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12/08/2026

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06/08/2026

Everyone should watch their own sleeve

इंसानी आँख जिस्म के सबसे पेचीदा और हैरतअंगेज़ आज़ा में से एक है। यह दिमाग़ के साथ मिलकर न सिर्फ़ बदलती हुई रौशनी के मुता...
19/06/2026

इंसानी आँख जिस्म के सबसे पेचीदा और हैरतअंगेज़ आज़ा में से एक है। यह दिमाग़ के साथ मिलकर न सिर्फ़ बदलती हुई रौशनी के मुताबिक़ फ़ौरन खुद को ढाल लेती है, बल्कि हरकत को महसूस करती है, लाखों रंगों में फ़र्क़ कर सकती है और हर सेकंड बेशुमार मंजरों की मालूमात को प्रोसेस करती है।

रौशनी सबसे पहले कॉर्निया और पुतली (प्यूपिल) के ज़रिए आँख में दाख़िल होती है। इसके बाद लेंस उसे फ़ोकस करता है। फिर यह विट्रियस ह्यूमर से गुज़रकर रेटिना तक पहुँचती है, जहाँ मौजूद ख़ास ख़लिये (Cells) रौशनी को बिजली जैसे इशारों में तब्दील कर देते हैं।

ये इशारे ऑप्टिक नर्व के ज़रिए दिमाग़ तक पहुँचते हैं और दिमाग़ उन्हें उन तस्वीरों में बदल देता है जिन्हें हम हर रोज़ देखते हैं।

फ़ोटोग्राफ़ी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी में सदियों की तरक़्क़ी के बावजूद इंसानी बीनाई का निज़ाम आज भी कुदरत की बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना माना जाता है।

16/05/2026
पत्थर चटा गुर्दे की पथरी को जड़ से ठीक कर फिर से जवान बना देता है यह एक रसीला बारहमासी पौधा है जो आयुर्वेद जैसी पारंपरिक...
02/05/2026

पत्थर चटा
गुर्दे की पथरी को जड़ से ठीक कर फिर से जवान बना देता है

यह एक रसीला बारहमासी पौधा है जो आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अपने औषधीय उपयोगों के लिए प्रसिद्ध है। इन पत्तियों का उपयोग अक्सर गुर्दे और पित्ताशय की पथरी के इलाज के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जाता है। यह अपने रोगाणुरोधी, कवकरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। यह पौधा अपनी पत्तियों के किनारों पर छोटे-छोटे अंकुर बनाने के लिए विशिष्ट है, जिससे इसका प्रजनन आसानी से हो जाता है।

Sinusitis Cold Congestion - बार-बार सर्दी, एलर्जी या साइनस की समस्या? पूरी जानकारी एक जगहआजकल बहुत सारे लोग बार-बार होने...
18/02/2026

Sinusitis Cold Congestion - बार-बार सर्दी, एलर्जी या साइनस की समस्या? पूरी जानकारी एक जगह
आजकल बहुत सारे लोग बार-बार होने वाली सर्दी, एलर्जिक राइनाइटिस या साइनस की समस्या से परेशान हैं। ऊपर से देखने में यह साधारण जुकाम जैसा लगता है, लेकिन जिसे पकड़ ले, उसकी दिनचर्या बिगाड़ देता है।

नाक से पानी बहना शुरू होता है, कुछ दिनों बाद वही पतला पानी गाढ़ा हो जाता है, फिर दवाइयाँ ली जाती हैं।

बाहर का बहना तो रुक जाता है, लेकिन अंदर साइनस कैविटी में कफ जमा होने लगता है। इसके बाद सिर भारी रहना, माथे या आंखों के आसपास दर्द, बेचैनी, बार-बार छींक, नाक बंद रहना, सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण शुरू हो जाते हैं। कई लोगों को तो “नाक की हड्डी बढ़ना” कहकर समझाई जाने वाली समस्या भी हो जाती है।

बहुत लोग अलग-अलग ट्रीटमेंट करा चुके होते हैं। कुछ दिन राहत मिलती है, फिर वही तकलीफ लौट आती है। इसलिए जरूरी है कि हम इसकी जड़ समझें और स्टेप-बाय-स्टेप सही दिशा में काम करें।

सबसे पहला कदम: निदान परिवर्जन
आयुर्वेद का स्पष्ट सिद्धांत है – जिस कारण से बीमारी हुई है, पहले उसे हटाओ। इसे ही निदान परिवर्जन कहा गया है।

अगर सर्दी-जुकाम या साइनस की समस्या है, तो सबसे पहले इन कारणों पर ध्यान दें:

धूल-मिट्टी और प्रदूषण से बचाव
ठंडी हवा, एसी में लंबे समय तक रहना
फ्रिज की ठंडी चीजें खाना
आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें लेना
बहुत लोग जानते हुए भी ठंडी चीजें खाते हैं और फिर गोली लेने की सोचते हैं। आयुर्वेद इसे प्रज्ञापराध कहता है — यानी समझ होते हुए भी गलत करना। अगर आपको पता है कि ठंडी चीज से तकलीफ बढ़ती है, तो उसे छोड़ना ही सही रास्ता है।

आधुनिक चिकित्सा भी कहती है — प्रिवेंशन बेहतर है इलाज से।

दिनचर्या की गलतियाँ जो कफ बढ़ाती हैं
दिन में सोना, रात में जागना
रात में देर तक जागना और दिन में लंबी नींद लेना कफ बढ़ाता है। अगर दिन में बहुत थकान हो तो 15–20 मिनट का छोटा पावर नैप ले सकते हैं, लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद लंबी नींद नहीं लें।

अत्यधिक पानी पीना
जरूरत से ज्यादा पानी पीना, सुबह उठते ही बिना प्यास के बहुत पानी पीना, या सूर्यास्त के बाद अत्यधिक पानी लेना — ये सब पाचन अग्नि को मंद करते हैं। इससे शरीर में आम बनता है, और वही आगे चलकर कफ विकारों जैसे सर्दी-खांसी को बढ़ाता है।

पानी उतना ही पिएं जितनी प्यास हो।

आहार में क्या रखें, क्या न रखें
खाना ताजा, हल्का और गुनगुना हो।
बहुत ठंडा, बासी या भारी भोजन न लें।
अत्यधिक मीठा और डेयरी उत्पाद कम करें, खासकर अगर वे पच नहीं रहे हों।
आयुर्वेद सर्दी-जुकाम में छाछ का सीमित और सही उपयोग बताता है, लेकिन ठंडा दही सीधे फ्रिज से खाना ठीक नहीं है।

अगर दूध लेना हो तो उसमें काली मिर्च या हल्दी डालकर गुनगुना लें।

मानसिक कारण भी अहम हैं
बहुत गुस्सा, डर, चिंता — ये सब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं।
मल, मूत्र, छींक, उल्टी जैसी प्राकृतिक वेगों को रोकना भी शरीर में विकार पैदा करता है।

इन सब बातों का सीधा असर आपकी इम्युनिटी और साइनस की समस्या पर पड़ता है।

इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं
साइनस और सर्दी में खासकर श्वसन तंत्र की इम्युनिटी मजबूत करना जरूरी है।

प्राणायाम
जब तीव्र सर्दी न हो और थोड़ी राहत हो, तब धीरे-धीरे शुरुआत करें:

अनुलोम-विलोम
भ्रामरी
कपालभाति (हल्के स्तर से शुरू करें)
धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं। इससे फेफड़ों और साइनस की क्षमता मजबूत होती है।

भाप और धूपन
जब नाक बहुत बंद हो:
सादे पानी की भाप लें।

घर में लोहे की तवा गर्म करें, उस पर अजवाइन और हल्दी डालें, उठती भाप को धीरे-धीरे अंदर लें।
यह नाक की ब्लॉकेज और जमा कफ को ढीला करने में मदद करता है।

स्नेहन और स्वेदन
तिल या सरसों का तेल हल्का गुनगुना करें।
माथे, नाक के आसपास हल्की मालिश करें।

अजवाइन या नमक की पोटली बनाकर हल्की सेक करें।
इससे जमा कफ ढीला होकर बाहर आने में मदद करता है।

नस्य (नाक में तेल की बूंदें)
हल्का गुनगुना तिल तेल या गौघृत की 2-2 बूंदें नाक में डाल सकते हैं।
या छोटी उंगली से अंदर हल्का लेप करें।

यह अंदर की सूखापन कम करता है, कफ को बाहर लाने में मदद करता है और रेस्पिरेट्री इम्युनिटी बढ़ाता है।

रसायन चिकित्सा
आंवला
आंवला श्रेष्ठ रसायन है।
घर में बना आंवला मुरब्बा, कैंडी या शरबत उपयोग करें।

हल्दी
हल्दी 1/4th spoon, दूध के साथ या गोली बनाकर ले सकते हैं।
यह एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्युनिटी बढ़ाने वाली है।

गिलोय
गिलोय का काढ़ा सुबह खाली पेट लिया जा सकता है।
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है।

आयुर्वेदिक चाय
घर में ऐसी चाय बना सकते हैं:

4–5 तुलसी पत्ते
छोटा अदरक टुकड़ा
1–2 काली मिर्च
1–2 लौंग
थोड़ी हल्दी
उबालकर गुनगुना पिएं। चाहें तो थोड़ा गुड़ या नींबू मिला सकते हैं।

सोंठ और शहद
सोंठ चूर्ण लगभग 1 ग्राम से कम मात्रा में शहद के साथ लें।
यह कफ कम करता है और पाचन सुधारता है।

कब डॉक्टर से मिलें
अगर इन उपायों के बाद भी:

तकलीफ बढ़ रही हो
सिर दर्द असहनीय हो
बार-बार तेज बुखार आए
सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो
तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिलें।

पंचकर्म, विशेषकर वमन चिकित्सा, कफ प्रधान रोगियों में लाभकारी हो सकती है। यह चिकित्सकीय देखरेख में ही कराएं। वसंत ऋतु इसका उत्तम समय माना गया है, लेकिन जरूरत के अनुसार अन्य समय में भी किया जा सकता है।

Conclusion
सर्दी-जुकाम और साइनस साधारण लग सकते हैं, लेकिन बार-बार होने पर जीवन की गुणवत्ता खराब कर देते हैं। केवल दवा से नहीं, बल्कि कारणों को हटाकर, दिनचर्या सुधारकर, इम्युनिटी बढ़ाकर ही स्थायी राहत मिलती है।

अपनी आदतों को ठीक करें, शरीर को सुनें, और धैर्य रखें। नियमित और सही तरीके से किए गए ये उपाय लंबे समय में आपको मजबूत बनाते हैं।

क्या आपको भी बार-बार सर्दी, नाक बंद या सिर दर्द की समस्या रहती है

12/02/2026

12/02/2026

काले चने की औषधि गुण🙏🙏काले चने (काला चना, बंगाली चना) आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में एक महत्वपूर्ण औषधीय एव...
04/01/2026

काले चने की औषधि गुण🙏🙏

काले चने (काला चना, बंगाली चना) आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में एक महत्वपूर्ण औषधीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थ माने जाते हैं। इनका वानस्पतिक नाम Cicer arietinum है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:

· रस (स्वाद): मधुर (मीठा)
· गुण: गुरु (भारी), रूक्ष (शुष्क)
· वीर्य (शक्ति): उष्ण (गर्म तासीर)
· विपाक (पाचन के बाद प्रभाव): कटु (तीखा)
· दोष प्रभाव: वात को शांत करता है, कफ को संतुलित करता है, पर अधिक मात्रा में पित्त बढ़ा सकता है।

औषधीय गुण एवं स्वास्थ्य लाभ:

1. पौष्टिकता:
· प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन (बी-6, सी, फोलेट), खनिज (आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, जिंक, कैल्शियम) से भरपूर।
· शारीरिक कमजोरी, एनीमिया और कुपोषण में लाभकारी।
2. पाचन स्वास्थ्य:
· उच्च फाइबर सामग्री कब्ज, गैस और अपच में राहत देती है।
· आंत के स्वस्थ बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है।
3. मधुमेह नियंत्रण:
· ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने के कारण रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक।
· फाइबर इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर करता है।
4. हृदय स्वास्थ्य:
· एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और पोटेशियम रक्तचाप व कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक।
· होमोसिस्टीन के स्तर को कम कर हृदय रोगों से बचाव।
5. शक्तिवर्धक:
· आयुर्वेद में इसे वाजीकारक (सेक्सुअल हेल्थ के लिए टॉनिक) माना जाता है।
· काले चने को घी में भूनकर गुड़ के साथ सेवन करने से शारीरिक ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ता है।
6. त्वचा एवं बालों के लिए:
· मुंहासे, रूखापन दूर करता है। चने के आटे का उबटन लाभकारी।
· प्रोटीन व खनिज बालों को मजबूत बनाते हैं।
7. वजन प्रबंधन:
· फाइबर से भरपूर होने के कारण भूख नियंत्रित करता है और वजन घटाने में सहायक।
8. सूजन कम करना:
· एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया व जोड़ों के दर्द में आराम दिलाते हैं।
9. महिलाओं के स्वास्थ्य में:
· आयरन की उपस्थिति मासिक धर्म के दौरान रक्त की कमी को पूरा करती है।
· फोलेट गर्भावस्था में भ्रूण के विकास के लिए उपयोगी।

औषधीय प्रयोग विधियाँ:

1. कमजोरी दूर करने के लिए:
· काले चने भिगोकर, उबालकर, हल्का नमक व जीरा डालकर सेवन करें।
· चने की दाल का सूप पीना भी फायदेमंद।
2. खाँसी-जुकाम में:
· भुने काले चने, अदरक और गुड़ का काढ़ा बनाकर पीएँ।
3. त्वचा रोग:
· काले चने का पेस्ट बनाकर नारियल तेल में मिलाकर लगाने से खुजली व एक्जिमा में आराम।
4. पौरुष शक्ति वर्धक:
· काले चने, खजूर और दूध का सेवन एक साथ करने की सलाह दी जाती है।
5. कब्ज निवारण:
· रात भर भिगोए काले चने सुबह खाली पेट चबा-चबा कर खाएँ।

सावधानियाँ एवं संभावित दुष्प्रभाव:

· अधिक मात्रा में सेवन से पेट फूलना, गैस बन सकती है।
· अधिक गर्म तासीर के कारण गर्मी के मौसम में संयम से सेवन करें।
· पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति अधिक मात्रा में न लें।
· गुर्दे की पथरी या गाउट की समस्या हो तो सीमित सेवन करें।

निष्कर्ष:

काले चने एक संपूर्ण पौष्टिक आहार हैं जो न केवल शारीरिक पोषण प्रदान करते हैं, बल्कि अनेक रोगों में औषधि का काम भी करते हैं। इन्हें अपने नियमित आहार में सही तरीके और मात्रा में शामिल कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या में औषधि के रूप में प्रयोग से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श उचित रहता है।

एक लोंग रात को पानी में भिगोकर सुबह चबने से सांसों की बदबू, मुंह के छाले और गले की खराश गायब होती है। ये देसी छोटी चीज़ ...
04/01/2026

एक लोंग रात को पानी में भिगोकर सुबह चबने से सांसों की बदबू, मुंह के छाले और गले की खराश गायब होती है। ये देसी छोटी चीज़ बड़े असर वाली है।

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