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Snake bites, Snakes, Medicine, Best medicineWorld best medicine when it comes to snake bitesनई दिल्ली. सांप काटने से दुन...
29/03/2019

Snake bites, Snakes, Medicine, Best medicine
World best medicine when it comes to snake bites

नई दिल्ली. सांप काटने से दुनियाभर में होने वाली मौतों की संख्या में भारत सबसे आगे है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल 83,000 लोग सांप के दंश का शिकार होते हैं और उनमें से 11,000 की मौत हो जाती है. मौत का सबसे बड़ा कारण है तुरंत सही से इलाज न होना.

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में सांपों की लगभग 550 प्रजातियां हैं. इनमें से ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते. जैसे कोबरा, वाइफर, करैत हैं. ऐसी 550 किस्म की सांपो की जातियां हैं. इनमें से मुश्किल से 10 सांप ऐसे है जो जहरीले है. इसका मतलब ये हुआ 540 सांप ऐसे है जिनके काटने से कुछ नहीं होता वह बिना जहर के होते हैं.

सांप के काटने का डर इतना होता है कि कई बार आदमी हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट से मर जाता है. बता दें कि सांप से मन में डर इतना ज्यादा होता है कि सांप के काटने से कम इसके डर से लोग जल्दी मर जाते हैं.

कैसे निकलेगा सांप का डर ?
जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के सांप है उनमें से सिर्फ 10 सांप जहरीले हैं. जिनके काटने से कोई नहीं मरता है. इनमे से जो सबसे जहरीला सांप है उनके नाम है रसेल वाइपर उसके बाद करैत इसके बाद है वाइफर और एक है कोबरा, किंग कोबरा जिसको आप कहते है काला नाग. ये 4 तो बहुत ही खतरनाक और जहरीले है इनमें से किसी ने काट लिया तो 99% चांस है कि मौत होगी.

सांप काटने के बाद ये काम करें, बच सकती हैं जान
आपने देखा होगा सांप जब भी काटता है तो उसके दो दांत है जिनमें जहर है जो शरीर के मांस के अंदर घुस जाते हैं और खून में वो अपना जहर छोड़ देता है. तो फिर ये जहर ऊपर की तरफ जाता है. मान लीजिये हाथ पर मान लीजिये हाथ पर सांप ने काट लिया तो फिर जहर दिल की तरफ जाएगा उसके बाद पूरे शरीर मे पहुंचेगा .

ऐसे ही अगर पैर पर काट लिया तो फिर ऊपर की और हार्ट तक जाएगा और फिर पूरे शरीर मे पहुंचेगा. कहीं भी काटेगा तो दिल तक जाएगा और पूरे मे खून में पूरे शरीर मे उसे पहुंचने मे 3 घंटे लगेंगे. मतलब ये है कि रोगी 3 घंटे तक तो नहीं ही मरेगा. जब पूरे दिमाग के एक एक हिस्से मे बाकी सब जगह पर जहर पहुंच जाएगा तभी उसकी मौत होगी अन्यथा नहीं होगी. तो 3 घंटे का समय है रोगी को बचाने का और उस तीन घंटे मे अगर आप कुछ कर ले तो बहुत अच्छा है.

नाजा क्या है ?
एक दवा आप चाहें तो हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है होमियोपैथी में आती है. उसका नाम है नाजा होमियोपैथी है किसी भी होमियोपैथी में आपको मिल जाएगी. आप दुकान पर जाकर कहें नाजा 200 . इसे आप घर मे खरीद कर भी रख सकते हैं. जिससे 100 लोगो की जान इससे बचाई जा सकती है और इसकी कीमत सिर्फ 50 रुपए है.

इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 150 से 200 रुपए की उससे आप कम से कम 10000 लोगों की जान बचा सकते हैं जिनको सांप ने काटा है .

आखिर नाजा क्यों है इतना असरदार
नाजा दुनिया के सबसे खतरनाक सांप का पॉइजन है जिसको कहते है क्रैक. इस सांप का पाइजन दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है. इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को काटा तो उसे भगवान ही बचा सकता है.

कैसे करें इसका प्रयोग
1 बूंद उसकी जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे. 3 बार डाल के छोड़ दीजिये बस इतना काफी है. ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा के लिए बचा लेगी और सांप काटने के एलोपेथी मे जो सुई है वो आम अस्तपतालों में नहीं मिल पाते और ज्यादा समय बर्बाद होने पर जान भी जा सकती है.

https://youtu.be/QIW5bQHT4r8?t=326
27/02/2019

https://youtu.be/QIW5bQHT4r8?t=326

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23/03/2018

भारत की सबसे बड़ी खोज ले गया था ये अंग्रेज डॉक्टर

1710 में डॉक्टर ऑलिवर भारत में आया और पूरे बंगाल में घूमा। उसके बाद वो अपनी डायरी में लिखता है,”मैंने भारत में आकार ये पहली बार देखा कि चेचक जैसी महामारी को कितनी आसानी से भारतवासी ठीक कर लेते हैं।” चेचक उस समय यूरोप के लोगों के लिए महामारी ही थी। इस बीमारी से लाखों यूरोपवासी मर गए थे। उस समय में वो लिखता है कि यहाँ लोग चेचक के टीके लगवाते हैं। वो लिखता है कि,”टीका एक सुई जैसी चीज़ से लगाया जाता था। इसके बाद तीन दिन तक उस व्यक्ति को थोड़ा बुखार आता था। बुखार ठीक करने के लिए पानी की पट्टियां रखी जाती थीं। तीन दिन में वो व्यक्ति ठीक हो जाता था। एक बार जिसने टीका ले लिया वो ज़िंदगी भर चेचक से मुक्त रहता था।

फिर ये डॉक्टर वापस लन्दन गया। डॉक्टरों की सभा बुलाई। सभा में भारत में चेचक के टीके की बात बताई। जब लोगों को यकीन नही हुआ तो वो उन सभी डॉक्टरों को अपने खर्च पर भारत लाया। यहाँ उन लोगों ने भी टीके को देखा। फिर उन लोगों ने भारतीय वैद्यों से पूंछा कि इस टीके में क्या है? तो उन वैद्यों ने बताया कि जो लोग चेचक के रोगी होते हैं हम उनके शरीर का पस निकाल लेते हैं और सुई की नोंक के बराबर यानि कि बहुत ज़रा सा पस किसी के शरीर में प्रवेश करा देते हैं। और फिर उस व्यक्ति का शरीर इस रोग की प्रतिरोधक क्षमता धारण कर लेता है।

डॉ.ऑलिवर आगे लिखता, “जब मैंने इन वैद्यों से पूंछा कि आपको ये सब किसने सिखाया? तो वे बोले कि हमारे गुरु ने, उनके गुरु को उनके गुरु ने सिखाया। मेरे अनुसार कम से कम डेढ़ हज़ार(1500) वर्षों से ये टीका भारत में लगाया जा रहा है।

डायरी के अंत में वो लिखता है, “हमें भारत के वैद्यों का अभिनन्दन करना चाहिए कि वे निशुल्क रूप से घरों में जा-जाकर लोगों को टीका लगा रहे हैं। हम अंग्रेजों को इन वैद्यों ने बिना किसी शुल्क(फीस) के ये विद्या सिखाई है, हमें इनका जितना हो सके उतना आभार करना चाहिए।

आज सारी दुनिया में जिस डॉ.ऑलिवर को चेचक के टीके का जनक माना जाता है वो खुद अपनी डायरी में भारत के वैज्ञानिकों को इस टीके का जनक स्वीकार कर रहा है।

05/10/2017

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