02/08/2026
लोगों में पेट बाहर क्यों निकलता है?
और इसे कम करने का सही तरीका क्या है?
कुछ दिन पहले एक मरीज मेरे क्लिनिक में आए।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“डॉक्टर साहब, शरीर तो अभी भी ठीक-ठाक है, लेकिन यह पेट है कि हर साल दो-तीन सेंटीमीटर आगे बढ़ जाता है।”
मैंने उनसे पूछा,
“आपकी उम्र क्या है?”
उन्होंने कहा,
“पचपन साल।”
मैंने फिर पूछा,
“रोज़ कितनी देर चलते हैं?”
उन्होंने कहा,
“समय ही नहीं मिलता। सुबह कार से ऑफिस जाता हूँ। पूरे दिन कुर्सी पर बैठकर काम करता हूँ। शाम को वापस घर आकर टीवी देखता हूँ।”
मैंने पूछा,
“मीठा पसंद है?”
वे हँस पड़े।
“डॉक्टर साहब, चाय बिना चीनी के पी ही नहीं सकता। खाना खाने के बाद कुछ मीठा न मिले तो लगता है खाना पूरा ही नहीं हुआ।”
क्योंकि यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं है।
आज करोड़ों लोग इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
कोई कहता है,
“पहले मेरी कमर 32 इंच थी, अब 38 हो गई है।”
कोई कहता है,
“चेहरा तो वैसा ही है, लेकिन पेट अचानक बढ़ गया।”
कई लोग रोज़ सुबह सौ-सौ बैठकें लगाते हैं, फिर भी तोंद कम नहीं होती।
आखिर ऐसा क्यों होता है?
क्या पेट केवल ज़्यादा खाने से निकलता है?
क्या सिर्फ उम्र इसकी वजह है?
क्या केवल पेट की एक्सरसाइज करने से तोंद कम हो जाती है?
क्या कोई आसान शॉर्टकट है?
आइए देखते हैं
पेट आखिर बढ़ता क्यों है?
सबसे पहले एक बात समझ लीजिए।
हमारा शरीर बहुत बुद्धिमान है।
जब हम ज़रूरत से अधिक कैलोरी खाते हैं और उन्हें खर्च नहीं कर पाते, तो शरीर उन्हें भविष्य के लिए बचाकर रख लेता है।
यही अतिरिक्त ऊर्जा धीरे-धीरे चर्बी के रूप में जमा होने लगती है।
शुरुआत में यह दिखाई नहीं देती।
लेकिन महीनों और वर्षों बाद वही चर्बी तोंद बनकर सामने आने लगती है।
केवल बाहर दिखाई देने वाली चर्बी ही समस्या नहीं है
बहुत से लोग सोचते हैं कि बाहर निकला हुआ पेट ही पूरी समस्या है।
असल चिंता उस चर्बी की होती है जो पेट के अंदर लीवर, आँतों और दूसरे अंगों के आसपास जमा होती है।
इसे विसरल फैट (Visceral Fat) कहा जाता है।
यही चर्बी शरीर में लगातार Inflammation पैदा करती है।
यही आगे चलकर डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।
इसलिए पेट कम करना केवल सुंदर दिखने का विषय नहीं है।
यह लंबे और स्वस्थ जीवन का विषय है।
इंसुलिन का इससे क्या संबंध है?
जब हम बार-बार मीठा, कोल्ड ड्रिंक, बिस्कुट, केक, नमकीन, सफेद ब्रेड, पिज़्ज़ा, बर्गर और मैदे से बनी चीज़ें खाते हैं, तो शरीर में बार-बार इंसुलिन हार्मोन बढ़ता है।
इंसुलिन का काम रक्त में मौजूद शुगर को कोशिकाओं तक पहुँचाना है।
लेकिन जब यह लंबे समय तक अधिक बना रहता है, तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को चर्बी में बदलकर जमा करने लगता है।
धीरे-धीरे शरीर इंसुलिन की बात कम सुनने लगता है।
इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं।
यहीं से पेट बढ़ने, वजन बढ़ने और बाद में डायबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है।
केवल चीनी ही दोषी नहीं है
बहुत लोग गर्व से कहते हैं,
“मैं तो मिठाई बिल्कुल नहीं खाता।”
लेकिन वही व्यक्ति दिनभर में तीन-चार कप मीठी चाय, बिस्कुट, नमकीन, सफेद ब्रेड, पैकेट वाले स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थ ले लेता है।
शरीर कैलोरी गिनता है।
उसे यह फर्क नहीं पड़ता कि वह कैलोरी रसगुल्ले से आई है या बिस्कुट से।
क्या केवल उम्र बढ़ने से पेट निकलता है?
कुछ हद तक हाँ।
40–45 वर्ष के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीरे-धीरे कम होने लगता है।
मांसपेशियाँ कम होने लगती हैं।
यदि खान-पान और गतिविधि पहले जैसी ही रहे, तो अतिरिक्त कैलोरी चर्बी के रूप में जमा होने लगती है।
लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि बढ़ती उम्र में पेट कम नहीं हो सकता।
आज दुनिया में हजारों लोग 60, 70 और 80 वर्ष की उम्र में भी वजन कम कर रहे हैं और पहले से अधिक सक्रिय जीवन जी रहे हैं।
क्या तनाव भी पेट बढ़ा सकता है
जब हम लगातार तनाव में रहते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बनाता है।
लंबे समय तक बढ़ा हुआ कोर्टिसोल पेट के आसपास चर्बी जमा होने में योगदान देता है।
यही कारण है कि तनाव के समय लोगों को मीठा और तला हुआ भोजन अधिक अच्छा लगता है।
नींद का पेट से क्या संबंध है?
यदि आप रोज़ केवल पाँच या छह घंटे सोते हैं, तो शरीर के भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन बिगड़ने लगते हैं।
भूख बढ़ती है।
मीठा खाने की इच्छा बढ़ती है।
थकान रहती है।
व्यायाम करने का मन नहीं करता।
और धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है।
क्या केवल पेट की एक्सरसाइज करने से तोंद कम हो जाएगी?
नहीं।
सैकड़ों Crunches या Sit-ups करने से पेट की मांसपेशियाँ मज़बूत हो सकती हैं।
लेकिन पेट की चर्बी केवल उसी जगह से नहीं घटती।
जब पूरे शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है, तभी पेट भी कम होता है।
पेट की चर्बी के बारे में कहा जाता है
It comes first
and
It goes last
तो फिर क्या करें?
अच्छी बात यह है कि समाधान कठिन नहीं है।
भोजन में सुधार कीजिए
महँगी डाइट की आवश्यकता नहीं है।
घर का संतुलित भोजन सबसे अच्छा है।
हर भोजन में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
दाल, पनीर, दही, दूध, अंकुरित अनाज, सोया और यदि कोई मांसाहारी है तो अंडा, मछली या चिकन अच्छे स्रोत हैं।
थाली का आधा भाग सब्ज़ियों और सलाद से भरिए।
फाइबर जितना अधिक होगा, पेट उतनी देर तक भरा रहेगा।
मीठे पेय पदार्थों को लगभग बंद कर दीजिए।
पर्याप्त पानी पीजिए।
हमें रोज़ कितना चलना चाहिए?
यदि आप शुरुआत कर रहे हैं तो रोज़ 20–30 मिनट तेज़ कदमों से चलना शुरू कीजिए।
धीरे-धीरे इसे 45 मिनट तक ले जाइए।
सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की शारीरिक गतिविधि अधिकांश लोगों के लिए लाभदायक मानी जाती है।
यदि डॉक्टर ने मना न किया हो, तो सप्ताह में दो या तीन दिन हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी कीजिए।
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग ज़रूरी है?
कुछ लोगों को इससे लाभ होता है।
लेकिन यह कोई जादुई तरीका नहीं है।
पेट कम करने से जुड़ी 10 सबसे बड़ी गलतफहमियाँ
आज सोशल मीडिया पर हजारों वीडियो और सैकड़ों “चमत्कारी” नुस्खे दिखाई देते हैं।
इस संबंध में कुछ भ्रांतियां निम्न हैं
1. केवल पेट की एक्सरसाइज से तोंद कम हो जाएगी।
-जी नहीं।
2. खाना छोड़ देने से वजन जल्दी कम होगा।
-भूखे रहने से कुछ दिन वजन कम दिख सकता है, लेकिन बाद में अधिक भूख लगती है और वजन फिर बढ़ जाता है।
3. केवल फल खाकर वजन कम किया जा सकता है।
-फल अच्छे हैं, लेकिन शरीर को प्रोटीन, स्वस्थ वसा और दूसरे पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है।
4. रात 8 बजे के बाद खाना हमेशा नुकसान करता है।
-असल बात पूरे दिन की कुल कैलोरी है। हाँ, देर रात भारी भोजन पाचन और नींद पर असर डाल सकता है।
5. जितना ज़्यादा पसीना निकलेगा, उतनी जल्दी चर्बी पिघलेगी।
-पसीना पानी कम करता है, चर्बी नहीं।
6. स्लिमिंग बेल्ट, फैट बर्नर और चमत्कारी पाउडर पेट कम कर देंगे।
-आज तक ऐसा कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
7. अब उम्र हो गई है, कुछ नहीं हो सकता।
-गलत। अच्छी आदतें किसी भी उम्र में लाभ देती हैं।
8. घी और तेल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
-नहीं। शरीर को स्वस्थ वसा भी चाहिए। मात्रा महत्वपूर्ण है।
9. रोज़ वजन देखना ज़रूरी है।
-सप्ताह में एक बार वजन देखिए और महीने में एक बार कमर भी नापिए।
10. पेट कम करने का कोई शॉर्टकट मिल जाएगा।
-यही सबसे बड़ी भूल है।
पेट वर्षों में बढ़ता है।
और उसे कम होने में भी समय लगता है।
-कमर का घेरा कितना होना चाहिए?
केवल वजन देखना पर्याप्त नहीं है।
कमर का घेरा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दक्षिण एशियाई लोगों में सामान्यतः—
पुरुषों में 90 सेंटीमीटर (36 इंच) से कम
और
महिलाओं में 80 सेंटीमीटर (32 इंच) से कम
कमर रखना बेहतर माना जाता है।
यदि कमर इससे अधिक है, तो डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और हार्ट डिज़ीज़ का खतरा बढ़ सकता है।
क्या केवल BMI देखना पर्याप्त है?
नहीं।
कई लोग सामान्य वजन वाले दिखाई देते हैं।
लेकिन उनकी कमर सामान्य से अधिक होती है।
इसे सामान्य भाषा में “छिपा हुआ मोटापा” भी कहा जा सकता है।
इसलिए केवल वजन नहीं—
कमर, मांसपेशियाँ, सक्रियता और फिटनेस—इन सबको साथ में देखना चाहिए।
आखिर शुरुआत कहाँ से करें?
यदि आज से केवल पाँच आदतें अपना लें, तो कुछ महीनों में अच्छा बदलाव दिखाई देने लगेगा।
✔ रोज़ 30–45 मिनट तेज़ चलिए।
✔ हर भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और भरपूर सब्ज़ियाँ रखिए।
✔ मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाइए।
✔ रोज़ 7–8 घंटे अच्छी नींद लीजिए।
✔ हर दिन अपने शरीर के लिए थोड़ा समय निकालिए।
एक ऑर्थोपेडिक सर्जन होने के नाते मेरा व्यक्तिगत अनुभव
एक ऑर्थोपेडिक सर्जन के रूप में पिछले कई वर्षों में मैंने अनेक मरीजों का इलाज किया है।
दिलचस्प बात यह है कि उनमें से बहुत-से लोग घुटनों के दर्द, कमर दर्द, एड़ी के दर्द या गर्दन के दर्द की शिकायत लेकर आते हैं।
जाँच करने पर अक्सर एक बात समान मिलती है—बढ़ा हुआ वजन और बाहर निकला हुआ पेट।
जब वजन बढ़ता है, तो उसका अतिरिक्त दबाव सबसे पहले हमारे जोड़ों पर पड़ता है।
घुटनों को हर कदम पर शरीर का कई गुना भार उठाना पड़ता है।
इसी कारण केवल 5–10 प्रतिशत वजन कम होने से भी कई मरीजों के घुटनों और कमर के दर्द में काफ़ी सुधार देखने को मिलता है।
मैं हमेशा अपने मरीजों से कहता हूँ कि दवा दर्द को कुछ समय के लिए कम कर सकती है, लेकिन यदि जीवनशैली नहीं बदली गई तो समस्या बार-बार लौट सकती है।
मेरे अनुभव में सबसे अच्छे परिणाम उन लोगों में दिखाई देते हैं जो धीरे-धीरे अपनी आदतें बदलते हैं—रोज़ थोड़ा चलते हैं, संतुलित भोजन करते हैं, पर्याप्त प्रोटीन लेते हैं, अच्छी नींद लेते हैं और नियमित बने रहते हैं।
अंत में बस एक बात…
अगर आपका पेट बाहर निकल रहा है, तो इसे केवल कपड़ों की फिटिंग की समस्या मत समझिए।
यह आपके शरीर का एक संदेश भी हो सकता है।
शायद अब समय आ गया है कि आप अपने भोजन, अपनी नींद, अपनी दिनचर्या और अपनी शारीरिक गतिविधि पर थोड़ा ध्यान दें।
याद रखिए…
हमारे शरीर को यह फर्क नहीं पड़ता कि आज सोमवार है, नया साल शुरू हुआ है या अगले महीने से डाइट शुरू होगी।
उसे केवल यह दिखाई देता है कि आप रोज़ क्या खाते हैं, कितना चलते हैं, कितनी नींद लेते हैं और अपने शरीर की कितनी देखभाल करते हैं।
स्वास्थ्य किसी दवा की दुकान में नहीं मिलता।
यह हमारी रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतों में छिपा होता है।
आज लिया गया एक छोटा-सा सही निर्णय आने वाले दस या बीस वर्षों के स्वास्थ्य को बदल सकता है।
इसलिए पेट कम करने की शुरुआत किसी महँगे जिम, किसी चमत्कारी दवा, किसी स्लिमिंग बेल्ट या किसी फैशन वाले डाइट प्लान से नहीं होती।
इसकी शुरुआत होती है…
आज उठाए गए पहले सही कदम से।
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Thanks and Regards
-Director Ajit Kumar singh
Partima parkash hospital 🏥 garkha saran bihar