10/05/2026
JSS 🙏🌹🚩
देश मे करीब उत्कृष्ट 9 बड़े आयुर्वेद संस्थान है (रिपोर्ट अनुसार) जो कई तो आजादी के पहले के है, जिन्हें #राज्य_सरकार द्वारा एवं #केंद्र_सरकार द्वारा आर्थिक अनुदान पर चलाये जाते है।
हजारों करोड़ दशकों से इन पर खर्च किया गया है,लेकिन उपलब्धि के नाम पर कोई ठोस चिकित्सा पद्धति देश के हाथ नही लगी आखिर क्यो इसके पीछे कारण क्या रहा.....
#आधुनिक_चिकित्सा_विज्ञान #एलोपैथी को #स्वास्थ्य_बजट कुल बजट का 98% मिलता है, बाकी 2% में सारी पैथी आती है #आयुर्वेद #होमियोपैथी #यूनानी आदि
एलोपैथी को 65,000 करोड़ का बजट मिलता है और आयुष को मात्र 1,900 करोड़ ,फिर भी ये अपने ही देश की चिकित्सा पद्धति #आयुर्वेद से इतना भयभीत है कि दुष्प्रचार का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे एक बात स्पष्ट है । #आयुर्वेद पहले से ज्यादा #शक्तिशाली होता जा रहा है...
अब बात आती है ऐसा क्यो होता रहा है किस कारण से बजट का लगभग पूरा हिस्सा एक पैथी को मिलने के बाद भी देश के हालात बत्तर से बत्तर होते जा रहे है जबकि इस सेक्टर की ग्रोथ रेट देश मे सबसे ऊंची है,
समझना यह होगा कि कौन #षड्यंत्रकारी शक्तियां है जो इसके पीछे काम करती है ।
अधिकांश #फार्मा #कम्पनियों में पकड़ #विदेशी कंपनियों की है और जो स्वदेशी कम्पनी भी है तो वो पूर्णतया #आत्मनिर्भर नही है #दवा बनाने से ले कर #उपकरणों तक मे विदेशी कंपनियों की जबरदस्त पकड़ है,
दुनियाभर में काफी सर्वे हुए जिसे पता चला कि इन सबके पीछे बहुत बड़ी लॉबी लगी हुई है जो पहले लोगों को बीमार करती है फिर उसे ठीक करने के नाम पर शोद्ध की वस्तु बना कर अपने नए षड्यंत्र का हिस्सा बनाती है, इसी कुचक्र में कई लाख करोड़ों की मलाई चट कर जाती है,
इसका एक उदाहरण आप अपने आस पास के किसी साधारण से #डॉक्टर #केमिस्ट #लैब वालो की #चक्रव्यूह से समझ सकते है, किसी भी साधारण से बीमारी में कई कई टेस्ट लिखे जाते है क्योंकि लैब से टेस्ट पर 30-60% कमीशन बंधा होता है फिर दवा कम्पनियों में अपने एजंट छोड़े होते है जो डॉक्टर को पूरी स्कीम समझाते है.....दवा के असर की नही न बीमारी की बल्कि उस पर मिलने वाले पैकेज की क्या क्या गिफ्ट्स या मिठाई है बच्चो के लिए वाली स्कीम डॉक्टर के साथ शेयर की जाती है ।
एक साधारण सा #डॉक्टर चंद सालो में #करोड़पति बन जाता है, और बड़े हॉस्पिटल हजारों करोड़ के धंधा करते है ।
आपके आस पास इनकी खरपतवार की तरह भरमार हो गई है जबकि बीमारी बढ़ी है क्यो .....???????
जबकि #योग #आयुर्वेद में आधार ही लोगो को बीमार न पड़ने देना है,
आयुर्वेद के हमेशा उलट सलाह देता रहा है एलोपैथी विज्ञान आहार में असंतुलन ही पूरे शरीर का ढर्रे को बर्बाद करता है,
जबकि आयुर्वेद में दवा से ज्यादा परहेज पर मरीज को जोर दिया जाता है,
शरीर अपने आप मे एक लैब है जहाँ जैसा पदार्थ उपलब्ध करवाया जाएगा वैसा परिणाम वह आपको देगा ।
अब आखिर में लेख के निष्कर्ष की और बढ़ते है लगभग 25/30 सालो अनुभव से # #पतंजलि को खड़ा करने वाले एक साधारण से व्यक्ति के जीवन संघर्ष में से देश को क्या क्या दिया योगदान दिया।
जिसने 2 दशको से लोगों को सुबह 5 बजे उठा कर #योग करने की जिद ठानी जिसका आधार ही बिना दवा लोगो को ठीक करना रहा है वो #व्यापारिक_दृष्टिकोण से सेवा नही करता ।
जिस देश में खाने को रोटी न हो वहाँ दवा चिकित्सा के पैसे कैसे आयंगे वो अपने आप को योग से ही ठीक कर ले या बीमार ही न पड़े ।
क्यो योग एक आंदोलन बना सारी दुनिया मे क्योंकि उसका परिणाम सब जानते है कि इसके करने से जटिल से जटिल बीमारी से निजात पाई जा सकती है या बीमारी से बचा जा सकता है।
देश की जनता से कमाया पैसा देश जनता के परोपकार में ही अर्पित करने में लगे है ।
क्यो उन #कम्पनियों #संस्थानों #विभागों पर उंगली नही उठाई जाती जिनके आसपी गठजोड ने देश जनता को लुटखोरी का जरिया बनाया हुआ है -