21/08/2026
किसी के घर जाओ, तो उसके घर के पानी की मिठास ही बहुत कुछ बता देती है'-
कि उसने तुम्हें सिर्फ घर में बुलाया है या दिल से स्वीकार भी किया है।
चाय की ट्रे लेकर आने का अंदाज़ बता देता है कि यहाँ कितनी देर बैठना है।
परोसने का तरीका बता देता है कि यहाँ खाना है या सिर्फ औपचारिकता निभानी है।
और खाना खा लेने के बाद यह फैसला भी आसान हो जाता है कि
यहाँ दोबारा आना है… या बस यही मुलाकात आखिरी थी।
तुलसीदास जी ने कहा है-
“आवत ही हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।”
इसलिए जहाँ आदर-सत्कार न हो, वहाँ बार-बार मत जाओ।
क्योंकि जहाँ सम्मान न मिले, वहाँ रिश्ते निभाने से बेहतर है
सम्मान के साथ दूरी बनाए रखना।