14/04/2025
**"जय भीम!
आज 14 अप्रैल को हम उस महान आत्मा को स्मरण कर रहे हैं, जिसने न केवल भारत का संविधान रचा, बल्कि करोड़ों शोषित, वंचित और पीड़ित जनों को न्याय, समानता और गरिमा का अधिकार दिलाया। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, वे एक संकल्प थे—एक क्रांति थे।
उन्होंने कहा था—
*'हम सबसे पहले और अंत में, इस देश के नागरिक हैं।'*
यह वाक्य हमें सिखाता है कि धर्म, जाति, भाषा या वर्ग से पहले हमारी पहचान एक जिम्मेदार नागरिक की होनी चाहिए।
बाबा साहेब ने जीवन भर ज्ञान को सबसे बड़ा हथियार माना। वे कहते थे—
*'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।'*
यह मंत्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।
हम सबका कर्तव्य है कि हम बाबा साहेब के विचारों को केवल जयंती तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारें, समाज में न्याय, समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करें।
आइए, इस अवसर पर हम संकल्प लें कि हम हर व्यक्ति को सम्मान देंगे, शिक्षा और अधिकार के लिए जागरूकता फैलाएंगे, और एक ऐसा भारत बनाएंगे जहाँ कोई भी पीछे न रह जाए।
**बाबा साहेब अमर रहें!
जय संविधान!
जय भीम!**"**