Awani Homoeopathic Clinic

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Awani Homoeopathic Clinic अवनी होमियोपैथी क्लीनिक
यहां नए व पुराने सभी प्रकार के रोगों का इलाज किया जाता है।

14/08/2026
11/08/2026
मानसिक पीड़ा : सबसे बड़ी बीमारी-------------------------------------------एक चिकित्सक होने के नाते प्रतिदिन अनेक रोगियों...
04/08/2026

मानसिक पीड़ा : सबसे बड़ी बीमारी
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एक चिकित्सक होने के नाते प्रतिदिन अनेक रोगियों से मिलना होता है।
वे दवा लेने आते हैं, लेकिन बातचीत के कुछ ही क्षणों बाद समझ में आने लगता है कि उनकी सबसे बड़ी बीमारी शरीर में नहीं, मन में है।जब मैं उनकी बीमारी का इतिहास पूछता हूँ, तो केवल लक्षण नहीं सुनता, उनके जीवन की अनकही कहानी भी सुनता हूँ। तब पता चलता है कि उनके भीतर के सबसे गहरे घाव किसी दुर्घटना, किसी शत्रु या किसी अजनबी ने नहीं दिए।
वे घाव उन लोगों ने दिए हैं जिन्हें उन्होंने सबसे अधिक अपना माना था, जिन पर सबसे अधिक विश्वास किया था, जिनके लिए अपने सपनों का त्याग किया, अपनी इच्छाओं को दबाया, अपना समय, अपना श्रम और कभी-कभी अपना पूरा जीवन तक समर्पित कर दिया।
फिर एक दिन वही लोग बदल गए।
किसी ने विश्वास तोड़ दिया,
किसी ने उपेक्षा कर दी,
किसी ने अपमानित किया,
और किसी ने बिना कुछ कहे साथ छोड़ दिया।
इन घावों का कोई एक्स-रे नहीं होता।
कोई रक्त-जाँच इन्हें नहीं पकड़ती।
फिर भी यही वे घाव हैं, जो मनुष्य को भीतर-ही-भीतर सबसे अधिक बीमार कर देते हैं। शहरों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली महिलाएं महिलाओं के मानसिक रोगों का सबसे बड़ा कारण होता है गृह कलह।
मैं उन्हें दवा अवश्य देता हूँ, लेकिन दवा के साथ एक बात उनके मन में भी रख देता हूँ
जीवन का सबसे कठिन, किन्तु सबसे मुक्त करने वाला सत्य यह है कि अंततः हर मनुष्य अपनी यात्रा स्वयं तय करता है।
लोग मिलते हैं, रिश्ते बनते हैं, साथ चलते हैं, लेकिन हर साथ जीवन भर का नहीं होता। समय, परिस्थितियाँ और स्वार्थ अक्सर अपने-अपने रास्ते चुन लेते हैं।
इसलिए अपने भीतर इतना प्रकाश अवश्य बचाकर रखिए कि किसी के चले जाने से आपका पूरा जीवन अँधेरे में न डूब जाए।
अपने आत्मसम्मान को किसी के व्यवहार का बंधक मत बनाइए।
अपने साहस को किसी की स्वीकृति का मोहताज मत होने दीजिए।
जिस दिन मनुष्य यह स्वीकार कर लेता है कि उसका सबसे स्थायी सहारा उसका अपना आत्मबल, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान है, उसी दिन से मन के घाव भरने लगते हैं।
शरीर की दवाइयाँ लिखना मेरा कर्तव्य है, लेकिन अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि मन की सबसे प्रभावी औषधियाँ किसी शीशी में नहीं मिलतीं।
वे हैं—
सत्य को स्वीकार करने का साहस,
स्वयं पर अटूट विश्वास,
और समय—जो सबसे गहरे घावों पर भी अंततः मरहम रख देता है।
एक चिकित्सक के रूप में मेरा अनुभव यह भी है कि मानसिक तनाव, शोक, भय, चिंता, अपमान या भावनात्मक आघात से उत्पन्न अनेक समस्याओं में होम्योपैथी भी सहायक भूमिका निभा सकती है। रोगी के संपूर्ण व्यक्तित्व और लक्षणों के आधार पर योग्य चिकित्सक द्वारा चयनित औषधियाँ, जैसे—Ignatia amara,
Natrum muriaticum,
Aurum metallicum,
Anacardium orientale,
Kali phosphoricum तथा Arsenicum album
आदि हैं।
होम्योपैथ में अगर लक्षणों को देखा जाए तो रोगी के मानसिक लक्षण बहुत ज्यादा अहम होते हैं किसी भी डॉक्टर के लिए ।
Doctor Kent रोगी के मानसिक लक्षणों को ही आधार बनाकर दवा चुनाव की सलाह देते हैं।
हालाँकि, मानसिक रोगों में स्वयं दवा लेना उचित नहीं है। सही औषधि का चयन रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के विस्तृत अध्ययन के बाद ही एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए। गंभीर अवसाद, आत्महत्या के विचार, मनोविकृति या अन्य गंभीर मानसिक अवस्थाओं में तत्काल विशेषज्ञ मनोचिकित्सक से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।

-- वेद प्रकाश तिवारी

31/07/2026
पार्किंसंस रोग (Parkinson's Disease) क्या है ?--------------------------यह मस्तिष्क का एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव वि...
12/07/2026

पार्किंसंस रोग (Parkinson's Disease) क्या है ?
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यह मस्तिष्क का एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारी) है जो मुख्य रूप से शरीर की गतिविधियों (Movement) को प्रभावित करता है। जब दिमाग के एक खास हिस्से (Substantia Nigra) की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, तो शरीर में डोपामाइन नामक न्यूरोट्रांसमीटर (रसायन) का स्तर कम हो जाता है। डोपामाइन ही हमारे शरीर के अंगों को नियंत्रित और संतुलित रखता है।

पार्किंसंस रोग क्यों होता है ?

चिकित्सा विज्ञान में इसका सटीक कारण अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके मुख्य कारक निम्नलिखित माने जाते हैं: जेनेटिक्स (आनुवंशिकता): लगभग 10-15% मामलों में यह बीमारी पारिवारिक इतिहास या विशिष्ट जीन में बदलाव (Mutations) के कारण हो सकती है

पर्यावरणीय कारक:

कीटनाशकों (Pesticides), टॉक्सिन्स और औद्योगिक रसायनों के अत्यधिक संपर्क में रहने से इसका खतरा बढ़ता है।

दिमागी चोट: सिर पर गंभीर चोट (Trauma) लगने के कारण भविष्य में कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।गट हेल्थ (पेट का स्वास्थ्य): कुछ नए शोधों से संकेत मिलते हैं कि पेट के माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) में बदलाव भी मस्तिष्क की नसों को प्रभावित कर सकता है।

इसके मुख्य लक्षण क्या हैं ?

शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है:
कंपन (Tremors):
आराम की स्थिति में भी हाथों, उंगलियों या पैरों का कांपना।धीमी गति (Bradykinesia):
दैनिक कार्यों (जैसे बटन लगाना, लिखना, चलना) की गति बहुत धीमी हो जाना।

मांसपेशियों में कड़ापन (Rigidity): हाथ-पैर और शरीर का जकड़ जाना।संतुलन खोना: चलने में लड़खड़ाहट होना और बार-बार गिरने की संभावना बढ़ना।

इससे बचने और इसे नियंत्रित करने के उपाय (Prevention & Management)

निम्नलिखित जीवनशैली अपनाकर इसके जोखिम को कम और लक्षणों को बेहतर किया जा सकता है:

नियमित व्यायाम: एरोबिक्स, पैदल चलना, साइकिल चलाना, जैविक योग और ध्यान करने से मांसपेशियों का संतुलन और लचीलापन बना रहता है।

एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार: भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सूखे मेवे और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करें।

सुरक्षित वातावरण (घर में बदलाव): मरीज को गिरने से बचाने के लिए फर्श से फिसलने वाले कारपेट हटाएं, बाथरूम में एंटी-स्किड मैट और साइड रेलिंग लगाएं।

डॉक्टर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं
01/07/2026

डॉक्टर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं

भीषण गर्मी और बुजुर्गों की सेहत : बीमारियां और होम्योपैथिक उपचार-------------------------------------------नमस्कार दोस्त...
18/06/2026

भीषण गर्मी और बुजुर्गों की सेहत :
बीमारियां और होम्योपैथिक उपचार
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नमस्कार दोस्तों, मैं डॉ. वेद प्रकाश तिवारी । इस भीषण गर्मी में हमारे घर के बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा होता है। उम्र के साथ शरीर का 'कूलिंग सिस्टम' कमजोर हो जाता है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ते हैं।
गर्मी में होने वाली मुख्य समस्याएं:

हीट स्ट्रोक (लू लगना) व एग्जॉस्टशन: अचानक तेज बुखार, बेहोशी या भारी कमजोरी आना।गंभीर डिहाइड्रेशन: बुजुर्गों को प्यास कम लगती है, जिससे पानी की कमी और किडनी पर असर होता है।

उल्टी-दस्त (फूड पॉइजनिंग): गर्मी में दूषित भोजन/पानी से पेट खराब होना।

भीषण गर्मी के कारण हृदय पर दबाव बढ़ना।
भीषण गर्मी केवल तापमान की समस्या नहीं है; यह रक्तचाप सहित शरीर की संपूर्ण कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। समय रहते उचित सावधानी और समुचित चिकित्सा अपनाकर इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। होम्योपैथी इस दिशा में एक संवेदनशील और व्यक्ति-केंद्रित उपचार पद्धति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राहत देने वाली मुख्य होम्योपैथिक दवाएं:

Glonoinum: लू लगने और धूप के कारण होने वाले भयंकर सिरदर्द के लिए।Gelsemium: गर्मी से होने वाली अत्यधिक सुस्ती, कमजोरी और चक्कर आने पर।Belladonna: अचानक धूप से तेज बुखार आने और चेहरा लाल होने पर।
China: उल्टी-दस्त या अत्यधिक पसीने के कारण आई कमजोरी (Dehydration) दूर करने के लिए।
Arsenicum Album: गर्मियों में बासी खाना से पेट खराब होने पर
Nat Mur और Lachesis : यह दवा रक्तचाप को ठीक रहती है

डॉक्टर की सलाह:
बुजुर्गों को बिना प्यास लगे भी बार-बार पानी, छाछ या नींबू पानी पिलाते रहें। दोपहर 11 से 4 बजे के बीच उन्हें बाहर न जाने दें।

नोट: दवा का चुनाव व सही खुराक के लिए हमेशा किसी योग्य होम्योपैथिक डॉक्टर से संपर्क करें। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें !
आप मुझसे भी संपर्क कर सकते हैं

Dr ved Parkash Tiwari
9250931566

17/06/2026

बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी: पैरेंट्स के लिए जरूरी जानकारी

19/05/2026

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