Yogi vikas semwal

Yogi vikas semwal whom much food is needed..more thn tht yoga is needed.. and em here to teach u tis great relaxation of body- YOGA ..

Hari  OM ji yoga classes in chennai.
01/09/2014

Hari OM ji yoga classes in chennai.

पीलिया निवारक घरेलु उपचार - पीलिया यकॄत का बहुधा होने वाला रोग है। इस रोग में चमडी और श्लेष्मिक झिल्लियों के रंग में पील...
22/04/2014

पीलिया निवारक घरेलु उपचार -

पीलिया यकॄत का बहुधा होने वाला रोग है। इस रोग में चमडी और श्लेष्मिक झिल्लियों के रंग में पीलापन आने लगता है। ऐसा खून में पित्त रस (bile) की अधिकता की वजह से होता है। रक्त में बिलरुबिन की मात्रा बढ जाती है। हमारा लिवर पित्त रस का निर्माण करता है जो भोजन को पचाने और शरीर के पोषण के लिये जरूरी है। यह भोजन को आंतों में सडने से रोकता है। इसका काम पाचन प्रणाली को ठीक रखना है। अगर पित्त ठीक ढंग से आंतों में नहीं पहुंचेगा तो पेट में गैस की शिकायत बढ जाती है और शरीर में जहरीले तत्व एकत्र होने लगते हैं।

पीलिया तीन रूपों में प्रकट हो सकता है-

१/ हेमोलाइटिक जांडिस में खून के लाल कण नष्ट होकर कम होने लगते हैं। परिणाम स्वरूप रक्त में बिलरूबिन की मात्रा बढती है और रक्ताल्पता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

२/ इस प्रकार के पीलिया में बिलरूबिन के ड्यूडेनम को पहुंचने में बाधा पडने लगती है। इसे obstructive jaundice कहते हैं।

३/ तीसरे प्रकार का पीलिया लिवर के सेल्स को जहरीली दवा(toxic drugs) या विषाणु संक्रमण (viral infection) से नुकसान पहुंचने की वजह से होता है।

त्वचा का और आंखों का पीला होना तीनों प्रकार के पीलिया का मुख्य लक्षण है।

अन्य लक्षण--

अत्यंत कमजोरी
सिरदर्द
ज्वर होना
मिचली होना
भूख न लगना
अतिशय थकावट
सख्त कब्ज होना
आंख जीभ त्वचा और मूत्र का रंग पीला होना।
अवरोधी पीलिया अधिकतर बूढे लोगों को होता है और इस प्रकार के रोग में त्वचा पर जोरदार खुजली मेहसूस होती है।

पीलिया ठीक करने के सरलउपचार--

उचित भोजन और नियमित व्यायाम पीलिया की चिकित्सा में महत्वपूर्ण हैं। लेकिन रोगी की स्थिति बेहद खराब हो तो पूर्ण विश्राम करना जरूरी है। पित्त वाहक नली में दबाव बढने और रूकावट उत्पन्न होने से हालत खराब हो जाती है। ऐसी गंभीर स्थिति में ५ दिवस का उपवास जरूरी है। उपवास के दौरान फलों का जूस पीते रहना चाहिये। संतरा, नींबू ,नाशपती, अंगूर , गाजर ,चुकंदर ,गन्ने का रस पीना फायदेमंद होता है।

रोगी को रोजाना गरम पानी का एनीमा देना कर्तव्य है। इससे आंतों में स्थित विजातीय द्रव्य नियमित रूप से बाहर निकलते रहेंगे और परिणामत: आंतों के माध्यम से अवशोषित होकर खून में नहीं मिलेंगे।

५ दिवस के फलों के जूस के उपवास के बाद ३ दिन तक सिर्फ फल खाना चाहिये। उपवास करने के बाद निम्न उपचार प्रारंभ करें-

सुबह उठते ही एक गिलास गरम पानी में एक नींबू निचोडकर पियें।

नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।

मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।

करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।

रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।

रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।

सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों और फलों का जूस पीना चाहिेये। कच्चे सेवफल और नाशपती अति उपकारी फल हैं।

दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।

मूली के हरे पत्ते पीलिया में अति उपादेय है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी।

टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें। स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। अब भोजन ऐसा होना चाहिये जिसमें पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन सी ,विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें।

शहतूत की औषधीय उपयोगिता .....गर्मियाँ शुरू हो चुकी है और जंगलों में अनेक प्रकार के फल बहार पर है. शहतूत भी ऐसा ही जंगली ...
22/04/2014

शहतूत की औषधीय उपयोगिता .....

गर्मियाँ शुरू हो चुकी है और जंगलों में अनेक प्रकार के फल बहार पर है. शहतूत भी ऐसा ही जंगली फल है जो न केवल जंगलों में बल्कि सडकों और राजमार्गों के किनारे भी पाया जाता है और जिसके फल गर्मियों में प्रचुरता से उपलब्ध होते है. आदिवासियों के अनुसार शहतूत का रस पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है और इनका शर्बत भी बनाया जाता है. पातालकोट, मध्यप्रदेश के आदिवासी शहतूत के रस में चीनी मिलकर पीने की सलाह देते है उनका मानना की ऐसा करने से लू से बचाव होता है. शहतूत का रस हृदय रोगियों के लिए काफी लाभदायक होता साथ ही जिन लोगो को ज्यादा प्यास लगने की शिकायत हो उनके लिए भी शहतूत का रस फायदेमंद होता है. शहतूत और नीम की छाल को बराबर मात्र में पीसकर मुंहासों पर लगाने से आदिवासी मानते है इससे मुहांसे ठीक हो जाते है. शहतूत में विटामिन ए, कैल्शियम, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे तत्व पाए जाते है. शहतूत के सेवन से बच्चों को न केवल पर्याप्त पोषण प्राप्त होता है बल्कि यह बच्चों के पेट के कृमियों का भी नाश करता है. ऐसा माना जाता है की शहतूत का सेवन रक्तविकारों को नष्ट कर रक्त का शोधन करता है. गुजरात के डांग आदिवासी मानते है कि अगर शरीर के किसी भाग में सूजन हो तो उस पर शहतूत का रस और शहद मिलाकर लगाने से सूजन में राहत मिलती है. जिन्हें पैर के तलुओं में जलन की शिकायत रहती है उन्हें शहतूत का रस पीना चाहिए.

ककड़ी के फ़ायदेकच्ची ककड़ी में आयोडीन पाया जाता है। ककड़ी बेल पर लगने वाला फल है। गर्मी में पैदा होने वाली ककड़ी स्वास्थ...
22/04/2014

ककड़ी के फ़ायदे
कच्ची ककड़ी में आयोडीन पाया जाता है। ककड़ी बेल पर लगने वाला फल है। गर्मी में पैदा होने वाली ककड़ी स्वास्थ्यवर्ध्दक तथा वर्षा व शरद ऋतु की ककड़ी रोगकारक मानी जाती है। ककड़ी स्वाद में मधुर, मूत्रकारक, वातकारक, स्वादिष्ट तथा पित्त का शमन करने वाली होती है।
उल्टी, जलन, थकान, प्यास, रक्तविकार, मधुमेह में ककड़ी फ़ायदेमंद हैं। ककड़ी के अत्यधिक सेवन से अजीर्ण होने की शंका रहती है, परन्तु भोजन के साथ ककड़ी का सेवन करने से अजीर्ण का शमन होता है।
ककड़ी की ही प्रजाति खीरा व कचरी है। ककड़ी में खीरे की अपेक्षा जल की मात्रा ज़्यादा पायी जाती है। ककड़ी के बीजों का भी चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है।
ककड़ी का रस निकालकर मुंह, हाथ व पैर पर लेप करने से वे फटते नहीं हैं तथा मुख सौंदर्य की वृध्दि होती है।
बेहोशी में ककड़ी काटकर सुंघाने से बेहोशी दूर होती है।
ककड़ी के बीजों को ठंडाई में पीसकर पीने से ग्रीष्म ऋतु में गर्मीजन्य विकारों से छुटकारा प्राप्त होता है।
ककड़ी के बीज पानी के साथ पीसकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की त्वचा स्वस्थ व चमकदार होती है।
ककड़ी के रस में शक्कर या मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
ककड़ी की मींगी मिश्री के साथ घोंटकर पिलाने से पथरी रोग में लाभ पहुंचता है।

पपीतापपीता न सिर्फ़ एक फ़ल है बल्कि औषधिय गुणों का खजाना है। इस फ़ल में प्रोटीन, बीटा- केरोटीन, थायमिन, रीबोफ़्लेविन और ...
22/04/2014

पपीता

पपीता न सिर्फ़ एक फ़ल है बल्कि औषधिय गुणों का खजाना है।
इस फ़ल में प्रोटीन, बीटा- केरोटीन, थायमिन, रीबोफ़्लेविन और कई विटामिन्स पाए जाते है। प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, बी और सी के साथ ही कुछ मात्रा में विटामिन-डी भी मिलता है। पपीता पेप्सिन नामक पाचक तत्व का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत है। इसमें कैल्शियम और कैरोटीन भी अच्छी मात्रा में मिलता है। इसके अलावा फॉस्फोरस, पोटेशियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट्स, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन भी होता है। पपीता सालभर बाजार में उपलब्ध होता है।
पपीते के पेड से निकलने वाला दूध मुहाँसो पर लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है। फ़लों से निकलने वाले दूध को बच्चों को देने से पेट के कीडे मर जाते है और बाहर निकल आते है।
पपीते की जड (१० ग्राम) और कुल्थी (५० ग्राम) का मिश्रण लेकर काढा बनाकर लेने से बवासीर में फ़ायदा होता है। पपीते के रस में दूध और मिश्री मिलाकर रात को पीने से अनिद्रारोग में फ़ायदा होता है। पपीता पित्त नाशक, वीर्यवर्धक और एक उत्तम पाचक फ़ल है।
इस पौष्टिक और रसीले फल से कई विटामिन मिलते हैं, नियमित रूप से खाने से शरीर में कभी विटामिन्स की कमी नहीं होती। बीमार व्यक्ति को दिए जाने वाले फलों में पपीता भी शामिल होता है, क्योंकि इसके एक नहीं, अनेक फायदे हैं

आसानी से अवशोषित होने से यह शरीर को काफी जल्दी फायदा पहुंचाता है। पपीता एक ऐसा फल है, जो कच्चा और पका हुआ दोनों ही रूप में खाया जाता है। कच्चा फल हरे रंग का दिखाई देता है, अधिकतर इसकी सब्जी बनाई जाती है। फल के रूप में ज्यादातर पका हुआ पपीता ही खाया जाता है।

गुण

पपीता पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे पाचन तंत्र ठीक रहता है और पेट के रोग भी दूर होते हैं। पपीता पेट के तीन प्रमुख रोग आम, वात और पित्त तीनों में ही राहत पहुंचाता है। यह आंतों के लिए उत्तम होता है।

पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन-ए होता है। इसलिए यह आंखों और त्वचा के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे आंखों की रोशनी तो अच्छी होती ही है, त्वचा भी स्वस्थ, स्वच्छ और चमकदार रहती है।

पपीते में कैल्शियम भी खूब मिलता है। इसलिए यह हड्डियां मजबूत बनाता है।

यह प्रोटीन को पचाने में सहायक होता है।

पपीता फाइबर का अच्छा स्रोत है।

इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, कैंसर रोधी और हीलिंग प्रॉपर्टीज भी होती है।

जिन लोगों को बार-बार सर्दी-खांसी होती रहती है, उनके लिए पपीते का नियमित सेवन काफी लाभकारी होता है। इससे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है।

इसमें बढ़ते बच्चों के बेहतर विकास के लिए ज़रूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। शरीर को पोषण देने के साथ ही रोगों को दूर भी भगाता है।
विरेचक होने की वजह से पपीते का सेवन गर्भवती महिलाओं के लिये वर्जित माना जाता है।

संधिवात संधिवात में शरीर के किसी संधि जोड में शोध की उत्पत्ति होती है। धीरे-धीरे शोथ विकसित होता है और तीव्र शूल होने लग...
22/04/2014

संधिवात
संधिवात में शरीर के किसी संधि जोड में शोध की उत्पत्ति होती है। धीरे-धीरे शोथ विकसित होता है और तीव्र शूल होने लगता है। शोथ के कारण त्वचा लाल हो जाती है। संधि शोथ को स्पर्श करने में भी पीड़ा होती है। रात को अधिक पीड़ा होने से रोगी की नींद नष्ट हो जाती हैं।

संधि शोथ और शूल के कारण रोगी चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है। उठकर खड़े होने में भी तीव्र शूल होता है। संधिवात के कारण रोगी को ज्वर भी हो जाता है। संधिवात के उग्र रूप धारण करने पर रोगी की भूख नष्ट हो जाती है।

क्या खाएं?

* लहसुन की एक-दो कली प्रतिदिन हल्के गर्म जल के साथ सेवन करें।
* गर्म जल व दूध में मधु मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है।
* लहसुन की कलियों को सरसों के तेल में देर तक उबालकर जलाएं, फिर उस तेल को छानकर संधि शोथ के अंगों पर मालिश करें।
* मेथी का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ सेवन करने से संधिवात का शूल कम होता है।
* संधिवात का रोगी कोष्ठबद्धता होने पर एरंड का तेल 7-8 ग्राम की मात्रा में उबाले हुए दूध में डालकर पिएं।
* अदरक के 5 ग्राम रस में मधु मिलाकर सेवन करने से संधि शूल नष्ट होता है।
* महा नारायण तेल की संधि शोथ पर मालिश करें।
* चुकंदर का सेवन करने से संधि शूल नष्ट होता है।
* प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर हल्का-सा गर्म करके संधि शोथ पर मलने से बहुत लाभ होता है।
* आलू की सब्जी खाने से शूल कम होता है।
* कुलथी को जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। क्वाथ को छानकर उसमें सोंठ का चूर्ण और सेंधा नमक मिलाकर पिएं।
* अजवायन का 3 ग्राम चूर्ण थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर हल्के गर्म जल के साथ सेवन करें।

क्या न खाएं?

* संधिवात के रोगी शीतल खाद्य और शीतल पेयों का सेवन न करें।
* सब्जियों में गाजर, मूली, टमाटर, अरबी, कचालू, फूलगोभी, भिंडी न खाएं।
* दही और तक्र (मट्ठे) का सेवन न करें।
* चावल व उड़द की दाल का सेवन न करें।
* घी, तेल, मक्खन से बने पकवान न खाएं।
* मांस, मछली व अंडे के साथ-साथ उष्ण मिर्च-मसालों से बनी तली हुई चीजों का सेवन ना करें।
* नंगे पाव फर्श पर न घूमें।
* भीगे वस्त्रों में देर तक न रहें।

को पीसकर लगाने से बालों का रंग सुंदर हो जाता है। मुंह के छाले में गुडहल के पते चबाने से लाभ होता है।डायटिंग करने वाले या...
22/04/2014

को पीसकर लगाने से बालों का रंग सुंदर हो जाता है।
मुंह के छाले में गुडहल के पते चबाने से लाभ होता है।
डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिकमूत्रवर्धक गुण होते हैं।
क्या आप जानते हैं कि गुडहल की चाय भी बनती है। जी हां, गुडहल की चाय एक स्वास्थ्य हर्बल टी है। तो आइये जानते हैं गुडहल के स्वास्थ्य और औषधीय लाभ के बारे में-
गुडहल के गुण -

1. गुडहल से बनी चाय को प्रयोग सर्दी-जुखाम और बुखार आदि को ठीक करने के लिये प्रयोग की जाती है।

2. गुड़हल के फूल का अर्क दिल के लिए उतना ही फायदेमंद है जितना रेड वाइन और चाय।

3. - विज्ञानियों के मुताबिक चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का अर्क कोलेस्ट्राल को कम करने में सहायक है। इसलिए यह इनसानों पर भी कारगर होगा।

4. - डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।

5. - अगर गुडहल को गरम पानी के साथ या फिर उबाल कर फिर हर्बल टी के जैसे पिया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करेगा और बढे कोलेस्ट्रॉल को घटाएगा क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है।

6. गुडहल का फूल काफी पौष्टिक होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह पौष्टिक तत्व सांस संबन्धी तकलीफों को दूर करते हैं। यहां तक की गले के दर्द को और कफ को भी हर्बल टी सही कर देती है।

7. - गुडहल के फूलों का असर बालों को स्वस्थ्य बनाने के लिये भी होता है। इसे पानी में उबाला जाता है और फिर लगाया जाता है जिससे बालों का झड़ना रुक जाता है। यह एक आयुर्वेद उपचार है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने मे
भी किया जाता है।

8. - गुडहल के पत्ते तथा फूलों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर की एक चम्मच मात्रा को एक चम्मच मिश्री के साथ पानी से लेते रहने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढाती है।

9. - गुडहल के फूलों को सुखाकर बनाया गया पावडर दूध के साथ एक एक चम्मच लेते रहने से रक्त की कमी दूर होती है |

10. - यदि चेहरे पर बहुत मुंहसे हो गए हैं तो लाल गुडहल की पत्तियों को पानी में उबाल कर पीस लें और उसमें शहद मिला कर त्वचा पर लगाए |

18/04/2014
नारियल के लाभ --------____________________________________________________नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा इसकी धार्...
04/04/2014

नारियल के लाभ --------
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नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा इसकी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। नारियल में विटामिन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। नारियल कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। नारियल में वसा और कोलेस्ट्रॉल नही होता है, इसलिए नारियल मोटापे से भी निजात दिलाने में मदद करता है। आइए जानते हैं नारियल के चमत्कारी गुणों के बारे में।
नारियल के लाभ –
नकसीर के लिए –नकसीर की समस्या कई लोगों को हो सकती है। नाक से खून निकलने पर कच्चे नारियल का पानी का सेवन नियमित रूप से करना फायदेमंद होता है। अगर खाली पेट नारियल का सेवन किया जाए तो खून का बहाव बंद हो जाता है।
दिमाग के लिए – नारियल खाने से याद्दाश्त बढती है। नारियल की गरी में बादाम, अखरोट एवं मिश्री मिलाकर हर रोज खाने से स्मृति में बढती है। बच्चों को नारियल खिलाना चाहिए, इससे बच्चों का दिमागी विकास होता है।
मुहांसे के लिए – मुहांसों से निजात दिलाने में भी नारियल बहुत फायदेमंद होता है। नारियल के पानी में खीरे का रस मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं और चेहरा सुंदर एवं चमकदार होता है। नारियल के तेल में नींबू का रस अथवा ग्लिसरीन मिलाकर चेहरे पर लेप करने से भी मुहांसे समाप्त होते हैं।
वजन घटाने के लिए - मोटापा कम करने में नारियल बहुत फायदेमंद है। नारियल में कोलेस्ट्रॉल और वसा नहीं होता है। इसलिए नारियल का सेवन करके वजन को घटाया जा सकता है। मोटे लोगों को नारियल का सेवन करना चाहिए।
अच्छी नींद के लिए – अगर नींद न आने की समस्या है तो नारियल का सेवन कीजिए। नियमित रूप से रात के खाने के बाद आधा गिलास नारियल का पानी पीना चाहिए। इससे नींद न आने की समस्या खतम होती है और नींद अच्छी आती है।
सिरदर्द के लिए - नारियल तेल में बादाम को मिलाकर तथा बारीक पीसकर सिर पर लेप लगाना चाहिए। इससे सिरदर्द में तुरंत आराम होता है।
रूसी के लिए – बालों में रूसी की समस्या के लिए नारियल का तेल बहुत फायदेमंद है। नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से रूसी एवं खुश्की से छुटकारा मिलता है।
पेट के लिए - पेट में कीड़े होने पर सुबह नाश्ते के समय एक चम्मच पिसा हुआ नारियल का सेवन करने से पेट के कीडे बहुत जल्दी मर जाते हैं।
नारियल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नारियल को कई प्रकार से प्रयोग किया जाता है। नारियल त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए नारियल का प्रयोग किसी न किसी रूप में जरूर करना चाहिए।

Recently Ashtanga yoga has made an indent on the community here in Costa Rica. Ashtanga literally means eight limbed. Th...
26/03/2014

Recently Ashtanga yoga has made an indent on the community here in Costa Rica. Ashtanga literally means eight limbed. The eight limbs of Ashtanga yoga were outlined by the sage Pantanjali who listed the path of internal purification for revealing the universal self as consisting of 8 spiritual practices, which are as follows:

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