04/08/2026
मानसिक पीड़ा : सबसे बड़ी बीमारी
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एक चिकित्सक होने के नाते प्रतिदिन अनेक रोगियों से मिलना होता है।
वे दवा लेने आते हैं, लेकिन बातचीत के कुछ ही क्षणों बाद समझ में आने लगता है कि उनकी सबसे बड़ी बीमारी शरीर में नहीं, मन में है।जब मैं उनकी बीमारी का इतिहास पूछता हूँ, तो केवल लक्षण नहीं सुनता, उनके जीवन की अनकही कहानी भी सुनता हूँ। तब पता चलता है कि उनके भीतर के सबसे गहरे घाव किसी दुर्घटना, किसी शत्रु या किसी अजनबी ने नहीं दिए।
वे घाव उन लोगों ने दिए हैं जिन्हें उन्होंने सबसे अधिक अपना माना था, जिन पर सबसे अधिक विश्वास किया था, जिनके लिए अपने सपनों का त्याग किया, अपनी इच्छाओं को दबाया, अपना समय, अपना श्रम और कभी-कभी अपना पूरा जीवन तक समर्पित कर दिया।
फिर एक दिन वही लोग बदल गए।
किसी ने विश्वास तोड़ दिया,
किसी ने उपेक्षा कर दी,
किसी ने अपमानित किया,
और किसी ने बिना कुछ कहे साथ छोड़ दिया।
इन घावों का कोई एक्स-रे नहीं होता।
कोई रक्त-जाँच इन्हें नहीं पकड़ती।
फिर भी यही वे घाव हैं, जो मनुष्य को भीतर-ही-भीतर सबसे अधिक बीमार कर देते हैं। शहरों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली महिलाएं महिलाओं के मानसिक रोगों का सबसे बड़ा कारण होता है गृह कलह।
मैं उन्हें दवा अवश्य देता हूँ, लेकिन दवा के साथ एक बात उनके मन में भी रख देता हूँ
जीवन का सबसे कठिन, किन्तु सबसे मुक्त करने वाला सत्य यह है कि अंततः हर मनुष्य अपनी यात्रा स्वयं तय करता है।
लोग मिलते हैं, रिश्ते बनते हैं, साथ चलते हैं, लेकिन हर साथ जीवन भर का नहीं होता। समय, परिस्थितियाँ और स्वार्थ अक्सर अपने-अपने रास्ते चुन लेते हैं।
इसलिए अपने भीतर इतना प्रकाश अवश्य बचाकर रखिए कि किसी के चले जाने से आपका पूरा जीवन अँधेरे में न डूब जाए।
अपने आत्मसम्मान को किसी के व्यवहार का बंधक मत बनाइए।
अपने साहस को किसी की स्वीकृति का मोहताज मत होने दीजिए।
जिस दिन मनुष्य यह स्वीकार कर लेता है कि उसका सबसे स्थायी सहारा उसका अपना आत्मबल, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान है, उसी दिन से मन के घाव भरने लगते हैं।
शरीर की दवाइयाँ लिखना मेरा कर्तव्य है, लेकिन अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि मन की सबसे प्रभावी औषधियाँ किसी शीशी में नहीं मिलतीं।
वे हैं—
सत्य को स्वीकार करने का साहस,
स्वयं पर अटूट विश्वास,
और समय—जो सबसे गहरे घावों पर भी अंततः मरहम रख देता है।
एक चिकित्सक के रूप में मेरा अनुभव यह भी है कि मानसिक तनाव, शोक, भय, चिंता, अपमान या भावनात्मक आघात से उत्पन्न अनेक समस्याओं में होम्योपैथी भी सहायक भूमिका निभा सकती है। रोगी के संपूर्ण व्यक्तित्व और लक्षणों के आधार पर योग्य चिकित्सक द्वारा चयनित औषधियाँ, जैसे—Ignatia amara,
Natrum muriaticum,
Aurum metallicum,
Anacardium orientale,
Kali phosphoricum तथा Arsenicum album
आदि हैं।
होम्योपैथ में अगर लक्षणों को देखा जाए तो रोगी के मानसिक लक्षण बहुत ज्यादा अहम होते हैं किसी भी डॉक्टर के लिए ।
Doctor Kent रोगी के मानसिक लक्षणों को ही आधार बनाकर दवा चुनाव की सलाह देते हैं।
हालाँकि, मानसिक रोगों में स्वयं दवा लेना उचित नहीं है। सही औषधि का चयन रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के विस्तृत अध्ययन के बाद ही एक योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए। गंभीर अवसाद, आत्महत्या के विचार, मनोविकृति या अन्य गंभीर मानसिक अवस्थाओं में तत्काल विशेषज्ञ मनोचिकित्सक से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।
-- वेद प्रकाश तिवारी