Dr.Kapur Sokriya

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ये बंदा मस्त अमेरिका में अपना जीवन काट रहा था, अपनी पढ़ाई कर रहा था और अपना करियर बनाने की तैयारी में था, लेकिन एक दिन S...
22/07/2026

ये बंदा मस्त अमेरिका में अपना जीवन काट रहा था, अपनी पढ़ाई कर रहा था और अपना करियर बनाने की तैयारी में था, लेकिन एक दिन SC के चीफ जस्टिस ने युवाओं को कॉकरोच बोल दिया, और भाई ने cockroach Janta party के नाम का एक इंस्टाग्राम पर प्रोफाइल बना दिया, फिर क्या था.. आक्रोशित युवाओं ने उस प्रोफाइल पर जोर का समर्थन दिखा दिया, और देखते ही देखते 22 मिलियन लोग उससे जुड़ गए, और यही एक छोटी सी गलती अभिजीत दीपके भाई को अमेरिका से सीधे भारत के सड़कों पर लाकर बिठा दिया, क्योंकि सर पे अचानक एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सवार हो गई, 22 मिलियन लोगों और उनके लड़ाई लड़ने की जिम्मेदारी।

भाई ने अपना करियर पर ताला लगाकर, अपने करियर को भारतीय संविधान के भरोसे छोड़कर उन लाखों छात्रों की आवाज बनकर सड़कों पर उतर आया, और पिछले कुछ दिनों में इन्होंने हर उस कठिनाइयों का सामना किया जो शायद वो अपने पूरे जीवन में नहीं फेस करते, उन्हें भीड़ में पीटा गया, उनके ऊपर स्याही फेंकी है, उन्हें पुलिस वालों ने पकड़ के मारा, आँख से आंसू बहे पर हार नहीं माना, जय भीम का नारा और भारतीय संविधान उनका ताकत बना।

दिल्ली के जंतर मंतर पर पहला प्रोटेस्ट करने के बाद भी ना लगे कि आंदोलन सिर्फ एक दिन का तुक्का था, इसलिए देश के कई बड़े शहरों में जा जाकर छात्रों को एकत्रित कर के आंदोलन किया, फिर लगा जैसे आंदोलन अब दम तोड़ चुकी है तो फिर से छात्रों को लेकर जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करने बैठ गया, जिसमें उनका साइंटिस्ट Sonam Wangchuk जी का साथ मिला, शुरुआत में सरकार और उनके सिस्टम ने खूब दबाने का प्रयास किया, लेकिन लगातार डटे रहने के बाद और Sonam Wangchuk के भूख हड़ताल के कारण आंदोलन ने तुल पकड़ लिया, और आज इस आंदोलन ने सरकार की नींद हराम कर रखा है, बनारस पटना कोलकाता राजस्थान पंजाब हरियाणा हिंदुस्तान के कोने कोने में बड़ी संख्या में लोग सरकार के खिलाफ उत्तर चुके हैं

अभिजीत दीपके के त्याग और संघर्ष को सलाम है।

14/07/2026

बुढ़ापा वह दरवाज़ा है? जहाँ से हर इंसान अकेले गुजरता है…
और अंदर सिर्फ़ सन्नाटा रहता है।

कहते हैं मौत अचानक आती है…??

नहीं.... मौत धीरे-धीरे आती है?....
पहले रिश्तों से दूर करती है,
फिर आवाज़ों से,
फिर यादों से.....!!

और एक दिन इंसान अपने ही घर में अनजान बन जाता है?

सबसे खतरनाक क्षण वह नहीं जब दिल धड़कना बंद हो…
सबसे भयानक वह है जब कमरा भरा हो फिर भी आवाज़ सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक की आए ?.....

बाहर लोग कहते हैं ?— दादाजी आराम कर रहे होंगे…
अंदर दिल चीख रहा होता है? — कोई मुझे याद भी करता है या नहीं?.....

बुढ़ापे में शरीर नहीं टूटता,
उम्मीदें टूटती हैं?.....
और उम्मीद टूट जाए,
तो इंसान सांस लेता हुआ भी मर चुका होता है.....??

आज जो बुज़ुर्ग आपके घर में हैं,
यही कल आपके भविष्य का आईना हैं?....
उन्हें अनदेखा मत कीजिए…
वरना कल आपकी भी आवाज़ कोई नहीं सुनेगा......!!

अकेलापन मौत नहीं देता,
अकेलापन पहले इंसान की आत्मा मारता है,
और शरीर बाद में गिरता है......!!

अब बताइए,
आपके अनुसार बुढ़ापे में सबसे घातक दर्द कौन-सा होता है —
शरीर का दर्द या रिश्तों का टूटना?.....?? (साभार फेसबुक)
😢😢😢l

सुना था कहीं पढ़ा था स्विट्जरलैंड सरकार ने 5 साल के लिए वीजा दिया है श्री सोनम वांग चुंग जी को फिर भी पता नहीं यहां किन ...
14/07/2026

सुना था कहीं पढ़ा था स्विट्जरलैंड सरकार ने 5 साल के लिए वीजा दिया है श्री सोनम वांग चुंग जी को फिर भी पता नहीं यहां किन लोगों के लिए अपनी जान के साथ खेल रहे हैं जाओ साहब ऐश करो जिंदगी जियो अपनी तोड़ दो इस हट को और जी भर के खाओ और अपनी जिंदगी जियो !!
मौत के बिल्कुल नजदीक है ये इंसान सबसे पहले तो शर्म आती है इस देश के उन युवाओं पर जिनके लिए इस भूख हड़ताल पर सोनम जी बैठे है आखिर कितनी संख्या में युवाओं ने इनका साथ दिया ?
फिर धिक्कार है इस देश के भर्ष्ट सिस्टम पर 16 दिन से भूखा इंसान बैठा है , 13 दिन में तो काँग्रेस पार्टी ने अन्ना हजारे का अनशन भी तुड़वा दिया था यहाँ कोई अभी तक सरकार की तरफ से हालचाल पूछने वाला भी नहीं है !!
अब में गारंटी से कह सकता हूँ ये मुर्दों का देश है यहाँ कमी सरकार या नेता मंत्रियों की नहीं है ,यहाँ पर कमी है जनता की ,जिनके लिए ये एक इतना बड़ा वैज्ञानिक लड़ाई लड रहा है वे ख़ुद ही इनका साथ नहीं देना चाहते वरना जंतर मंतर पर 1000-1500 आदमी नहीं होते अगर इस देश में जागरूकता होती तो उनकी जंगह कम से कम लाखों छात्र जंतर मंतर पर इकट्ठा होने चाहिए थे , उनकी भीड़ के दबाव से अभी तक सरकार यूथ के डर से बेकपुथ पर आजाती सोनम का अनशन भी खुल जाता पर भारत की जनता है ही ऐसी बस इस इंतजार में है कब सोनम जी आख़िरी सांस ले फिर इनके फोटो लगाकर इनको भगत सिंह बनाये जिंदा हो तब तक साहब आपको कोई नहीं पूछेगा ना जनता ना सरकार !!!

नोट-हर्ष छिकारा ख़ुद भुगत भोगी है यहाँ किसी के हक़ की आवाज़ उठाने पर लड़ाई लड़ने पर गालियाँ तो मिल सकती है साथ नहीं मिलेगा !!!

🙏😭

संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है। ‌जितना ज्यादा कोई मर्द सम्भोग का शौक़ीन होता है, उतना...
23/06/2026

संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है। ‌जितना ज्यादा कोई मर्द सम्भोग का शौक़ीन होता है, उतना ही वह बीवी के स्पर्श का आदी हो जाता है। नशेड़ी हमेशा नशा देने वाले का ग़ुलाम होता है।
लेकिन मुश्किल तब पैदा होती है जब औरत इस नशे को अपना हथियार बनाने की बजाय इसे रोककर पति को आज़माने लगती है। वह समझती है कि बच्चे हो चुके, घर बस चुका, अब पति कहीं नहीं जाएगा। मगर यही सबसे बड़ी भूल होती है...
बीवी जब बार-बार पति की शारीरिक प्यास को टालती है, नखरे दिखाती है, तो पति को बीवी ज़हर लगने लगते हैं। यह रिश्ता धीरे-धीरे खोखला होने लगता है।
ज़्यादातर औरतें बच्चों के बाद समझती हैं कि अब उनका पति कहीं नहीं जाएगा, अब तो वह सुरक्षित हो चुकी हैं। लेकिन यही ग़लतफ़हमी अक्सर घरों की बर्बादी की शुरुआत बन जाती है।
दूसरी शादी करने वाले मर्दों की अक्सर यही औरतें बीवियाँ होती हैं जिन्होंने रिश्ते को सिर्फ़ ज़िम्मेदारी समझकर निभाया, मोहब्बत और हवस से महरूम रखा। मर्द को रोका जा सकता है, बाँधा जा सकता है... लेकिन सिर्फ़ तब, जब उसकी प्यास बीवी के स्पर्श से बुझे। वरना वह प्यास कहीं और से बुझाने का रास्ता खुद बना लेता है।
औरतें अगर सच में अपने पति को जोड़े रखना चाहती हैं पति की असली मंज़िल बन जाएँ।
घर सिर्फ़ दुआओं से नहीं चलते, बल्कि उन शारीरिक हक़ीक़तों से बंधे होते हैं जिन्हें अक्सर झिझक या शर्म के नाम पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगर बीवी खुद को पति की ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ फ़र्ज़ समझने लगे... तो एक दिन पति भी फ़र्ज़ अदा करके किसी और की हवस बनने निकल पड़ता है।
और किसी औरत से संबंध बनाने लगता है!
इसलिए जरूरी है! पती की इंच्छाओ को पूरी करें
आप अपनी राय कमैंट्स मे दे........

19/06/2026

Celebrating my 2nd year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

धर्म की परिभाषा ही बदल गई है , धार्मिक इंसान के कुछ प्रमुख लक्षण:1. सत्यप्रियता    * लाभ या हानि की परवाह किए बिना सत्य ...
19/06/2026

धर्म की परिभाषा ही बदल गई है ,

धार्मिक इंसान के
कुछ प्रमुख लक्षण:

1. सत्यप्रियता
* लाभ या हानि की परवाह किए बिना सत्य का सम्मान करता है।
* अपनी गलती स्वीकार करने का साहस रखता है।

2. करुणा
* दूसरों के दुःख को समझने और कम करने की इच्छा रखता है।

3. विनम्रता
* अपने ज्ञान, पद या धन का अहंकार नहीं करता।
* “मैं ही सही हूँ” की जिद कम होती है।

4. आत्मनिरीक्षण
* दूसरों की गलतियों से पहले अपनी कमियों को देखने का प्रयास करता है।

* स्वयं को सुधारने में रुचि रखता है।

5. संयम
* क्रोध, लोभ, वासना, ईर्ष्या और अहंकार पर नियंत्रण रखने का प्रयास करता है।
* इच्छाओं का दास नहीं बनता।

6. कर्तव्यनिष्ठा
* अपने परिवार, समाज और कार्य के प्रति जिम्मेदारी निभाता है ,
* धर्म को भागने का नहीं, जीवन को बेहतर ढंग से जीने का मार्ग मानता है।

7. सहिष्णुता
* अलग विचार, अलग पूजा-पद्धति या अलग विश्वास रखने वालों से घृणा नहीं करता।
* असहमति होने पर भी सम्मान बनाए रखता है।

8. लोभ में कमी
* धन और शक्ति को साधन मानता है, लक्ष्य नहीं।
* अन्यायपूर्वक लाभ लेने से बचता है।

9. शांति
* परिस्थितियाँ विपरीत होने पर भी भीतर कुछ स्थिरता बनी रहती है।
* प्रतिक्रिया देने से पहले विचार करता है।

10. प्रेम
* धर्म उसके भीतर विभाजन नहीं, जुड़ाव पैदा करता है।
* धर्म उसे अधिक मानवीय बनाता है , न की दूसरे धर्म के प्रति हिंसा का भाव रखने वाला ।

लेकिन आज धर्म को :-

वस्त्रो
भोजन
भाषा
देश

से देखा जाता है ।

Sakha 🧜‍♂️

सोंचे ?

13/06/2026
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━1. शास्त्रों के अनुसार इंद्रायण की असली पहचान 📚🔍आयुर्वेद के महान ग्रंथो...
20/05/2026

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1. शास्त्रों के अनुसार इंद्रायण की असली पहचान 📚🔍

आयुर्वेद के महान ग्रंथों (चरक संहिता और सुश्रुत संहिता) में इंद्रायण को 'गवाक्षी' (गाय की आंख जैसी) और 'चित्रफला' कहा गया है। इसकी पहचान इस प्रकार है:

• बेल और पत्ते: इसकी बेल जमीन पर फैलती है, जिसके पत्ते तरबूज के पत्तों की तरह कटे-फटे और रोएंसेदार होते हैं। 🍃

• फूल: इसके फूल पीले रंग के और दिखने में बहुत सुंदर होते हैं। 🌼

• फल (कोडतुंबा): इसके फल छोटे तरबूज या कंचे की तरह गोल होते हैं। कच्चा होने पर यह हरे रंग का होता है जिस पर सफेद धारियां होती हैं। पकने पर यह चटक पीले रंग का हो जाता है। 🟢 ➡️ 🟡

• अद्भुत पहचान: इसके फल को काटने पर अंदर का गूदा बेहद कड़वा और स्पंज जैसा होता है, जिसमें भूरे रंग के बीज होते हैं। 🍈

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2. इंद्रायण के गुण-धर्म (आयुर्वेदिक प्रॉपर्टीज) 🧪⚖️

आयुर्वेद के अनुसार इंद्रायण कोई साधारण फल नहीं है, इसके गुण बेहद उग्र और असरदार होते हैं:

• रस (स्वाद): तिक्त (बेहद कड़वा) और कटु (तीखा)। 👅
• गुण: लघु (पचने में हल्का), रूक्ष (सूखापन लाने वाला) और तीक्ष्ण (तेज असर करने वाला)। ⚡
• दोष प्रभाव: यह मुख्य रूप से कफ और पित्त दोष का नाश करता है। यह शरीर के भीतर जमे हुए विजातीय तत्वों (Toxins) को बाहर निकालने में मास्टर है। 🧼

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3. इसकी तासीर (Potency) 🔥❄️

• तासीर: इंद्रायण की तासीर अत्यंत उष्ण (बेहद गर्म) होती है। 🔥

• 🚨 विशेष चेतावनी: इसकी तासीर बेहद गर्म और स्वभाव रेचक (पेट साफ करने वाला) होने के कारण इसका सेवन कभी भी सीधे या अत्यधिक मात्रा में नहीं किया जाता। बिना शुद्ध किए या बिना डॉक्टर की सलाह के इसे खाने से दस्त और मरोड़ हो सकती है। ❌

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4. इंद्रायण के मुख्य फायदे (Health Benefits) 🩺💪

वैसे तो इसके सैकड़ों फायदे हैं, लेकिन ये 4 फायदे सबसे मुख्य हैं:

• 🩸 डायबिटीज (मधुमेह) का काल: कोडतुंबा के सूखे फल का चूर्ण या इसके बीजों का नियंत्रित तेल इंसुलिन के स्राव को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है। पुराने समय में लोग इसके पानी में पैर डुबाकर रखते थे जिससे शुगर लेवल कम हो जाता था। 👣🩺

• 🤢 पुराने से पुराना कब्ज और पेट रोग: यह आयुर्वेद का सबसे तगड़ा 'विरेचक' (पेट साफ करने वाला) है। इंद्रायण की जड़ का चूर्ण पेट के कीड़ों, जलोदर (पेट में पानी भरना) और भयंकर कब्ज को जड़ से खत्म करता है। 🪱

• 💇 गंजेपन और सफेद बालों से छुटकारा: इसके बीजों के तेल को नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से असमय सफेद हुए बाल काले होने लगते हैं और जड़ों से नए बाल उगने लगते हैं। 💆‍♂️

• 🦴 जोड़ों का दर्द और गठिया: इसकी गर्म तासीर के कारण, इसके फलों को कूटकर बनाया गया तेल यदि जोड़ों पर मला जाए, तो यह यूरिक एसिड को शांत करता है और सूजन व दर्द को तुरंत खींच लेता है। 🧴

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5. खेती और प्रोसेसिंग (खेती से कमाई का विज्ञान) 🌾💰

आज के समय में इंद्रायण (कोडतुंबा) की खेती बंजर और रेतीली जमीनों के लिए वरदान साबित हो रही है:

• 🌱 बुवाई और जलवायु: इसके लिए सूखी, गर्म जलवायु और रेतीली मिट्टी सबसे उत्तम है। इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। इसके बीजों को सीधे खेतों में बोया जाता है। ☀️

• 📆 फसल की अवधि: बुवाई के लगभग 3 से 4 महीने बाद इसके फल पककर पीले होने लगते हैं, तब इनकी तुड़ाई की जाती है। 🚜

• ⚙️ प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण):

A. फलों को तोड़ने के बाद उन्हें चाकू से दो भागों में काटा जाता है। 🔪
B. इसके बाद इन्हें तेज धूप में सुखाया जाता है जब तक कि इनका मॉइस्चर पूरी तरह खत्म न हो जाए। ☀️
C. आयुर्वेदिक कंपनियां इसके सूखे फल, इसकी जड़ (इंद्रायण मूल) और इसके बीजों को अलग-अलग खरीदती हैं। 💼
D. इसके बीजों से कोल्ड-प्रेस विधि द्वारा तेल निकाला जाता है, जिसकी बाजार में भारी मांग है। 🛢️

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📢 एक जरूरी सलाह: इंद्रायण एक दिव्य औषधि है, लेकिन यह 'तीक्ष्ण' (Teekshna) श्रेणी में आती है। इसलिए इसका सेवन हमेशा किसी योग्य वैद्य की देखरेख में 'इंद्रायण वटी' या 'महाविषगर्भ तेल' के रूप में ही करें। 👨‍⚕️🌿

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: जब  #इंसान रोता है,  #भगवान कहाँ होता है?”*1. तुम कहते हो तुम्हारा भगवान *सर्वशक्तिमान* है, *सर्वज्ञ* है, *सर्वव्यापी*...
15/05/2026

: जब #इंसान रोता है, #भगवान कहाँ होता है?”*

1. तुम कहते हो तुम्हारा भगवान *सर्वशक्तिमान* है, *सर्वज्ञ* है, *सर्वव्यापी* है — फिर भी वो मेरे सवालों के सामने आने से कतराता क्यों है?
2. अगर वो कण-कण में है, तो *उस समय वो क्या कर रहा होता है जब एक बेटी के साथ बलात्कार हो रहा होता है*, और वो चीख-चीखकर मदद पुकारती है?
3. *गरीब का हक जब उसी के नौकर — अफसर, नेता, साहूकार — दिन-दहाड़े खा रहे होते हैं*, तब तुम्हारा सर्वज्ञानी भगवान किस फाइल पर दस्तखत कर रहा होता है?
4. *जब एक माँ के सामने उसके बेटे, बेटी या पति की हत्या हो रही होती है*, और उसकी आँखों के आँसू सूख जाते हैं — उस वक्त तुम्हारा सर्वव्यापी भगवान किस कोने में छुपा होता है?
5. अगर वो सब देख रहा है, सब जान रहा है, सब कर सकता है — तो अन्याय के वक्त उसका *सन्नाटा* सबसे बड़ा सबूत क्यों बन जाता है?
6. सच्चाई ये है कि सिंहासन पर भगवान नहीं, *पंडित-पुजारी का स्वार्थ* बैठा है, जिसने डर और लालच की दुकान खोल रखी है।
7. स्वर्ग का लालच दिखाकर जेब खाली करवाई जाती है, नर्क का डर दिखाकर अक्ल पर ताला लगाया जाता है।
8. असल में ‘भगवान’ एक पर्दा है, जिसके पीछे *शोषण का खेल* चलता है — नाम उसका, माल पुजारी का।
9. जो सवाल करे उसे ‘नास्तिक’ कहकर चुप कराया जाता है, क्योंकि सवालों से ही तो *पाखंड की पोल* खुलती है।
10. जिस दिन इंसान ने भगवान के भरोसे बैठना छोड़ दिया, और अन्याय के खिलाफ खुद उठ खड़ा हुआ — उस दिन *मंदिर की घंटी नहीं, इंकलाब की घंटी* बजेगी।...
#सतयुग_का_सच #जीवन_सत्य ी_बात
👍👍

बुद्ध का इंसानी रूप दिखाने वाला दुर्लभ सिक्का – टिल्या टेपे (बैक्ट्रियन खजाना)अफ़गानिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्वि...
02/05/2026

बुद्ध का इंसानी रूप दिखाने वाला दुर्लभ सिक्का – टिल्या टेपे (बैक्ट्रियन खजाना)

अफ़गानिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में से एक है टिल्या टेपे (Golden Hill) का खजाना, जो 1978–1979 में उत्तरी अफ़गानिस्तान के जोज़जान प्रांत में मिला था। इस खोज का नेतृत्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् विक्टर सरियानिदी ने किया था। यहाँ से कुल 6 कब्रें मिलीं, जिनमें से कब्र नंबर 4 से एक बेहद खास सोने का सिक्का प्राप्त हुआ—जो बौद्ध कला के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।

यह कब्र एक कुषाण कालीन अमीर व्यक्ति की थी, जो पारंपरिक ढीले-ढाले वस्त्रों में दफनाया गया था। इसी कब्र से मिला यह सोने का सिक्का, लगभग 2000 वर्ष पुराना (पहली सदी CE) है और इसे बुद्ध के सबसे शुरुआती मानव रूप (Anthropomorphic depiction) में से एक माना जाता है।

🔶 सिक्के का सामने वाला भाग (Obverse) – “धर्म चक्र प्रवर्तन”

सिक्के के एक तरफ एक खड़ा हुआ पुरुष दर्शाया गया है, जो आधा नग्न है और उसने एक बहती हुई चादर (क्लैमिस – Chlamys) ओढ़ रखी है। उसके सिर पर एक चौड़ी किनारी वाली टोपी (पेटासोस – Petasos) है—जो ग्रीक प्रभाव को दर्शाती है।

वह एक बड़े धर्मचक्र (Wheel of Dharma) को घुमाते हुए दिखाई देता है—जो बुद्ध के प्रथम उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) का प्रतीक है।

इस आकृति के ऊपर खरोष्ठी लिपि में लिखा है:

“धर्मचक्रप्रवर्तको”
👉 अर्थ: “वह जो धर्मचक्र को चलाता है”

यह उपाधि प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में सीधे गौतम बुद्ध के लिए प्रयुक्त होती है, क्योंकि वही एक ऐसे ज्ञानवान माने जाते हैं जो धर्म के चक्र को गति देते हैं।

🔶 सिक्के का पीछे वाला भाग (Reverse) – “डर मिटाने वाला शेर”

सिक्के के पीछे एक शक्तिशाली एशियाई शेर दर्शाया गया है, जिसके साथ बौद्ध धर्म का त्रिरत्न (Three Jewels) चिन्ह अंकित है—जो बुद्ध, धर्म (शिक्षाएं), और संघ (भिक्षु समुदाय) का प्रतीक है।

ऊपर खरोष्ठी में लिखा है:

“सिहो विगतभयो”
👉 अर्थ: “डर को समाप्त करने वाला शेर”

बौद्ध परंपरा में शेर, बुद्ध की वाणी की शक्ति और उनके निर्भीक ज्ञान का प्रतीक है। इसे “सिंहनाद” (Lion’s Roar) भी कहा जाता है—जो सत्य की निर्भीक घोषणा को दर्शाता है।

🔶 ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व

यह सिक्का संभवतः कुषाण साम्राज्य के शुरुआती शासकों—जैसे कुजुला कडफिसेस या विमा ताकतो—के शासनकाल में बनाया गया था।

👉 इससे पहले बौद्ध कला में बुद्ध को सीधे मानव रूप में नहीं दिखाया जाता था। उनकी उपस्थिति केवल प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त की जाती थी, जैसे:

धर्मचक्र

पदचिन्ह (Footprints)

बोधि वृक्ष

खाली सिंहासन

लेकिन ग्रीको-बैक्ट्रियन कला और विशेष रूप से गांधार क्षेत्र के प्रभाव से, कुषाण काल में पहली बार बुद्ध को इंसानी रूप में दिखाना शुरू हुआ।

यह सिक्का उसी परिवर्तन का एक प्रारंभिक और अत्यंत दुर्लभ प्रमाण है—जहाँ प्रतीकात्मक कला से मानव आकृति की ओर संक्रमण हुआ।

🔶 वर्तमान स्थान

आज यह अनमोल सिक्का अफगानिस्तान का नेशनल म्यूजियम, काबुल में सुरक्षित है और “टिल्या टेपे गोल्ड कलेक्शन” का हिस्सा है।

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