्री नमरा सैयद नियाजी, श्री अभिनव कुमार, सुश्री सुमन, शिवेन्द्र चौहान, सचिन कुमार सिंह, राहुल यादव, नियोजिता चौहान, फुरकाना नाज, अजमी सुल्ताना, उजमा तबस्सुम, सोनल भाटिया, सोनम पाण्डेय, हेमा चौहान, अनुज प्रताप सिंह चौहान, रूकसार, नाजिया, नेहा सिंह, भार्गवी वत्स, ममता दिवाकर, काजल यादव, अर्शी मिर्जा डिप्लोमा कोर्स विशेष शिक्षा में अध्यनरत सभी प्रशिक्षु अध्यापकों एवं संस्थान के प्रशासक श्री हर्ष चौहान आदि उपस्थित रहे।

Media Coverage On the occasions of ‘’World Autism Awareness Day’’, 02 April 2026
04/04/2026

Media Coverage On the occasions of ‘’World Autism Awareness Day’’, 02 April 2026

दिनांक 02 अप्रैल 2026 को आई०एम०ए० सभागार, बरेली में "विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस" के अवसर पर जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध स...
04/04/2026

दिनांक 02 अप्रैल 2026 को आई०एम०ए० सभागार, बरेली में "विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस" के अवसर पर जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान तथा आई०एम०ए० कम्युनिटी सर्विस, बरेली व इंडियन पीडियाट्रिक एकेडमी, बरेली के संयुक्त तात्वाधान से निःशुल्क ऑटिज्म स्क्रीनिंग सह मूल्यांकन शिविर का आयोजन प्रातः 09:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दोपहर 02:00 बजे से लेकर सांय 05:00 बजे किया गया।

अभिभावकों के लिए आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के चेयरमैन प्रो० (डा०) अमिताव मिश्रा, आई०एम०ए०, बरेली के अध्यक्ष डा० अतुल श्रीवास्तव, आई०एम०ए० कम्युनिटी सर्विस, बरेली के अध्यक्ष डा० प्रमेंन्द्र महेश्वरी, डा० अंशु अग्रवाल, डा० शालिनी महेश्वरी, डा० के०सी० गुप्ता, डा० एकांश अग्रवाल, डा० अमृत, डा० प्रेम कुमार, डा० गिरीश अग्रवाल, डा० जी० एस० खंडुजा, डा० वी०के० चावला, डा० राका चावला, एवं संस्थान की निदेशिका श्रीमती शाश्वती नंदा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करकें किया। इस अवसर पर लगभग 150 से अधिक अभिभावकों एवं जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के डिसेबिलिटी एक्सपर्ट एवं विशेष शिक्षक आदि मौजूद रहें।

जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम के प्रथम सत्र में निःशुल्क ऑटिज्म स्क्रीनिंग सह मूल्यांकन शिविर का आयोजन प्रातः 09:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक किया गया जिसमें लगभग 150 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें ऑटिस्टिक बच्चों के Sensory Issues पर डा० अमिताव मिश्रा ने बताया कि ऑटिस्टिक बच्चों में जो भी समस्याएं होती है। उनमें Sensory Issues होता है। इन बच्चों के Sensory Issues का आंकलन एक प्रशिक्षित एक्सपर्ट से ही कराना चाहिए। यदि Sensory over reaction, access या deficit के कारण से हो रही है तो थैरेपिस्ट को दोनो परिस्थितियों में अलग-अलग प्रशिक्षण देना चाहिए। इसी तरह उन्होने Communication Issues और Behavioral Issues पर अभिभावको को आसान एवं सरल तरीके की युक्ति के माध्यम से समझाया तथा अभिभावको के मन में जो कि डाउट थे उनका निस्तारण किया। संस्थान की खेल शिक्षिका सुश्री फारिया खान ने ऑटिस्टिक बच्चों के लिए विशेष प्रकार के फनगेम्स का भी आयोजन किया।

कार्यदिवस के द्वितीय सत्र में ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दोपहर 02:00 बजे से लेकर सांय 05:00 बजे किया गया। जिसमें जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के चेयरमैन प्रो० (डा०) अमिताव मिश्रा ने बताया कि विगत कुछ वर्षों से ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की संख्या लगातार बढ रही हो जो चिन्ताजनक है। डा० अमिताव मिश्रा ने यह राय दी कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को ऑटिज्म से उत्पन्न होने वाले सभी समस्याओं को अच्छे से समझना चाहिए और विशेषज्ञों से प्राप्त परामर्श के अनुसार थैरेपी एवं घरेलू प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। कार्यशाल विभिन्न सत्रों में Understanding Children with Autism, Managing Sensory Issues, Managing Language and Communication Issues, Managing Behavioral & Emotional Issues आदि पर परिचर्चा हुई।

डॉ० अतुल श्रीवास्तव, अध्यक्ष आई.एम.ए., बरेली ने कहा कि मेडिकल सर्विस में विगत वर्षों में ऐसे बच्चों की निदान और चिकित्सा को लेकर अनेक प्रगति हुई है परन्तु पुनर्वास के क्षेत्र में जो प्रगति हम अन्र्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शोध पत्रिका में पढ़ते है, वो हमारे जीवनधारा में देखने पर मिल जाता है और यह संस्थान अत्याधिक क्रियाओं की नयी-नयी जानकारी दिलाता है।

डा० प्रमेंन्द्र महेश्वरी, अध्यक्ष आई०एम०ए० कम्युनिटी सर्विस, बरेली ने कहा कि यह एक दिमागी बीमारी होती है, जो ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलती है। जब बच्चा छोटा होता है, तो इसके लक्षणों का पता लगा पाना आसान नहीं होता है। इसे हम मानसिक दिव्यांगता का एक छोटा रूप कह सकते हैं लेकिन उचित ट्रेनिंग से ऑटिस्टिक बच्चों को कार्यकुशल बनाया जा सकता है, ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बस दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया है। आइए, उनकी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानें और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडे।हर बच्चा खास होता है और उसकी अपनी एक अलग चमक होती है। ऑटिज्म से ग्रसित बच्चो को आपकी सहानुभूति की नहीं, बल्कि आपके सहयोग और स्वीकृति की जरूरत है।

संस्थान की संरक्षिका डा० राका चावला ने कहा कि ऑटिज़्म कोई कमी नही है, बल्कि यह दुनिया को देखने और समझने का एक अलग और अनोखा तरीका है। यह एक ऐसी धुन की तरह है, जो हर किसी से अलग होती है-कभी धीमी, कभी गहरी, लेकिन हमेशा अर्थपूर्ण। ऑटिज्म से जुड़े बच्चों को संवाद, व्यवहार और सामाजिक संबंधों में कुछ चुनौतियों हो सकती है, लेकिन उनके भीतर अद्भुत क्षमताएं भी होती है-जैसे गहरी एकाग्रता, सृजनात्मकता और सच्ची भावनाएँ। सही समय पर पहचान, प्रशिक्षण और निरंतर सहयोस से वे अपने जीवन में बेहतर प्रगति कर सकते है।

कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए संस्थान की निदेशिका श्रीमती शाश्वती नन्दा ने श्री वरूण कुमार, (एमपीटी केरल स्वास्थ्य विश्वद्यालय, पीजीडीईआई उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, न्यूरो-फिजियोथेरेपिस्ट और अर्ली इंटरवेंशनिस्ट), श्री सीकन कुमार सामंतराय और सुश्री पल्लवी सिंह (एमएसएड, एवाईजे नेशनल इंस्टीट्यूट आफर स्वीच एंड हियरिंग डिसेबिलिटी, मुंबई), सुश्री नमरा सैयद नियाजी, श्री अभिनव कुमार, सुश्री सुमन (डीएसएम नेशनल रिहैबिलिटेशन यूनिवर्सिटी, लखनऊ), शिवेन्द्र चौहान, सचिन कुमार सिंह, राहुल यादव, नियोजिता चौहान, फुरकाना नाज, अजमी सुल्ताना, उजमा तबस्सुम, सोनल भाटिया, सोनम पाण्डेय, हेमा चौहान, अनुज प्रताप सिंह चौहान, रूकसार, नाजिया, नेहा सिंह, भार्गवी वत्स, ममता दिवाकर, काजल यादव, श्रीमती मेघा रमन राजपाल, अर्शी मिर्जा एवं संस्थान के प्रशासक श्री हर्ष चौहान आदि के सहयोग की सरहाना की।

25 मार्च 2026 को Jeevandhara Rehabilitation Research Institute एवं Bareilly International University क़े Institute of Den...
27/03/2026

25 मार्च 2026 को Jeevandhara Rehabilitation Research Institute एवं Bareilly International University क़े Institute of Dental Science. Bareilly के Department of Pediatric and Preventive Dentistry के संयुक्त तत्वाधान में जीवन धारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान की द्वितीय शाखा देलापीर पीलीभीत रोड, बरेली में World Oral Wealth Day, Celebration 2026 किया गयाl

जिसमें Oral Health & Hygiene संबंधित गतिविधियां तथा खेलों का आयोजन किया गया जिसमें Coloring Rolls, Caries Progression & Check-up through Puppets आदिl इस कैंप का आयोजन डॉक्टर शिवांगी शर्मा वह उनकी टीम के निर्देशन में हुआl

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर अमिताभ मिश्रा तथा निर्देशिका श्रीमती शाश्वती नंदा सभी को शुभकामनाएं दी तथा इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेंटल साइंस, बरेली का बहुत-बहुत आभार व्यक्त कियाl

इस अवसर पर संस्थान की ओर से एडमिनिस्ट्रेटर श्री हर्ष चौहान, समन्वयक डी एड विशेष शिक्षा, श्री सीकन कुमार सामंत राय , श्री अभिनव कुमार, श्री अनुज प्रताप सिंह चौहान, श्रीमती सोनल भाटिया, श्रीमती ममता दिवाकर, श्रीमती हेमा चौहान, रुखसार खान, सोनम पांडे, भार्गवी वत्स, काजल यादव, नाजिया इरफान, फ़ारिहा ख़ानम तथा संस्थान के विशेष छात्र एवं कर्मचारियों का उपस्थित रहेl

21 मार्च 2026 को जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान में डाउन सिंड्रोम डे मनाया गया l डाउन सिंड्रोम डे दिवस पर संस्थान में...
27/03/2026

21 मार्च 2026 को जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान में डाउन सिंड्रोम डे मनाया गया l डाउन सिंड्रोम डे दिवस पर संस्थान में ड्राइंग एवं आर्ट कंपटीशन, फन गेम्स, बाद संवाद प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया गया l

श्री सीकन कुमार सामंत राय कोर्स कोऑर्डिनेटर D. Ed डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन ने बताया कि दुनिया भर में कई खतरनाक और रेयर बीमारियों के बारे में मेडिकल साइंस लगता रिसर्च, स्टडी और एक्सपेरिमेंट नए फैक्स जुटता रहा है l. डॉक्टर लगातार ऐसी बीमारियों के इलाज की कोशिश करते रहे हैं वहीं संयुक्त राष्ट्र इन बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम करता हैl ऐसी ही एक सबसे पुरानी बीमारी का नाम डाउन सिंड्रोम है l यह जेनेटिक डिसऑर्डर मरीजों की बॉडी और उसके बब्रेन दोनों पर बेहद बुरा असर डालती हैl.
उन्होंने बताया कि मेडिकल साइंस के मुताबिक डाउन सिंड्रोम तब होता हैl जब किसी इंसान के पास क्रोमोसोम 21 की एडिशनल आंशिक या पूरी कॉपी होती हैl यह अभी तक पता नहीं चला है कि डाउन सिंड्रोम क्यों होता है, लेकिन डाउन सिंड्रोम हमेशा से लोगों को बीमार करता रहा हैl यह दुनिया भर के सभी हिस्सों में मौजूद है l आमतौर पर यह लोगों के सीखने की शैली, शारीरिक विशेषताओं और सेहत पर काफी बदलाव करने वाला नेगेटिव असर डालता है l

संस्थान के प्रशासक श्री हर्ष चौहान ने बताया की संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2011 में घोषणा की थी की हर साल 21 मार्च को वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे के रूप में मनाया जाएगा महासभा ने 21 मार्च 2012 को पहला वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे मनाया इसके तहत सभी सदस्य राज्यों, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली से जुड़े संगठनों और बाकी अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों और प्राइवेट सेक्टर सहित सिविल सोसाइटी से डाउन सिंड्रोम के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए इस खास दिन को मनाने की अपील की गईl

संस्थान की प्रधानाचार्या श्रीमती सोनम भाटिया ने बताया दुनिया में हर साल लगभग 3000 से 5000 बच्चे डाउन सिंड्रोम बीमारी के साथ पैदा होते हैंl डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोगों की देखभाल और जरूरत को पूरा करने के लिए नियमित तौर पर मेडिकल जांच के अलावा फिजियोथैरेपी, मेंटल थेरेपी, काउंसलिंग आदि की आवश्यकता होती हैl डाउन सिंड्रोम को लेकर स्टीरियोटाइप को खत्म करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी l कल्चर और मीडिया दोनों में इस इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी के बारे में खुलकर सही बात करने के लिए वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम दडे जैसी इवेंट को मनाने की बहुत आवश्यकता जरूरत है l

संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर अमिताव मिश्रा एवं डायरेक्टर Smt Saswati Nanda संस्थान के सभी अध्यापकों एवं कर्मचारियों को कार्यक्रम की सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया l

मान बढ़ाने वालों को सम्मान @ वासु तिवारी, जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान बरेली 💐💐💐
13/03/2026

मान बढ़ाने वालों को सम्मान @ वासु तिवारी, जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान बरेली 💐💐💐

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Bareilly
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