30/08/2026
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
SatyarthPrakash
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♦️दयानंद सरस्वती ने पहला वार देवाधिदेव महादेव और हिन्दू देवी-देवताओं पर किया है
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है—‘तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!’
♦️महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 142 पर लिखा है कि जब श्रद्धालु ने शिव पर जल चढ़ाने हेतु लोटा माँगा, तो दयानंद जी द्वारा कहा गया—‘अपने मुख में कुल्ला भर ले जाओ और उसके ऊपर डाल दो!’
♦️'सत्यार्थ प्रकाश' समुल्लास 11, पृष्ठ 289 पर! यहाँ दयानंद जी लिखते हैं कि मूर्तिपूजा के कारण रामचंद्र, श्रीकृष्ण, नारायण (विष्णु) और शिव का उपहास होता है और पुजारी उनके नाम पर भीख माँगकर उन्हें ‘भिखारी’ बनाते हैं। यहाँ दयानंद जी ने प्रभु राम, कृष्ण, नारायण, शिव, सीता, रुक्मिणी, लक्ष्मी और पार्वती को केवल हाड़-मांस का साधारण राजा-रानी बताकर उनके ईश्वरीय अस्तित्व को ही नकार दिया!
♦️सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 291 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि
श्रावण मास में भक्तों के ‘बम-बम’ नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव को ‘प्रेतनाथ’ और ‘भूतनाथ’ कहकर उपहास उड़ाया गया है।
♦️सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 292-293 पर दयानंद सरस्वती ने
वैष्णवों को ‘धूड़’ अर्थात तुच्छ कहा और भगवान नारायण (विष्णु) सहित वैष्णवों को ‘चोरमंडली’ की संज्ञा दे दी!
♦️सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 305 पर दयानंद सरस्वती ने श्रीकृष्ण के चरित्र पर आक्षेप लगाते हुए उन्हें 'भगंदर' का रोगी कहा गया!
♦️सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 2, पृष्ठ 31 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि प्रसूता स्त्री बालक को केवल 6 दिन दूध पिलाए, फिर स्तनों पर औषधि का लेप लगाकर दूध सुखा दे ताकि दो