31/03/2021
🌺मंदिर मे दर्शन - सम्पूर्ण योग साधना🌺
आदि-आनादि काल से मनुष्य अपने धर्म/श्रद्धा के कारण वह अपने इष्टदेव/परमात्मा के दर्शन करने के लिए मंदिर में जाता रहा है। मंदिर में अपने "इष्टदेव" के दर्शन करना एक "सम्पूर्ण योग साधना' है। मंदिर में जाने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से शांति और संतुष्टि का अनुभव करता है।
🌹उद्देश्य:-
1🌹अपने इष्टदेव भगवान के दर्शन:-
जब हम मंदिर में दर्शन करने जाते हैं, तो हमें खुली आंखों से भगवान के दर्शन करने चाहिए। पर हम जाते ही वहां आंखें बंद करके खड़े हो जाते हैं,ओर शुरू हो जाते है, याचना करने। आंखें बंद क्यों करना हम तो दर्शन करने आए हैं । भगवान के स्वरूप का, श्री चरणों का ,मुखारविंद का,श्रंगार का संपूर्णानंद लें।दर्शन के बाद अपने नेत्र बंद करके जो दर्शन किए है, उस स्वरूप का ध्यान करें । अगर ठाकुर जी का स्वरूप ध्यान में नहीं आए तो दोबारा भगवान का दर्शन करें ।
(भगवान के स्वरूप के दर्शन मंदिर के हाल (महामडंप) के बीच मे बैठकर किये जाते है। यह स्थान हमारे शरीर में हृदय (अनाहत चक्र) है। मन का भी यह स्थान है।)
2🌹 भगवान के स्वरूप का चित्रण:-
लगातार ठाकुर जी के दर्शन का अभ्यास करने से हमारे ललाट(माथे) के अंदर अपने इष्टदेव का चित्रण होने लगता है।
3🌹मंत्र साधना:-
जो भी आपके "इष्टदेव'" है, केवल उसी के मन्त्र की साधना करनी चाहिए। आदि-अनादि काल से श्ववासों के मन्त्र 'सोsहम् "की साधना की जाती है। अगर हम अपने श्ववास के लेने व छोडने पर ध्यान दें, तो यह मन्त्र जाप लगातार चौबीसों घंटे हमारे कण्ठ (विशुद्धि चक्र) से चलता रहता है।
(मंदिर में विशुद्धि चक्र भगवान के गर्भ ग्रह का प्रवेश द्वार माना गया है। गर्भ ग्रह मे प्रवेश बिना किसी योग्य गुरु के कृपा दृष्टि के सम्भव नहीं हो सकता।)
4🌹मंदिर में दर्शन एक सम्पूर्ण योग साधना:-
मंदिर में शंख-घंटा-मन्त्रों के ऊचारण की ध्वनि के कंपन मे विशेष दैवीय शक्ति/ऊर्जा होती है। जिसको हम ग्रहण करते है।
मंदिर का निर्माण एक कुण्डलिनी चक्र के हिसाब से गर्भ गृह-मंडप-प्ररिक्रमा आदि का किया जाता है। जहाँ व्यक्ति को चलकर या बैठकर उस चक्र को जागृत करने में सहयोग मिलता है। मंदिर में जाने से हमारे शरीर के सातों चक्र प्रभाव में आते हैं,जो नीचे दिये गए चित्र के अनुसार इस प्रकार से है।
1*गोपुरम - ईश्वर के चरण।
2*ध्वजस्तंभ - मूलाधार चक्र।
3*बालीपीठम - स्वाधिष्ठान चक्र।
4*अधिकार नंदी- मनिपुर चक्र।
5*महामंडपम - अनहद चक्र।
6*गर्भ गृह प्रवेश द्वार - विशुद्धि चक्र।
7* गर्भ गृह में इष्टदेव का स्थान - आज्ञा चक्र
8* गर्भ गृह का विमान - सहस्रार चक्र।
5🌹प्राथना करें, याचना नहीं :-
🌹"याचना अर्थात भीख " संसारिक पुत्र-पुत्री-धन-दौलत आदि वस्तुओं की होती है। प्रभु हमारी पात्रता /कर्मो के अनुसार सबको ही देता है। इसके लिए हमें भगवान श्रीकृष्ण के बताये मार्ग "कर्म योग" का अनुसरण करना चाहिए।
🌹"प्राथना अर्थात निवेदन"
*भगवान के दर्शन /ध्यान के पछचात प्राथना,नेत्रों को बंद करके इस श्लोक का उच्चारण करें:-
*अनायासेन मरणम् ,बिना देन्येन जीवनम्।*
*देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम् ।।*
इस श्लोक का अर्थ है :-
*अनायासेन मरणम्* अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और हम कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े ,कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हो चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं ।
*बिना देन्येन जीवनम्* अर्थात हमें कभी किसी के सहारे ना पड़े रहना पड़े। जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना हो । ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख के ही जीवन बसर हो सके ।
*देहांते तव सानिध्यम* अर्थात जब भी मृत्यु हो तब भगवान के सम्मुख हो। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर जी उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए। उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले ।
*देहि में परमेशवरम्* हे परमेश्वर ऐसा वरदान हमें दें
6🌹महत्वपूर्ण ध्यान देने वाली बातें:-
1*मंदिर में प्रवेश करते समय "चौखट" पर पैर नहीं रखना चाहिए। चौखट पर "भगवान नरसिंह" का वास माना गया है।
2* मंदिर में प्रवेश के समय/पूजा अर्चना करते समय सिर ढ़का होना चाहिए।यह अपने इष्टदेव के प्रति आदर की भावना को दर्शाता है। पूजा के समय मन केन्द्रित रहता है, तथा बालों के जरिए नकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर में नहीं प्रवेश करती।
3*गर्भ गृह की परिक्रमा अपने इष्टदेव के मन्त्रों का मानसिक जाप करते हुए, घड़ी की सूई की दिशा (Clockwise) में करनी चाहिए। हर परिक्रमा के बाद देव प्रतिमा को प्रणाम करें।
4*जहां परिक्रमा का स्थान ना हो वहां भगवान के सामने खडे होकर मन्त्र जाप करना चाहिए।
5*पूजा अर्चना के बाद मंदिर में रखे चरणामृत को अवश्य गृहण करें। इसमें मन्त्रों की शक्ति समाहित होती है।
5* परिक्रमा के बाद भगवान को पीठ दिखाकर बाहर नहीं निकलना चाहिए।
(यदि यह लेख आपको अच्छा लगे तो इसकी जानकारी अपने बच्चों को अवश्य दें)
🙏धन्यवाद🙏