Gulal ayurved

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मुलेठी (Licorice) गले की खराश,  #खांसी, और श्वसन समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ...
26/12/2025

मुलेठी (Licorice) गले की खराश, #खांसी, और श्वसन समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं; यह पेट के #अल्सर, लीवर की सेहत, त्वचा और बालों के लिए भी अच्छी है, इम्यूनिटी बढ़ाती है, और PCOS जैसी समस्याओं में हार्मोनल #संतुलन में मदद कर सकती है, लेकिन अधिक मात्रा में लेने से ब्लड प्रेशर और पोटैशियम पर असर हो सकता है, इसलिए सावधानी ज़रूरी है।
मुलेठी के फायदे (Mulethi Ke Fayde)
गला और श्वसन तंत्र: गले की #खराश, #खांसी, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में राहत देती है; बलगम कम करती है।
पाचन: पेट की जलन (heartburn), अल्सर और अपच से बचाती है; कब्ज में भी सहायक है।
इम्यूनिटी: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) को मजबूत करती है।
त्वचा और बाल: त्वचा को नमी देती है, टैनिंग कम करती है और बालों के लिए भी लाभकारी है।
हार्मोनल संतुलन: PCOS और अनियमित पीरियड्स में टेस्टोस्टेरोन कम कर, प्रजनन क्षमता बढ़ा सकती है।
मस्तिष्क और लिवर: दिमाग के लिए अच्छी है और लीवर की सेहत बनाए रखने में मदद करती है।
अन्य लाभ: #डायबिटीज, #माइग्रेन, और आंखों की जलन में भी फायदेमंद है; घावों को जल्दी भरती है।
कैसे करें इस्तेमाल (How to Use)
काढ़ा: मुलेठी की जड़ को पानी में उबालकर पिएं।
चूर्ण: पाउडर को शहद या पानी के साथ लें।
फेस पैक: पाउडर को गुलाब जल, #दूध या चंदन के साथ मिलाकर लगाएं।

सावधानियां (Precautions)
हाई ब्लड #प्रेशर वाले लोग सीमित मात्रा में लें।
गर्भवती महिलाएं #डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
अधिक सेवन से शरीर में पोटैशियम की कमी हो सकती है।

इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें : जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रख...
11/12/2025

इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें : जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी :-

1. दूध ना पचे तो - सोंफ

2. दही ना पचे तो - सोंठ

3. छाछ ना पचे तो - जीरा व काली मिर्च

4. अरबी व मूली ना पचे तो - अजवायन

5. कड़ी ना पचे तो - कड़ी पत्ता

6. तेल, घी, ना पचे तो - कलौंजी

7. पनीर ना पचे तो - भुना जीरा

8. भोजन ना पचे तो - गर्म जल

9. केला ना पचे तो - इलायची

10. ख़रबूज़ा ना पचे तो - मिश्री का उपयोग करें

◾योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।

◆ लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है।

◆ हाई बी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करें।

◆ लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें।

◆ कूबड़ निकलना - फास्फोरस की कमी।

◆ कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं।

◆ दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी।

◆ सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी।

◆ सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें।

◆ अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें।

◆ जम्भाई - शरीर में आक्सीजन की कमी।

◆ जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें।

◆ ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।

◆ किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये। गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है।

◆ अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं।

◆ वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा।

◆ परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं।

◆ पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है।

◆ RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है।

◆ सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें।

◆ पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है।

◆ भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है।

◆ HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा।

◆ गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें।

◆ चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है।

◆ शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है।

◆ वात के असर में नींद कम आती है।

◆ कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।

◆ कफ के असर में पढाई कम होती है।

◆ पित्त के असर में पढाई अधिक होती है।

◆ आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है।

◆ शाम को वात-नाशक चीजें खानी चाहिए।

◆ प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए।

◆ सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है।

◆ व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए।

◆ भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए।

◆ जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं।

◆ निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास ( लंघन ) से बुखार शांत होता है।

◆ भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है।

◆ दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,

◆ माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं।

◆ तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए।

◆ छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है।

◆ कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है। ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है।

◆ मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए।

◆ सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें
#आयुर्वेद #बेगूसराय Gulal ayurved

क्या आप जानते हैं डाइलिसिस के दौरान, खून को लाल वाली ट्यूब से बाहर निकाला जाता है , फिर dialysis मशीन से वो खून गुजरता ह...
25/06/2025

क्या आप जानते हैं डाइलिसिस के दौरान, खून को लाल वाली ट्यूब से बाहर निकाला जाता है , फिर dialysis मशीन से वो खून गुजरता है, और फिर नीली ट्यूब से उसे वापस शरीर में डाला जाता है…

इस प्रक्रिया को पूरा होने में चार घंटे लगते हैं और #मरीज़ bed पे immobile रहता है.!

ये प्रोसीजर हफ़्ते में तीन बार होता है, इसका मतलब एक महीने में १२ बार, और हर बार ये चार घंटे लेता है, इसका मतलब अढ़तालीस घंटे…

जो लोग किडनी के किसी रोग से त्रस्त नहीं हैं, और जो स्वस्थ हैं उनके लिए उनकी किडनी ये काम बिना किसी #परेशानी के दिन में छत्तीस बार करती है.

अगर आप इसे पढ़ रहे हैं तो , शराब पीना छोड़िए, प्रोसेस्ड फ़ूड ख़ाना छोड़िए, जंकी फ़्राई ख़ाना छोड़िए, अनावश्यक #मीठा ख़ाना बंद कीजिए और सबसे ज़्यादा जरूरी hit the gym.

मुझे लगता है ये सारे विकल्प आपके लिए काफ़ी सस्ते और आसान होंगे.!

आपका स्वास्थ्य, आपके ही काम आयेगा। अपना ध्यान स्वयं रखिए।
❤️

95% शुगर रोग को रिमूव कर देगी विजयसार की लकड़ीखराब लाइफस्टाइल के चलते डायबिटीज की समस्या आम हो गई है। पहले तो डायबिटीज 5...
03/03/2025

95% शुगर रोग को रिमूव कर देगी विजयसार की लकड़ी

खराब लाइफस्टाइल के चलते डायबिटीज की समस्या आम हो गई है। पहले तो डायबिटीज 50 साल से ज्यादा उम्र के लागों को होती थी, लेकिन जेनेटिक होने के कारण अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। समय रहते इसे कंट्रोल कर लिया जाए, तो इसके बढ़ने की संभावना को कम किया जा सकता है। वैसे तो डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए लोग लौकी, गिलोय जैसे घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, मधुमेह और घुटनो के दर्द का रामबाण इलाज है...विजयसार नाम से एक लकड़ी है ये हमारे भारत में मध्य प्रदेश से लेकर पूरे दक्षिण भारत मे पाया जाता है। इसकी लकड़ी के टुकड़े हर जड़ी बूटी बेचने वाले या पन्सारी की दुकान से आसानी से मिल जाते है। इसकी लकड़ी का रंग हल्का लाल रंग से गहरे लाल रंग का होता है। यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही, साथ में उन रोगियों जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता, उनके लिये भी अचूक है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए कई कम्पनिया और कई क्षेत्रों में इसके ग्लास भी बनाकर बेचते हैं। पर वो बहुत मेहँगे पड़ते है और कुछ देर बाद उस ग्लास की उपयोगिता समाप्त हो जाती है।

मधुमेह, प्रमेह (धातु रोग), अस्थियों कि मजबूती के लिए तो यह जाना जाता ही है मेरे जानने वाले बहुत ही लोगों ने इसे 3 मास तक स्वयं प्रयोग किया है और इसके लाभ अनुभव किये है और किसी भी तरह का साइड-एफेक्ट नहीं पाया।

◾औषधीय गुण : -

1. मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
2. उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
3.‌ अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
4. जोडों के दर्द में लाभ देता है। विजयसार : घुटनो के दर्द का रामबाण इलाज है.
5. हाथ-पैरों के कम्पन में भी बहुत लाभदायक है।
6. शरीर में बधी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
7. त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-2 फोडे-फिंसी होते हों, उनमें भी लाभ देता है।
8. प्रमेह (धातु रोग) में भी अचूक है।
9. इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़- कड़ बंद होती है .अस्थियाँ मजबूत होती है।

विजयसार की लकड़ी के टुकड़े बाजार से ले आए, जिसमे घुन ना लगा हो। इसे सूखे कपड़े से साफ कर ले। अगर टुकड़े बड़े है तो उन्हे तोड़ कर छोटे- छोटे- 1/4 -1/2 सेंटीमीटर या और भी छोटे टुकड़े बना ले।फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को दो कप या एक गिलास पानी में डाल दे । सुबह तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी ले और दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर छान ले। फिर इसे ठंडा होने पर पी ले।

इसकी मात्रा रोग के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते है अगर आप अग्रेजी दवा का प्रयोग कर रहे है तो एक दम न बंद करे बस धीरे -धीरे कम करते जाए अगर आप इंस्युलीन के इंजेक्शन प्रयोग करते है वह 1 सप्ताह बाद इंजेक्शन की मात्रा कम कर दे। हर सप्ताह मे इंस्युलीन की मात्रा 2-3 यूनिट कम कर दे। विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं.

नोट : 1) यदि आप साथ में एलोपेथिक दवा भी ले रहे हैं, तो रक्त में शर्करा की मात्रा नियमित रूप से चेक करते रहें। यह केवल विजयसार पर ही लागू नहीं - आप कोई और भी आयुर्वेदिक दवा एलोपेथिक दवा के साथ में लेते हैं तो यह ध्यान रखना आवश्यक है।
मैने आगे भी कई बार बताया है की बढ़ी हुई शुगर या शर्करा की मात्रा हानि पहुंचने में कुछ सप्ताह या मास ले सकती है, जबकि अगर यह एकदम काम हो जाये, तो चंद मिनटों में ही घातक हो सकती है।
- मिट्टी का बर्तन तो ही लें, अगर मिट्टी अच्छी तरह से पकी हुई हो और उसे अच्छी तरह साफ करके ही प्रयोग करें। वर्ना आप शीशे या चीनी मिट्टी का बर्तन भी प्रयोग में ला सकते हैं।
- मधुमेह के रोगी को जेब मे कुछ टाफिया या मीठे बिस्कुट हमेशा रखने चाहिए। यदि चक्कर आए तो 1-2 टॉफी या बिस्कुट तत्काल खा ले।

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*भोजन करते समय अक्सर हम सबने तेजपत्ते को थाली से बाहर कर दिया होगा....**पर जब आप इसके औषधीय मूल्य को जानेंगे तो इसको थाल...
17/01/2025

*भोजन करते समय अक्सर हम सबने तेजपत्ते को थाली से बाहर कर दिया होगा....*
*पर जब आप इसके औषधीय मूल्य को जानेंगे तो इसको थाली से बाहर न करके बड़े चाव से इसका सेवन शुरू कर देंगे..!*

*तेजपत्ता को तेजपत्र, तेजपान, तमालका, तमालपत्र, तेजपात, इन्डियन केसिया आदि आदि नामों से जाना जाता है।*

*तेजपत्ता की खेती हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू- कश्मीर, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में की जाती है।*

*ये हमेशा हरा रहने वाले तमाल वृक्ष के पत्ते हैं जो कई सालों तक लगातार उपज देता रहता है।*

*इस पेड़ को यदि एक बार लगाया गया तो यह 50 से 100 सालों तक उपज देकर सेवा करता रहता है।*

*रोपण करने के 6 साल बाद जब इसका पेड़ पूरी तरह से विकसित हो जाता है तो इसकी पत्तियों को इक्कठा कर लिया जाता है।*

*पत्तियों को इक्कठा करने के बाद इन्हें छाया में सुखाया जाता है।*

*तब ये पत्तियां उपयोग करने के लिए तैयार हो जाती है। फसल की कटाई करने का बाद, इसकी पत्तियों को छाया में सुखाया जाता है।*

*तेज पत्ते का तेल निकालने के लिए आसवन यंत्र का प्रयोग किया जाता है।*

*इसकी पत्तियों से हमे 0.6% खुशबूदार तेल की प्राप्ति होती है।*

*इसका तेल भी एक बहुआयामी बहुकीमती औषधि है।*

*औषधीय गुण* 🍾👌

*तेजपत्ता मधुमेह, अल्ज़ाइमर्स, बांझपन, गर्भस्त्राव, स्तनवर्धक, खांसी जुकाम, जोड़ो का दर्द, रक्तपित्त, रक्तस्त्राव, दाँतो की सफाई, सर्दी जैसे अनेक रोगो में अत्यंत उपयोगी है।*

*तेजपत्ता में दर्दनाशक, एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। आयुर्वेद में अनेक गंभीर रोगो में इसके उपयोग किये जाते रहे हैं।*

*चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम, छींकें आना, बुखार, नाक बहना, जलन, सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है।*

*तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है।*

*तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है।*

*एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।*

*तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है।*

*कपड़ों के बीच में तेजपात के पत्ते रख दीजिये, ऊनी, सूती, रेशमी कपडे कीड़ों से बचे रहेंगे।*

*अनाजों के बीच में 4-5 पत्ते डाल दीजिए तो अनाज में भी कीड़े नहीं लगेंगे लेकिन उनमें एक दिव्य सुगंध जरूर बस जायेगी।*

*अनेक लोगों के मोजों से दुर्गन्ध आती है, वे लोग तेजपात का चूर्ण पैर के तलुवों में मल कर मोज़े पहना करें। पर इसका मतलब ये नहीं कि आप महीनों तक मोज़े धुलें ही न.!*

*तेजपात का अपने भोजन में लगातार प्रयोग कीजिए, आपका ह्रदय मजबूत बना रहेगा, कभी हृदय रोग नहीं होंगे।*

*इसके पत्ते को जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।*

*इसका धुँआ मिर्गी रोगी के लिए काफी लाभदायक होता है।*
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गृध्रसी= साइटिका का आयुर्वेद से सफल चमत्कारी इलाज...🧵◾लक्षण-: एक पैर मे पंजे से लेकर कमर तक दर्द होना गृध्रसी या रिंगण ब...
16/01/2025

गृध्रसी= साइटिका का आयुर्वेद से सफल चमत्कारी इलाज...🧵
◾लक्षण-: एक पैर मे पंजे से लेकर कमर तक दर्द होना गृध्रसी या रिंगण बाय कहलाता है। प्रायः पैर के पंजे से लेकर कूल्हे तक दर्द होता है जो लगातार होता रहता है। मुख्य लक्षण यह है कि दर्द केवल एक पैर मे होता है। दर्द इतना अधिक होता है कि रोगी सो भी नहीं पाता।

हारसिंगार = पारिजात के 10-15 कोमल पत्ते को कटे फटे न हों तोड़ लाएँ। पत्ते को धो कर मिक्सी मे या कैसे ही थोड़ा सा कूट ले या पीस ले। बहुत अधिक बारीक पीसने कि जरूरत नहीं है। लगभग 200-300 ग्राम पानी (2 कप) मे धीमी आंच पर उबालें। तेज आग पर मत पकाए... चाय की तरह पकाए। चाय कि तरह छान कर गरम गरम पानी (काढ़ा) पी ले।

पहली बार मे ही 10% फायदा होगा।
प्रतिदिन 2 बार पिए...यदि आप ऑफिस जाते हैं तो दोगुना पानी उबाले। थर्मस मे भरकर ले जाएँ। इस हरसिंगार के पत्तों के काढ़े से 15 मिनट पहले और बाद तक ठंडा पानी न पीए...दही लस्सी और आचार न खाएं।।

12/01/2025





क्या है HMPV? ये वायरस कैसे फैलता है? क्या हैं इसके लक्षण? किन लोगों को है ज़्यादा ख़तरा और क्या हैं बचाव के उपाय? जानिए...
06/01/2025

क्या है HMPV? ये वायरस कैसे फैलता है? क्या हैं इसके लक्षण? किन लोगों को है ज़्यादा ख़तरा और क्या हैं बचाव के उपाय? जानिए इन सवालों के जवाब।

 #आयुर्वेदिक  Gulal ayurved
04/01/2025

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04/01/2025

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