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13/06/2026

जड़ी-बूटियों का अनमोल मिश्रण
09/06/2026

जड़ी-बूटियों का अनमोल मिश्रण

सुधांशु राय और सुमित श्योराण — ये नाम आज किसी भी एग्रीटेक सेक्टर में जाने-पहचाने नाम हैं. लेकिन इनकी जड़ें बेहद साधारण ह...
09/06/2026

सुधांशु राय और सुमित श्योराण — ये नाम आज किसी भी एग्रीटेक सेक्टर में जाने-पहचाने नाम हैं. लेकिन इनकी जड़ें बेहद साधारण हैं. दोनों की परवरिश किसानों के घर में हुई. बचपन से देखा कि उनके माता-पिता कैसे हर साल बारिश की दया पर निर्भर रहते हैं, कैसे खाद कब डालनी है इसका अंदाज़ा खेत में खड़े होकर लगाया जाता है, और कैसे कीट लगने पर पता चलता है जब फसल आधी तबाह हो चुकी होती है.

इन दोनों ने आगे चलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और Infosys की सब्सिडियरी EdgeVerve में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम किया. लेकिन उनके दिल में अब भी खेतों की तस्वीर बसी थी.

सुधांशु बताते हैं, “हमने सोचा, क्या ऐसा कोई तरीका नहीं हो सकता जिससे किसान को पहले ही बता दिया जाए कि क्या करने से फसल को नुकसान नहीं होगा?”

एक अनुभव ने बदली ज़िंदगी
साल 2018 में एक रिसर्च ट्रिप के दौरान दोनों दोस्त नाशिक गए. वहाँ उन्होंने देखा कि अंगूर के बागानों में ज़रा-सी लापरवाही से लाखों का नुकसान हो जाता है. अगर किसान को समय पर जानकारी मिल जाए कि अगले 2 दिन में बारिश है, या मिट्टी में नमी कम हो गई है, तो वह तुरंत कदम उठा सकता है.

वहीं से विचार आया — एक ऐसा डिजिटल सिस्टम बनाया जाए जो किसान के मोबाइल पर सीधे, उसकी ज़बान में, उसके खेत के लिए सलाह भेजे.

यही सोच बन गई Fyllo की नींव. साल 2019 में उन्होंने बेंगलुरु से इस स्टार्टअप की शुरुआत की.

कैसे काम करता है Fyllo?
Fyllo एक IoT (Internet of Things) आधारित एग्रीटेक प्लेटफॉर्म है. इसमें खेत में एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाता है, जो लगातार मिट्टी की नमी, तापमान, हवा की गति, वर्षा की संभावना और अन्य डेटा इकट्ठा करता है.

इस डेटा का विश्लेषण कंपनी के बनाए गए खास AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) और मशीन लर्निंग (ML) मॉडल करते हैं. फिर किसान को मोबाइल ऐप या SMS के ज़रिए सटीक और फसल-विशेष सलाह दी जाती है — जैसे,

आज पानी मत दो,
अगले दो दिन में फंगल अटैक का खतरा है,
अभी छिड़काव मत करो क्योंकि बारिश होगी,

मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी है.
Fyllo की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके पीछे तकनीकी दिमाग और ज़मीन से जुड़ा दिल दोनों हैं. सुधांशु और सुमित, दोनों जानते थे कि किसान को सिर्फ ऐप नहीं चाहिए, उसे भरोसा चाहिए. इसलिए उन्होंने एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया — डिजिटल टेक्नोलॉजी के साथ-साथ 25 से ज़्यादा एग्रोनॉमिस्ट और फील्ड एक्सपर्ट्स की टीम, जो गांव-गांव जाकर किसानों की मदद करती है.

बढ़ता नेटवर्क, बढ़ता भरोसा
2024 तक, Fyllo देश के 8,000 से ज़्यादा किसानों तक पहुँच चुका है. इसका नेटवर्क अब 50,000 एकड़ से

09/06/2026

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