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How To Prevent Fungal Infection In Summer: गर्मी का मौसम आते ही सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ता, बल्कि स्किन से जुड़ी परेशानि...
12/05/2026

How To Prevent Fungal Infection In Summer: गर्मी का मौसम आते ही सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ता, बल्कि स्किन से जुड़ी परेशानियां भी तेजी से बढ़ने लगती हैं. तेज धूप, पसीना, उमस और लंबे समय तक त्वचा में बनी रहने वाली नमी फंगल इंफेक्शन के लिए बिल्कुल सही माहौल तैयार कर देती है. यही वजह है कि गर्मियों में खुजली, लाल चकत्ते, दाद और पैरों की उंगलियों के बीच होने वाले फंगल इंफेक्शन के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. खासकर भारत जैसे गर्म और उमस वाले देशों में यह समस्या काफी आम हो चुकी है. NIH के मुताबिक, सतही फंगल इंफेक्शन ट्रॉपिकल देशों में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली स्किन समस्याओं में शामिल हैं.
गर्मियों के मौसम में क्यों बढ़ जाते हैं फंगल इंफेक्शन के मामले?
स्किन एक्सपर्ट डॉ. निधि रोहतगी बताती हैं कि गर्मियों में सिर्फ फंगल ही नहीं, बल्कि बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते हैं. उनका कहना है कि फंगस को गर्म और नम माहौल सबसे ज्यादा पसंद होता है. जिस तरह बरसात या गर्मी में कपड़ों और खाने की चीजों पर फंगस जल्दी लग जाती है, उसी तरह शरीर के उन हिस्सों में भी इंफेक्शन तेजी से फैलता है जहां ज्यादा पसीना आता है. अंडरआर्म्स, जांघों के आसपास, पैरों की उंगलियों के बीच और त्वचा की सिलवटों में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है.
कपड़े पहनना, टाइट जींस या सिंथेटिक कपड़े इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक
कई बार मौसम से ज्यादा हमारी रोजमर्रा की आदतें इस परेशानी को बढ़ा देती हैं. लंबे समय तक पसीने वाले कपड़े पहनना, टाइट जींस या सिंथेटिक कपड़े इस्तेमाल करना और घंटों तक जूते-मोजे पहने रहना फंगस के बढ़ने का कारण बन सकता है. डॉ. रोहतगी सलाह देती हैं कि गर्मियों में जितना हो सके ढीले और कॉटन के कपड़े पहनने चाहिए, ताकि त्वचा को हवा मिलती रहे।.
नहाने के बाद आप करते हैं यह सबसे बड़ी गलती
नहाने के बाद शरीर को ठीक से न सुखाना भी एक बड़ी गलती मानी जाती है. अक्सर लोग जल्दी में त्वचा की सिलवटों को गीला छोड़ देते हैं, जिससे वहां नमी बनी रहती है और फंगस पनपने लगता है. इसके अलावा तौलिया और साबुन शेयर करना भी इंफेक्शन फैलाने का कारण बन सकता है.
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क्या बिना मेडिकल एक्सपर्ट से पूछे क्रीम लगाते हैं आप?
आजकल एक और समस्या तेजी से बढ़ रही है, बिना सलाह के मेडिकल स्टोर से क्रीम खरीदकर इस्तेमाल करना. NIH पहले भी चेतावनी दे चुका है कि स्टेरॉयड वाली क्रीम फंगल इंफेक्शन को और जिद्दी बना सकती हैं. शुरुआत में खुजली और लालपन कम जरूर दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर फंगस बढ़ता रहता है. डॉ. रोहतगी भी बिना सलाह के ऐसी क्रीम लगाने से बचने की सलाह देती हैं.
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि गर्मियों में स्किन को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं होती. रोज नहाना, पसीने वाले कपड़े तुरंत बदलना, धूप में सूखे कपड़े पहनना और शरीर को सूखा रखना जैसी छोटी आदतें ही फंगल इंफेक्शन से काफी हद तक बचा सकती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Sweating And Skin Problems: गर्मियों में खुजली, लाल चकत्ते, दाद और पैरों की उंगलियों के बीच होने वाले फंगल इंफेक्शन के मामले ज्यादा .....

Foods That Can Slowly Damage Your Kidneys: किडनी शरीर के उन अंगों में से है जो शुरुआत में ज्यादा शोर नहीं मचाती. दिनभर च...
12/05/2026

Foods That Can Slowly Damage Your Kidneys: किडनी शरीर के उन अंगों में से है जो शुरुआत में ज्यादा शोर नहीं मचाती. दिनभर चुपचाप काम करते हुए यह खून को फिल्टर करती है, शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालती है, पानी का संतुलन बनाए रखती है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करती है. लेकिन खराब खानपान धीरे-धीरे इस पर दबाव बढ़ाता रहता है और लंबे समय तक इसके संकेत भी साफ नजर नहीं आते.
दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे हैं किड़नी डिजीज के मामले
आज दुनियाभर में डॉक्टर किडनी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जता रहे हैं. अमेरिकी संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, अमेरिका में हर 7 में से 1 व्यक्ति क्रॉनिक किडनी डिजीज से प्रभावित है और कई लोगों को इसका पता तक नहीं होता. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक, मीठे ड्रिंक्स और हाई-प्रोटीन डाइट का बढ़ता चलन इसकी बड़ी वजह बन रहा है.
प्रोटीन शेक, रेड मीट और हाई-प्रोटीन स्नैक्स हाई बीपी वालों के लिए खतरा
सोशल मीडिया ने प्रोटीन को हेल्दी लाइफस्टाइल का सिंबल बना दिया है. प्रोटीन शेक, रेड मीट और हाई-प्रोटीन स्नैक्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स डिपार्टमेंट के टीम लीड अंशुल सिंह कहते हैं कि जरूरत से ज्यादा प्रोटीन किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या किडनी की समस्या हो.
किड़नी के लिए पैकेज्ड फूड बना बड़ा खतरा
मैरेंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम की चीफ डाइटिशियन डीटी. पारुल यादव ने TOI को बताया कि पैकेज्ड फूड सबसे बड़ा छिपा हुआ खतरा बन चुका है. चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स और फ्रोजन फूड में सोडियम, प्रिजर्वेटिव्स और फॉस्फेट की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जो समय के साथ किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज की रिसर्च भी ज्यादा नमक को हाई ब्लड प्रेशर और किडनी स्ट्रेस से जोड़ चुकी है.
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अगर आप बाहर का खाना खाते हैं, तो सावधान हो जाइए
बहुत ज्यादा नमक वाली चीजें जैसे अचार, नमकीन, सॉस और बाहर का खाना भी धीरे-धीरे किडनी की काम करने की क्षमता कमजोर कर सकता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, एक वयस्क को दिनभर में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं लेना चाहिए, लेकिन ज्यादातर लोग प्रोसेस्ड फूड और रेस्टोरेंट मील्स के जरिए इससे कहीं ज्यादा नमक खा लेते हैं. इसके अलावा मीठे ड्रिंक्स और सोडा भी किडनी के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं. पारुल यादव के मुताबिक, लगातार सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, जो किडनी डिजीज की बड़ी वजह हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक स्टडी में भी शुगर वाली ड्रिंक्स को किडनी डैमेज के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है.
पालक, चुकंदर, चॉकलेट और नट्स क्यों नहीं हैं हेल्दी?
एक और दिलचस्प बात यह है कि हर हेल्दी चीज हर इंसान के लिए सही नहीं होती. पारुल यादव बताती हैं कि पालक, चुकंदर, चॉकलेट और नट्स जैसे ऑक्सलेट-रिच फूड्स कुछ लोगों में किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि किडनी को किसी चमत्कारी डाइट की नहीं, बल्कि संतुलित खाने की जरूरत होती है. घर का ताजा खाना, पर्याप्त पानी, कम नमक और कम प्रोसेस्ड फूड लंबे समय तक किडनी को स्वस्थ रखने में सबसे ज्यादा मदद करते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

High Protein Diet Side Effects: आज दुनियाभर में डॉक्टर किडनी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जता रहे हैं. चलिए आपको ब.....

Summer Care Tips: खून सूखना-जलन या सूजन... ज्यादा गर्मी से हमारे शरीर पर क्या पड़ता है असर, यह कितनी खतरनाक?
11/05/2026

Summer Care Tips: खून सूखना-जलन या सूजन... ज्यादा गर्मी से हमारे शरीर पर क्या पड़ता है असर, यह कितनी खतरनाक?

जब शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है तो उसे खुद को ठंडा रखने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. वही लगातार पसीना निक....

Can Blurry Vision Be A Sign Of Eye Cancer: आंखों में लगातार दर्द रहना, धुंधला दिखाई देना या नजर कमजोर लगना कई लोग सामान्...
11/05/2026

Can Blurry Vision Be A Sign Of Eye Cancer: आंखों में लगातार दर्द रहना, धुंधला दिखाई देना या नजर कमजोर लगना कई लोग सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कुछ मामलों में ये लक्षण आंखों के कैंसर यानी आई कैंसर का संकेत भी हो सकते हैं. हालांकि यह बीमारी बहुत आम नहीं है, लेकिन समय पर पहचान न होने पर यह आंखों की रोशनी ही नहीं, जान के लिए भी खतरा बन सकती है.
क्या आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है?
आंखों के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Centreforsight के अनुसार, आई कैंसर तब होता है जब आंख के अंदर मौजूद सेल्स अनकंट्रोल तरीके से बढ़ने लगती हैं. यह समस्या आंख के अलग-अलग हिस्सों जैसे रेटिना, आइरिस या यूविया में हो सकती है. रिसर्च बताती है कि अगर बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो इलाज ज्यादा असरदार होता है और आंखों की रोशनी बचाने की संभावना भी बढ़ जाती है.
कितने तरह के होते हैं आई कैंसर?
आई कैंसर के कई प्रकार होते हैं. इनमें इंट्राऑक्यूलर मेलानोमा वयस्कों में सबसे ज्यादा देखा जाता है. इसके लक्षणों में धुंधला दिखाई देना, आंख की पुतली पर काले धब्बे पड़ना या पुतली के आकार में बदलाव शामिल हो सकते हैं. वहीं रेटिनोब्लास्टोमा नाम का कैंसर छोटे बच्चों में ज्यादा पाया जाता है.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आंखों में होने वाले कुछ बदलावों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. अगर लगातार धुंधलापन महसूस हो, सीधी लाइनें टेढ़ी दिखने लगें, आंख की पुतली का आकार बदल जाए या देखने का दायरा कम होने लगे तो तुरंत जांच करवानी चाहिए. कई मामलों में आंख के आसपास सूजन, गांठ या लगातार लालिमा भी गंभीर संकेत हो सकते हैं.
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क्या आई कैंसर से आंखों में दर्द होता है?
खास बात यह है कि आई कैंसर शुरुआती स्टेज में हमेशा दर्द नहीं देता. यही वजह है कि कई लोग देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि नियमित आई चेकअप इस बीमारी को समय रहते पकड़ने का सबसे अच्छा तरीका है. खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है जिनकी आंखें हल्के रंग की हों या परिवार में कैंसर की हिस्ट्री रही हो. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक तेज अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में रहना, स्मोकिंग, ज्यादा शराब और हानिकारक केमिकल्स वाले वातावरण में काम करना आई कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं. बढ़ती उम्र के साथ भी इसका जोखिम बढ़ने लगता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Retinoblastoma Symptoms: आई कैंसर तब होता है जब आंख के अंदर मौजूद सेल्स अनकंट्रोल तरीके से बढ़ने लगती हैं. यह समस्या आंख के अलग-अलग .....

Coconut Water Benefits: गर्मियों के मौसम में नारियल पानी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले हेल्दी ड्रिंक्स में से एक माना ज...
11/05/2026

Coconut Water Benefits: गर्मियों के मौसम में नारियल पानी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले हेल्दी ड्रिंक्स में से एक माना जाता है. यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करने के साथ-साथ ठंडक भी पहुंच जाता है. यही वजह है कि फिटनेस और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने की सलाह देते हैं. इसमें मौजूद पोटैशियम, मैग्निशियम, कैल्शियम, इलेक्ट्रोलाइट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं. हालांकि हर चीज की तरह इसका सेवन भी सही मात्रा और सही तरीके से करना जरूरी माना जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या खाली पेट नारियल पानी पी सकते हैं और इसके फायदे क्या-क्या होते हैं.
शरीर को हाइड्रेट रखने में मददगार नारियल पानी
नारियल पानी को नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक कहा जाता है. इसमें मौजूद पोटैशियम, सोडियम और मैग्नीशियम शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. गर्मी, ज्यादा पसीना आने या वर्कआउट के बाद इसका सेवन कर शरीर को एनर्जी देने में मदद कर सकता है. रातभर की नींद के बाद सुबह खाली पेट इसे पीने से शरीर को जल्दी हाइड्रेशन मिलता है.
पाचन को बेहतर बनाने में भी सहायक
खाली पेट नारियल पानी पीने से पाचन प्रक्रिया बेहतर हो सकती है. इसमें मौजूद एंजाइम और फाइबर पेट को हल्का रखने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से कब्ज, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है. कई हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक भी मानते हैं, क्योंकि यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है.
वजन घटाने में भी मिल सकती है मदद
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भी नारियल पानी फायदेमंद माना जाता है. इसमें कैलोरी काफी कम होती है और यह लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास दिला सकता है. इससे बार-बार भूख लगने और अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है. साथ ही यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने में भी मददगार माना जाता है.
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स्किन और बालों के लिए भी फायदेमंद
नारियल पानी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से स्किन में निखार आ सकता है और स्किन फ्रेश दिख सकती है. कई लोगों का मानना है कि इससे बालों की मजबूती और चमक बनाए रखने में भी मदद मिलती है.
किन लोगों को नारियल पानी से बरतनी चाहिए सावधानी?
नारियल पानी काफी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह समान रूप से सही नहीं हो सकता है. जिन लोगों को लो-ब्लड प्रेशर की समस्या रहती हैं, उन्हें खाली पेट इसका सेवन करने से चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है. क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को कम करने में असर दिखा सकता है. डायबिटीज के मरीजों को भी सीमित मात्रा में ही नारियल पानी पीने की सलाह दी जाती है. इसमें नेचुरल शुगर होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में सेवन ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है. वहीं किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोगों को भी डॉक्टर की सलाह के बिना इसका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा ज्यादा होती है. कुछ लोगों को खाली पेट नारियल पानी पीने से भी पेट में गड़बड़ी, गैस या हल्की दस्त हो सकती है. ऐसे में खाली पेट नारियल पानी पीने की शुरुआत कम मात्रा में करना बेहतर होता है.
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Risk Of Brain Stroke Due To High Blood Pressure: स्ट्रोक से बच जाना किसी भी मरीज के लिए बड़ी राहत की बात होती है, लेकिन ...
11/05/2026

Risk Of Brain Stroke Due To High Blood Pressure: स्ट्रोक से बच जाना किसी भी मरीज के लिए बड़ी राहत की बात होती है, लेकिन असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है. बहुत से लोग जो स्ट्रोक से उबर जाते हैं, उनमें दोबारा स्ट्रोक होने का खतरा बना रहता है. खासतौर पर उन मरीजों में यह जोखिम ज्यादा होता है जिन्हें दिमाग में खून बहने वाला स्ट्रोक यानी इंट्रासेरेब्रल हेमरेज हुआ हो. चलिए आपको बताते हैं कि इसका कारण क्या है.
क्यों होते हैं दोबारा स्ट्रोक?
इस तरह के स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण हाई ब्लड प्रेशर होता है. जब लंबे समय तक हाई बीपी ज्यादा रहता है, तो खून की नसों की दीवारें कमजोर पड़ने लगती हैं. धीरे-धीरे यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि नस फट जाए और दिमाग में खून बहने लगे. इसलिए दोबारा स्ट्रोक से बचने का सबसे असरदार तरीका है ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना. हालांकि, यह काम उतना आसान नहीं होता जितना सुनने में लगता है. कई मरीजों को दिन में अलग-अलग समय पर कई तरह की दवाइयां लेनी पड़ती हैं. खासकर बुजुर्गों या दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह रूटीन निभाना मुश्किल हो जाता है. कभी दवा छूट जाती है, तो कभी सही समय पर नहीं ली जाती, जिससे इलाज का असर कम हो जाता है.
क्या निकला स्टडी में?
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिपोर्ट के अनुसार, इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए एक नई स्टडी की गई, जिसमें इलाज को आसान बनाने का तरीका खोजा गया. रिसर्चर ने एक ऐसी गोली पर काम किया जिसमें ब्लड प्रेशर की तीन आम दवाइयों को कम मात्रा में मिलाया गया है. इस गोली का नाम GMRx2 रखा गया है. यह स्टडी TRIDENT ट्रायल के तहत की गई, जिसमें अलग-अलग देशों के 1600 से ज्यादा मरीज शामिल हुए. ये सभी मरीज पहले दिमाग में खून बहने वाले स्ट्रोक का सामना कर चुके थे और उनका ब्लड प्रेशर अभी भी सामान्य स्तर से ऊपर था.
क्या निकला रिजल्ट?
मरीजों को दो समूहों में बांटा गया. एक समूह को यह नई कॉम्बिनेशन गोली दी गई, जबकि दूसरे समूह को सामान्य इलाज के साथ प्लेसीबो दिया गया. इसके बाद दोनों समूहों के परिणामों की तुलना की गई. नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे. जिन मरीजों ने यह कॉम्बिनेशन गोली ली, उनमें दोबारा स्ट्रोक का खतरा करीब 40 प्रतिशत तक कम हो गया. यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि दोबारा स्ट्रोक अक्सर ज्यादा गंभीर साबित होता है.
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इन चीजों के लिए भी कारगर
इसके अलावा, इस गोली को लेने वाले मरीजों में ब्लड प्रेशर भी बेहतर तरीके से कंट्रोल में पाया गया. रिसर्चर का कहना है कि ब्लड प्रेशर में थोड़ा सा भी सुधार लंबे समय में बड़े फायदे दे सकता है. स्टडी में यह भी सामने आया कि इस गोली से दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं, जैसे हार्ट अटैक और दिल की बीमारी से होने वाली मौत का खतरा भी कम हुआ. यानी यह इलाज सिर्फ स्ट्रोक ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है.
हालांकि, अभी कुछ सीमाएं भी हैं. इस स्टडी को कुछ सालों तक ही फॉलो किया गया है, इसलिए लंबे समय के असर को समझना बाकी है. इसके साथ ही, यह इलाज हर मरीज के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Blood Pressure After Stroke: स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण हाई ब्लड प्रेशर होता है. जब लंबे समय तक हाई बीपी ज्यादा रहता है, तो खून की नसों क...

Can Drinking Too Much Water Be Dangerous: गर्मी के दिनों में अक्सर हम यही मानते हैं कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीना ही शरी...
11/05/2026

Can Drinking Too Much Water Be Dangerous: गर्मी के दिनों में अक्सर हम यही मानते हैं कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीना ही शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे आसान तरीका है. लेकिन क्या सिर्फ पानी पीना ही काफी है? एक हालिया मामला इस सोच को पूरी तरह बदल देता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. रोमेल टिक्कू ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एक 25 साल का युवक पूरे दिन धूप में बाइक से इधर-उधर घूमता रहा. उसने खुद को हाइड्रेट रखने के लिए करीब 5 लीटर पानी पिया, लेकिन दिनभर कुछ खाया नहीं. न फल, न कोई नमक वाला पेय सिर्फ सादा पानी, शुरुआत में उसे हल्का चक्कर और मतली महसूस हुई, जिसे उसने थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया. लेकिन कुछ ही घंटों में हालत बिगड़ गई, बोलने में दिक्कत, ज्यादा नींद और उलझन जैसी परेशानी शुरू हो गई. जांच में पता चला कि उसके शरीर में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से गिर चुका था. इसे तीव्र हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है.
क्यों होता है ऐसा?
यह कोई एक मामला नहीं है. देशभर में बढ़ती गर्मी के साथ ऐसे केस तेजी से सामने आ रहे हैं, जहां लोग पानी तो खूब पीते हैं, लेकिन जरूरी खनिजों की कमी से बीमार पड़ जाते हैं. असल में पसीना सिर्फ पानी नहीं होता, उसमें सोडियम, पोटैशियम और दूसरे जरूरी तत्व भी निकल जाते हैं. जब शरीर से ये तत्व लगातार कम होते रहते हैं और हम सिर्फ पानी पीते रहते हैं, तो खून में उनका संतुलन बिगड़ जाता है. यही स्थिति खतरनाक बन जाती है.
सोडियम की कमी से क्या दिक्कत होती है?
सोडियम की कमी खास तौर पर ब्रेन के लिए खतरनाक होती है. जब इसका स्तर गिरता है, तो शरीर की सेल्स में पानी भरने लगता है, जिससे सूजन बढ़ती है. शुरुआत में सिरदर्द, थकान, चक्कर और उलझन जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन अगर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति दौरे या बेहोशी तक पहुंच सकती है. वहीं दूसरी तरफ, अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ सकता है. इसे हाइपरनेट्रेमिया कहा जाता है, जिसमें शरीर की सेल्स सिकुड़ने लगती हैं. इसके लक्षण प्यास, मुंह सूखना, चिड़चिड़ापन और गंभीर मामलों में दौरे तक हो सकते हैं.
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पोटैशियम भी जरूरी
पोटैशियम भी उतना ही जरूरी है, लेकिन इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. इसकी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, ऐंठन और दिल की धड़कन में गड़बड़ी हो सकती है. इसलिए गर्मियों में सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर में जरूरी तत्वों का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. छाछ, नींबू पानी में नमक-शक्कर, नारियल पानी और संतुलित भोजन इस कमी को पूरा करने में मदद करते हैं.
इन चीजों का रखें ध्यान
डॉ. डॉ. रोमेल टिक्कू का कहना है कि सही तरीके से पानी पीना ही असली बचाव है. समय-समय पर ब्रेक लेना, तेज धूप से बचना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करना जरूरी है. यह समझना जरूरी है कि शरीर को सिर्फ पानी नहीं, बल्कि संतुलित पोषण चाहिए. अगर हम इस छोटी सी बात को नजरअंदाज करते हैं, तो यह बड़ी समस्या में बदल सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Overhydration: देशभर में बढ़ती गर्मी के साथ ऐसे केस तेजी से सामने आ रहे हैं, जहां लोग पानी तो खूब पीते हैं, लेकिन जरूरी खनिजों ....

How AI Technology Is Helping Treat Male Infertility: दुनियाभर में लाखों दंपति ऐसे हैं जो संतान सुख पाने के लिए लंबे समय ...
11/05/2026

How AI Technology Is Helping Treat Male Infertility: दुनियाभर में लाखों दंपति ऐसे हैं जो संतान सुख पाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करते हैं. कई मामलों में समस्या पुरुषों में पाई जाती है, जहां शरीर में स्पर्म बेहद कम होते हैं या बिल्कुल नहीं बनते. ऐसी स्थिति को मेडिकल टर्म में गंभीर पुरुष बांझपन माना जाता है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विकसित एक नई तकनीक ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है.
टेक्नोलॉजी ने किया काम आसान
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में विकसित की गई इस तकनीक ने उन पुरुषों में भी स्पर्म खोजने में सफलता हासिल की है, जिन्हें पहले यह कह दिया गया था कि वे कभी पिता नहीं बन सकेंगे. यह सिस्टम बेहद उन्नत तकनीक और मशीन आधारित एनालिसिस का इस्तेमाल करती है. इसका उद्देश्य उन छिपे हुए स्पर्म को ढूंढना है, जो सामान्य जांच में दिखाई नहीं देते.
क्या है मामला?
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, एक दंपति कई सालों से संतान पाने की कोशिश कर रहा था. जांच में पता चला कि पुरुष एक जेनेटिक समस्या से जूझ रहा था, जिसके कारण उसके सीमन में स्पर्म सेल मौजूद नहीं थे. डॉक्टरों ने उनकी संभावना बेहद कम बताई थी. इसके बावजूद नई तकनीक की मदद से नमूने में कुछ रेयर स्पर्म खोज लिए गए और उसी के जरिए गर्भधारण संभव हो सका.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट के मुताबिक यह तकनीक बेहद तेज गति से हजारों तस्वीरों का एनालिसिस करती है. जहां इंसानी आंखें स्पर्म नहीं खोज पातीं, वहां मशीन आधारित सिस्टम उन्हें पहचान लेती है. इसके बाद एक विशेष रोबोटिक प्रक्रिया उन स्पर्म को अलग करती है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सके. रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इस तकनीक ने अब तक कई ऐसे मामलों में सफलता दिखाई है, जहां पहले उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिन लोगों को पूरी तरह बांझ माना गया था, उनमें से करीब 30 प्रतिशत मामलों में स्पर्म खोजने में सफलता मिली.
अभी रिसर्च की जरूरत
हालांकि, एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि इस तकनीक पर अभी और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है. लंबे समय तक इसके परिणामों और सुरक्षा को समझना जरूरी होगा. इसके अलावा गोपनीयता और संवेदनशील चिकित्सकीय जानकारी से जुड़े सवाल भी भविष्य में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

New Infertility Technology: कोलंबिया यूनिवर्सिटी में विकसित की गई इस तकनीक ने उन पुरुषों में भी स्पर्म खोजने में सफलता हासिल की है, .....

Exercises To Avoid With High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन ऐसी बीमारी है, जो अक्सर बिना किसी साफ संकेत...
11/05/2026

Exercises To Avoid With High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन ऐसी बीमारी है, जो अक्सर बिना किसी साफ संकेत के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. ज्यादातर लोगों को तब तक पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए. यही वजह है कि इसे "साइलेंट किलर" कहा जाता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO के अनुसार, दुनियाभर में करीब 1.28 अरब एडल्ट हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं और इनमें से लगभग आधे लोगों को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं है. हर साल करीब 1 करोड़ मौतों के पीछे हाई ब्लड प्रेशर एक बड़ी वजह माना जाता है.
क्या ब्लड प्रेशर वालों को व्यायाम नहीं करना चाहिए?
अक्सर लोगों को लगता है कि हाई ब्लड प्रेशर होने पर व्यायाम नहीं करना चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट इससे सहमत नहीं हैं. डॉ. विनय कुमार पांडे ने TOI को बताया कि रेगुलर फिजिकल एक्सरसाइज ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और हार्ट को स्वस्थ रखने में मदद करती है. हालांकि कुछ तरह की एक्सरसाइज अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं, जिससे अनियंत्रित हाइपरटेंशन वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है.
क्या अनकंट्रोल बीपी वालों को वजन नहीं उठाना चाहिए?
डॉक्टर का कहना है कि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं रहता या जिन्हें पहले से दिल की बीमारी है, उन्हें भारी वजन उठाने से बचना चाहिए. खासतौर पर अपनी क्षमता के 75 प्रतिशत से ज्यादा वजन उठाना शरीर पर अचानक दबाव डाल सकता है. डेडलिफ्ट, भारी स्क्वैट्स या बहुत अधिक तीव्रता वाली बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज कुछ लोगों में चक्कर, सीने में दबाव और दिल से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं. कई लोग वजन उठाते समय सांस रोक लेते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है.
इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग करने से क्या होता है खतरा?
इसी तरह हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग यानी HIIT भी हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती. डॉ विनय बताते हैं कि जो लोग फिटनेस की शुरुआत कर रहे हैं, जिनका ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है या जो मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, उन्हें इस तरह की एक्सरसाइज सावधानी से करनी चाहिए. HIIT में शरीर को कम समय में बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर तेजी से ऊपर-नीचे होता है और दिल पर दबाव बढ़ सकता है. लंबी दूरी की तेज दौड़, स्प्रिंटिंग, क्रॉसफिट और अत्यधिक सहनशक्ति वाली ट्रेनिंग भी जोखिम बढ़ा सकती हैं.
इन चीजों से बचना चाहिए
डॉक्टर के मुताबिक, लगातार जोर लगाकर किए जाने वाले पुश-अप्स या रस्सी कूद जैसी एक्टिविटी भी ब्लड प्रेशर पर असर डाल सकती हैं. खासकर तब, जब सही तकनीक का पालन न किया जाए. प्रतिस्पर्धी खेलों या अत्यधिक दबाव वाली ट्रेनिंग के दौरान भी ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है.
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इन चीजों को अपनाना चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए सुरक्षित एक्सरसाइज सबसे बेहतर विकल्प हैं. तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, योग, स्ट्रेचिंग और हल्की एरोबिक एक्सरसाइज शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. एक्सरसाइज से पहले शरीर को अच्छी तरह वार्मअप करना, पर्याप्त पानी पीना और बहुत गर्म मौसम में भारी वर्कआउट से बचना जरूरी है. अगर किसी को अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है, तो नई फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Exercises For Hypertension: अक्सर लोगों को लगता है कि हाई ब्लड प्रेशर होने पर व्यायाम नहीं करना चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट इससे सहमत नहीं...

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