Drx.Manjeet Bhardwaj

Drx.Manjeet Bhardwaj स्वदेशी आयुर्वेद

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10/05/2026

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देश मे करीब उत्कृष्ट 9 बड़े आयुर्वेद संस्थान है (रिपोर्ट अनुसार) जो कई तो आजादी के पहले के है, जिन्हें #राज्य_सरकार द्वारा एवं #केंद्र_सरकार द्वारा आर्थिक अनुदान पर चलाये जाते है।
हजारों करोड़ दशकों से इन पर खर्च किया गया है,लेकिन उपलब्धि के नाम पर कोई ठोस चिकित्सा पद्धति देश के हाथ नही लगी आखिर क्यो इसके पीछे कारण क्या रहा.....
#आधुनिक_चिकित्सा_विज्ञान #एलोपैथी को #स्वास्थ्य_बजट कुल बजट का 98% मिलता है, बाकी 2% में सारी पैथी आती है #आयुर्वेद #होमियोपैथी #यूनानी आदि
एलोपैथी को 65,000 करोड़ का बजट मिलता है और आयुष को मात्र 1,900 करोड़ ,फिर भी ये अपने ही देश की चिकित्सा पद्धति #आयुर्वेद से इतना भयभीत है कि दुष्प्रचार का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे एक बात स्पष्ट है । #आयुर्वेद पहले से ज्यादा #शक्तिशाली होता जा रहा है...
अब बात आती है ऐसा क्यो होता रहा है किस कारण से बजट का लगभग पूरा हिस्सा एक पैथी को मिलने के बाद भी देश के हालात बत्तर से बत्तर होते जा रहे है जबकि इस सेक्टर की ग्रोथ रेट देश मे सबसे ऊंची है,
समझना यह होगा कि कौन #षड्यंत्रकारी शक्तियां है जो इसके पीछे काम करती है ।
अधिकांश #फार्मा #कम्पनियों में पकड़ #विदेशी कंपनियों की है और जो स्वदेशी कम्पनी भी है तो वो पूर्णतया #आत्मनिर्भर नही है #दवा बनाने से ले कर #उपकरणों तक मे विदेशी कंपनियों की जबरदस्त पकड़ है,
दुनियाभर में काफी सर्वे हुए जिसे पता चला कि इन सबके पीछे बहुत बड़ी लॉबी लगी हुई है जो पहले लोगों को बीमार करती है फिर उसे ठीक करने के नाम पर शोद्ध की वस्तु बना कर अपने नए षड्यंत्र का हिस्सा बनाती है, इसी कुचक्र में कई लाख करोड़ों की मलाई चट कर जाती है,
इसका एक उदाहरण आप अपने आस पास के किसी साधारण से #डॉक्टर #केमिस्ट #लैब वालो की #चक्रव्यूह से समझ सकते है, किसी भी साधारण से बीमारी में कई कई टेस्ट लिखे जाते है क्योंकि लैब से टेस्ट पर 30-60% कमीशन बंधा होता है फिर दवा कम्पनियों में अपने एजंट छोड़े होते है जो डॉक्टर को पूरी स्कीम समझाते है.....दवा के असर की नही न बीमारी की बल्कि उस पर मिलने वाले पैकेज की क्या क्या गिफ्ट्स या मिठाई है बच्चो के लिए वाली स्कीम डॉक्टर के साथ शेयर की जाती है ।
एक साधारण सा #डॉक्टर चंद सालो में #करोड़पति बन जाता है, और बड़े हॉस्पिटल हजारों करोड़ के धंधा करते है ।
आपके आस पास इनकी खरपतवार की तरह भरमार हो गई है जबकि बीमारी बढ़ी है क्यो .....???????
जबकि #योग #आयुर्वेद में आधार ही लोगो को बीमार न पड़ने देना है,
आयुर्वेद के हमेशा उलट सलाह देता रहा है एलोपैथी विज्ञान आहार में असंतुलन ही पूरे शरीर का ढर्रे को बर्बाद करता है,
जबकि आयुर्वेद में दवा से ज्यादा परहेज पर मरीज को जोर दिया जाता है,
शरीर अपने आप मे एक लैब है जहाँ जैसा पदार्थ उपलब्ध करवाया जाएगा वैसा परिणाम वह आपको देगा ।
अब आखिर में लेख के निष्कर्ष की और बढ़ते है लगभग 25/30 सालो अनुभव से # #पतंजलि को खड़ा करने वाले एक साधारण से व्यक्ति के जीवन संघर्ष में से देश को क्या क्या दिया योगदान दिया।
जिसने 2 दशको से लोगों को सुबह 5 बजे उठा कर #योग करने की जिद ठानी जिसका आधार ही बिना दवा लोगो को ठीक करना रहा है वो #व्यापारिक_दृष्टिकोण से सेवा नही करता ।
जिस देश में खाने को रोटी न हो वहाँ दवा चिकित्सा के पैसे कैसे आयंगे वो अपने आप को योग से ही ठीक कर ले या बीमार ही न पड़े ।
क्यो योग एक आंदोलन बना सारी दुनिया मे क्योंकि उसका परिणाम सब जानते है कि इसके करने से जटिल से जटिल बीमारी से निजात पाई जा सकती है या बीमारी से बचा जा सकता है।
देश की जनता से कमाया पैसा देश जनता के परोपकार में ही अर्पित करने में लगे है ।
क्यो उन #कम्पनियों #संस्थानों #विभागों पर उंगली नही उठाई जाती जिनके आसपी गठजोड ने देश जनता को लुटखोरी का जरिया बनाया हुआ है -

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10/05/2026

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गर्मियों में सूती कपड़ों (Cotton) का चयन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि थर्मल कंफर्ट (Thermal Comfort) का एक सटीक वैज्ञानिक समाधान है। जिसे हम 'सांस लेने वाला कपड़ा' (Breathable Fabric) कहते हैं, वह वास्तव में पसीने और हवा के बीच एक ऊर्जा विनिमय (Energy Exchange) का माध्यम है।
1. 'कैपिलरी एक्शन' और पसीने का सोखना
सूती रेशा प्राकृतिक रूप से सेल्युलोज (Cellulose) से बना होता है, जिसमें पानी के अणुओं के प्रति जबरदस्त आकर्षण होता है।
• पसीने का खिंचाव: सूती कपड़ों के रेशों के बीच बहुत सूक्ष्म छिद्र होते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे कैपिलरी एक्शन (Capillary Action) कहते हैं, जो पसीने को त्वचा से खींचकर कपड़े की बाहरी सतह पर ले आता है।
• सिंथेटिक बनाम सूती: नायलॉन या पॉलिएस्टर पसीने को सोखते नहीं, बल्कि उसे त्वचा और कपड़े के बीच कैद कर देते हैं, जिससे उमस और 'चिपचिपाहट' बढ़ती है।
2. वाष्पीकरण: ठंडक का मुख्य स्रोत (Evaporative Cooling)
ठंडक का असली अहसास पसीना सोखने से नहीं, बल्कि उसके उड़ने से होता है।
• ऊर्जा का स्थानांतरण: जब हवा पसीने से भीगे सूती कपड़े के संपर्क में आती है, तो पसीना भाप (Vapour) बनकर उड़ने लगता है।
• शरीर की गर्मी का कम होना: पसीने को तरल से गैस (भाप) में बदलने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। यह ऊर्जा पसीना आपके शरीर से गर्मी के रूप में खींचता है। जैसे-जैसे पसीना उड़ता है, आपके शरीर का तापमान गिर जाता है और आपको ठंडक महसूस होती है।
3. हवा का प्रवाह (Breathability)
सूती कपड़े की बुनाई इस तरह की होती है कि वह हवा के अणुओं को आसानी से आर-पार जाने देती है।
• हीट वेंटिलेशन: यह शरीर के पास गर्म हवा को जमा नहीं होने देता। यह लगातार ताजी हवा को त्वचा तक पहुँचाता है, जिससे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर पाता है।
4. सफेद या हल्के रंग का विज्ञान
गर्मियों में अक्सर 'सफेद सूती कपड़े' पहनने की सलाह दी जाती है, जिसके पीछे प्रकाशिकी (Optics) का नियम है:
• रिफ्लेक्शन (Reflection): सफेद रंग सूरज की रेडिएशन को सोखने के बजाय उसे परावर्तित (Reflect) कर देता है। इससे कपड़ा खुद कम गर्म होता है, जिससे शरीर तक गर्मी कम पहुँचती है।

JSS 🙏🌹🚩 शरीर में होने वाले तीनों दोष 🌹 उनके लक्षण और उपचार 🙏
10/05/2026

JSS 🙏🌹🚩
शरीर में होने वाले तीनों दोष 🌹
उनके लक्षण और उपचार 🙏

वात पित्त कफ के दोष तीनों को संतुलित करे इस आयुर्वेदिक उपाय से...अंत तक जरुर पढ़ें।
❤❤❤वात पित्त और कफ के दोष:-
💜पोस्ट को धयान से 2 बार पढ़े
शरीर 3 दोषों से भरा है
वात(GAS) -लगभग 80 रोग
पित्त(ACIDITY)- लगभग 40 रोग
कफ(COUGH) -लगभग 28 रोग
💚यहां सिर्फ त्रिदोषो के मुख्य लक्षण बतये जायेगे और वह रोग घरेलू चिकित्सा से आसानी से ठीक होते है
💚सभी परहेज विधिवत रहेंगे जैसे बताता हूं
💙जिस इंसान की बड़ी आंत में कचड़ा होता है बीमार भी केवल वही होता है
💙एनीमा एक ऐसी पद्धति है जो बड़ी आंत को साफ करती है और किसी भी रोग को ठीक करती है
💚संसार के सभी रोगों का कारण इन तीन दोष के बिगड़ने से होता है
💛वात(GAS) अर्थात वायु:-💛
--शरीर मे वायु जहां भी रुककर टकराती है, दर्द पैदा करती है, दर्द हो तो समझ लो वायु रुकी है
--पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, घुटनो का दर्द ,सीने का दर्द आदि
--डकार आना भी वायू दोष है
--चक्कर आना,घबराहट और हिचकी आना भी इसका लक्षण है
💙कारण:-
--गैस उत्तपन्न करने वाला भोजन जैसे कोई भी दाल आदि गैस और यूरिक एसिड बनाती ही है
--यूरिक एसिड जहां भी रुकता है उन हड्डियों का तरल कम होता जाता है हड्डियां घिसना शुरू हो जाती है ,उनमे आवाज आने लगती है, उसे डॉक्टर कहते है कि ग्रीस ख़त्म हो गई, या फिर स्लिप डिस्क या फिर स्पोंडलाइटिस, या फिर सर्वाइकल आदि
--प्रोटीन की आवश्यकता सिर्फ सेल्स की मरम्मत के लिए है जो अंकुरित अनाज और सूखे मेवे कर देते है
--मैदा औऱ बिना चोकर का आटा खांना
--बेसन की वस्तुओं का सेवन करना
--दूध और इससे बनी वस्तुओं का सेवन करना
-आंतो की कमजोरी इसका कारण व्यायाम न करना।
👉🏻 तन बिगड़ने वाला भोजन से
👉🏻 मन बिगड़ने वाले विचार से
👉🏻 मनोदीशा बिगड़ने वाले लोगों से कैसे दूर रहे।
💜निवारण:-
--अदरक का सेवन करें,यह वायु खत्म करता है, रक्त पतला करता है कफ भी बाहर निकालता है, सोंठ को लेकर रात में गुनगने पानी से आधा चम्मच खायेँ
--लहसुन किसी भी गैस को बाहर निकालता है,
यदि सीने में दर्द होने लगे तो तुरन्त 8-10 कली लहसुन खा ले, ब्लॉकेज में तुरंत आराम मिलता है
--लहसुन कफ के रोग और टीबी के रोग भी मारता है
--सर्दी में 2-2 कली सुबह शाम, और गर्मी में 1-1 कली सुबह शाम ले, और अकेला न खायेँ सब्जी या फिर जूस , चटनी आदि में कच्चा काटकर डालकर ही खायेँ
--मेथीदाना भी अदरक लहसुन की तरह ही कार्य करता है
💜प्राकृतिक उपचार:-
गर्म ठंडे कपड़े से सिकाई करे, अब उस अंग को पहले छुएं यदि वो गर्म है तो ठंडे सिकाई करे और वह अंग अगर ठंडा है तो गर्म सिकाई करे औऱ अगर न गर्म है और न ठंडा तो गर्म ठंडी सिकाई करे एक मिनट गर्म एक मिनट ठंडा ।
💛कफ(COUGH):-💛
--मुंह नाक से आने वाला बलगम इसका मुख्य लक्षण है
--सर्दी जुखाम खाँसी टीबी प्लूरिसी निमोनिया आदि इसके मुख्य लक्षण है
--सांस लेने में तकलीफ अस्थमा आदि या सीढी चढ़ने में हांफना
💙कारण:-
--तेल एव चिकनाई वाली वस्तुओं का अधिक सेवन
--दूध और इससे बना कोई भी पदार्थ
--ठंडा पानी औऱ फ्रिज की वस्तुये खांना
--धूल ,धुंए आदि में अधिक समय रहना
--धूप का सेवन न करना
💜निवारण:-
--विटामिन C का सेवन करे यह कफ का दुश्मन है यह संडास के रास्ते कफ निकालता है, जैसे आवंला
--लहसुन, यह पसीने के रूप में कफ को गलाकर निकालता है
--Bp सामान्य हॉगा
--ब्लड सर्कुलेशन ठीक हॉगा
--नींद अच्छी आएगी
--अदरक भी सर्वश्रेष्ठ कफ नाशक है
💜प्राकृतिक उपचार
--एक गिलास गुनगने पानी मे एक चम्मच नमक डालकर उससे गरारे करे
--गुनगने पानी मे पैर डालकर बैठे, 2 गिलास सादा।पानी पिये और सिरर पर ठंडा कपड़ा रखे, रोज 10 मिनट करे
--रोज 30-60 मिनट धूप ले ।
💛पित्त(ACIDITY):-पेट के रोग💛
--वात दोष और कफ दोष में जितने भी रोग है उनको हटाकर शेष सभी रोग पित्त के रोग है, BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस, आदि
--शरीर मे कही भी जलन हो जैसे पेट मे जलन, मूत्र त्याग करने के बाद जलन ,मल त्याग करने में जलन, शरीर की त्वचा में कही भी जलन,
--खट्टी डकारें आना
--शरीर मे भारीपन रहना
💜कारण:-
--गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार
--चाय ,काफी,सिगरेट, तम्बाकू, शराब,
--मांस ,मछली ,अंडा
--दिनभर में सदैव पका भोजन करना
--क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव
--दवाइयों का सेवन
--मल त्याग रोकना
--सभी 13 वेग को रोकना जैसे छींक, पाद, आदि
💜निवारण
--पुराने रोग और नए रोग का एक ही समाधान बता रहा हु
--फटे हुए दूध का पानी पिये, गर्म दूध में नीम्बू डालकर दूध को फाड़े, वह पानी छानकर पिए, पेट का सभी रोग में रामबाण है, सभी प्रकार का बुखार भी दूर करता है
--फलो व सब्जियों का रस, जैसे अनार का रस, लौकी का रस, पत्ता गोभी का रस आदि
--निम्बू पानी का सेवन
💜प्राकृतिक उपचार
--पेट को गीले कपड़े से ठंडक दे
--रीढ़ की हड्डी को ठंडक देना, लकवा इसी रीढ़ की हड्डी की गर्मी से होता है, गीले कपड़े से रीढ़ की हड्डी पर पट्टी रखें
--व्यायाम ,योग करे
--गहरी नींद ले
इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े !

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