देसी जड़ीबूटी पहचान केंद्र

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देसी जड़ीबूटी पहचान केंद्र आयुर्वेद इलाज व जड़ी बूटियाँ
(1)

10/08/2026

कायाकल्प वज्र रसायन
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
आयुर्वेद की नई खोज
400 सालों से बनता आ रहा है
हमारे दवारा
चौथी बार रेडी किया जा रहा है

पहले के रिजल्ट शानदार है

इसमें 62 जड़ी बूटी है
Or 8 भस्मे है

इसमें कोई भी जड़ी 62 से कम नहीं है और न कोई फेरबदल होता

ये सिर्फ कुशल वैद्य ही बना सकते है
इसमें इन 7 जड़ी के रस की भावना 7-7 बार देने साथ घुटाई भी की जाएगी
इसको बनाने में कम से कम 60 दिन लगते है

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀
रसायन केआर सेवन का समय
——
हेमंत ,शिशिर ,बसंत ऋतु ये समय बढ़िया है
🍀🍀🍀🍀🍀🍀

इसके फायदे 🌿🌿🌿
🌿🌿🌿🌿🌿
बुढ़ापा नष्ट होकर नवयौवन प्राप्त होता है
चेहरे पे तेज
कमजोरी दूर
बल ,वीर्य वृद्धि ,
मानसिक रोग ठीक होते है
ज्ञान तंतु ठीक होते है

यहाँ योग पुराने ग्रंथ जो हस्थ लिखित है से लिया गया है जो संस्कृत में था और उसका हिंदी अनुवाद करके हमने बनाया

रिजल्ट में इसका मुकाबला कोई भी योग नहीं करता

कोरियर ke द्वारा पुरे भारत में भेजा जाता है
Order पहले करना होता है
☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️
क्योकि इसमें मेहनत ज्यादा लगती है
2023 और 2024 ये इस योग की क़ीमत 1800 रुपये रखी गई रही
2025 में इस रसायन की कीमत 2500 रुपये रखी गई थी
अब इस साल की कीमत 3200 से 3600 रुपये रखी जाएगी
पूरा शरीर वज्र की तरह मजबूत बनेगा
इम्युनिटी बढ़ेगी

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀
वैद्य आशुतोष राणा
9896969392
देसी जड़ीबूटी पहचान केंद्र

07/08/2026

वीर्य

विज्ञान के अनुसार, वीर्य (Semen) मुख्य रूप से शुक्राणुओं (S***m) और विभिन्न ग्रंथियों से निकलने वाले तरल पदार्थों (Fluids) का गाढ़ा मिश्रण होता है। यह वृषण (Testicles), सेमिनल वेसिकल (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) में हॉर्मोनल प्रक्रियाओं के माध्यम से बनता है।

वीर्य के मुख्य घटकशुक्राणु (S***m): यह कुल वीर्य का लगभग 10% हिस्सा होता है, जो अंडकोष के अंदर बनता है।सेमिनल वेसिकल का तरल: यह लगभग 60% भाग बनाता है और शुक्राणुओं को ऊर्जा (फ्रुक्टोज) देता है।प्रोस्टेट ग्रंथि का तरल: यह लगभग 30% हिस्सा बनाता है, जो शुक्राणुओं को सुरक्षित और सक्रिय रखता है।

वीर्य बनने की प्रक्रियाहॉर्मोन का नियंत्रण: मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि एफएसएच (FSH) और एलएच (LH) हॉर्मोन बनाती है, जो टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन को सक्रिय करते हैं।

शुक्राणु का निर्माण: अंडकोष के अंदर छोटी नलिकाओं (Seminiferous Tubules) में कोशिकाएं विभाजित होकर शुक्राणु बनाती हैं। एक शुक्राणु को पूरी तरह विकसित होने में लगभग 70 से 74 दिन लगते हैं

परिपक्वता: ये शुक्राणु एपिडिडाइमस (Epididymis) में जाकर स्टोर होते हैं और तैरना व परिपक्व होना सीखते हैं।
तरल पदार्थों का मिलना: जब स्खलन (Ej*******on) की प्रक्रिया होती है, तब ये शुक्राणु प्रोस्टेट और सेमिनल वेसिकल के तरलों के साथ मिलकर अंतिम रूप से वीर्य बनाते हैं
***m

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03/08/2026

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02/08/2026

हरियाणा में सावन के महीने में इस मिठाई का बहुत प्रचलन है

घेवर मुख्य रूप से सावन (मानसून) के महीने में, हरियाली तीज और रक्षाबंधन के त्योहारों पर खाया जाता है।

सीमित मात्रा में घेवर खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है, वात-पित्त शांत होते हैं और मन का स्वाद बदलता है, लेकिन अत्यधिक खाने से वजन और ब्लड शुगर बढ़ सकता है। यह पारंपरिक राजस्थानी मिठाई सावन और मानसून के मौसम में विशेष रूप से खाई जाती है।

ऊर्जा मिलना: इसमें मौजूद घी और चीनी से तुरंत ताकत मिलती है।आयुर्वेदिक लाभ: मानसून में वात और पित्त को संतुलित करने में मदद मिलती है।पाचन पर प्रभाव: सीमित मात्रा में खाने पर घी पचने में मदद करता है, लेकिन ज्यादा खाने से भारीपन हो सकता है।

घेवर खाने के मुख्य फायदे और नुकसान में तुरंत ऊर्जा मिलना, वात दोष शांत होना, और वजन व शुगर का बढ़ना शामिल हैं। शुद्ध देसी घी से बनी यह पारंपरिक सावन स्पेशल मिठाई सीमित मात्रा में खाने पर सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अत्यधिक सेवन नुकसानदेह होता है।

किलो घेवर की कीमत आमतौर पर ₹400 से लेकर ₹1,140 तक होती है। यह कीमत घेवर के प्रकार (सादा, मलाई या रबड़ी वाला) और उसकी गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

सादा घेवर (Plain Ghewar): ₹400 से ₹600 प्रति किलो
मलाई/रबड़ी घेवर (Malai/Rabdi Ghewar): ₹800 से ₹1,140 प्रति किलो
विशेष और देसी घी घेवर (Desi Ghee/Special): ₹1,000 से अधिक प्रति किलो

घेवर बनाने के लिए मुख्य रूप से मैदा, देसी घी, और बर्फ के ठंडे पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा बैटर में थोड़ा बेसन, दूध और नींबू का रस मिलाया जाता है, तथा तलने के लिए घी या तेल, मीठे के लिए चीनी की चाशनी, और सजावट के लिए ड्राई फ्रूट्स काम में आते हैं।

घोल (बैटर) की सामग्री
मैदा: 1 से 1.5 कप
देसी घी: 1/4 से 1/2 कप (मक्खन की तरह फेंटने के लिए)
बर्फ के टुकड़े: 4 से 6 (घोल को ठंडा रखने के लिए)
बेसन: 1 छोटा चम्मच (कुरकुरापन और रंग के लिए)
दूध: 2 से 4 बड़े चम्मच
नींबू का रस: 1 छोटी चम्मच (क्रंच बढ़ाने के लिए)
ठंडा पानी: आवश्यकतानुसार (पतला घोल बनाने के लिए)
चाशनी और सजावट की सामग्री
चीनी: 1 कप (चाशनी के लिए)
पानी: आधा कप
इलायची पाउडर / केसर: स्वाद और खुशबू के लिए
देशी घी या तेल: घेवर को डीप फ्राई करने के लिए
कटे हुए बादाम और पिस्ता: गार्निशिंग के लिए
रबड़ी या मलाई: मलाई घेवर बनाने के लिए ऊपर से लगाने हेतु

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कायाकल्प वज्र रसायन 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿आयुर्वेद की नई खोज 400 सालों से बनता आ रहा है हमारे दवारा चौथी बार रेडी किया जा रहा है पहले क...
29/07/2026

कायाकल्प वज्र रसायन
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
आयुर्वेद की नई खोज
400 सालों से बनता आ रहा है
हमारे दवारा
चौथी बार रेडी किया जा रहा है

पहले के रिजल्ट शानदार है

इसमें 62 जड़ी बूटी है
Or 8 भस्मे है

इसमें कोई भी जड़ी 62 से कम नहीं है और न कोई फेरबदल होता

ये सिर्फ कुशल वैद्य ही बना सकते है
इसमें इन 7 जड़ी के रस की भावना 7-7 बार देने साथ घुटाई भी की जाएगी
इसको बनाने में कम से कम 60 दिन लगते है

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बुढ़ापा नष्ट होकर नवयौवन प्राप्त होता है
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कमजोरी दूर
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यहाँ योग पुराने ग्रंथ जो हस्थ लिखित है से लिया गया है जो संस्कृत में था और उसका हिंदी अनुवाद करके हमने बनाया

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2023 और 2024 ये इस योग की क़ीमत 1800 रुपये रखी गई रही
2025 में इस रसायन की कीमत 2500 रुपये रखी गई थी
अब इस साल की कीमत 3200 से 3600 रुपये रखी जाएगी
पूरा शरीर वज्र की तरह मजबूत बनेगा
इम्युनिटी बढ़ेगी

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वैद्य आशुतोष राणा
9896969392
देसी जड़ीबूटी पहचान केंद्र

किसी भाई को स्किन रोग कैसा भी हो जो जगह जगह जगह दवाई लेकर जो थक गए है वो वैद्य जी से संपर्क कर सकते है इनका नम्बर 989696...
25/07/2026

किसी भाई को स्किन रोग कैसा भी हो जो जगह जगह जगह दवाई लेकर जो थक गए है वो
वैद्य जी से संपर्क कर सकते है
इनका नम्बर
9896969392

 #लता  #पलाश (Lata Palas), सामान्य पलाश (ढाक या टेसू) के पेड़ की तरह ही एक बेहद महत्वपूर्ण और औषधीय वनस्पति है। जहाँ आम ...
12/07/2026

#लता #पलाश (Lata Palas), सामान्य पलाश (ढाक या टेसू) के पेड़ की तरह ही एक बेहद महत्वपूर्ण और औषधीय वनस्पति है। जहाँ आम पलाश एक मध्यम आकार का पेड़ होता है, वहीं लता पलाश एक बड़े आकार की बेल (Climber/Liana) के रूप में जंगलों में बड़े पेड़ों के सहारे ऊपर चढ़ती है।
इसे आयुर्वेद और वानिकी में बहुत विशिष्ट स्थान प्राप्त है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं:
1. वैज्ञानिक वर्गीकरण और प्रकार
वैज्ञानिक और औषधीय दस्तावेजों में मुख्य रूप से दो प्रकार के लता पलाश का वर्णन मिलता है:
* लाल फूलों वाला लता पलाश (Butea superba): इसके फूल चमकीले लाल और नारंगी रंग के होते हैं, जो तोते की चोंच जैसे घुमावदार दिखते हैं।
* सफेद फूलों वाला लता पलाश (Butea parviflora / Spatholobus parviflorus): औषधीय दृष्टिकोण और दुर्लभता के मामले में सफेद फूलों वाले लता पलाश को अत्यंत चमत्कारी और अधिक उपयोगी माना जाता है।
* पीला पलाश: यह भी एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति है जिसका प्रयोग पारंपरिक पद्धतियों में किया जाता है।
2. लता पलाश की पहचान (Physical Characteristics)
* पत्तियां: इसके पत्ते भी सामान्य पलाश की तरह त्रिपरणा (एक साथ तीन पत्तों के समूह में) होते हैं, लेकिन बेल के रूप में होने के कारण इनका फैलाव बहुत बड़ा होता है।
* तने और जड़ें: इसकी बेल का तना काफी मोटा और मटमैले या भूरे रंग का होता है। इसकी जड़ों और कंद में विशेष औषधीय तत्व पाए जाते हैं।
* फूल: वसंत ऋतु (फाल्गुन-चैत्र) के समय जब इस बेल पर फूल खिलते हैं, तो यह पेड़ों के ऊपर लिपटी हुई ऐसी लगती है मानो जंगल में आग की लपटें उठ रही हों, इसलिए इसे भी 'Flame of the Forest' की श्रेणी में रखा जाता है।
3. औषधीय गुण और लाभ (Medicinal Uses)
आयुर्वेद में लता पलाश के पांचों अंगों (जड़, तना, पत्ती, फूल और बीज) यानी पंचांग का उपयोग किया जाता है:
* त्वचा रोग (Skin Care): इसके बीजों को नींबू के रस के साथ पीसकर लगाने से दाद, खाज, खुजली और एक्जिमा जैसी त्वचा समस्याओं में बहुत आराम मिलता है। प्राचीन समय से इसके फूलों का उपयोग त्वचा की रंगत सुधारने के लिए किया जाता रहा है।
* पेट के कीड़े (Anthelmintic): लता पलाश के बीजों में पेट और आंतों के कीड़ों (Parasitic Worms) को नष्ट करने का अचूक गुण होता है। इसके बीजों का चूर्ण इसके लिए विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है।
* ताकत और रसायन गुण (Tonic & Rejuvenation): ब्यूटिया सुपर्बा (लाल लता पलाश) की जड़ों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में शारीरिक कमजोरी को दूर करने, ऊर्जा बढ़ाने और बढ़ती उम्र के असर को कम करने (Anti-aging) के लिए टॉनिक के रूप में किया जाता है।
* सूजन और बवासीर में राहत: इसके पत्तों और छाल का काढ़ा सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके औषधीय चूर्ण का घी या शहद के साथ सेवन बवासीर (Piles) के प्रबंधन में सहायक माना जाता है।
* एंटीऑक्सीडेंट और लिवर सुरक्षा: इसके फूलों में ब्यूट्रीन और आइसोब्यूट्रीन जैसे फ्लेवोनोइड्स पाए जाते हैं, जो लिवर को अवांछित तत्वों से सुरक्षित रखने और शरीर को डिटॉक्स (खून साफ) करने में मदद करते हैं।
4. सांस्कृतिक और अन्य उपयोग
* प्राकृतिक और सुरक्षित रंग: इसके फूलों से उबाले गए पानी से पारंपरिक रूप से होली के प्राकृतिक रंग तैयार किए जाते हैं, जो त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित और गुणकारी होते हैं।
* धार्मिक महत्व: सनातन परंपरा में पलाश को 'ब्रह्मवृक्ष' या 'यज्ञवृक्ष' भी कहा जाता है। इसके पत्तों से बने पत्तलों का उपयोग अत्यंत पवित्र माना जाता है।
> ⚠️ महत्वपूर्ण नोट: लता पलाश औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन इसके बीजों या छाल की तासीर काफी गर्म और तेज होती है। इसलिए आंतरिक रूप से (खाने के लिए) इसका सेवन करने से पहले हमेशा किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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10/07/2026

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27/06/2026

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