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देसी जड़ीबूटी पहचान केंद्र आयुर्वेद इलाज व जड़ी बूटियाँ
(2)

08/06/2026

ये चूर्ण पेट के पित्त वाले रोगों में अच्छा है
गर्मी की अधिकता के लिए इस चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते hai
पाचन अच्छा करेगा
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03/06/2026

खेलने का स्थान -महर्षि वागभट्ट जी कहते है कि बच्चे को खेलने का स्थान समतल होना चाहिए किन्तु वो समतल स्थान लोहा, पत्थर, गिट्टी, मिट्टी, धूल से रहित होना चहिए। इस स्थान पर वायविडंग, काली मिर्च को पीसकर पानी में घोलकर छिड़काव करना चहिए यदि ये न मिले तो नीम के पानी से समतल भूमि को छिड़काव करना चहिए जिस भूमि पर बच्चे खेलते है।
विमर्श -बच्चे के लिए खेलने का स्थान समतल भूमि होनी चहिए। उस भूमि पर नीम के पानी का अथवा गौमूत्र का अथवा निरगुंडी के पानी का छिड़काव करना चाहिएं। भूमि साड़ी (घास ) युक्त होनी चहिए। बच्चे को गंदे स्थान (जिस भूमि पर कूड़ा कर्कट, लिफाफा आदि हो ) पर हरगिज नहीं खिलाना चाहिए।
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03/06/2026

टाइफाइड के लिए v सभी बुख़ारो के लिए
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🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁अरंडी (Castor) के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण होते हैं। घुटनों पर इनके इस्तेमाल से गठिया...
30/05/2026

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अरंडी (Castor) के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण होते हैं। घुटनों पर इनके इस्तेमाल से गठिया का दर्द, सूजन, और अकड़न कम होती है। यह जोड़ों के आसपास रक्त संचार बढ़ाकर राहत देते
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घुटनों के लिए उपयोग की विधि:सेंक: पत्तों पर कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) या तिल का तेल लगाएं। इन्हें तवे पर हल्का गर्म करके घुटने पर बांधें और सूती कपड़े से ढक ले
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मालिश: पत्तों के रस को अरंडी के तेल के साथ मिलाकर घुटनों की मालिश करने से भी बहुत आराम मिलता है।
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घुटनों का प्राकृतिक ग्रीस (साइनोवियल फ्लूइड) बढ़ाने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड, कैल्शियम, और विटामिन-C से भरपूर आहार लें。हाइड्रेशन के लिए दिन में कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं。अपने आहार में अलसी के बीज, अखरोट, दूध-दही, हरी सब्जियां और हल्दी शामिल करें。
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29/05/2026

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सिंहनाद गुग्गुल (Singhnad Guggulu)
एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है जो मुख्य रूप से जोड़ों के दर्द, गठिया (आर्थराइटिस), और सूजन को कम करने में बेहद फायदेमंद है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों (toxins) को बाहर निकालकर पाचन क्रिया को सुधारने का काम करती है।

इसके प्रमुख स्वास्थ्य लाभ निम्नलिखित हैं:
गठिया और जोड़ों का दर्द: यह आमवात (Rheumatoid arthritis) और संधिवात (Osteoarthritis) में बहुत असरदार है। यह जोड़ों की सूजन, अकड़न और दर्द को कम करने में मदद करती है।
शरीर की डिटॉक्सिफिकेशन: यह रक्त (blood) और जोड़ों से 'आम' (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने के लिए जानी जाती है, जिससे शरीर शुद्ध होता है।

त्वचा के रोग: यह रक्त शोधक (blood purifier) के रूप में कार्य करती है और सोरायसिस, एक्जिमा, और फोड़े-फुंसी जैसे त्वचा रोगों में राहत देती है।

पाचन शक्ति में सुधार: यह पाचन को बेहतर बनाती है, गैस-कब्ज को दूर करती है और भूख बढ़ाती है।

यूरिक एसिड नियंत्रण: यह यूरिक एसिड के स्तर को कम करके जोड़ों के दर्द (Gout) को प्रबंधित करने में सहायक है।
सावधानी:
इसकी खुराक मरीज की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए, इसका सेवन हमेशा किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करें। इसे अधिक मात्रा में लेने से पेट में मरोड़ या दस्त की समस्या हो सकती है
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गोखरू पंचांग 28 मई 2026 Gokhruगोखरू पंचांग (पूरे पौधे, जैसे जड़, तना, पत्ती, फूल और फल का मिश्रण) का आयुर्वेद में बहुत म...
28/05/2026

गोखरू पंचांग
28 मई 2026
Gokhru
गोखरू पंचांग (पूरे पौधे, जैसे जड़, तना, पत्ती, फूल और फल का मिश्रण) का आयुर्वेद में बहुत महत्व है। यह मुख्य रूप से किडनी की पथरी, मूत्र संबंधी समस्याओं, हार्मोनल असंतुलन और शारीरिक कमजोरी को दूर करने में एक बेहद असरदार और प्राकृतिक औषधि है।

गोखरू पंचांग के प्रमुख फायदे:
पथरी और किडनी की सुरक्षा: गोखरू में प्राकृतिक रूप से 'एंटीलिथियेटिक' गुण होते हैं, जो किडनी की पथरी को तोड़ने और उसे पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह यूरिनरी ट्रैक्ट (UTI) की सूजन और जलन को भी कम करता है।
पेशाब संबंधी विकार: अगर आपको रुक-रुक कर पेशाब आना, पेशाब में दर्द, या प्रोटीन लीकेज की समस्या है, तो गोखरू पंचांग का उपयोग बहुत लाभदायक माना जाता है।
हार्मोन संतुलन और शारीरिक ताकत: यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में हार्मोनल संतुलन को सुधारने में मदद करता है। यह प्राकृतिक रूप से स्टैमिना बढ़ाता है, थकान मिटाता है और मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक है।
यौन स्वास्थ्य: आयुर्वेद में इसे 'वीर्यवर्धक' माना गया है। यह पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के प्राकृतिक स्तर को बढ़ाकर यौन इच्छा (libido) और प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।
जोड़ों का दर्द और सूजन: इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुणों के कारण, यह जोड़ों के दर्द और गठिया की समस्या में आराम देता है।

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उपयोग करने का तरीका:
गोखरू पंचांग को आमतौर पर चूर्ण (Powder) या जूस (Juice) के रूप में पानी के साथ लिया जाता है। आप इसे पतंजलि या किसी भी प्रामाणिक आयुर्वेदिक स्टोर से प्राप्त कर सकते हैं।

मात्रा: लगभग 10 से 20 मिलीलीटर गोखरू पंचांग का जूस बराबर मात्रा में पानी मिलाकर दिन में दो बार भोजन से पहले लिया जाता है। (आचार्य बालकृष्ण के दिशा-निर्देशानुसार आप इसे काढ़े के रूप में भी ले सकते हैं।)


सावधानी:
गोखरू की तासीर ठंडी और गर्म दोनों मिश्रित क्षेत्रों में उगने के कारण सम-शीतोष्ण होती है। लेकिन गर्भावस्था, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और गंभीर ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं करना चाहिए।
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26/05/2026

नौतपा में क्या न खाएं + श्लोक प्रमाण + पूरी हानि + क्यों
25 मई से 2 जून - साल के 9 सबसे आग वाले दिन

1. बैंगन

श्लोक: "वातलं कटुकं पाके तिक्तं उष्णं गुरु च तत्... वार्ताकं त्यजेत्"- चरक संहिता

अर्थ: बैंगन गरम तासीर, भारी, वात बढ़ाता है। गर्मी में मना है

क्यों न खाएं: नौतपा में शरीर पहले से 45°C पर तप रहा है। बैंगन ऊपर से आग लगाता है।

खाने से हानि: पेट में ऐसी जलन जैसे मिर्च डाल दी हो, गैस से पेट फूल जाएगा, पथरी वाले को असहनीय दर्द, स्किन पर लाल दाने, मुँह में छाले। आयुर्वेद कहता है - खून में जहर घोल देता है।

2. दही

श्लोक: "ग्रीष्मे शरदि चाद्यात् दधि नो" - अष्टांग हृदयम्
अर्थ : नोतपा और पतझड़ में दही न खाएं

क्यों न खाएं: लोग समझते हैं दही ठंडी है, पर ये भारी और गरम है। नौतपा में पाचन आग सबसे कमजोर।

खाने से हानि: गले में बलगम की परत जम जाएगी, खराश, खाँसी शुरू। घुटने-कमर का पुराना दर्द रातों-रात बढ़ जाएगा। रात को खाया तो सर्दी-जुकाम + लूज मोशन दोनों फ्री में मिलेंगे।

3. लहसुन ।।

श्लोक: "लशुनः कटुको उष्णश्च तीक्ष्णो... पित्तप्रकृतये न हितः" - चरक संहिता

अर्थ: लहसुन तीखा, गरम है। *पित्त बढ़ाता है, गर्मी में जहर

क्यों न खाएं: गर्मी में शरीर का पित्त वैसे ही बढ़ा हुआ है। लहसुन और आग में घी डालेगा।

खाने से हानि: सिर फटने जैसा दर्द, आँखें लाल, मुँह में छाले, पेट गैस का गुब्बारा बन जाएगा। उल्टी आएगी। लू सीधे दिमाग पर चढ़ेगी।

4. तेज मिर्च-मसाला + तला-भुना

श्लोक: "तिक्तं कषायं कटुकं विदाहि चाम्लं च वर्जयेत्" - अष्टांग हृदय 3/26

अर्थ: गर्मी में कड़वा, कसैला, तीखा, खट्टा, जलन करने वाला खाना छोड़ो

क्यों न खाएं: बाहर धूप 45°C, अंदर से मिर्च की भट्टी जलाओगे तो शरीर सह नहीं पाएगा।

खाने से हानि: सीने में ऐसी जलन जैसे एसिड पी लिया, खट्टी डकार, उल्टी, दस्त। पानी की कमी से चक्कर खाकर गिरोगे। डॉक्टर बोलेगा - "लू लग गई, एडमिट करो"।

7. फ्रिज का बर्फ वाला पानी + आइसक्रीम

शास्त्र: अति ठंडा = पाचन अग्नि बुझ जाती है

क्यों न खाएं: तपती धूप से आकर -2°C पानी पियोगे तो शरीर को शॉक लगेगा।

खाने से हानि: गला एकदम से बैठ जाएगा, टॉन्सिल सूज जाएंगे, आवाज नहीं निकलेगी। पेट की गर्मी एकदम दब जाएगी, खाना वहीं का वहीं सड़ जाएगा। पेट में ऐंठन, मरोड़ शुरू।

8. दिन में सोना*

श्लोक: "दिवास्वप्नं न कुर्वीत ग्रीष्मे... ज्वरं चैव प्रवर्धयेत्" - अष्टांग हृदय 3/55

अर्थ: गर्मी में दिन में सोना = बीमारी को बुलावा

हानि: शरीर में कफ गाढ़ा-चिपचिपा हो जाएगा, बुखार, सिर भारी, पूरा दिन आलस, मोटापा बढ़ेगा।

✅ नौतपा में अमृत समान क्या खाएं*

श्लोक: "सक्तून् शीतान् सशर्करान्... जलं शीतलं बहु"

अर्थ: सत्तू, शक्कर, मीठे-ठंडे-हल्के पदार्थ, ठंडा पानी खूब पियो

खाएं: सत्तू का घोल, बेल का शरबत, नारियल पानी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, लौकी, तौरी, छाछ, लस्सी, गुलकंद

फायदा: शरीर 24 घंटे AC जैसा ठंडा, लू छू भी नहीं पाएगी, 4 लीटर पानी की कमी पूरी, चेहरे पर चमक, एनर्जी फुल।

सार श्लोक - नौतपा का निचोड़:

ग्रीष्मे तु अत्युष्णतीक्ष्णाम्ललवणान् कटुकानि च।
व्यायाममातपं चैव व्यवायं च विवर्जयेत्।।"_

अर्थ: गर्मी में *अति गरम, तीखा, खट्टा, नमकीन, धूप, ज्यादा मेहनत - सब छोड़ दो

खुद भी स्वस्थ रहें अपने परिवार को भी स्वस्थ रखें
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कुचला ऐसा पेड़ है, जिसके फलों के बीजों का इस्तेमाल करके कई तरह की दवाइयां बनाई जाती हैं. इसे अंग्रेजी में नक्स वोमिका (N...
17/05/2026

कुचला ऐसा पेड़ है,

जिसके फलों के बीजों का इस्तेमाल करके कई तरह की दवाइयां बनाई जाती हैं. इसे अंग्रेजी में नक्स वोमिका (Nux vomica) कहा जाता है. इसका इस्तेमाल इरेक्टाइल डिसफंक्शन, पेट की सूजन, कब्ज, चिंता व माइग्रेन जैसी कई परेशानियों को दूर करने के लिए किया जाता है. वहीं, इसमें स्ट्रिकनीन नामक जहरीला पदार्थ होता है, जिसका सीधे तौर पर सेवन करना घातक माना जाता है. कम मात्रा में भी इसका सीधे तौर पर सेवन करने से बेचैनी, चिंता, चक्कर आना, गर्दन व पीठ में अकड़न और जबड़े व गर्दन की मांसपेशियों में ऐंठन जैसी परेशानी हो सकती है.

कुचला के औषधीय गुण
कुचला के औषधीय गुण या रासायनिक सरंचना पर अभी तक पूर्ण रूप से अध्ययन नहीं किया गया है. हालांकि, इसमें कुछ मात्रा में एल्केलाइड, जैसे - नेओपेल्लिन, नेप्लिन, इफेड्रिन इत्यादि पाए जाते हैं. साथ ही स्ट्रिकनीन, ब्रुसीन, प्रोटीड, लोगिन ग्लूकोसाइड और गौंद होता है. इसका इस्तेमाल सीधे तौर पर नहीं किया जाता, बल्कि अलग-अलग रूप में किया जाता है, क्योंकि इसमें मौजूद केमिकल जहर के समान होते हैं. अगर इसका सेवन सीधे किया जाए, तो व्यक्ति को नुकसान होने का खतरा होता है. यही कारण है कि कुछ लोग इसे पॉइजन नट्स भी कहते हैं.

कुचला के फायदे
नक्स वोमिका या कुचला के कुछ लाभ हो सकते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है. साथ ही यह दर्द को कम करने का भी गुण रखता है. कुचला के कुछ अन्य फायदे भी हो सकते हैं, जिसके बारे में नीचे बताया गया है -

दर्द के लिए कुचला के फायदे

रिसर्च में बताया गया है कि कुचला के पत्तों के अर्क का इस्तेमाल करके शरीर में होने वाले दर्द से राहत पाया जा सकता है. दरअसल, कुचला के पत्तों में एनाल्जेसिक या दर्द निवारक गुण होता है. वहीं, होम्योपैथिक दवाइयों में इसकी पत्तियों का नहीं, बल्कि बीजों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा, कुचला में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है. रिसर्च में यह भी बताया गया है कि इसके इस्तेमाल से शरीर की सूजन व दर्द को कम किया जा सकता है.

शुगर के लिए कुचला के फायदे

कुचला का इस्तेमाल डायबिटीज के इलाज के लिए भी किया जाता है. जानवरों पर हुए रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कुचला के बीज का अर्क मरीजों के शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित रख सकता है.

एंटीऑक्सीडेंट गुण के लिए कुचला के फायदे

कुचला में एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर रूप से होता है. रिसर्च के मुताबिक, नक्स वोमिका (कुचला) में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण कई समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हो सकते हैं. हालांकि, इस अध्ययन में यह भी पुष्टि की गई है कि कुचला में मौजूद दो प्रमुख एक्टिव यौगिक ब्रुसीन और स्ट्रिकनीन की उच्च खुराक जहरीला हो सकती है.

इन्फ्लूएंजा के लिए कुचला के फायदे

इतना ही नहीं, कुचला के इस्तेमाल से इन्फ्लूएंजा या फ्लू और वायरस से होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है. रिसर्च में देखा गया है कि नक्स वोमिका के पौधे के तने की छाल से तैयार अर्क फ्लू से लड़ने में असरदार होता है.

कुचला के अन्य लाभ

होम्योपैथिक में कुछ डॉक्टर्स का दावा है कि कुचला (नक्स वोमिका) कई स्थितियों का इलाज करने में मददगार हो सकती हैं, जो निम्न हैं -

अनिद्रा
एलर्जी
बुखार
हाथ या पैर में सुन्नता
हैंगओवर
पाचन संबंधी समस्याएं (जैसे- मतली, उल्टी, कब्ज इत्यादि)
सिरदर्द और माइग्रेन
रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
तनाव
पीठ दर्द
मासिक धर्म की समस्या
पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या इत्यादि

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कुचला के नुकसान
कुचला से होने वाले नुकसान काफी गंभीर हो सकते हैं. यह नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है. इसकी वजह से बेचैनी व ऐंठन इत्यादि परेशानी हो सकती है. इसके साथ ही कुछ अन्य नुकसान हैं, जैसे-

गर्दन में दर्द होना
चेहरे की मांसपेशियां का कठोर होना
ऐंठन, चिंता व बेचैनी जैसी परेशानी
त्वचा का नीला पड़ना
ध्यान रखें कि बिना डॉक्टरी सलाह के इसका इस्तेमाल करना नहीं चाहिए. इससे गंभीर नुकसान हो सकते हैं. वहीं, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कुचला का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भ्रूण और शिशु को नुकसान पहुंचने की आशंका हो सकती है. साथ ही लिवर की परेशानियों से जूझ रहे व्यक्तियों को भी इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए. इससे लिवर डैमेज हो सकता है.
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सभी मेरे इंस्टाग्राम पेज को भी फॉलो करे जी सभी से रिक्वेस्ट है इसमें नुस्खे बताए जाया करेंगे जी
15/05/2026

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सभी से रिक्वेस्ट है
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13/05/2026

ये घृत आँखो के लिए वरदान है
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