24/02/2025
सभी प्रकार के पेट और लीवर के रोगों की अचूक औषधि
#शोभान्जन_वटी 093363 77701
शोभान्जन वटी के सेवन से पाचक अग्नि की शिथिलता दूर हो पुनः उसमें चेतना आ जाती है अधिक भोजन या गरिष्ठ भोजन करने से अजीर्ण हो गया हो तो शोभान्जन वटी की दो गोली खा लेने से भोजन जल्दी पच जाता है शोभान्जन वटी के सेवन से अम्लपित्त में मुंह में खट्टा या कड़वा पानी आना बंद हो जाता है और अन्न का परिपाक भली-भांति होने लगता है पेट के दर्द को कम करने के लिए शोभान्जन वटी की गोली गर्म जल के साथ खा लेने से दर्द में आराम हो जाता है। यह मंदाग्नि, अजीर्ण, अम्लपित्त, उदरशूल और वायूगोला आदि का शीघ्र नाश करती है। अधिक भोजन या गरिष्ठ भोजन, बासी आदि भोजन करने से उत्पन्न मंदाग्नि कब्जियत आदि इसके सेवन से नष्ट हो जाते हैं। यह मंदाग्नि को नष्ट कर जठराग्नि को प्रदीप्त करती है। इसकी दो तीन खुराक खाने से ही भूख खूब खुलकर लगती है और भोजन भी ठीक-ठीक पचने लग जाता है। किसी भी तरह का अजीर्ण हो उसे नष्ट करने के लिए शोभान्जन वटी का प्रयोग अवश्य करें। मात्रा से अधिक भोजन कर लिया हो तो उसे भी यह पचा देती है। पेट में वायु भर जाने से पेट फूल जाता हो उस समय शोभान्जन वटी की दो गोली गर्म जल के साथ देने से तत्काल लाभ होता है। शोभान्जन वटी बड़ी आंत तथा छोटी आंत की विकृति को नष्ट करती है। किसी भी कारण से अग्नि मन्द होकर भूख ना लगती हो, अन्न में अरुचि हो, जी मिचलाता हो, पेट भारी रहता हो, वमन की इच्छा हो या वमन हो जाता हो, अपच दस्त होते हों, या कब्ज रहता हो आदि उपद्रव होने पर शोभान्जन वटी अद्भुत कार्य करती है। इसके सेवन से भोजन पच कर खूब भूख लगती है और दस्त साफ आता है। जिन्हें बार बार भूख कम लगने की शिकायत हो उन्हें शोभान्जन वटी अवश्य लेनी चाहिए। अजीर्ण की शिकायत अधिक दिनों तक बनी रहने पर पित्त कमजोर हो जाता है और कफ तथा आंव की वृद्धि हो जाती है इसमें हृदय भारी हो जाना, पेट में भारीपन बना रहना, शरीर में आलस्य, किसी भी काम में उत्साह नहीं होना की गति और नाड़ी की चाल मंद हो जाना आदि लक्षण होने पर शोभान्जन वटी देने से बहुत शीघ्र लाभ होता है। शोभान्जन वटी पित्त को जागृत कर कफ और आंव के दोष को पचाकर बाहर निकाल देती है और पाचक रस की उत्पत्ति कर भूख जगा देती है। यह दीपक पाचक तथा वायुनाशक है। अजीर्ण के कारण पेट में वायु भर जाती है जिससे डकारें आने लगती हैं इस वायु को पचाने तथा डकारों को बंद करने के लिए शोभान्जन वटी बहुत उपयोगी है। पेट में वायु कुपित होकर उर्ध्व गति हो जाती है, सामान्य लोग इसे गोला बनना कहते हैं। दिमागी काम करने वालों को यह शिकायत बहुत होती है।इसमें जी मिचलाना, सिर भारी रहना, दिल धड़कना, भ्रम, चक्कर आना, खट्टी डकार आना, पेट फूलना या अफरा आदि लक्षण होते हैं। शोभान्जन वटी के प्रयोग से उर्ध्ववात का शमन शीघ्र ही हो जाता है। शोभान्जन वटी आम को पचाती तथा अजीर्ण मन्दाग्नि पेट दर्द-परिणाम-शूल, पित्तज शूल आदि रोगों को दूर करती है। इसके नियमित सेवन से पेट-सम्बन्धी किसी व्याधि(रोग) के होने का डर नहीं रहता है, क्योंकि उदर सम्बन्धी व्याधियों का मूल अजीर्ण और कब्ज, इसके सेवन से ना तो अजीर्ण ही हो सकता है और न कब्ज ही होता है। इसलिए उदर सम्बन्धी व्याधियों से रक्षा के लिए शोभान्जन वटी का नियमित प्रयोग करना अति श्रेष्ठ उपाय है।
अपने शरीर को किसी भी प्रकार की बीमारी से मुक्त करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार अपनाएं।
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वैद्य पंडित पुष्पराज त्रिपाठी
मो०- 9336377701