09/09/2026
देहरादून। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा, देहरादून में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य, शारीरिक गतिशीलता एवं गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में विशेष पहल की गई। इस अवसर पर अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग का विधिवत उद्घाटन किया गया। विभाग का उद्घाटन अस्पताल के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार मेहता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राहुल शुक्ला, फिजियोथेरेपी प्रभारी डॉ. रुचित खेड़ा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आदित्य मोंगिया, प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. प्रशान्त कुमार भटनागर एवं एस.एस.ओ. श्री जितेंद्र त्यागी द्वारा किया गया। इस दौरान फिजियोथेरेपी विभाग की विशेषज्ञ टीम डॉ. पल्लवी राणा, डॉ. शालिनी एवं डॉ. ज़र शमन मलिक भी उपस्थित रहीं।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के उपलक्ष्य में अस्पताल की ओर से 7 सितंबर से 12 सितंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत सभी मरीजों के लिए निःशुल्क फिजियोथेरेपी परामर्श एवं ओ.पी.डी. आधारित पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसका उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी के महत्व के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ सलाह और आवश्यक उपचार सुविधाएं प्रदान करना है।
इस अवसर पर अस्पताल के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार मेहता ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में फिजियोथेरेपी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। किसी बीमारी, चोट अथवा सर्जरी के बाद मरीज को पूरी तरह सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए केवल चिकित्सा उपचार ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उचित पुनर्वास भी आवश्यक है। फिजियोथेरेपी शरीर की गतिशीलता, मांसपेशियों की कार्यक्षमता और दैनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग की शुरुआत मरीजों को एक ही स्थान पर समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राहुल शुक्ला ने कहा कि फिजियोथेरेपी चिकित्सा उपचार और पुनर्वास के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। दुर्घटना या चोट के बाद, सर्जरी के पश्चात, जोड़ों एवं मांसपेशियों की समस्याओं तथा लंबे समय से चले आ रहे दर्द में फिजियोथेरेपी मरीज की रिकवरी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। उन्होंने कहा कि समय पर उचित फिजियोथेरेपी शुरू होने से मरीज की कार्यक्षमता में सुधार के साथ उसे जल्द से जल्द सामान्य दिनचर्या में लौटने में सहायता मिल सकती है। अस्पताल का प्रयास है कि मरीजों को उपचार के साथ बेहतर पुनर्वास की सुविधा भी उपलब्ध हो।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आदित्य मोंगिया ने कहा कि फिजियोथेरेपी को मरीज की उपचार प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सही मूल्यांकन और मरीज की आवश्यकता के अनुरूप तैयार की गई पुनर्वास योजना से उपचार के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी मरीज को दर्द से राहत देने के साथ-साथ उसकी शारीरिक क्षमता, संतुलन, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फिजियोथेरेपी प्रभारी डॉ. रुचित खेड़ा ने बताया कि विभाग में मरीजों की समस्या का विशेषज्ञ मूल्यांकन कर उनकी आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिगत फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मरीज की शारीरिक स्थिति और समस्या अलग होती है, इसलिए उपचार भी उसकी जरूरत के अनुसार होना चाहिए। सही समय पर शुरू की गई फिजियोथेरेपी दर्द को नियंत्रित करने, शरीर की गतिशीलता बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और कार्यक्षमता में सुधार करने में काफी प्रभावी साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि विशेष अभियान के दौरान कमर एवं गर्दन के दर्द, घुटने एवं अन्य जोड़ों की समस्याओं, खेल अथवा अन्य चोटों, सर्जरी के बाद पुनर्वास, पोश्चर संबंधी समस्याओं, मांसपेशियों की कमजोरी, स्ट्रेचिंग एवं एंड्यूरेंस से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही मरीजों को आवश्यकता के अनुसार व्यायाम, सही पोश्चर, दैनिक गतिविधियों में सावधानियों तथा घर पर किए जाने वाले आवश्यक अभ्यासों के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
फिजियोथेरेपी विभाग की विशेषज्ञ टीम में डॉ. पल्लवी राणा, डॉ. शालिनी एवं डॉ. ज़र शमन मलिक द्वारा भी मरीजों को आवश्यक परामर्श एवं फिजियोथेरेपी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार फिजियोथेरेपी केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीज की संपूर्ण शारीरिक कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। नियमित एवं सही तरीके से किए गए व्यायाम और थेरेपी के माध्यम से मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, लचीलापन एवं गतिशीलता में सुधार किया जा सकता है।
एस.एस.ओ. श्री जितेंद्र त्यागी ने विभाग के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग की शुरुआत मरीजों के लिए एक उपयोगी सुविधा के रूप में सामने आएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में उपचार के साथ पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। फिजियोथेरेपी सेवाओं की उपलब्धता से मरीजों को बेहतर एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
प्रचार-प्रसार प्रमुख डॉ. प्रशान्त कुमार भटनागर ने कहा कि विश्व फिजियोथेरेपी दिवस लोगों को अपने शारीरिक स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल एवं कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल, शारीरिक गतिविधियों में कमी और गलत पोश्चर जैसी आदतों के कारण कम उम्र में भी कमर, गर्दन, कंधे, घुटने और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि और सही पोश्चर अपनाने के साथ आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी परामर्श लेना बेहद उपयोगी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी का दायरा केवल चोट या दर्द के उपचार तक सीमित नहीं है। यह सर्जरी के बाद शीघ्र एवं सुरक्षित पुनर्वास, मांसपेशियों की कार्यक्षमता में सुधार, शरीर की गतिशीलता बढ़ाने, शारीरिक क्षमता को बनाए रखने तथा मरीज के आत्मनिर्भर जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि लंबे समय से किसी प्रकार के दर्द, जकड़न, चलने-फिरने में परेशानी या चोट के बाद बनी समस्या को नजरअंदाज न करें और समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित चिकित्सकों एवं फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार का अंतिम उद्देश्य केवल बीमारी या दर्द को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उसे यथासंभव सामान्य और सक्रिय जीवन में वापस लाना होना चाहिए। इसी दृष्टिकोण के साथ सुभारती अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग को विकसित किया गया है, जहां मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श के साथ व्यवस्थित पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार विशेष अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक फिजियोथेरेपी के लाभों की जानकारी पहुंचाने और उन्हें अपने शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। 7 से 12 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में निःशुल्क फिजियोथेरेपी परामर्श एवं ओ.पी.डी. पुनर्वास सेवाओं का लाभ मरीज उठा सकते हैं।