Dr. Aaditi S. Sharma

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मूर्ति नहीं, परिवार के सदस्य हैं मेरे प्रभु: एक आध्यात्मिक संकल्प"ॐ नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव!अक्सर हम अपने घरों मे...
24/07/2026

मूर्ति नहीं, परिवार के सदस्य हैं मेरे प्रभु: एक आध्यात्मिक संकल्प"

ॐ नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव!

अक्सर हम अपने घरों में देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित तो कर लेते हैं, लेकिन क्या हम उन्हें वास्तव में वह स्थान दे पाते हैं जिसके वे हकदार हैं? याद रखिएगा, यदि आप घर में किसी विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा कर रहे हैं, तो उसे केवल एक 'स्टैचू' या सजावट की वस्तु समझने की भूल कभी न करें। वे पत्थर की मूरत नहीं, बल्कि हमारे भावों से जीवित साक्षात ईश्वर हैं। जब प्रभु हमारे घर में विराजते हैं, तो वे एक अतिथि नहीं बल्कि परिवार के सबसे मुख्य सदस्य के रूप में आते हैं। उनके प्रति हमारा सेवा भाव वैसा ही होना चाहिए जैसा अपने माता-पिता या बच्चों के प्रति होता है। प्रभु तो कण-कण में हैं, वे हमारे भीतर भी हैं, लेकिन जब हम उन्हें स्वरूप देकर घर लाते हैं, तो वह हमारी अटूट आस्था का केंद्र बन जाते हैं।आज के समय में एक बहुत ही हृदय विदारक दृश्य देखने को मिलता है—जरा सी मूर्ति खंडित हुई नहीं कि लोग उन्हें किसी कचरे की तरह घर से बाहर कर देते हैं। विचार कीजिए, यदि घर में किसी अपने का हाथ या पैर टूट जाए, तो क्या हम उन्हें त्याग देते हैं? नहीं, हम डॉक्टर के पास जाते हैं। वैसे ही इन मूर्तियों के डॉक्टर वे मूर्तिकार हैं जो इन्हें गढ़ते हैं। जब तक मूर्ति पूर्ण रूप से विसर्जित करने योग्य न हो जाए, तब तक अटूट श्रद्धा के साथ उन्हें सहेज कर रखें। उन्हें पीपल के पेड़ के नीचे या सड़कों पर लावारिस छोड़ देना उनकी भक्ति नहीं, बल्कि उनका अपमान है। हमारी नदियां पहले ही प्रदूषित हैं, ऐसे में जल विसर्जन के बजाय 'भू-विससर्जन' का मार्ग अपनाएं। मिट्टी से आए प्रभु को ससम्मान मिट्टी में ही विलीन करें। आइए संकल्प लें कि हम अपने आराध्य को दर-बदर की ठोकरें खाने के लिए विवश नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें अंत समय तक वही प्रेम और सम्मान देंगे जो एक परिवार के मुखिया को दिया जाता है। क्योंकि अंततः, हमारा भाव ही हमारी सबसे बड़ी पूजा है।

"पत्थर नहीं है मेरा महादेव, वो तो मेरा विश्वास है,मिट्टी के इस स्वरूप में, साक्षात प्रभु का वास है।सजावट की वस्तु मानकर, न करना उनका अपमान,परिवार का सदस्य मानकर, देना उनको उचित सम्मान।"
Mahant Satish Das नवलकिशोर दास जी Shiv Shakti Mahakali Peeth trust सनातन धर्म Rekha Gupta Dr. Aaditi S. Sharma S Niddhi

18/06/2026

🚩 मां कामाख्या अंबुबाची महापर्व: ऑनलाइन ठगी से बचें, जानें सटीक समय और सच्ची भक्ति का मर्म 🚩

जय श्री राम, हर हर महादेव! जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मां कामाख्या का पावन अंबुबाची महापर्व अत्यंत निकट है। मंदिर प्रशासन के आधिकारिक निर्णय के अनुसार, इस वर्ष अंबुबाची महापर्व की शुरुआत 22 जून 2026 (सोमवार) को रात 09 बजकर 08 मिनट 42 सेकंड पर 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ होगी, जिसके तुरंत बाद मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इसके पश्चात, 26 जून 2026 (शुक्रवार) को सुबह सूर्योदय के समय 'निवृत्ति' अनुष्ठान के साथ इस महापर्व का समापन होगा और मां के कपाट दोबारा भक्तों के दर्शन के लिए खोले जाएंगे। इस पावन अवसर के बीच लगातार कई भक्तों के संदेश और फोन कॉल आ रहे हैं, जिसमें लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि आजकल इंटरनेट पर जो तमाम प्रकार की ऑनलाइन पूजा के दावे किए जा रहे हैं, क्या हमें उनमें भाग लेना चाहिए? इस विषय पर असमंजस में पड़े सभी सनातनियों और भक्तों को सबसे पहले अंबुबाची महापर्व के वास्तविक महत्व को गहराई से समझना होगा। यह वह पवित्र समय होता है जब मां भगवती साक्षात रजस्वला होती हैं। यह काल साधारण पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि केवल उच्च कोटि के साधकों, तांत्रिकों और तपस्वियों के लिए अत्यंत कठिन, गोपनीय और अनिवार्य तंत्र-साधना का महापर्व होता है। इसलिए मगर जो साधक हो साधना क्षेत्र में हो, यह सब उन्हीं के लिए ही अनिवार्य है;

जिस चीज को आप पूर्ण रूप से जानते न हों, बस दुनिया की देखा-देखी या सोशल मीडिया के दिखावे में आकर इस दौरान किसी भी प्रकार की पूजा या अनुष्ठान करवाने की सोचें भी नहीं।आजकल आस्था के नाम पर बाजार सजाकर बैठे कुछ तत्व भक्तों की भावनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे हैं और ऑनलाइन पूजा के नाम पर घोटाले कर रहे हैं। आपको यह समझना होगा कि मां कामाख्या साक्षात भाव की भूखी हैं। यदि आप एक सच्चे भक्त हैं और मां को अपनी तरफ से कोई भी सेवा या पूजा अर्पित करना चाहते हैं, तो ऑनलाइन घोटालेबाजों से बचें और पूरी भक्ति व भाव के साथ अपने मन को मां के चरणों में लगाएं। आप अपने घर पर रहकर भी, पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ मन से जो कुछ भी मां को अर्पित करेंगे, जगत जननी उसे कहीं से भी और कैसे भी सहर्ष स्वीकार करेंगी। ऑनलाइन पूजा के इन भ्रामक विज्ञापनों से खुद को दूर रखें। इसके स्थान पर, जब अंबुबाची महापर्व की अवधि समाप्त हो जाए (यानी 26 जून को कपाट खुलने के बाद), तब आप पूरी भक्ति, शुद्धता और सेवा भाव के साथ अपने ही घर में कुमारी पूजन (कन्या पूजन) का आयोजन कर सकते हैं। सनातन धर्म में कुमारी पूजन को साक्षात देवी आराधना के समतुल्य माना गया है, जो आपको बिना किसी आडंबर या ऑनलाइन पैसे गंवाए मां की असीम कृपा प्रदान करेगा।इसके साथ ही, एक और बहुत बड़े रैकेट और धोखेबाज़ी से आप सभी को सावधान रहने की सख्त आवश्यकता है।

इन दिनों इंटरनेट पर मां कामाख्या के पवित्र 'अंबुबाची वस्त्र' या 'रक्त वस्त्र' को बेचने और प्रसाद के रूप में हर किसी को उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। भक्तों को यह परम सत्य जानना चाहिए कि मां का वह पावन सिद्ध वस्त्र अत्यंत दुर्लभ है और वस्त्र ऐसे कहीं पर भी हर किसी को प्राप्त नहीं होता है। ठग लोग साधारण लाल कपड़ों को मां का सिद्ध प्रसाद बताकर भोले-भाले भक्तों को ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं और उनके साथ छल कर रहे हैं। अतः आप सभी से मेरा करबद्ध अनुरोध है कि इन ढोंगी, व्यावसायिक ठगों और ऑनलाइन घोटालों से सावधान रहें। अपनी आस्था को पवित्र रखें, सहज नाम-स्मरण और मानसिक पूजा को अपनाएं, क्योंकि सच्ची साधना हृदय की शुद्धता और अटूट विश्वास में बसती है, किसी ऑनलाइन भुगतान या बाहरी दिखावे में नहीं। मां कामाख्या आप सभी का कल्याण करें।



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Mahant Satish Das Ji Maharaj Little Krishna @ Snatani Aaditi S Sharma Didi

05/06/2026

पर्यावरण दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
संकल्प ले गंदगी ना करेंगे ना करने देंगे

Team' Bharat swachh Mandir
05/06/2026

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22/05/2026

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