26/05/2026
नौतपा में क्या न खाएं + श्लोक प्रमाण + पूरी हानि + क्यों
25 मई से 2 जून - साल के 9 सबसे आग वाले दिन
1. बैंगन
श्लोक: "वातलं कटुकं पाके तिक्तं उष्णं गुरु च तत्... वार्ताकं त्यजेत्"- चरक संहिता
अर्थ: बैंगन गरम तासीर, भारी, वात बढ़ाता है। गर्मी में मना है
क्यों न खाएं: नौतपा में शरीर पहले से 45°C पर तप रहा है। बैंगन ऊपर से आग लगाता है।
खाने से हानि: पेट में ऐसी जलन जैसे मिर्च डाल दी हो, गैस से पेट फूल जाएगा, पथरी वाले को असहनीय दर्द, स्किन पर लाल दाने, मुँह में छाले। आयुर्वेद कहता है - खून में जहर घोल देता है।
2. दही
श्लोक: "ग्रीष्मे शरदि चाद्यात् दधि नो" - अष्टांग हृदयम्
अर्थ : नोतपा और पतझड़ में दही न खाएं
क्यों न खाएं: लोग समझते हैं दही ठंडी है, पर ये भारी और गरम है। नौतपा में पाचन आग सबसे कमजोर।
खाने से हानि: गले में बलगम की परत जम जाएगी, खराश, खाँसी शुरू। घुटने-कमर का पुराना दर्द रातों-रात बढ़ जाएगा। रात को खाया तो सर्दी-जुकाम + लूज मोशन दोनों फ्री में मिलेंगे।
3. लहसुन ।।
श्लोक: "लशुनः कटुको उष्णश्च तीक्ष्णो... पित्तप्रकृतये न हितः" - चरक संहिता
अर्थ: लहसुन तीखा, गरम है। *पित्त बढ़ाता है, गर्मी में जहर
क्यों न खाएं: गर्मी में शरीर का पित्त वैसे ही बढ़ा हुआ है। लहसुन और आग में घी डालेगा।
खाने से हानि: सिर फटने जैसा दर्द, आँखें लाल, मुँह में छाले, पेट गैस का गुब्बारा बन जाएगा। उल्टी आएगी। लू सीधे दिमाग पर चढ़ेगी।
4. तेज मिर्च-मसाला + तला-भुना
श्लोक: "तिक्तं कषायं कटुकं विदाहि चाम्लं च वर्जयेत्" - अष्टांग हृदय 3/26
अर्थ: गर्मी में कड़वा, कसैला, तीखा, खट्टा, जलन करने वाला खाना छोड़ो
क्यों न खाएं: बाहर धूप 45°C, अंदर से मिर्च की भट्टी जलाओगे तो शरीर सह नहीं पाएगा।
खाने से हानि: सीने में ऐसी जलन जैसे एसिड पी लिया, खट्टी डकार, उल्टी, दस्त। पानी की कमी से चक्कर खाकर गिरोगे। डॉक्टर बोलेगा - "लू लग गई, एडमिट करो"।
7. फ्रिज का बर्फ वाला पानी + आइसक्रीम
शास्त्र: अति ठंडा = पाचन अग्नि बुझ जाती है
क्यों न खाएं: तपती धूप से आकर -2°C पानी पियोगे तो शरीर को शॉक लगेगा।
खाने से हानि: गला एकदम से बैठ जाएगा, टॉन्सिल सूज जाएंगे, आवाज नहीं निकलेगी। पेट की गर्मी एकदम दब जाएगी, खाना वहीं का वहीं सड़ जाएगा। पेट में ऐंठन, मरोड़ शुरू।
8. दिन में सोना*
श्लोक: "दिवास्वप्नं न कुर्वीत ग्रीष्मे... ज्वरं चैव प्रवर्धयेत्" - अष्टांग हृदय 3/55
अर्थ: गर्मी में दिन में सोना = बीमारी को बुलावा
हानि: शरीर में कफ गाढ़ा-चिपचिपा हो जाएगा, बुखार, सिर भारी, पूरा दिन आलस, मोटापा बढ़ेगा।
✅ नौतपा में अमृत समान क्या खाएं*
श्लोक: "सक्तून् शीतान् सशर्करान्... जलं शीतलं बहु"
अर्थ: सत्तू, शक्कर, मीठे-ठंडे-हल्के पदार्थ, ठंडा पानी खूब पियो
खाएं: सत्तू का घोल, बेल का शरबत, नारियल पानी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, लौकी, तौरी, छाछ, लस्सी, गुलकंद
फायदा: शरीर 24 घंटे AC जैसा ठंडा, लू छू भी नहीं पाएगी, 4 लीटर पानी की कमी पूरी, चेहरे पर चमक, एनर्जी फुल।
सार श्लोक - नौतपा का निचोड़:
ग्रीष्मे तु अत्युष्णतीक्ष्णाम्ललवणान् कटुकानि च।
व्यायाममातपं चैव व्यवायं च विवर्जयेत्।।"_
अर्थ: गर्मी में *अति गरम, तीखा, खट्टा, नमकीन, धूप, ज्यादा मेहनत - सब छोड़ दो
खुद भी स्वस्थ रहें अपने परिवार को भी स्वस्थ रखें
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