10/04/2020
प्रिय केमिस्ट साथियों,
जबसे कोरोना वायरस का प्रकोप विश्व भर में फैला है चहुँओर हाहाकार मचा हुआ है।तथा इस संकट की घड़ी में हर वो व्यक्ति जो इस संक्रमण को समाप्त करने में अपने अपने स्तर पर योगदान दे रहा है। लाकडाउन सभी दूर हम देख भोग रहें हैं। इस समय प्रशासनिक अमला ,पुलिसकर्मि ,डॉक्टर, नर्स यहाँ तक की सफाई कर्मी भी कार्य कर सहभागिता निभा रहे है और ये सभी लोग सब तरफ से यहाँ तक की जनमानस से प्रशंसा ओर सराहना पा रहे हैं। होना भी चाहिये । ये इसके पात्र भी हैं। किंतु कभी आपने भी सोचा या महसूस किया होगा कि हम दवा व्यवसायी भी इन्ही की भाँती सारी जोखिमें उठा कर अपना योगदान इस संकट की घड़ी में जनमानस को दे रहें है। परन्तु इसके बदले में हमें किसी की सराहना या प्रोत्साहन मिला ? नही ना ! मुझे उम्मीद भी नही है कि कोई हमारी इस महती भूमिका को सराहेगा या हमे प्रोत्साहित करेगा। इसकी क्या वजह है ! इस पर हमें आत्म मन्थन करना चाहिए। आपने देखा होगा सराहना तो दूर हमें प्रताड़ित किया जाता हैं,यदि हमारी दुकानों पर भीड़ है तो भी हम जिम्मेदार, व्यवस्था बनाने का जिम्मा भी हमारा, कोई ग्राहक हमसे दुर्व्यवहार करे तोभी हम जिम्मेदार हमे ही उन परिस्थितियों से निपटना है और अंततः झुकना भी हमे ही है। आखिर क्यों ? क्या हम इतना निकृष्ट व्यवसाय करतें है ? नही ना ।
मित्रों कहीं न कहीं इसके मूल में यदि आप जायँगे तो स्वयम को ही दोषी पाएंगे। हम असंगठित होकर व्यवसाय कर रहें है। हम एकसूत्र में बंध कर व्यवसाय करना नही चाहते। हमने अपने स्वार्थ में दूसरे को नीचा दिखाने के लिए इतना नीचे गिर गए है कि हमें अपनी गरिमा,स्वाभिमान ओर सम्मान का भी ध्यान नहीं है।जबकि हम नोबल व्यवसाय से जुड़े है जहाँ सम्मान, सराहना,सहयोग और प्रशस्ति मिलना चाहिये । अस्तु सोचें ! हमे क्या और कैसे व्यवसाय करना चाहिए जिससे हमारे लिए भी कोई ताली- थाली बजावे हमे सम्मान और आदर की भवना या नजरों से देखे समझे। क्षमा करना जनमानस में आज हमारे योगदान ओर महत्व को इस तरह परिभाषित देखकर मन उद्वेलित था अस्तु इतना सब कुछ सबको विचार करने के लिए लिख दिया।धन्यवाद। आपके स्नेहाधीन ।महेन्द्र उपाध्याय।