26/10/2018
ओमेगा - ३ शारीर के लिए अति आवश्यक खाद्य पुरको में से
एक .इसे लेने से कई तरह की बीमारिया पास नहीं आती है.
आईये जानते है इसके बारे में --
हमारी सेहत को बैलेंस रखने में ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड्स का
खासा रोल होता है। दरअसल , ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड्स
एसेंशल पोलीअनसैचुरेटेड फैटी कहलाते हैं , क्योंकि इनका
प्रॉडक्शन बॉडी द्वारा नहीं किया जाता। हमें इन्हें सप्लीमेंट्स
या भोजन के जरिए लेना पड़ता है। एसेंशल फैटी ऐसिड्स हार्ट ,
मसल्स , ब्रेन और इम्यून सिस्टम को सही प्रोसेस में काम
करने में मदद करते हैं।
ये तीन तरह के होते हैं - डीएचए , ईपीए और एएलए। इनमें
एएलए सबसे जरूरी ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड है , जो ईपीए और
फिर डीएचए में चेंज हो जाता है। एएलए वेजीटेबल्स बेस्ड
ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड है , जो वेजीटेरियंस के लिए जरूरी है।
दूसरे , डीएचए ओर ईपीए सबसे ज्यादा फिश में पाए जाते हैं ,
जबकि फिश में एएलए नहीं होता।
बालों को दे स्ट्रेंथ
अगर आप यह सोचती हैं कि बालों को हेल्दी रखने के लिए शैंपू
और कंडिशनर ही काफी हैं , तो आप गलत हैं। दरअसल , बालों
को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए भी ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड बेहद
जरूरी है। ' ओमेगा थ्री फाउंडेशन ऑफ इंडिया ' के चेयरपर्सन
डॉ . विजयी के . एस . शुक्ला बताते हैं , ' ओमेगा -3 में अल्फा
लाइनोलेनिक ऐसिड ( एएलए ), इकोजपेंटेनाइक ऐसिड
( ईपीए ) और डोकोजहेक्सानोइक ऐसिड ( डीएचए ) पाया
जाता है। यह मैजिक -3 बालों की ड्राईनेस खत्म करने , गिरने
से रोकने , शाइनिंग देने और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में
काम आता है। '
पीरियड्स का पेन
डॉक्टर्स का कहना है कि महिलाओं में पीरियड्स और मेनोपॉज
के दौरान होने वाले दर्द की एक बड़ी वजह ओमेगा - 3 फैटी
ऐसिड्स की क्वॉन्टिटी में कमी होना है। इस दौरान होने वाली
हार्ट की प्रॉब्लम , जॉइंट्स पेन , आंखों में ड्राईनेस जैसी
दिक्कतों में इसकी सही क्वॉन्टिटी बेहद मायने रखती है।
ऑस्टियोपोरोसिस
आमतौर पर कैल्शियम की कमी की वजह से महिलाओं को इस
प्रॉब्लम से जूझना पड़ता है। एएलए बेस ओमेगा - 3 फैटी
ऐसिड्स की सही क्वॉन्टिटी ऑस्टियोपोरोसिस से बचाने के
साथ ही बोन्स के बनने में भी मदद करती है और पीरियड्स के
दौरान होने वाले बोन पेन से भी बचाती है।
हेल्थ पर रखे चेक: ओमेगा- 3
वैसे तो , ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड्स बॉडी की कई ऐक्टिविटीज
के लिए बेहद जरूरी हैं। लेकिन महिलाओं की लाइफ में आने वाले
कई स्टेज में इनका रोल बेहद इंपॉर्टेंट है। जानते हैं इसके
फायदों के बारे में :
हमारी सेहत को बैलेंस रखने में ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड्स का
खासा रोल होता है। दरअसल , ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड्स
एसेंशल पोलीअनसैचुरेटेड फैटी कहलाते हैं , क्योंकि इनका
प्रॉडक्शन बॉडी द्वारा नहीं किया जाता। हमें इन्हें सप्लीमेंट्स
या भोजन के जरिए लेना पड़ता है। एसेंशल फैटी ऐसिड्स हार्ट ,
मसल्स , ब्रेन और इम्यून सिस्टम को सही प्रोसेस में काम
करने में मदद करते हैं।
ये तीन तरह के होते हैं - डीएचए , ईपीए और एएलए। इनमें
एएलए सबसे जरूरी ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड है , जो ईपीए और
फिर डीएचए में चेंज हो जाता है। एएलए वेजीटेबल्स बेस्ड
ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड है , जो वेजीटेरियंस के लिए जरूरी है।
दूसरे , डीएचए ओर ईपीए सबसे ज्यादा फिश में पाए जाते हैं ,
जबकि फिश में एएलए नहीं होता।
बालों को दे स्ट्रेंथ
अगर आप यह सोचती हैं कि बालों को हेल्दी रखने के लिए शैंपू
और कंडिशनर ही काफी हैं , तो आप गलत हैं। दरअसल , बालों
को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए भी ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड बेहद
जरूरी है। ' ओमेगा थ्री फाउंडेशन ऑफ इंडिया ' के चेयरपर्सन
डॉ . विजयी के . एस . शुक्ला बताते हैं , ' ओमेगा -3 में अल्फा
लाइनोलेनिक ऐसिड ( एएलए ), इकोजपेंटेनाइक ऐसिड
( ईपीए ) और डोकोजहेक्सानोइक ऐसिड ( डीएचए ) पाया
जाता है। यह मैजिक -3 बालों की ड्राईनेस खत्म करने , गिरने
से रोकने , शाइनिंग देने और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखने में
काम आता है। '
पीरियड्स का पेन
डॉक्टर्स का कहना है कि महिलाओं में पीरियड्स और मेनोपॉज
के दौरान होने वाले दर्द की एक बड़ी वजह ओमेगा - 3 फैटी
ऐसिड्स की क्वॉन्टिटी में कमी होना है। इस दौरान होने वाली
हार्ट की प्रॉब्लम , जॉइंट्स पेन , आंखों में ड्राईनेस जैसी
दिक्कतों में इसकी सही क्वॉन्टिटी बेहद मायने रखती है।
ऑस्टियोपोरोसिस
आमतौर पर कैल्शियम की कमी की वजह से महिलाओं को इस
प्रॉब्लम से जूझना पड़ता है। एएलए बेस ओमेगा - 3 फैटी
ऐसिड्स की सही क्वॉन्टिटी ऑस्टियोपोरोसिस से बचाने के
साथ ही बोन्स के बनने में भी मदद करती है और पीरियड्स के
दौरान होने वाले बोन पेन से भी बचाती है।
कैंसर होगा स्लो
ओमेगा - 3 की सही खुराक ट्यूमर होने के प्रोसेस को भी स्लो
कर देती है। विशेषकर , ब्रेस्ट व इंटेस्टाइन के कैंसर में। एएलए
बेस्ड ओमेगा - 3 में नैचरल ऐंटी - इंफ्लेमेट्री एजेंट हैं , जो
कैंसर होने की प्रोसेस को 53 पर्सेंट कम कर देते हैं।
प्रेग्नेंसी टाइम
बच्चा न हो पाने या वक्त से पहले होने , जैसी दिक्कतों से
ओमेगा - 3 फैटी ऐसिड्स डाइट बेहद काम आती है। यही नहीं ,
इससे कंसीव करने की पॉसिबिलिटीज भी बेहद बढ़ जाती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान मां की डाइट में ली
गई चीजें बच्चे के बॉडी , ब्रेन डिवेलपमेंट और इस दौरान आने
वाली प्रॉब्लम्स से बचाता है। प्रेग्नेंट लेडी को फोएटल
न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के उचित विकास के लिए ओमेगा -3
फैटी ऐसिड लेने की सलाह दी जाती है। सामान्य तौर पर ओमेगा
-3 फैटी ऐसिड मछली में पाया जाता है , जो बच्चे के
कार्डियोवास्क्युलर सिस्टम , ब्रेन और आंखों के लिए
मददगार होता है।
दूध बढ़ाने में
बच्चे के जन्म के बाद दूध की क्वॉन्टिटी बढ़ाने में भी ओमेगा -
3 डाइट खूब काम आती है। रिसर्च के बाद पता चला है कि
ईपीए और डीएचए को प्रेग्नेंट महिला की डाइट में शामिल किए
जाने से बच्चे के विजुअल एवं कॉग्नीटिव विकास पर पॉजिटिव
इफेक्ट पड़ता है। ओमेगा -3 एस की सही क्वॉन्टिटी बच्चे में
एलर्जी के जोखिम को भी कम कर सकती है। इसके लिए जरूरी
है कि फिश , अखरोट , पालक , मैकरल ( छोटी समुद्री मछली ),
लौकी के बीज और सोयाबीन को डाइट में शामिल करना।
हार्ट प्रॉब्लम
एएलए बेस्ड ओमेगा -3 फैटी एसिड्स हार्ट को हेल्दी रखने ,
हार्ट रेट को कम रखने और हार्ट अटैक पड़ने की खतरे को भी
कम कर देती है। ओमेगा
थ्री फैटी ऐसिड हार्ट के लिए फायदेमंद हैं। तेल वाली
फिशेजजैसे सैलमोन , मैकेरेल व सार्डीनेस में दो तरह के ओमेगा
3 फैट - डीएचए और ईपीए होता है , जो ब्लड फैट्स ( जिसे
ट्राइग्लाइसराइड्स कहते हैं ) को कम करता है और हार्ट बीट
को कंट्रोल में रखता है।
ओमेगा - 3 डाइट
- ठंडे पानी की मछली जैसे सालमन , ट्यूना आदि।
- कैनोला ऑयल , रेपसीड , राई , सरसों , सोयाबीन ऑयल ,
सन , पटसन , अलसी के बीज और इनका ऑयल , कद्दू व
इसके बीजों का ऑयल।
- पेरिला सीड ऑयल , अखरोट व उसका तेल , सनफ्लॉवर तेल
, मकई तेल ।
- अंडे , क्रिल व शैवाल।
- फ्लैक्स सीड्स।
- सोया , अजमोद पत्तेदार सब्जी