25/07/2026
आज सुन रहा था हर्ष दूबे को, एक बात बड़े काम की कही लड़के ने कि यहां वो लोग NEET के बारे में बात कर रहे हैं जिन्हें पता ही नहीं कि नीट में हो क्या रहा है।
दरअसल बात एक सरकार की नहीं और किसी एक मंत्री की तो बिल्कुल नहीं , बात है उस सिस्टम की तो इस कदर सो रहा है कि उसको पता ही नहीं कि उस विभाग में क्या हो रहा है।
यह खबर पढ़िए, चूंकि यह मेरे अपने कार्यक्षेत्र से है तो कुछ बेसिक बातें तो समझ आती ही हैं। विभाग के नियम दशकों से अपडेट नहीं होता, सूचना सटीक नहीं होती , नियम बनाने वालों की चिरनिंद्रा टूटती ही नहीं और परेशान होता है आम आदमी। परेशान होता है युवा, परेशान होता है वो अंतिम व्यक्ति जिस तक पहुंचना ही अंतिम लक्ष्य है।
दरअसल कई बार हम स्वयं यह आकलन नहीं कर पाते कि समस्या कितनी गहरी है। अब यहां देखिए जिस कोर्स को बंद हुए लगभग चार दशक हो गए उसी आधार पर नियुक्ति निकल रही।
भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबे इस तंत्र को यह तक ज्ञात नहीं कि वो समय के हिसाब से अपने आप को अपडेट करें।
कहां तक लड़ेंगे आप, क्या क्या कहेंगे आप, सरकारों के मंत्री बदलने से पहले खुद को भी बदलिए तभी कुछ बदलाव होगा।
आप चाहें किसी सरकारी ओहदे पर बैठे अफसर हैं या कोई सफाई कर्मी, आप चाहें पार्क में टहलते हुए केले के छिल्के फेंकने वाले आम आदमी हैं , या फिर घूस देकर अपने नाबालिग बच्चे का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले पिता, फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर छुट्टी लेने वाले मास्टर हैं या अपने ही विभाग से अपने लिए करोड़ों की सब्सिडी स्वीकृत क्या लेने वाले कोई विभागीय सचिव हैं, जब तक इस मनोदशा को एक आंदोलन के रूप में अपना कर बदला नहीं जाएगा , यह परिवर्तन संभव नहीं है।
ध्यान रखिए एक पक्ष सरकार है तो एक पक्ष हम और आप हैं। बदलाव दोनों स्तर पर होना होगा।
डॉ नित्यानंद शुक्ल
Nityanand Shukla