Ayurveda ek Anmul Den

Ayurveda ek Anmul Den What is Ayurveda medicine? Ayurveda is an ancient Indian medicine that appeared for the first time around 5000 years ago.

It’s in fact some of world’s oldest health systems and it has a proven beneficial effect on many health problems

1. पेट की बीमारियों के लिए यह बहुत प्रभावी दवा है जैसे मरोड़, दर्द और गैस्ट्रिक डिस्ऑर्डर के लिए।  2. सौंफ आपकी याददाश्त ...
18/04/2022

1. पेट की बीमारियों के लिए यह बहुत प्रभावी दवा है जैसे मरोड़, दर्द और गैस्ट्रिक डिस्ऑर्डर के लिए।

2. सौंफ आपकी याददाश्त बढ़ाती है।

3. सौंफ का नियमित सेवन दृष्टि को तेज करता है। 5-6 ग्राम सौंफ रोज लेने से लीवर और आंखों की ज्योति ठीक रहती है।

4. सिंकी हुई सौंफ मिश्री के साथ खाने से आवाज तो मधुर होती ही है यह खांसी भी भगाती है।

5. अगर आप चाहते हैं कि आपका कोलेस्ट्रॉल स्तर न बढ़े तो खाने के लगभग 30 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ खा लें। सौंफ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखती है।

6. सूखी, रोस्टेड और कच्ची सौंफ को बराबर मात्रा में मिला लें। इसे खाने के बाद खाएं। इससे पाचन क्रिया बेहतर रहेगी और आप हल्का महसूस करेंगे।

7. अगर आप एक चम्मच सौंफ 2 कप पानी में उबाल लें और इस मिश्रण को दिन में दो-तीन बार लें तो आपकी आंतें अच्छा महसूस करेंगी और खांसी भी लापता हो जाएगी।

8. सौंफ की पत्तियों में खांसी संबंधी परेशानियां जैसे दमा व ब्रोन्काइटिस को दूर रखने की भी क्षमता होती है।

9. सौंफ को अंजीर के साथ खाएं और खांसी व ब्रोन्काइटिस को दूर भगाएं। कफ और खांसी के इलाज के लिए सौंफ खाना उपयोगी है।

10. मासिक चक्र को नियमित बनाने के लिए सौंफ खाएं।

11. अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर सिंकी हुई सौंफ और बिना सिंकी सौंफ को मिलाकर लेने से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है।

12. दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है।

13. अस्थमा के उपचार में सौंफ कमाल की सहायक है।

14. गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होता है।

15. यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।

16. एक चम्मच सौंफ को एक कप पानी में उबलने दें और 20 मिनट तक इसे ठंडा होने दें। इससे शिशु के कॉलिक का उपचार होने में मदद मिलती है। शिशु को एक या दो चम्मच से ज्यादा यह घोल नहीं देना चाहिए।

17. सौंफ के पावडर को शकर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है। भोजन के बाद 10 ग्राम सौंफ लेनी चाहिए।

Chamomile Tea : औषधीय गुणों से भरपूर कैमोमाइल टी के हैरान करने देने वाले फायदेChamomile Tea : कैमोमाइल टी अनिद्रा से राह...
23/03/2022

Chamomile Tea : औषधीय गुणों से भरपूर कैमोमाइल टी के हैरान करने देने वाले फायदे
Chamomile Tea : कैमोमाइल टी अनिद्रा से राहत देने से लेकर मासिक धर्म के दर्द को कम करने में मदद करती है. आप इस सुपर ड्रिंक को अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं. आइए जानें इसके स्वास्थ्य लाभ क्या है.

Chamomile Tea : औषधीय गुणों से भरपूर कैमोमाइल टी के हैरान करने देने वाले फायदे

कैमोमाइल चाय एक जड़ी बूटी है. ये फूलों से तैयार की जाती है. कैमोमाइल चाय का पौधा एस्ट्रैसी परिवार से आता है. कैमोमाइल चाय लंबे समय से स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाती रही है. ये अनिद्रा से राहत देने से लेकर मासिक धर्म के दर्द को कम करने में मदद करती. आप इस सुपर ड्रिंक को अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं. आइए जानें इसके स्वास्थ्य लाभ क्या है.

कैमोमाइल चाय आपको बेहतर नींद में मदद करती है
कैमोमाइल चाय आपको शांत करती है. इसका इस्तेमाल अनिद्रा के इलाज के लिए भी किया जाता है. इसमें एपिजेनिन नामक फ्लेवोनोइड होता है. ये बहेतर नींद में मदद कर सकता है. इसमें कैफीन भी नहीं होता है. ये हमारे दिमाग और शरीर को आराम देता है. इससे हमें बेहतर नींद आती है.

कैमोमाइल चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है
कैमोमाइल चाय एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुणों से भरपूर होती हैं. ये हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. इसके अलावा ये हमें सोने की क्षमता भी देते हैं. कैमोमाइल चाय में मैग्नीशियम, फोलेट, कैल्शियम, विटामिन ए और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं. ये सभी एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल हर्बल पेय को और भी पौष्टिक बनाते हैं. ये हृदय रोगों और कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए जानी जाती है.

कैमोमाइल चाय पेट दर्द और पीरियड क्रैम्प को कम करती है
कैमोमाइल चाय का इस्तेमाल पाचन संबंधी समस्याओं और पेट दर्द की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है. इसमें ऐंटी-इन्फ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज पीरियड्स क्रैम्प्स और दर्द से राहत दिला सकते हैं.

कैमोमाइल चाय डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद है
कैमोमाइल चाय चीनी और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद होती है. एक अध्ययन के अनुसार इसमें ऐसे गुण होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं.

कैमोमाइल चाय का सेवन तनाव और चिंता को कम करने के लिए
कैमोमाइल चाय तनाव और चिंता को दूर करने में मदद करती है. कैमोमाइल चाय का सेवन प्राचीन समय से ही तनाव-निवारक के रूप में किया जा रहा है. एक कप गर्म कैमोमाइल की चाय सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाने का काम करती है. इससे तनाव और चिंता दूर होते हैं. इसलिए चिंता और तनाव से मुक्त होने के लिए कैमोमाइल चाय का भी सेवन कर सकते हैं.

त्वचा के लिए फायदेमंद
कैमोमाइल चाय पोषक तत्वों से भरपूर होती है और इसमें रोगाणुरोधी गुण होते हैं जो सूजन को रोकते हैं और त्वचा को शांत करते हैं. ये घावों और निशानों को ठीक करने में बेहद प्रभावी है. कैमोमाइल का अर्क पारंपरिक रूप से सनबर्न, त्वचा में जलन , मुंहासे और यहां तक ​​कि एक्जिमा जैसी त्वचा की स्थिति के इलाज के लिए इस्तेमाल किया गया है.

औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधिशिरशूल-कनपट्टियों पर पान के पत्तों को बाँधने से शिरशूल का शमन होता है।नेत्ररोग-पान स्वरस में...
10/03/2022

औषधीय प्रयोग मात्रा एवं विधि

शिरशूल-कनपट्टियों पर पान के पत्तों को बाँधने से शिरशूल का शमन होता है।
नेत्ररोग-पान स्वरस में समभाग मधु मिलाकर नेत्रों में अंजन करने से नवीन पक्ष्मकोप रोग का शमन होता है।
कर्णशूल-1-2 बूँद ताम्बूल पत्र-स्वरस को कान व नेत्र में डालने से कर्णशूल व रतौंधी में लाभ होता है।
मुखरोग-3-3 ग्राम रूमी मस्तगी, सुपारी तथा खदिर सार को ताम्बूल के परिपक्व पत्तों के साथ पीसकर 250-500 मिग्रा की वटी बनाकर घिसकर दाँतों पर लेप करने से दंतमूलगत शूल, शोथ आदि का शमन होता है।
पान की मूल को चूसने से कण्ठ स्वर मधुर होता है।
बच्चों की सर्दी-पान के पत्तों को गर्म करके, एरंड का तेल चुपड़कर छाती पर बाँधने से लाभ होता है।
प्रतिश्याय-पान की जड़ और मुलेठी को पीसकर मधु के साथ चटाने से प्रतिश्याय में लाभ होता है।
कुक्कुर कास-डिप्थीरिया रोग में जब श्वासावरोध उत्पन्न होकर रोगी को अत्यन्त कष्ट होता है तब पान के रस का सेवन करने से गले की सूजन कम हो जाती है और कफ निकलने लगता है। इस रोग में 2-5 पान के पत्तें के रस को थोड़े गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से भी फायदा होता है।
5-10 मिली पान स्वरस को शहद के साथ मिलाकर चटाने से सूखी खाँसी मिटती है।
पान की डंठल को घिसकर शहद मिलाकर चटाने से बच्चों की सर्दी व कफ में आराम मिलता है।
श्वास-पान के पत्तों को गर्म कर श्वास रोगी के वक्ष पर बाँधने से श्वास रोग में लाभ होता है।
हृदय-विकार-हृदय की दुर्बलता तथा हृदय अवसाद की अवस्था में इसका प्रयोग लाभदायक है। डिजिटेलीस के स्थान पर इसका प्रयोग कर सकते हैं।
पान का शर्बत पीने से हृदय का बल बढ़ता है, कफज और मंदाग्नि का शमन होता है।
पान के चूसने पर लार की मात्रा अधिक निकलती है, जिससे पाचन क्रिया में मदद मिलती है। यह पेट की बादी को मिटाने वाला, उत्तेजक और ग्राही है। इससे मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती है। (पान खाने से प्यास कम लगती है)।
कब्ज-पान के डंठल पर तेल चुपड़कर बच्चों की गुदा में रखने से बच्चों की कब्ज और बादी के रोग मिट जाते हैं।
स्तनशोथ-जिन त्रियों के शिशु की मृत्यु हो गयी हो और स्तनों में दूध भरकर सूजन आ गई हो तो उन त्रियों के स्तनों पर पान को गर्म करके बाँधने से सूजन कम हो जाती है और दूध सूख जाता है।
ध्वज भंग-पान के पत्तों को शिश्न पर बाँधने से ध्वजभंग रोग में लाभ होता है।
श्लीपद-ताम्बूल के सात पत्रों को लेकर, कल्क बनाकर, थोड़ा सेंधानमक मिलाकर उष्णोदक के साथ पीने से श्लीपद में लाभ होता है।
व्रण-व्रणों के ऊपर पान को बाँधने से व्रण जल्दी भर जाते हैं।
आवेश रोग-स्त्रियों का आवेश रोग मिटाने के लिए 5-10 मिली पान के रस को 100 मिली दूध में मिलाकर पिलाना चाहिए।
दुर्बलता-पान के शर्बत में चरपरी चीजें या उष्ण बेसवार मिलाकर 25-25 मिली दिन में तीन बार पिलाने से, शरीर की दुर्बलता मिटती है।
ज्वर-3 मिली पान के अर्क को गर्म करके दिन में 2-3 बार पिलाने से ज्वर का शमन होता है।
शोथ-पान को गर्म करके बाँधने से शोथ और पीड़ा का शमन होता है।
कृशता-पान के पत्र को दस मरिच के साथ पीसकर शीतल जल के साथ सेवन करने से कृशता का शमन होता है।
वमन, विरेचन आदि द्वारा भी यदि ज्वर का शमन न हो तो पान के पके पत्तों से पकाए हुए घृत का सेवन हितकर होता है।
सर्पदंश-पान स्वरस को दंश स्थान पर लगाने से सर्पदंशजन्य विषाक्त प्रभावों का उपशमन होता है।
और पढ़ें : अलसी के फायदे आंखों के रोग में

प्रयोज्याङ्ग : पत्र, मूल, फल एवं तैल।

मात्रा : स्वरस 5-10 मिली।

पान खाने से लाभ : पान खाना भी एक व्यसन है। लगातार खाने से इसकी आदत पड़ जाती है। पहली बार खाने से मस्तिष्क पर कुछ खास असर मालूम पड़ता है; जैसे कुछ चक्कर आना, घबराहट, बेचैनी आदि, किन्तु पान खाने की आदत बन जाने पर ये सब शिकायतें धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं। पान के चूसने पर लार की मात्रा अधिक निकलती है, जिससे पाचन क्रिया में मदद मिलती है, परन्तु अधिक मात्रा में पान का सेवन तम्बाकू तथा सुपारी के साथ अहितकर है।

दोष : तीक्ष्ण, उष्ण और पित्तप्रकोपक होने के कारण रक्तपित्त, उरक्षत, मूर्च्छा आदि पैत्तिक-विकारों में निषिद्व है। पान के अधिक खाने से भूख कम लगती है। इसलिए इसको कम मात्रा में खाना चाहिए। इसमें हेपिक्साइन नामक जहरीला पदार्थ होता है। सुपारी में अर्कीडाइन नामक विषैला पदार्थ रहता है, इसलिए सुपारी भी कम लेनी चाहिए। ज्यादा कत्थे से फेफडे में खराबी पैदा हो जाती है। अधिक चूना दाँतों को खराब कर देता है।

गन्ने के फायदे (Sugar cane Benefits and Uses in Hindi)आमतौर पर लोग गन्ने की फसल को केवल उसके जूस के लिए ही जानते हैं, ले...
17/09/2021

गन्ने के फायदे (Sugar cane Benefits and Uses in Hindi)
आमतौर पर लोग गन्ने की फसल को केवल उसके जूस के लिए ही जानते हैं, लेकिन आज आपको बताते हैं कि आप गन्ना का औषधीय प्रयोग कैसे कर सकते हैं। औषधीय प्रयोग के लिए गन्ना की मात्रा या इस्तेमाल का तरीका क्या होना चाहिएः-

गला बैठने पर गन्ने का प्रयोग (Benefits of Sugarcane Juice in Throat Disorder in Hindi)
किसी व्यक्ति का गला बैठ जाता है, तो व्यक्ति सही से बोल नहीं पाता है। प्रायः ज्यादा जोर से गाना गाने, बोलने, चिल्लाने, या फिर ठंड लगने के कारण गला बैठ जाता है। ऐसे में गन्ने को गर्म रेत, या गर्म राख में गर्म कर लें। इसे चूसें। इससे गला ठीक हो जाता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

कंठ के रोग में गन्ने से फायदा (Uses of Sugar cane in Treating Throat Disease in Hindi)
ईख के रस को धूप में, या आग में गर्म करें, जब इसमें एक ऊफान आ जाए, तो इसे शीशी, या चीनी मिट्टी के बरतन में भरकर रख लें। इसे एक सप्ताह बाद प्रयोग में लाएं। इसका गरारा करने से कण्ठ से संबंधित परेशानी से आराम (benefits of sugarcane juice) मिलता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़ें: कंठ रोग में वन तुलसी के फायदे

हिचकी की परेशानी में गन्ने का इस्तेमाल (Sugarcane Juice Benefits to Treat Hiccups in Hindi)
हिचकी बहुत ही साधारण समस्या है, लेकिन कभी-कभी हिचकी परेशानी भी बन जाती है। इस परेशानी में थोड़े से गुड़, और सोंठ को पानी में घिस लें। इसे नाक के रास्ते लें। इससे हिचकी और सिर दर्द में फायदा होता है।
इसी तरह 10-20 मिली ईख के रस का सेवन करें। इससे भी हिचकी में लाभ होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
और पढ़े: हिचकी में चना के फायदे

वीर्य की वृद्धि के लिए गन्ने का प्रयोग (Benefit of Sugar cane in Semen Problem in Hindi)
गन्ना का इस्तेमाल वीर्य की वृद्धि के लिए भी किया जाता है। वीर्य दोष वाले लोग 2-4 ग्राम आंवला चूर्ण के साथ, गुड़ का सेवन करें। इससे वीर्य की वृद्धि होती है। इसके साथ ही थकान, रक्तपित्त, जलन, और पेशाब से संबंधित परेशानी से आराम मिलता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़ें: वीर्य रोगों में चंद्रप्रभा वटी के लाभ

sugar cane benefits for many diseases
आंखों की रोशनी की कमी में गन्ने का उपयोग (Sugarcane Benefits in Eye Disorder in Hindi)
आंखों की बीमारी में गन्ना का सेवन करना लाभदायक होता है। इसके लिए आंखों की बीमारी वाले रोगी, मिश्री के टुकड़े को जल के साथ घिसकर आंखों में लगाएं। इससे आंखों की रोशनी ठीक होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़े: आंखों की बीमारी में रजः प्रवर्तिनी वटी के फायदे

सर्दी-जुकाम, और खांसी में गन्ने से फायदा (Uses of Sugar cane for Cold and Cough Treatment in Hindi)
10 ग्राम गुड़, 40 ग्राम दही, तथा 3 ग्राम मरिच चूर्ण को मिला लें। इसका सुबह-सुबह तीन दिनों तक सेवन करें। इससे सर्दी-जुकाम या सूखी खांसी ठीक हो जाती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
अगर आप कफ वाली खांसी से बहुत परेशान हैं, और चाहते हैं कि आयुर्वेदिक उपाय से आपकी बीमारी पूरी ठीक हो जाए, तो पुराने गुड़ में अदरक मिलाकर सेवन करें। इससे कफ वाली खांसी (sugarcane health benefits) ठीक होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
भूख बढ़ाने के लिए गन्ना का सेवन (Benefit of Sugarcane Juice in Appetite Problem in Hindi)
ईख के रस को धूप में, या आग में गर्म कर लें। एक ऊफान आने के बाद शीशी, या चीनी मिट्टी के बरतन में भरकर रख लें। एक सप्ताह बाद प्रयोग में लाएं। इससे भोजन ठीक से पचता है, और भोजन के प्रति रुचि भी बढ़ती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

पाचनतंत्र की मजबूती के लिए गन्ने का प्रयोग (Benefits of Sugarcane Juice for Indigestion in Hindi)
गुड़ के साथ थोड़ा-सा जीरा मिला लें। इसका सेवन करने से पाचनतंत्र संबंधित परेशानी ठीक होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

कब्ज की परेशानी में गन्ना का प्रयोग (Sugarcane Juice Benefits in Constipation in Hindi)
अनेक लोग कब्ज से परेशान रहते हैं। कब्ज के कारण कई बड़ी बीमारियां भी होने की संभावना रहती है। इसलिए कब्ज से परेशान लोग ईख के रस (benefits of sugarcane juice) के साथ जौ के बाल को पीसकर पिएं। इससे कब्ज में फायदा होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़ेंः कब्ज के लिए घरेलू उपाय

पेट फूलने की परेशानी में ईख का प्रयोग (Uses of Sugarcane Juice to Treat Gastric Problem in Hindi)
पेट के फूलने की परेशानी कई कारणों से हो सकती है। इसके लिए ईख के रस (ganne ka juice) को पका लें। इसे ठंडा कर पीने से पेट के फूलने की परेशानी में लाभ होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

गन्ना के सेवन से पेट दर्द से आराम (Benefits of Sugar cane Juice for Abdominal Pain in Hindi)
पेट दर्द से परेशान रहते हैं, तो गन्ना का उपयोग करें। इसके लिए 5 लीटर ईख के रस को मिट्टी के बरतन में भर लें। इस बरतन का मुंह कपड़े से बंद कर रख दें। एक सप्ताह बाद छानकर रख लें। एक महीने बाद 10-20 मिली रस में 3 ग्राम सेंधा नमक मिला लें। इसे थोड़ा गर्म कर पिलाने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
पेट की बीमारी में 2-4 ग्राम अजवायन चूर्ण को गुड़ के साथ मिलाकर सेवन करें। [Go to: Benefis of Sugarcane]
और पढ़ें- पेट दर्द को ठीक करने के लिए घरेलू उपाय

पित्त दोष को ठीक करने के लिए गन्ना का उपयोग (Sugarcane Benefits to Treat Pitta Disorder in Hindi)
पित्त संबंधित दोषों के लिए खाना खाने से पहले ईख का सेवन करना उत्तम रहता है।
ईख के 30-40 मिली रस में शहद मिलाकर पीने से पित्त से संबंधित बीमारी ठीक होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
वात दोष में गन्ना का प्रयोग (Uses of Sugar cane in Vaat Disorder Treatment in Hindi)
गुड़ को गाय के ताजा दूध के साथ पीने से वात दोष ठीक होते हैं। [Go to: Benefis of Sugarcane

सिर दर्द में गन्ना से फायदा (Benefit of Sugar cane in Relief from Headache in Hindi)
10 ग्राम गुड़, तथा 6 ग्राम तिल को दूध के साथ पीस लें। इसमें 6 ग्राम घी मिलाकर गुनगुना कर लें। इसका सेवन करने से सिर दर्द से राहत मिलती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़ेंः सिर दर्द को ठीक करने के लिए घरेलू उपाय

सांसों के रोग में गन्ने का सेवन (Benefit of Sugar cane in Respiratory Disease in Hindi)
3-6 ग्राम गुड़ में इतनी ही मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर सेवन करें। इससे सांस फूलने, या सांस के उखड़ने की परेशानी से राहत मिलती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़े – सांस फूलने की समस्या में टमाटर के फायदे

नकसीर या नाक से खून बहने पर गन्ना के प्रयोग से फायदा (Benefits of Sugarcane Juice to Stop Nasal Bleeding in Hindi)
नकसीर या नाक से खून निकलने पर ईख के रस को नाक से देने पर आराम मिलता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

घेंघा रोग को ठीक करने के लिए गन्ने का उपयोग (Sugarcane Juice Benefits to Treat Goiter Disease in Hindi)
घेंघा रोग गले में होने वाली एक बीमारी है। इसमें 2-4 ग्राम हरड़ के चूर्ण का सेवन करें। ऊपर से गन्ने का रस (sugarcane juice benefits) पीने से लाभ होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

Sugarcane benefits in Goiter
स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए गन्ने का सेवन (Uses of Sugar cane for Increasing Breast Milk in Hindi)
स्तनपान कराने वाली माताएं अगर स्तनों में दूध की कमी महसूस कर रही हैं, तो वे ईख की 5-10 ग्राम जड़ को पीस लें। इससे गन्ने की कांजी (काढ़ा) बना लें। इसका सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़े: स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए चावल के फायदे

ल्यूकोरिया (प्रदर रोग) में गन्ने से फायदा (Sugarcane Benefits in Leucorrhea Treatment in Hindi)
ल्यूकोरिया को ठीक करने के लिए गुड़ की ऐसी खाली बोरी लें, जिसमें 2-3 साल तक गुड़ भरा रहा हो। इसे जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को छान लें। रोजाना सुबह 1 ग्राम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ (sugarcane health benefits) होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

मेनॉयरेजिया (गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव) में गन्ना से लाभ (Benefits of Sugar cane Juice for Menorrhagia in Hindi)
ईख के रस (ganne ka ras) से कपड़े को गीला कर पट्टी बना लें। इसे योनि पर रखने से गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव की बीमारी ठीक होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

डायबिटीज में गन्ने का सेवन फायदेमंद (Uses of sugar cane for Controlling Diabetes in Hindi)
गुड़ के साथ जौ का राख मिला लें। इसे गर्म जल के साथ सेवन करने से डायबिटीज (मधुमेह) में फायदा होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़ेंः डायबिटीज को नियंत्रित करने के घरेलू नुस्खे

मूत्र रोग में गन्ने से फायदा (Sugar cane Juice Benefits in Treating Urinary Disease in Hindi)
ईख के ताजे रस (sugar cane juice) को पीने से मूत्र सम्बन्धी विकारों, जैसे- बार-बार पेशाब आने में आराम मिलता है। अगर आपको ईख के ताजा रस नहीं मिल रहा है, तो आप ईख की जड़ से काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं।
ईख के 30-40 मिली रस में, आंवले का रस, और शहद मिला ले। इसका सेवन करने से मूत्र संबंधी परेशानी ठीक होती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
ईख की ताजी जड़ का काढ़ा बना लें। इसे 40-60 मिली मात्रा में पीने से पेशाब में जलन की समस्या से राहत मिलती है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
पीलिया रोग में गन्ने का प्रयोग (Uses of Sugar cane in Fighting with Jaundice in Hindi)
ईख के टुकड़े कर, रात के समय घर के ऊपर छत पर, ओस में रख दें। इसके रस (sugarcane juice benefits) को सुबह साफ करने के बाद चूसें। 4 दिन के प्रयोग से पीलिया में बहुत लाभ होता है।
ईख के शुद्ध ताजे रस के साथ, जौ के सतू् का सेवन करें। इससे पीलिया (पांडु) रोग में लाभ होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]
और पढ़ेंः पीलिया के लिए घरेलू उपचार

पेचिश में गन्ना का प्रयोग फायदेमंद (Benefits of Sugarcane Juice to Stop Dysentery in Hindi)
पेचिश के रोगी, जिन्हें खून के साथ मल आता है। वे 30-40 मिली ईख के रस (sugar cane juice) में इतनी ही मात्रा में अनार का रस मिला लें। इसे पीने से पेचिश में लाभ होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

खूनी बवासीर में गन्ना का प्रयोग फायदेमंद (Sugarcane Juice Benefits in Piles Treatment in Hindi)
खूनी बवासीर को ठीक करने के लिए गन्ना (sugar cane) का उपयोग लाभ देता है। इसके लिए ईख के रस से गीली पट्टी को मस्सों पर लगाएं। इससे खूनी बवासीर में लाभ होता है। [Go to: Benefis of Sugarcane]

और पढ़ेंः बवासीर के लिए घरेलू उपाय

संक्रामक रोग में गन्ना का इस्तेमाल (Sugarcane Health Benefits in Infectious Disease in Hindi)
ऐसे रोग, जो हवा द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं, उसे संक्रामक रोग बोलते हैं। ऐसे संक्रामक बीमारियों को ठीक करने के लिए गन्ना का सेवन (ganne ka ras) करना लाभ देता है। इसके लिए गुड़ के साथ जौ का राख मिला लें। इसे गर्म जल के साथ सेवन करें।

किडनी विकार (गुर्दा विकार) में गन्ने का इस्तेमाल (Sugarcane Uses in Kidney Problem in Hindi)
किडनी से संंबंधित विकार, जैसे- किडनी में दर्द हो रहा हो, तो 11 ग्राम गुड़, और 500 मिग्रा बुझा हुआ चूना को मिलाकर, दो गोलियं बना लें। पहले 1 गोली गुनगुने जल के साथ लें। अगर दर्द कम ना हो तो दूसरी गोली लें।

ह्रदय को स्वस्थ बनाने के लिए गन्ना का सेवन (Sugarcane Uses for Healthy Heart in Hindi)
ह्रदय को स्वस्थ रखना है, तो गन्ना का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। इसके लिए गुड़ की पपड़ी, या गुड़ से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर होता है।

अन्य रोगों में गन्ने का इस्तेमाल (Uses of Sugarcane in Other Diseases in Hindi)
5 ग्राम गुड़ के साथ, 5 ग्राम अदरक, या सोंठ, या हरड़, या फिर पीपल में से किसी का चूर्ण मिला लें। इसे 10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के साथ सेवन करें। इससे मुंह के छाले की बीमारी (mouth ulcer), सांसों के रोग, कफ, सूजन, सर्दी-जुकाम, गला की बीमारी, बुखार, बवासीर, और पेचिश में लाभ मिलता है

मिश्री के फायदे (Benefits of Mishri/Mishri ke fayde)
मिश्री गन्ने से ही बनती है, इसलिए गन्ना की तरह मिश्री का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। आप मिश्री का इस्तेमाल इस तरह कर सकते हैंः-

मुंह में छाले होने पर मिश्री का सेवन (Mishri Benefit for Mouth Ulcer Treatment in Hindi)
मुंह में छाले होने पर, या भूख की कमी होने पर मिश्री का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके लिए मिश्री के टुकड़े के साथ, एक छोटा-सा कत्थे का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसें। इससे मुंह के छाले, तथा भूख की कमी की समस्या ठीक होती है।

आंखों की रोशनी की कमी में मिश्री का प्रयोग (Benefit of Mishri in Treating Eye Problem in Hindi)
आंखों में रोशनी की कमी महसूस होने पर, मिश्री को जल के साथ घीस लें। इसे आंखों में काजल की तरह लगाने से लाभ होता है।

बुखार उतारने के लिए मिश्री का उपयोग (Uses of Mishri in Fighting with Fever in Hindi)
बुखार होने पर दूध में घी, तथा मिश्री मिला लें। इसका सेवन करने से बुखार ठीक होता है।

Address

Dhanbad
826001

Telephone

+917008337321

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayurveda ek Anmul Den posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Ayurveda ek Anmul Den:

Shortcuts

Share