21/08/2025
🪷 डायबिटिक वाउंड एवं बर्न – आयुर्वेदिक कारण व उपचार
✍️ प्रस्तुतकर्ता – डॉ. सुनील गुप्ता
आयुर्वेदिक कारण (Hetu)
डायबिटिक रोगी में घाव (wound) या जलन (burn) जल्दी क्यों बिगड़ जाते हैं?
आयुर्वेद के अनुसार कारण हैं –
1. मधुमेह (Prameha) में दोष imbalance –
• कफ और मेद दोष की वृद्धि → शरीर में रक्त व रस धारा को बाधित करती है।
• पित्त असंतुलन → त्वचा व मांस धातु को कमजोर करता है।
2. रक्त धातु दूषित होना –
• रक्त में शर्करा अधिक होने से रक्तसंचार मंद हो जाता है।
• इससे घाव भरने की शक्ति (Ropan Shakti) कम हो जाती है।
3. अग्नि मंद्यता (Digestive Fire weak) –
• जठराग्नि मंद होने से पोषण रस धातुओं तक नहीं पहुँचता।
• त्वचा (Twak), मांस (Mamsa) और अस्थि (Asthi) धातु दुर्बल हो जाते हैं।
4. Ojas क्षीणता –
• मधुमेह में ओज (प्रतिरोधक शक्ति) कम हो जाती है।
• परिणाम: घाव जल्दी संक्रमित होते हैं और धीरे भरते हैं।
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आयुर्वेदिक उपचार
1. शोधन (Cleansing & Detox)
• त्रिफला क्वाथ या नीम-पानी से घाव धोना।
• पंचवल्कल क्वाथ से स्नान करना।
2. लेप एवं बाह्य प्रयोग
• जैवंत्यादि घृत / शतधौत घृत से लेप।
• हल्दी, नीम, घृतकुमारी (Aloe vera) का मिश्रण लेप।
• मधु (शहद) का उपयोग – रक्तशोधन व जीवाणुनाशक।
3. आंतरिक औषधि (Oral Medicines)
• निशामलकी चूर्ण (हल्दी + आंवला) – 3–6 gm सुबह-शाम।
• गुडमार (Meshshringi), जामुन बीज चूर्ण – शुगर नियंत्रण हेतु।
• मंजिष्ठा, नीम, हरिद्रा – रक्त शुद्धि व wound healing हेतु।
4. रसायन (Rejuvenation)
• अमलकी रसायन
• शिलाजीत
• अश्वगंधा
5. पथ्य (Do’s)
• जौ, कोदो, कूटू, करेला, मेथी, लहसुन का प्रयोग।
• हरी सब्जियाँ, नीम की पत्तियाँ, गिलोय रस।
6. अपथ्य (Don’ts)
• मिठाई, मैदा, चावल, आलू, तैलीय व गरिष्ठ भोजन।
• मानसिक तनाव व देर रात जागना।
आयुर्वेद के अनुसार डायबिटिक वाउंड और बर्न का मूल कारण है –
दोष असंतुलन (विशेषकर कफ–पित्त), रक्तदूष्यता और ओज क्षीणता।
यदि आंतरिक औषधि + बाह्य लेप + शोधन सही ढंग से किया जाए, तो घाव शीघ्र भर सकते हैं और रोगी जटिलताओं से बच सकता है।
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डॉ. सुनील गुप्ता
094520 25732
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